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लेखक – Vikramaditya Dalvi

कुछ समय पहले बसपा के किसी मुस्लिम सांसद ने वंदेमातरम कहने से विरोध जताया था! वंदेमातरम आरंभ होते ही वो अपने आसन से उठकर चल दिया! पत्रकारों ने पूछने पर उस मुल्ले ने बताया की हम वंदेमातरम अर्थात किसी मातृभूमि को नहीं मानते “केवल इस्लाम ही सब कुछ है” हमारे लिए! इस घटना के उपरांत अनेक हिंदुत्ववादियों और राष्ट्रवादियों ने लेख लिखे, कई लोगो ने भाषण भी दिए!

इन सब का कहना केवल इतना ही था की भारत के मुस्लिम हमारे अपने है और इस लिए उन्हें वंदे मातरम से तिरस्कार नही करना चाहिए!

कुछ लोगो ने ये तक कहा की वे भारत माता को नही वंदन करेंगे तो चले जाए पाकिस्तान!

 

Slide1

ये चित्र है जिहादी आतंकी अबू जिंदाल का जो सिम्मी के लिए कार्यरत (अभी ये कारागृह [Jail] में है) था! इसके माथे पर जो काला धब्बा आप देख रहे है वो इसे इस्लाम की देंन है! हर मुल्ला दिन में ५ बार मक्का की ओर मुह कर माथा रगड़ता है! जिसके चलते इनका माथा काला पड़ जाता है!

 

ये है मुल्लो का अरब भूमि को वंदेमातरम

 

मुल्लो का वंदे-मातरम विरोध कोई नई बात नही है! क्या यह सत्य है की मुसलमान किसी मातृभूमी को नहीं मानते? या वे किसी मातृभूमी के आगे माथा नही टेकते.

वंदेमातरम का अर्थ है “हे मातृभूमी मै शीर्ष झुका कर तुझे वंदन करताहु”!यदी ये अर्थ है वंदेमातरम का तो हमे सोचना चाहिए की, क्या ये मुल्ले दिन में ५ बार अरब भूमी के आगे माथा टेक-टेक कर वंदेमातरम नही करते?

Arab Imperialism of Islam

Arab Imperialism of Islam

जो कोई महमद द्वारा बुने हुए “इस्लाम” नामक मायावी जाल में फसता (अर्थात मुस्लिम) बनता है! तब उसे अपनी मातृभूमी से नाता तोड़ अरब भूमि से नाता जोड़ना पड़ता है!

हम में से बहुत कम लोग इस सत्य से परिचित है की भारत, पाक एव बंगलादेशी मुस्लिमो को अरब देशो में नागरिकता कभी नही मिलती (फिर चाहे वे भारतमाता को गाली देके अपने आप को अरब ही क्यों न समझे). गली चौक के कुत्ते से भी भयंकर दुर्व्यवहार इनके साथ किया जाता है!

 

आप नीचे दिए हुए विडियो देख सकते है की कैसे एक बंगलादेशी मुल्ले के मुह पर थूक कर एक अरब उसे कुत्ते जैसा पिट रहा है!

 

[https://www.youtube.com/watch?v=ma43GHk3ht8]

कुछ भारतवासीयो का ये मानना है की मुसलमानो का अल्ला “मक्का” में बसता है इस लिए वे “मक्का” के आगे शीश झुकाते है! ये बात तो तर्क के संपूर्ण विरुद्ध है, क्योकि यदी मुल्ले अल्ला को इश्वर मानते है तो वो केवल अरब भुमी में ही क्यों रहेगा उसका अस्तित्व तो सपूर्ण सृष्टी में होना चाहिए! इस आश्चर्य को जानने के लिए हमे इस्लाम और उसके रचयता महमद का धूर्त उदेश्य समझना होगा!

 

आओ आज हम इस रहस्य का भेद खोलते है!

हमे समझना चाहिए की इस्लाम कोई धर्म/ पंथ/ उपसना पद्धति / मोक्ष प्राप्ती का माध्यम नही है! वह तो महमद का मास्टर प्लान है, सारे विश्व को अरब देशो के गुलाम बनाने का! मानलो पूरा विश्व ही एक अरब कोलोनी हो!

 

आप कहेंगे ये कैसे?

वो एसे!! की…….

इस्लाम का अल्ला अरबी

उसका दूत महमद भी अरब

इस्लाम की पवित्र पुस्तक “कुरान” भी अरबी

इस्लाम के पवित्र स्थल “मक्का” और “मदीना” भी अरब भुमी में है! इस लिए इस श्रेष्ठ लोगो (अरब) की भुमी को वंदेमातरम करने के लिए दिन में ५ बार (नमाज) आपना माथा रगड़ते है!

सारे मुल्लो को मुस्लिम बने रहने के लिए अरब वेषभुषा करना अनिवार्य है! जैसे की सलवार कमीज, गोल अरबी टोपी, साफा इत्यादि

सारे अरबी सभ्याचार जैसे की सुन्नत (अर्थात खतना), निकाह, वजू इत्यादि

सारे मुल्ले अपने कमाई का बहुत बड़ा भाग अरब देश “सऊदी अरब” को भेजते है जिसे “जकात” कहा जाता है!

इस्लामी जगत का प्रमुख अर्थात “खलीफा” भी अरब होना आवश्यक है! इसी कारण से सभी अरब देश तुर्की के सुलतान को मुस्लिम जगत का खलीफा नही मानते थे! जिस तुर्की के खलीफा को बचाने के लिए गाँधीने खिलाफत आन्दोलन खड़ा किया था!

इस्लाम मानता है की अरब जाति श्रेष्ठ जाति है जिन्हें अल्ला ने विश्व पर राज्य करने के लिए भेजा है!

इस्लाम की मुलभुत शिक्षा ये बताती है के जो कोई महमद और अल्ला को मानेगा वही मुसलमान बनेगा! जो इस्लाम की इस सिख को नही मानता वो काफ़िर (श्रद्धाहीन) है, जो नर्क में सड़ेंगे!

जिस किसीको मुस्लिम बनना है फिर चाहे वो अरब नही हो तो भी उसे अरब नाम अपनाने होगे (जैसे की महमद, अब्दुल, इब्राहीम जिन्हें लोग मुस्लिम नाम समझते है)! इन सभी बिन्दुओ पर धन देने से यह स्पष्ट हो जाता है की इस्लाम धर्म की आड़ में छुपा हुआ “अरब साम्राज्यवाद”(ठीक हिटलर के नाझी साम्राज्यवाद जैसा)है जिसका इश्वर प्राप्ती या मानवता से कोई लेना देना नही है!

 

अरब देशो के लिए महमद और उसका इस्लाम एक वरदान सिद्ध हुआ है, और जो अरब नही है जैसे की पाकिस्तानी या बंगलादेशी उनके लिए एक अभिशाप! अभीशाप इस लिए क्योकि जो मुस्लिम अरब नही है उन्हें अपने आप में कोई अस्तित्व नही बचता वे अरब देशो के सांस्कृतिक गुलाम बन जाते है! जिनका अस्तित्व अरेबिया के आगे घुमने वाले उपग्रहों जैसा बन जाता है!

 

महमद की असाधारण प्रतिभा तब दिखती है जब वो विश्व के सारे मुस्लिमो को उसकी (अरब-भुमी) मातृभूमी के आगे ५ बार नही किंतु हर क्षण वंदन करवाता है (पृथ्वी का समय हर क्षेत्र में भिन्न होने के कारण)!

और आगे देखे……

यह वर्णन जमे तिरमिज़ हैदिथ का है! जो सारे मुस्लिम जगत के लिए आदर्श है! (कृपया इसका हिन्दी अनुवाद उपलब्ध नही है पर जो अंग्रेजी जानते है वो समझ सकते है!)

 

Of the two tribes that God chose as the best were the descendants of Ishmael and Isaac. God preferred the children of Ishmael (Arabs) to the children of Isaac (the Jews). Then, God created Muhammad in the chosen tribe of Quresh (the descendants of  Ishmael) and then He chose the best family among the Quresh and created Muhammad as the best of men.” (JameTirmze, Vol. 2)

अनुवादं

जब  अल्ला को सर्व श्रेष्ठ मनुष्य संसार से चुनना था तब उसने अरबो को चुना जो की इस्माइल के वंशज है! उन अरबो में भी श्रेष्ठ टोली थी “कुरेश”! उस श्रेष्ठ “कुरेश” में से सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति महमद को अल्ला ने अपने दूत के रूप में चुना! (हदीथ – जमे तिरमिज़ खण्ड – २)

 

इस सन्दर्भ से यह सपष्ट हो जाता है की सारे मुस्लिम अरब देशो को अपना स्वामी क्यों मानते है! कितना आश्चर्य है, की कुछ लोग फिर भी ये सोचते है की इस्लाम मानवता का प्रतीक है!

 

“The right to rule shall belong to the Quresh even if two men existed.” (Bokhari, Vol. 4) 

अनुवादं

शासन का अधिकार केवल कुरेश टोली को ही होगा! (सही बुखारी खण्ड – ४)

हमे ये ध्यान देना चाहिए की जो मुसल्ले इस्लाम के नाम पर इतना उछलते है! इस हदीथ से यह स्पष्ट होता है, की इस्लाम में इनका स्थान क्या है! यह वही हदीथ था जिसके आधार पर सारे अरबी देशो ने तुर्की के बादशाह को मुस्लिम जगत का प्रमुख अर्थात “खलीफा” मानने से विरोध किया था! क्योकि तुर्क अरब नही होते! और अरबो में भी यदी कोई “कुरेश” (महमद इस अरब टोली में जन्मा था) टोली में जन्मा हो तो ही वह मुस्लिम जगत का प्रमुख बन सकता है!

 

 “He who aggresses against Arabia, shall not win my love, nor will I intercede for him.” (JameTirmze, Vol. 2)

 

महमद ने कहा “जो कोई अरबस्तान पर आक्रमण करता है वह मेरा प्रेम नही पा सकता और मै उसे स्वर्ग में नही आने दूंगा! (जमे तिरमिज़ खण्ड -२)

 

इन सब के ऊपर मात करके महमद ने “इस्लाम का मायावी जाल” इतना जबरदस्त बनया, की उसमे फसा हुआ कोई भी वापस बाहर नही निकल सकता! इसी लिए सारे मुस्लिम जो अरब नही है, इस्लाम, महमद और अरब देशो की दृष्टी से कीड़े मकोड़ो के समान है! इसे स्वय देख ले…..

 

क.                हर किसी मुस्लिम के लिए महमद की मातृभूमी (अरबस्तान) ही उसकी मातृभूमी है! जिसके आगे दिन में ५ बार उसे माथा टेकना होगा! ये है मुल्लो का वंदे मातरम

ख.                प्रत्येक मुस्लिम की कब्र का सर मक्का की दिशा में होना चाहिए!

ग.                 मक्का (अर्थात अरब भुमी) इतनी पवित्र है की कोई भी मुस्लिम उसके सामने मुह करके शौच या मूत्र विसर्जन नही कर सकता है! जो करता है वो काफ़िर है जिसे तत्काल मृत्य दंड देना चाहिए!

घ.                 अल्लाह केवल अरबी समझता है! इसी लिए कुरान भी अरबी में है! सभी मुसलमानों को अल्ला का प्रेम पाने के लिए अरबी सीखना अनिवार्य है! (यह कितना आश्चर्य है की अल्ला, अरबी और अरबस्तान के प्रति इतना झुका हुआ है)

ङ.                  हदीथ क्र. ५७५१ (मिश्कात, खण्ड -३) इसमें महमद ने मुसलमानों से कहा है की..

च.                 अरब राष्ट्र को ३ कारणों के लिए प्रेम (मुस्लिमो ने) करना चाहिए

  1. मै (महमद) अरब हु!
  2. कुरान अरबी में है!
  3. इस्लाम के जन्नत (स्वर्ग) में अरबी भाषा बोली जाती है!

छ.                जो कब्रगाह अरबस्थान में है (जन्नत उल मुअल्ला) और (जन्नत उल बाकी) वे स्वर्ग से चमकती हुई दिखती है! ठीक वैसेही जैसे, हम पृथ्वी से सूर्य और चंद्र को चमकता हुआ देखते है! जो कोई अरबस्तान की इस पवित्र भूमि में गाड दिया जाएगा, वह निश्चित ही स्वर्ग में पहुचेगा!

 

इस अरब साम्राज्यवाद (इस्लाम) की शिक्षा को वारंवार मन पर थोपे जाने (Brain Wash) से भारत और अन्य देशो के मुस्लिम अपना विवेक खो बैठते है! उनकी सोचने की और तर्क देने की शक्ति समाप्त हो जाती है! वे केवल अरब भूमि और अरब देशो के आगे झुकने वाले कीड़े मकोड़े के समान बन जाते है! जिन्हें अपने आप में कोई पहचान नही है!

 

इसका सारांश ये है की अल्ला और महमद की “इस्लामी जन्नत” पाने के लिए प्रत्येक मुस्लिम को अरब बनकर जीना पड़ेगा!

यह कितना आश्चर्य है की सारे मुस्लिम जो अरब नहीं है वे संसार के दुसरे राष्ट्रों को श्राप देते है और अरब भुमी के गुण गान गाते है! ये एक एसा उदाहरण है, की मनो बकरा स्वय कसाई को हाथ जोड़े बिनती करे, की ले चलो मुझे कत्लखाने!

 

यही कारण है की मुस्लिम भारत माता को वंदन नही करते! वे केवल अरब भूमि को ही वंदन करेंगे! यदी एसा नही किया तो नर्क में सड़ने का भय सामने आता है!

 

इस्लाम भारत के ही नहीं अपितु सारे मुसलमानों (जो अरब नही है) के लिए अभिशाप है, और अरब देशो के लिए एक अमर वरदान! इस श्राप से मुक्ति चाहते हो तो इस्लाम त्यागकर महमद के इस अरबी विष को थूकना होगा!

 

संदर्भ

इस्लाम अरब साम्राज्यवाद: लेखक अनवर शेख

http://www.islam-watch.org/anwarsheikh/Islam-Arab-Imperialism7.htm

 

कुरान:

http://quran.com/

http://quranhindi.com

http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Quranic_suras

 

हदीथ:

http://www.searchtruth.com/hadith_books.php#.UQNSs784shE