Tags

, , , , , , , , , , , ,


इस्लाम के आलिमो ओर उसके शुभचिंतको द्वारा इस बात पर बल दिया जाता है कि इस्लाम विशुध्द ऐकेश्वरवाद को मानता है ओर एक ही अल्लाह को मानता है| लेकिन इस्लाम के अध्ययन से पता चलता है कि अल्लाह के साथ साथ मुहमद भी आवश्यक है | अल्लाह बिना मुहमद के कुछ भी नही है| बिना मुहमद की सुन्नत का पालन किए जन्नत हासिल नही हो सकती जैसे कि मुहमद या तो अल्लाह का दलाल है या फिर खुद ही अल्लाह है|
मुहमद कई तरह से अल्लाह के साथ जुडा है ओर कुरान मे दिए गए पैगम्बरो ओर फरिश्तो से अधिक मुहमद ही अल्लाह के करीब है|

१ कलमा मे मुहमद का नाम-

मुस्लिमो मे यह भ्रम है कि वो अल्लाह के सिवा किसी को नही मानते लेकिन कलमा मे बिना मुहमद का नाम लिए मुस्लिम नही बन सकते ओर कलमा मे मुहमद भी जुडा है उसकी प्रशंसा करना आवश्यक है देखिए-
1) Kalma Tayyab: Laa ilaaha illal Lahoo Mohammadur Rasool Ullah

2) Kalma Shaadat: Ashahado An Laa ilaaha illal Laho Wahdahoo Laa Shareeka Lahoo Wa Ash Hado Anna Mohammadan Abdo Hoo Wa Rasoolohoo.

3) Kalma Tamjeed: Subhanallahe Wal Hamdulillahe Wa Laa ilaha illal Laho Wallahooakbar. Wala Haola Wala Quwwata illa billahil AliYil Azeem.

4) Kalma Tauheed: Laa ilaha illal Lahoo Wahdahoo Laa Shareekalahoo Lahul Mulko Walahul Hamdo Yuhee Wa Yumeeto Wa  Hoa Haiy Yul La Yamooto Abadan Abada Zul Jalali Wal ikraam Beyadihil Khair. Wa hoa Ala Kulli Shai In Qadeer.

5) Kalma Astaghfar: Astaghfirullah Rabbi Min Kullay Zambin Aznabtuho Amadan Ao Khat An Sirran Ao Alaniatan Wa Atoobo  ilaihe Minaz Zambil Lazee Aalamo Wa Minaz Zambil Lazee La Aalamo innaka Anta Allamul Ghuyoobi Wa Sattaarul Oyobi Wa
Ghaffaruz Zunoobi Wala Haola Wala Quwwata illa billahil AliYil Azeem.

6) Kalma Radde Kufr: Allah Humma inni Aaoozubika Min An Oshrika Beka Shai Aown Wa Anaa Aalamo Behi Wa Astaghfiroka Lima laa Aalamo Behi Tubtu Anho Wa Tabarrato Minal Kufri Washshirki Wal Kizbi Wal Jheebati Wal Bidaati Wan Nameemati Wal Fawahishi Wal Bohtani Wal Maasi Kulliha Wa Aslamtoo Wa Aamantoo Wa Aqoolo Laa ilaaha illal Lahoo Mohammadur Rasool Ullah.

अजान मे मुहमद-

ठीक कलमा कि तरह अजान लगाने मै भी मुस्लिमो को मुहमद का गुणगान या कहो स्तुति गान करना पडता है-
1- ﺍﻟﻠﻪ ﺍﻛﺒﺮ :अल्लाहो अकबर
2- ﺍﺷﻬﺪ ﺍﻥ ﻻ ﺍﻟﻪ ﺍﻻ ﺍﻟﻠﻪ :अशहदु अन ला इलाह इल्लल्लाह
3- ﺭﺳﻮﻝ ﺍﻟﻠﻪ ﺃﺷﻬﺪ ﺃﻥ ﻣﺤﻤﺪﺍ :अशहदु अन मुहम्मदुर रसूल्लाह
4- ﺍﺷﻬﺪ ﺍﻥ ﻋﻠﻴﺎ ﻭﻟﻲ ﺍﻟﻠﻪ :अशहदु अन अलीयन वलीउल्लाह
5- ﺣﻲ ﻋﻠﻰ ﺍﻟﺼﻼﺓ :हय्या अलस्सलात
6- ﺣﻲ ﻋﻠﻰ ﺍﻟﻔﻼﺡ :हय्या अलल फलाह
7- ﺣﻲ ﻋﻠﻰ ﺧﻴﺮ ﺍﻟﻌﻤﻞ :हय्या अलल खैरल अमल
8- ﺍﻟﻠﻪ ﺍﻛﺒﺮ :अल्लाहो अकबर
9- ﻻ ﺍﻟﻪ ﺍﻻ ﺍﻟﻠﻪ :ला इलाहा इल्लल्लाह

३ कुरान मे मुहमद की बातो को मानने का उपदेश करना-

कुरान मे मुहमद की बातो को न मानने पर अल्लाह उस व्यक्ति से नाराज हो जाता है जो मुहमद की बातो पर अमल न करे|
मुहमद ने बडी ही चालाकि से आयते बना बना कर खुद के साम्राज्य की स्थापना कर दी थी|
चित्र मे दी गई कुरान की आयते देखिए कि किस तरह मुहमद ने काल्पनिक अल्लाह के माध्यम से खुद की बातो को भोले भाले अरबो पर थोपा-

image

अल्लाह द्वारा अन्य लोगो से मुहमद को श्रेष्ट बताना-

image

इस तरह मुहमद ने खुद को अन्य मुस्लिमो से श्रेष्ट बताया ताकि सभी मुहमद का अनुसरण करे|

४ विवाह आदि सम्बन्धो मे मुहमद का अन्य मुस्लिमो से ज्यादा अधिकार-

एक ओर कुरान मे अधिक से अधिक चार पत्नियो का उपदेश है ,देखिए

image

लेकिन मुहमद साहब को अल्लाह सब कुछ हलाल कर देता है ओर घोषणा करता है कि ये इमान वालो से बढकर केवल रसूल के लिए है-

image

मुहमद साहब अपने लाभ के लिए खुद के द्वारा दिए गए नियमो को ही तोड देते थे जहा एक साथ ४ बीविया ऱखने का उपदेश है वही मुहमद ९ बीविया तक रखते-

image

अनस बिन मलिक ने कहा” कि रसूल एक रात मे अपनी सभी औरतो से संभोग करते थे उस समय उनकी ओरतो की संख्या ९ थी|
(बुखारी ६२:१४२)

इस तरह आप देखिए मुहमद साहब अपनी मन मर्जी ही चलाते थे|

५ मुहमद ओर अल्लाह को साथ साथ मानने पर पाप मुक्ति-

अल्लाह को अपना अराध्य ,मुहमद को रसूल और इस्लाम को अपना दीन मानकर संतुष्ट है उसके पाप क्षमा कर दिए जाएगे
The Messenger of Allah (ﷺ ) said: If anyone says on hearing the Mu’adhdhin: I testify that there is no god but Allah alone. Who  has no partner, and that Muhammad is His servant and His Messenger, (and that) I am satisfied with Allah as my Lord, with Muhammad as Messenger. and with Islam as din (code of life), his sins would be forgiven. In the narration transmitted by Ibn  Rumh the words are:” He who said on hearing the Mu’adhdhin and verity I testify.” ‘ Qutaiba has not mentioned his words:”
And I.”

ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻣُﺤَﻤَّﺪُ ﺑْﻦُ ﺭُﻣْﺢٍ، ﺃَﺧْﺒَﺮَﻧَﺎ ﺍﻟﻠَّﻴْﺚُ، ﻋَﻦِ ﺍﻟْﺤُﻜَﻴْﻢِ ﺑْﻦِ
ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺑْﻦِ ﻗَﻴْﺲٍ ﺍﻟْﻘُﺮَﺷِﻲِّ، ﺡ ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻗُﺘَﻴْﺒَﺔُ ﺑْﻦُ
ﺳَﻌِﻴﺪٍ، ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻟَﻴْﺚٌ، ﻋَﻦِ ﺍﻟْﺤُﻜَﻴْﻢِ ﺑْﻦِ ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ، ﻋَﻦْ
ﻋَﺎﻣِﺮِ ﺑْﻦِ ﺳَﻌْﺪِ ﺑْﻦِ ﺃَﺑِﻲ ﻭَﻗَّﺎﺹٍ، ﻋَﻦْ ﺳَﻌْﺪِ ﺑْﻦِ ﺃَﺑِﻲ
ﻭَﻗَّﺎﺹٍ، ﻋَﻦْ ﺭَﺳُﻮﻝِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﺃَﻧَّﻪُ
ﻗَﺎﻝَ ” ﻣَﻦْ ﻗَﺎﻝَ ﺣِﻴﻦَ ﻳَﺴْﻤَﻊُ ﺍﻟْﻤُﺆَﺫِّﻥَ ﺃَﺷْﻬَﺪُ ﺃَﻥْ ﻻَ ﺇِﻟَﻪَ ﺇِﻻَّ
ﺍﻟﻠَّﻪُ ﻭَﺣْﺪَﻩُ ﻻَ ﺷَﺮِﻳﻚَ ﻟَﻪُ ﻭَﺃَﻥَّ ﻣُﺤَﻤَّﺪًﺍ ﻋَﺒْﺪُﻩُ ﻭَﺭَﺳُﻮﻟُﻪُ
ﺭَﺿِﻴﺖُ ﺑِﺎﻟﻠَّﻪِ ﺭَﺑًّﺎ ﻭَﺑِﻤُﺤَﻤَّﺪٍ ﺭَﺳُﻮﻻً ﻭَﺑِﺎﻹِﺳْﻼَﻡِ ﺩِﻳﻨًﺎ .
ﻏُﻔِﺮَ ﻟَﻪُ ﺫَﻧْﺒُﻪُ ” . ﻗَﺎﻝَ ﺍﺑْﻦُ ﺭُﻣْﺢٍ ﻓِﻲ ﺭِﻭَﺍﻳَﺘِﻪِ ” ﻣَﻦْ ﻗَﺎﻝَ
ﺣِﻴﻦَ ﻳَﺴْﻤَﻊُ ﺍﻟْﻤُﺆَﺫِّﻥَ ﻭَﺃَﻧَﺎ ﺃَﺷْﻬَﺪُ ” . ﻭَﻟَﻢْ ﻳَﺬْﻛُﺮْ ﻗُﺘَﻴْﺒَﺔُ
ﻗَﻮْﻟَﻪُ ﻭَﺃَﻧَﺎ .
Reference : Sahih Muslim 386
In-book reference : Book 4, Hadith 15
USC-MSA web (English) reference : Book 4, Hadith 749
(deprecated numbering scheme)
इस हदीस से स्पष्ट होता है कि अल्लाह के साथ साथ मुहमद का स्तुतिगान करना आवश्यक है|
मुआज को यमन का शासक बनाकर भेजते हुए,मुहमद कहते है-“अव्वल उन्हे गवाही देने के लिए कहो कि अल्लाह के सिवाय कोई अन्य अराध्य नही है ओर मै अल्लाह का रसूल हू| यदि वे इसे मंजूर कर लेते है तो उनसे कहो कि अल्लाह ने उनके लिए जकात की अदायगी का एक जरूरी फर्ज तय किया है|
It is reported on the authority of Ibn ‘Abbas that Mu’adh said:

The Messenger of Allah sent me (as a governor of Yemen) and (at the time of departure) instructed me thus: You will soon find  yourself in a community one among the people of the Book, so first call them to testify that there is no god but Allah, that I  (Muhammad) am the messenger of Allah, and if they accept this, then tell them Allah has enjoined upon them five prayers during the day and the night and if they accept it, then tell them that Allah has made Zakat obligatory for them that it should be collected from the rich and distributed among the poor, and if they agree to it don’t pick up (as a share of Zakat) the best of their wealths. Beware of the supplication of the oppressed for there is no barrier between him and Allah.

ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺃَﺑُﻮ ﺑَﻜْﺮِ ﺑْﻦُ ﺃَﺑِﻲ ﺷَﻴْﺒَﺔَ، ﻭَﺃَﺑُﻮ ﻛُﺮَﻳْﺐٍ ﻭَﺇِﺳْﺤَﺎﻕُ
ﺑْﻦُ ﺇِﺑْﺮَﺍﻫِﻴﻢَ ﺟَﻤِﻴﻌًﺎ ﻋَﻦْ ﻭَﻛِﻴﻊٍ، – ﻗَﺎﻝَ ﺃَﺑُﻮ ﺑَﻜْﺮٍ ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ
ﻭَﻛِﻴﻊٌ، – ﻋَﻦْ ﺯَﻛَﺮِﻳَّﺎﺀَ ﺑْﻦِ ﺇِﺳْﺤَﺎﻕَ، ﻗَﺎﻝَ ﺣَﺪَّﺛَﻨِﻲ ﻳَﺤْﻴَﻰ
ﺑْﻦُ ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺑْﻦِ ﺻَﻴْﻔِﻲٍّ، ﻋَﻦْ ﺃَﺑِﻲ ﻣَﻌْﺒَﺪٍ، ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ
ﻋَﺒَّﺎﺱٍ، ﻋَﻦْ ﻣُﻌَﺎﺫِ ﺑْﻦِ ﺟَﺒَﻞٍ، – ﻗَﺎﻝَ ﺃَﺑُﻮ ﺑَﻜْﺮٍ ﺭُﺑَّﻤَﺎ ﻗَﺎﻝَ
ﻭَﻛِﻴﻊٌ ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ ﻋَﺒَّﺎﺱٍ، ﺃَﻥَّ ﻣُﻌَﺎﺫًﺍ، – ﻗَﺎﻝَ ﺑَﻌَﺜَﻨِﻲ ﺭَﺳُﻮﻝُ
ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻗَﺎﻝَ ” ﺇِﻧَّﻚَ ﺗَﺄْﺗِﻲ ﻗَﻮْﻣًﺎ ﻣِﻦْ
ﺃَﻫْﻞِ ﺍﻟْﻜِﺘَﺎﺏِ . ﻓَﺎﺩْﻋُﻬُﻢْ ﺇِﻟَﻰ ﺷَﻬَﺎﺩَﺓِ ﺃَﻥْ ﻻَ ﺇِﻟَﻪَ ﺇِﻻَّ ﺍﻟﻠَّﻪُ
ﻭَﺃَﻧِّﻲ ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻓَﺈِﻥْ ﻫُﻢْ ﺃَﻃَﺎﻋُﻮﺍ ﻟِﺬَﻟِﻚَ ﻓَﺄَﻋْﻠِﻤْﻬُﻢْ ﺃَﻥَّ
ﺍﻟﻠَّﻪَ ﺍﻓْﺘَﺮَﺽَ ﻋَﻠَﻴْﻬِﻢْ ﺧَﻤْﺲَ ﺻَﻠَﻮَﺍﺕٍ ﻓِﻲ ﻛُﻞِّ ﻳَﻮْﻡٍ
ﻭَﻟَﻴْﻠَﺔٍ ﻓَﺈِﻥْ ﻫُﻢْ ﺃَﻃَﺎﻋُﻮﺍ ﻟِﺬَﻟِﻚَ ﻓَﺄَﻋْﻠِﻤْﻬُﻢْ ﺃَﻥَّ ﺍﻟﻠَّﻪَ ﺍﻓْﺘَﺮَﺽَ
ﻋَﻠَﻴْﻬِﻢْ ﺻَﺪَﻗَﺔً ﺗُﺆْﺧَﺬُ ﻣِﻦْ ﺃَﻏْﻨِﻴَﺎﺋِﻬِﻢْ ﻓَﺘُﺮَﺩُّ ﻓِﻲ ﻓُﻘَﺮَﺍﺋِﻬِﻢْ
ﻓَﺈِﻥْ ﻫُﻢْ ﺃَﻃَﺎﻋُﻮﺍ ﻟِﺬَﻟِﻚَ ﻓَﺈِﻳَّﺎﻙَ ﻭَﻛَﺮَﺍﺋِﻢَ ﺃَﻣْﻮَﺍﻟِﻬِﻢْ ﻭَﺍﺗَّﻖِ
ﺩَﻋْﻮَﺓَ ﺍﻟْﻤَﻈْﻠُﻮﻡِ ﻓَﺈِﻧَّﻪُ ﻟَﻴْﺲَ ﺑَﻴْﻨَﻬَﺎ ﻭَﺑَﻴْﻦَ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺣِﺠَﺎﺏٌ ” .
Reference : Sahih Muslim 19 a In-book reference : Book 1, Hadith 29 USC-MSA web (English) reference : Book 1, Hadith 27
(deprecated numbering scheme)

स्पष्ट है कि मुहमद अल्लाह के बराबर हो रहा है|
मुहमद चाहता था कि लोग उसी कि सुन्नत को माने वो अपने अनुयायीयो की वृध्दि चाहता था इसलिए उसने ये बोला-  मुहमद ने कहा- ” कयामत के रोज हमारे अनुयायी सबसे ज्यादा होगे(मुस्लिम किताब१ हदीस २८३)

image

मस्जिद जाने मे मुहमद का विशेषाधिकार प्रयोग-

मुहमद आम मुस्लिमो के लिए मस्जिद मे जाने के कई नियम बना देता लेकिन खुद को उन नियमो से मुक्त रखता ये बात इस हदीस से प्रमाणित होती है-
अबु सईद के अनुसार मुहमद ने अली से कहा-“ऐ अली ! यौनाचार से उत्पन्न अपवित्रता की दशा मे मस्जिद मे जाना ,मेरे ओर तुम्हारे सिवाय,और किसी के लिए विधिसम्मत नही है”(तिरमिजी,किताब२,हदीस १५८४)
लूट के माल मे मुहमद का अधिकार-
मुहमद जिहाद मे जो लूट होती उसके माल को ज्यादातर खुद ही हडपता था ओर लोंडियो को सबसे पहले चुनता था-

image

उमर कहते है कि-“बनू नजीर कबीले की जो जायदादे हमे हासिल हुई वो पूरी तरह अल्लाह के रसूल को बख्शी थी| उस लडाई मे न घुडसवार थे न ही ऊटसवार थे | ये जायदाद खासतौर पर रसूल के लिए बक्शी गई| ताकि वो अपना परिवार का खर्च चढाते ओर घोडे ओर हथियार खरीदते(सहीह मुस्लिम१९:५३४७)

मुहमद बहुविवाह ओर खुद की सुन्नत को मानने का आदेश देता था-

image

मुहमद से उनके एक साथी ने कहा कि-“मै शादी नही करूगा,दूसरे ने कहा मै गौश्त नही खाउगा| एक अन्य ने कहा कि मै बिस्तर मे नही सोउगा| मोहमद ने अपने आपसे कहा “इन लोगो को क्या हो गया जो ऐसा बोलते है मै खाता हू,सोता हू ओर निकाह करता हू और जो मेरी सुन्ना को न माने उसका मुझसे कोई रिश्ता नही|(मुस्लिम८:३२३६)
इस हदीस से स्पष्ट है कि मुहमद की सुन्ना न मानने वाला मुस्लिम नही होता है|
मुहमद का अन्य पैगम्बरो से श्रेष्ट बताना ओर जन्नत पहुचाने का एक मात्र दलाल बनना-
मुहम्मद ने कहा क़यामत के रोज़ मैं अव्वलीन और आखिरीन का सरदार रहूँगा , जिसकी सूरत ये होगी कि अल्लाह अव्वलीन और आखिरिन को एक चटयल मैदान में जमा करेगा जहाँ मनादी की आवाज़ बखूबी सब को पहुँच सके और नज़र सब को देख सके . चूँकि आफ़ताब सरों से बहुत नज़दीक होगा ,
इस लिए लोग निहायत तकलीफ और मुसीबत में मुब्तिला होंगे . इस मुसीबत से नजात पाने के लिए लोग आपस में सलाह मशविरा करेगे कि किसके पास चलें कि जो अल्लाह से हमारी मदद की सिफारिश कर सके . सब से पहले लोग आदम के पास जाएँगे और सब के बाप होने का वास्ता देकर मदद करने को कहेंगे . आदम कहेंगे कि अल्लाह तअला आज बहुत गुस्से में है कि इतना पहले कभी भी नहीं था . मैं ममनूआ शजर खाकर अल्लाह का नाफरमान बन्दा हूँ और मुझे
खुद अपने नफ़स की पड़ी हुई है तुम किसी दूसरे के पास जाओ . आदम के बाद लोग नूह के पास जाएँगे . नूह भी कहेंगे आज अल्लाह तअला बहुत गुस्से में
है कि ऐसा कभी नहीं देखा गया . मेरी एक दुआ मकबूल होने वाली थी , वह मैंने अपनी उम्मत के लिए अज़ाब मांग कर पूरी कर ली . मुझे खुद अपने नफ़स
की पड़ी हुई है तुम किसी दूसरे के पास जाओ . इसके बाद लोग हज़रात इब्राहीम के पास जाएँगे , इनका रवय्या भी आदम और नूह जैसा ही होगा . वह भी अपने
तीन जुर्म कुबूलते हुए कहेगे मुझे खुद अपने नफ़स की पड़ी हुई है, तुम किसी दूसरे के पास जाओ .

इसी तरह मूसा के पास जाने और मायूस होकर वापस आने का वक़ेआ होगा . मूसा को भी दुन्या में एक मिसरी के खून कर देने का वक़ेआ याद आएगा , वह
भी कहेंगे मुझे खुद अपने नफ़स की पड़ी हुई है, तुम किसी दूसरे के पास जाओ . इसके बाद लोग हजरत ईसा के पास जाएँगे ,
उनका भी हाल कुछ ऐसा ही होगा और उनको भी अपनी जान की पड़ी होगी आखीर में लोग थक हार के मुहम्मद के पास आएँगे जिनका अगला पिछला सब गुनाह अल्लाह ने मुआफ़ कर रखा है , मुहम्मद चटयल मैदान की गर्मी से परेशान हाल लोगों का मसअला लेकर अल्लाह के पास जाएँगे और ऐसी हम्द ओ सना करेगे कि गाऊदी अल्लाह का गुस्सा काफूर हो जाएगा और भरभराते हुए उनकी उम्मत जन्नत में घुस जाएगी .
(बुख़ारी १६९४)

इस बात मे मुहमद ने इतनी चालाकि चली की पहले तो लोगो को ईसा मूसा,आदम,इब्राहिम को पैगम्बर बताकर अपने मत मे शामिल कर लिया लेकिन बाद मे खुद को ही जन्नत का ठेकेदार बता दिया| मुहम्मद ने कहा जो शख्स मेरे लिए दो चीजों का जामिन हो जाए , एक दोनों जबड़ों के बीच ज़बान है , दूसरे दोनों टांगों के बीच जो शर्म गाह है , मैं उसके वास्ते जन्नत का ज़ामिन दार हो जाऊँगा।
(बुखारी २००७)

उपरोक्त बातो से स्पष्ट होता है कि इस्लाम ऐकेश्वरवाद नही है बल्कि अल्लाह मुहमद पर निर्भर है ओर ये मुहमद की अपनी एक चाल है ताकि उसके अनुयायियो की संख्या ज्यादा रहे|
मुस्लिम भाई अपने विवेक से सोचे ओर ऐकेश्वरवाद के झुठे अंधविश्वास मे मुहमद के द्वारा शोषित होने से खुद को बचाए ओर आपको विशुध्द ऐकेश्वरवाद चाहिए तो वेदो की शरण मे आओ जहा कोई मनुष्य बिचौलिया या ठैकेदार नही है|
ओम
https://www.sunaah.com
https://WWW.haditchcollection.com