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मित्रो आपने जाकिर नाईक ओर अन्य इस्लाम वालो के मुह से सुना होगा कि इस्लाम का प्रचार विश्वभर मे शांति पूर्वक ओर पवित्रता से फैला| इन सब इस्लाम समर्थको ने इस्लाम को शांति का मजहब(Religion of Peace) कहना शुरू कर दिया तथा कई लोगो को मुर्ख बनाकर इस्लाम मे शामिल किया जबकि ये सत्य नही है ;
इस्लामिक पुस्तको ओर इतिहास के अध्ययन से पता चलता है कि मुहमद ओर उसके साथियो ने इस्लाम को फैलाने के लिए हर चीज का सहारा लिया
जैसे -आतंकवाद या जिहाद का सहारा-
“कत्ल करो उनको जो अल्लाह पर ईमान नही लाए,जो कयामत को नही मानते,हराम को हराम नही मानते,जो रसूल को नही मानते,अल्लाह के दीन को नही मानते,अल्लाह की किताब को नही मानते ओर जजिया नही देते वे सब कत्ल करने योग्य है|(सूरा तौबा २९)
“कहा अब्दुला इब्ने मसूयद ने एक बार हजरत से पूछा कि हमारे लिए अच्छा काम क्या है? तो कहा- समय पर नवाज पढना-फिर पूछा इससे अच्छा माता पिता की सेवा फिर कहा इससे अच्छा -जबाब मिला कि सबसे अच्छा अल्लाह के लिए जिहाद करना|(बुखारी ४६:५१)
जनसंख्या वृध्दि द्वारा- आपने देखा होगा कि मुस्लिम कई सारे बच्चे पैदा करते है इसका भी कारण इस्लाम के संख्यको की वृध्दि करना है जिसके बारे मे निम्न हदीसो का यह लोग पालन करते है-
“स्त्रियो का यह मजहबी कर्तव्य है कि वे अधिकाधिक संख्या मे बच्चे पैदा करे,(इब्ने ए माजाह खण्ड १ पृष्ठ५१८)”
“पैगम्बर ने कहा था कि,शादी मेरा मोलिक अधिकार है| जो कोई मेरे अादर्श का अनुसरण नही करता है वो मेरा अनुयायी नही है,शादिया करो ताकि मेरे नेतृत्व मे सर्वाधिक अनुयायी हो जाए फलस्वरूप मे दूसरे समुदायो से अधिक मान्यता प्राप्त कर सकु|”(इब्न ऐ माजाह,पृष्ठ ५२३)
कयामत के दिन मेरे अनुयायियो की संख्या अन्य किसी से अधिक हो,इस उद्देश्य की प्राप्ती के लिए संतान पैदा करो( मिस्कट खण्ड३पृष्ठ ११९)
शायद इसीलिए इस्लाम मे ब्रह्मचर्य का पालन नही है जैसा कि कुरान मे है-“ओर संसार मे वैराग्य की प्रथा उनहोने स्वंय निकाली,हमने कभी इसका आदेश नही दिया”(अल हदीद ५७:२७)
इसके अलावा भक्ति जिहाद जो कि निजामुद्दीन,मोइनुद्दीन चिश्ति ने भारत मे सूफीवाद के रूप मे फैलाया ओर प्रेम जिहाद कई तरह के सहारे इस्लामिक साम्राज्य को धरती पर फैलाने के लिए जिहादियो ने किए यहा तक कि काल्पनिक जन्नत के हुरै,गिलमो ओर शराब का लालच से लेकर जहर्रुम की आग का डर तक”
इस्लाम को शांति का मजहब बताने वालो को इस पर भी विचार करना चाहिए कि” बाबर,गौरी,कासिम तलवार ओर सेना द्वारा कौनसी शांति स्थापना के लिए भारत आए थे |
यहा हम अब कुछ हदीसो के प्रमाण से अब यह सिध्द करेगे कि इस्लाम को फैलाने के लिए लोगो को लोभ ओर लालच भी दिया गया था ताकि लालच के कारण लोग इस्लाम मे आए-
सहीह मुस्लिम की अठाईसवी किताब “पैगम्बर के श्रेष्ठ गुण” जिसके अध्ययन से पता चलता है कि मुहमद ने लूट का माल लोगो को बाटते ओर जिससे प्रभावित होकर लोग इस्लाम अपनाने लगे थे| वास्तव मे ज्यादातर लोग जिहाद मे लूट के माल जैसे स्त्री,ओर धन के कारण मुहमद के साथ थे|
निम्न हदीस देखे-
“अबु सिरमा ने अबु सईद से कहा(अल्लाह उसे शक्ति दे)-ओ अबु
सईद ,क्या तुमने अल्लाह के रसूल से अल्-अजल के बारे मे सुना|
उसने कहा-हा ओर कहा कि जब हम रसूल के साथ बनु मुस्तालिक
की मुहिम पर थे तब हमने वहा कुछ सुन्दर अरब
औरतो को अपने कब्जे मे कर लिया |चुकि हम
अपनी बैगमो से उस समय काफी समय के
लिए दूर थे तो हमारी काम वासना जाग गई तो उनके साथ
हमने अजल की विधि से संभोग किया ताकि उनके गर्भ न
ठहरे| यह करते हुए हमे याद आया कि रसूल हमारे साथ
है ,क्यु न हम इस बारे मे उनसे पूछे|इस पर अल्लाह के पैगम्बर
ने कहा” तुम अज्ल करो या न करो इससे कोई अंतर
नही पडता क्युकि वह प्रत्येक जीव
कयामत के दिन को जन्म लेगा ही ओर लेना है
सहीह मुस्लिम किताब ८ जिल्द ०२२
हदीस ३३७१
अंग्रेजी मे ओर अरबी मे हदीस
Abu Sirma said to Abu Sa’id al Khadri (Allah he
pleased with him):
0 Abu Sa’id, did you hear Allah’s Messenger ( )
mentioning al-‘azl? He said: Yes, and added: We
went out with Allah’s Messenger ( ) on the
expedition to the Bi’l-Mustaliq and took captive
some excellent Arab women; and we desired them,
for we were suffering from the absence of our
wives, (but at the same time) we also desired
ransom for them. So we decided to have sexual
intercourse with them but by observing ‘azl
(Withdrawing the male sexual organ before
emission of semen to avoid-conception). But we
said: We are doing an act whereas Allah’s
Messenger is amongst us; why not ask him? So
we asked Allah’s Mes- senger ( ), and he said: It
does not matter if you do not do it, for every soul
that is to be born up to the Day of Resurrection
will be born.
ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻳَﺤْﻴَﻰ ﺑْﻦُ ﺃَﻳُّﻮﺏَ، ﻭَﻗُﺘَﻴْﺒَﺔُ ﺑْﻦُ ﺳَﻌِﻴﺪٍ، ﻭَﻋَﻠِﻲُّ
ﺑْﻦُ ﺣُﺠْﺮٍ، ﻗَﺎﻟُﻮﺍ ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺇِﺳْﻤَﺎﻋِﻴﻞُ، ﺑْﻦُ ﺟَﻌْﻔَﺮٍ ﺃَﺧْﺒَﺮَﻧِﻲ
ﺭَﺑِﻴﻌَﺔُ، ﻋَﻦْ ﻣُﺤَﻤَّﺪِ ﺑْﻦِ ﻳَﺤْﻴَﻰ ﺑْﻦِ ﺣَﺒَّﺎﻥَ، ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ
ﻣُﺤَﻴْﺮِﻳﺰٍ، ﺃَﻧَّﻪُ ﻗَﺎﻝَ ﺩَﺧَﻠْﺖُ ﺃَﻧَﺎ ﻭَﺃَﺑُﻮ ﺻِﺮْﻣَﺔَ ﻋَﻠَﻰ ﺃَﺑِﻲ
ﺳَﻌِﻴﺪٍ ﺍﻟْﺨُﺪْﺭِﻱِّ ﻓَﺴَﺄَﻟَﻪُ ﺃَﺑُﻮ ﺻِﺮْﻣَﺔَ ﻓَﻘَﺎﻝَ ﻳَﺎ ﺃَﺑَﺎ ﺳَﻌِﻴﺪٍ
ﻫَﻞْ ﺳَﻤِﻌْﺖَ ﺭَﺳُﻮﻝَ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻳَﺬْﻛُﺮُ
ﺍﻟْﻌَﺰْﻝَ ﻓَﻘَﺎﻝَ ﻧَﻌَﻢْ ﻏَﺰَﻭْﻧَﺎ ﻣَﻊَ ﺭَﺳُﻮﻝِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ
ﻭﺳﻠﻢ ﻏَﺰْﻭَﺓَ ﺑَﻠْﻤُﺼْﻄَﻠِﻖِ ﻓَﺴَﺒَﻴْﻨَﺎ ﻛَﺮَﺍﺋِﻢَ ﺍﻟْﻌَﺮَﺏِ ﻓَﻄَﺎﻟَﺖْ
ﻋَﻠَﻴْﻨَﺎ ﺍﻟْﻌُﺰْﺑَﺔُ ﻭَﺭَﻏِﺒْﻨَﺎ ﻓِﻲ ﺍﻟْﻔِﺪَﺍﺀِ ﻓَﺄَﺭَﺩْﻧَﺎ ﺃَﻥْ ﻧَﺴْﺘَﻤْﺘِﻊَ
ﻭَﻧَﻌْﺰِﻝَ ﻓَﻘُﻠْﻨَﺎ ﻧَﻔْﻌَﻞُ ﻭَﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ
ﺑَﻴْﻦَ ﺃَﻇْﻬُﺮِﻧَﺎ ﻻَ ﻧَﺴْﺄَﻟُﻪُ . ﻓَﺴَﺄَﻟْﻨَﺎ ﺭَﺳُﻮﻝَ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ
ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻓَﻘَﺎﻝَ ” ﻻَ ﻋَﻠَﻴْﻜُﻢْ ﺃَﻥْ ﻻَ ﺗَﻔْﻌَﻠُﻮﺍ ﻣَﺎ ﻛَﺘَﺐَ
ﺍﻟﻠَّﻪُ ﺧَﻠْﻖَ ﻧَﺴَﻤَﺔٍ ﻫِﻲَ ﻛَﺎﺋِﻨَﺔٌ ﺇِﻟَﻰ ﻳَﻮْﻡِ ﺍﻟْﻘِﻴَﺎﻣَﺔِ ﺇِﻻَّ
ﺳَﺘَﻜُﻮﻥُ ” .
Reference : Sahih Muslim 1438 a
In-book reference : Book 16, Hadith 147
USC-MSA web (English) reference : Book 8, Hadith
3371
http://www.hadithcollection.com/sahihmuslim/136-Sahih%20Muslim%20Book%2008.%20Marriage/11334-sahih-muslim-book-008-hadith-number-3371.html
इससे पता चलता है कि महमद के साथी जिहाद मे पकडी गई औरतो के साथ संभोग करते थे | इसी कारण वो मुहमद का साथ देते थे|
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अब कुछ उदाहरण सहीह मुस्लिम के जिसके अनुसार मुहमद के द्वारा दिए गए लोभ के कारण लोगो ने इस्लाम कबूला
“अनस कहते है कि पैगम्बर “इस्लाम के नाम पर जो कुछ मांगा जाए” उसे वे जरूर देते है|एक व्यक्ति उनके पास आया और मुहमद ने उसे भेड और बकरियो का एक रेवड दे दिया|”वह अपने लोगो के बीच लौटकर गया ओर बोला -मेरे भाईयो इस्लाम अपना लो,क्युकि मुहमद इतना दान देता है मानो उसके पास कोई कमी न हो
Musa b. Anas reported on the authority of his
father:
It never happened that Allah’s Messenger ( ﷺ ) was
asked anything for the sake of Islam and he did not
give that. There came to him a person and he
gave him a large flock (of sheep and goats) and he
went back to his people and said: My people,
embrace Islam, for Muhammad gives so much
charity as if he has no fear of want.
ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻋَﺎﺻِﻢُ ﺑْﻦُ ﺍﻟﻨَّﻀْﺮِ ﺍﻟﺘَّﻴْﻤِﻲُّ، ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺧَﺎﻟِﺪٌ، –
ﻳَﻌْﻨِﻲ ﺍﺑْﻦَ ﺍﻟْﺤَﺎﺭِﺙِ – ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺣُﻤَﻴْﺪٌ، ﻋَﻦْ ﻣُﻮﺳَﻰ ﺑْﻦِ
ﺃَﻧَﺲٍ، ﻋَﻦْ ﺃَﺑِﻴﻪِ، ﻗَﺎﻝَ ﻣَﺎ ﺳُﺌِﻞَ ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ
ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻋَﻠَﻰ ﺍﻹِﺳْﻼَﻡِ ﺷَﻴْﺌًﺎ ﺇِﻻَّ ﺃَﻋْﻄَﺎﻩُ – ﻗَﺎﻝَ –
ﻓَﺠَﺎﺀَﻩُ ﺭَﺟُﻞٌ ﻓَﺄَﻋْﻄَﺎﻩُ ﻏَﻨَﻤًﺎ ﺑَﻴْﻦَ ﺟَﺒَﻠَﻴْﻦِ ﻓَﺮَﺟَﻊَ ﺇِﻟَﻰ
ﻗَﻮْﻣِﻪِ ﻓَﻘَﺎﻝَ ﻳَﺎ ﻗَﻮْﻡِ ﺃَﺳْﻠِﻤُﻮﺍ ﻓَﺈِﻥَّ ﻣُﺤَﻤَّﺪًﺍ ﻳُﻌْﻄِﻲ ﻋَﻄَﺎﺀً
ﻻَ ﻳَﺨْﺸَﻰ ﺍﻟْﻔَﺎﻗَﺔَ .
Reference : Sahih Muslim 2312 a
In-book reference : Book 43, Hadith 78
USC-MSA web (English) reference : Book 30, Hadith 5728(Reference : Sahih Muslim 2312 a
In-book reference : Book 43, Hadith 78
USC-MSA web (English) reference)
अल्लाह ने पैगम्बर को हुनैन की लडाई मे जीत दिला दी ,तो उनहोने साफवान बिन उम्मया को सौ ऊट दिये| फिर उन्होने उसे सौ ऊट ओर दिए ओर सौ ओर|पाने वाला हक्का बक्का रह गया | उसने कहा -मुहमद मेरी नजर मे लोगो के बीच सबसे घृणास्पद व्यक्ति था| लेकिन वह मुझे देता ही चला गया और अब वो मेरे सबसे निकट व्यक्ति है|
Ibn Shihab reported that Allah’s Messenger ( ﷺ )
went on the expedition of Victory, i. e. the Victory
of Mecca, and then he went out along with the
Muslims and they fought at Hunain, and Allah
granted victory to his religion and to the Muslims,
and Allah’s Messenger ( ﷺ ) gave one hundred
camels to Safwan b. Umayya. He again gave him
one hundred camels, and then again gave him one
hundred camels. Sa’id b. Musayyib said that
Safwan told him:
(By Allah) Allah’s Messenger ( ﷺ ) gave me what he
gave me (and my state of mind at that time was)
that he was the most detested person amongst
people in my eyes. But he continued giving to me
until now he is the dearest of people to me.
ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨِﻲ ﺃَﺑُﻮ ﺍﻟﻄَّﺎﻫِﺮِ، ﺃَﺣْﻤَﺪُ ﺑْﻦُ ﻋَﻤْﺮِﻭ ﺑْﻦِ ﺳَﺮْﺡٍ ﺃَﺧْﺒَﺮَﻧَﺎ
ﻋَﺒْﺪُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺑْﻦُ ﻭَﻫْﺐٍ، ﺃَﺧْﺒَﺮَﻧِﻲ ﻳُﻮﻧُﺲُ، ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ ﺷِﻬَﺎﺏٍ،
ﻗَﺎﻝَ ﻏَﺰَﺍ ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻏَﺰْﻭَﺓَ
ﺍﻟْﻔَﺘْﺢِ ﻓَﺘْﺢِ ﻣَﻜَّﺔَ ﺛُﻢَّ ﺧَﺮَﺝَ ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ
ﻭﺳﻠﻢ ﺑِﻤَﻦْ ﻣَﻌَﻪُ ﻣِﻦَ ﺍﻟْﻤُﺴْﻠِﻤِﻴﻦَ ﻓَﺎﻗْﺘَﺘَﻠُﻮﺍ ﺑِﺤُﻨَﻴْﻦٍ ﻓَﻨَﺼَﺮَ
ﺍﻟﻠَّﻪُ ﺩِﻳﻨَﻪُ ﻭَﺍﻟْﻤُﺴْﻠِﻤِﻴﻦَ ﻭَﺃَﻋْﻄَﻰ ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ
ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻳَﻮْﻣَﺌِﺬٍ ﺻَﻔْﻮَﺍﻥَ ﺑْﻦَ ﺃُﻣَﻴَّﺔَ ﻣِﺎﺋَﺔً ﻣِﻦَ ﺍﻟﻨَّﻌَﻢِ
ﺛُﻢَّ ﻣِﺎﺋَﺔً ﺛُﻢَّ ﻣِﺎﺋَﺔً . ﻗَﺎﻝَ ﺍﺑْﻦُ ﺷِﻬَﺎﺏٍ ﺣَﺪَّﺛَﻨِﻲ ﺳَﻌِﻴﺪُ ﺑْﻦُ
ﺍﻟْﻤُﺴَﻴَّﺐِ ﺃَﻥَّ ﺻَﻔْﻮَﺍﻥَ ﻗَﺎﻝَ ﻭَﺍﻟﻠَّﻪِ ﻟَﻘَﺪْ ﺃَﻋْﻄَﺎﻧِﻲ ﺭَﺳُﻮﻝُ
ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻣَﺎ ﺃَﻋْﻄَﺎﻧِﻲ ﻭَﺇِﻧَّﻪُ ﻷَﺑْﻐَﺾُ
ﺍﻟﻨَّﺎﺱِ ﺇِﻟَﻰَّ ﻓَﻤَﺎ ﺑَﺮِﺡَ ﻳُﻌْﻄِﻴﻨِﻲ ﺣَﺘَّﻰ ﺇِﻧَّﻪُ ﻷَﺣَﺐُّ ﺍﻟﻨَّﺎﺱِ
ﺇِﻟَﻰَّ .
( Reference : Sahih Muslim 2313
In-book reference : Book 43, Hadith 80
USC-MSA web (English) reference : Book 30, Hadith 5730
(deprecated numbering scheme))
मुहमद के मरने के बाद भी जिहादी लोगो को इस्लाम मे आकृषित करने के लिए लौकिक प्रलोभन दिया करते थे-
“बहराईन से दौलत पहुचने पर अबु बकर ने उस व्यक्ति को मुट्ठीभर सिक्के दिये| सिक्के पाने वाला व्यक्ति हमे बताता है कि -“उनहोने मुझे सिक्के गिनने को कहा | मैने गिना तो पांच सौ दीनार थे| और वे बोले इससे दुगने ये लो|
Jabir b. ‘Abdullah reported Allah’s Messenger ( ﷺ )
as saying:
In case we get wealth from Bahrain, I would give
you so much and so much; he made an indication
of it with both his hands. Allah’s Apostle ( ﷺ ) died
before wealth from Bahrain came, and it fell to the
lot of Abu Bakr after him. He commanded the
announcer to make announcement to the effect
that he to whom Allah’s Apostle ( ﷺ ) had held out
promise or owed any debt should come (to him). I
came and said: Allah’s Apostle ( ﷺ ) had said to me:
In case there comes to us the wealth of Bahrain I
shall give you so much, and so much. Abu Bakr
took a handful (of the coins) and gave that to me
once and asked me to count them I counted them
as five hundred dinars and he said: Here is double
of this for you.
ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﻋَﻤْﺮٌﻭ ﺍﻟﻨَّﺎﻗِﺪُ، ﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺳُﻔْﻴَﺎﻥُ ﺑْﻦُ ﻋُﻴَﻴْﻨَﺔَ، ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ
ﺍﻟْﻤُﻨْﻜَﺪِﺭِ، ﺃَﻧَّﻪُ ﺳَﻤِﻊَ ﺟَﺎﺑِﺮَ، ﺑْﻦَ ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺡ
ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺇِﺳْﺤَﺎﻕُ، ﺃَﺧْﺒَﺮَﻧَﺎ ﺳُﻔْﻴَﺎﻥُ، ﻋَﻦِ ﺍﺑْﻦِ ﺍﻟْﻤُﻨْﻜَﺪِﺭِ، ﻋَﻦْ
ﺟَﺎﺑِﺮٍ، ﻭَﻋَﻦْ ﻋَﻤْﺮٍﻭ، ﻋَﻦْ ﻣُﺤَﻤَّﺪِ، ﺑْﻦِ ﻋَﻠِﻲٍّ ﻋَﻦْ ﺟَﺎﺑِﺮٍ،
ﺃَﺣَﺪُﻫُﻤَﺎ ﻳَﺰِﻳﺪُ ﻋَﻠَﻰ ﺍﻵﺧَﺮِ ﺡ
ﻭَﺣَﺪَّﺛَﻨَﺎ ﺍﺑْﻦُ ﺃَﺑِﻲ ﻋُﻤَﺮَ، – ﻭَﺍﻟﻠَّﻔْﻆُ ﻟَﻪُ – ﻗَﺎﻝَ ﻗَﺎﻝَ
ﺳُﻔْﻴَﺎﻥُ ﺳَﻤِﻌْﺖُ ﻣُﺤَﻤَّﺪَ ﺑْﻦَ ﺍﻟْﻤُﻨْﻜَﺪِﺭِ، ﻳَﻘُﻮﻝُ ﺳَﻤِﻌْﺖُ
ﺟَﺎﺑِﺮَ ﺑْﻦَ ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ، ﻗَﺎﻝَ ﺳُﻔْﻴَﺎﻥُ ﻭَﺳَﻤِﻌْﺖُ ﺃَﻳْﻀًﺎ، ﻋَﻤْﺮَﻭ
ﺑْﻦَ ﺩِﻳﻨَﺎﺭٍ ﻳُﺤَﺪِّﺙُ ﻋَﻦْ ﻣُﺤَﻤَّﺪِ ﺑْﻦِ ﻋَﻠِﻲٍّ، ﻗَﺎﻝَ ﺳَﻤِﻌْﺖُ
ﺟَﺎﺑِﺮَ ﺑْﻦَ ﻋَﺒْﺪِ ﺍﻟﻠَّﻪِ، ﻭَﺯَﺍﺩَ، ﺃَﺣَﺪُﻫُﻤَﺎ ﻋَﻠَﻰ ﺍﻵﺧَﺮِ ﻗَﺎﻝَ ﻗَﺎﻝَ
ﺭَﺳُﻮﻝُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ” ﻟَﻮْ ﻗَﺪْ ﺟَﺎﺀَﻧَﺎ ﻣَﺎﻝُ
ﺍﻟْﺒَﺤْﺮَﻳْﻦِ ﻟَﻘَﺪْ ﺃَﻋْﻄَﻴْﺘُﻚَ ﻫَﻜَﺬَﺍ ﻭَﻫَﻜَﺬَﺍ ﻭَﻫَﻜَﺬَﺍ ” . ﻭَﻗَﺎﻝَ
ﺑِﻴَﺪَﻳْﻪِ ﺟَﻤِﻴﻌًﺎ ﻓَﻘُﺒِﺾَ ﺍﻟﻨَّﺒِﻲُّ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ
ﻗَﺒْﻞَ ﺃَﻥْ ﻳَﺠِﻲﺀَ ﻣَﺎﻝُ ﺍﻟْﺒَﺤْﺮَﻳْﻦِ ﻓَﻘَﺪِﻡَ ﻋَﻠَﻰ ﺃَﺑِﻲ ﺑَﻜْﺮٍ
ﺑَﻌْﺪَﻩُ ﻓَﺄَﻣَﺮَ ﻣُﻨَﺎﺩِﻳًﺎ ﻓَﻨَﺎﺩَﻯ ﻣَﻦْ ﻛَﺎﻧَﺖْ ﻟَﻪُ ﻋَﻠَﻰ ﺍﻟﻨَّﺒِﻲِّ
ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻋِﺪَﺓٌ ﺃَﻭْ ﺩَﻳْﻦٌ ﻓَﻠْﻴَﺄْﺕِ . ﻓَﻘُﻤْﺖُ
ﻓَﻘُﻠْﺖُ ﺇِﻥَّ ﺍﻟﻨَّﺒِﻲَّ ﺻﻠﻰ ﺍﻟﻠﻪ ﻋﻠﻴﻪ ﻭﺳﻠﻢ ﻗَﺎﻝَ ” ﻟَﻮْ ﻗَﺪْ
ﺟَﺎﺀَﻧَﺎ ﻣَﺎﻝُ ﺍﻟْﺒَﺤْﺮَﻳْﻦِ ﺃَﻋْﻄَﻴْﺘُﻚَ ﻫَﻜَﺬَﺍ ﻭَﻫَﻜَﺬَﺍ ﻭَﻫَﻜَﺬَﺍ ” .
ﻓَﺤَﺜَﻰ ﺃَﺑُﻮ ﺑَﻜْﺮٍ ﻣَﺮَّﺓً ﺛُﻢَّ ﻗَﺎﻝَ ﻟِﻲ ﻋُﺪَّﻫَﺎ . ﻓَﻌَﺪَﺩْﺗُﻬَﺎ ﻓَﺈِﺫَﺍ
ﻫِﻲَ ﺧَﻤْﺴُﻤِﺎﺋَﺔٍ ﻓَﻘَﺎﻝَ ﺧُﺬْ ﻣِﺜْﻠَﻴْﻬَﺎ .
( Reference : Sahih Muslim 2314 a
In-book reference : Book 43, Hadith 81
USC-MSA web (English) reference : Book 30, Hadith 5731)
इन सब उदाहरणो से स्पष्ट है कि मुहमद,जिहादियो ने इस्लाम के साम्राज्य को फैलाने मे लोभ लालच,जिहाद,वासना सबका सहारा लिया| इस्लाम आज कई देशो मे है तो इसका कारण ये सब जिहाद है|
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