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मित्रो आजकल इसाई कट्टरपंथियो ने बडे पैमाने पर हमारे देश मे भोले भाले लोगो विशेष कर आदिवासी लोगो को बहला फुसला कर ओर जन्नत,दोखज ओर इसामसीह की झुठी उधारता की कहानी सुना सुनाकर उनका मतान्तरण कर रहे है|
लेकिन यदि हम बाईबिल का अध्ययन करे तो पता चलता है कि इस किताब मे नारियो को बद से बदत्तर संमझा गया है|
इतनी बूरी दशा नारियो की बाईबिल मे कर रखी है जिसके कुछ अंश मै अभी प्रस्तुत कर रहा हू ओर कुछ किसी अन्य लेख मे-
नारियो के मान सम्मान को ठेस पहुचाने ओर उन पर पुरूषो का शासन कायम करने के उद्देश्य से ही बाईबिल मे आदम ओर हव्वा की झुठी कहानी गडी गई
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जिसकी एक झलक इन विडियो मे देखे:-
https://m.youtube.com/watch?rl=yes&v=A_a6RjR_AHY&gl=IN&hl=en&client=mv-google&guid= (aadam and eve)
https://m.youtube.com/watch?rl=yes&v=hxv_yfxCCwk&gl=IN&guid=&client=mv-google&hl=en
इस तरह की झुठी कहानी बाईबिल मे नारी को अधीन बनाने के लिये गढी गई|
१स्त्री चुप रहे:
11 और स्त्री को चुपचाप
पूरी आधीनता में
सीखना चाहिए।
12 और मैं कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश
करे, और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप
रहे।
13 क्योंकि आदम पहिले, उसके बाद हव्वा बनाई गई।
14 और आदम बहकाया न गया, पर
स्त्री बहकाने में आकर
अपराधिनी हुई।(तीमुथियुस के नाम पहला पत्र२:११-१३)
बदले के लिए विवाहितो का कत्ल ओर कुवांरियो का बटवारा-
14 और मूसा सहस्त्रपति-शतपति आदि, सेनापतियों से,
जो युद्ध करके लौटे आते थे क्रोधित हो कर कहने
लगा,
15 क्या तुम ने सब स्त्रियों को जीवित छोड़
दिया?
16 देखे, बिलाम की सम्मति से, पोर के विषय में
इस्त्राएलियों से यहोवा का विश्वासघात
इन्हीं ने कराया, और
यहोवा की मण्डली में
मरी फैली।
17 सो अब बाल-बच्चों में से हर एक लड़के को, और
जितनी स्त्रियों ने पुरूष का मुंह देखा हो उन
सभों को घात करो।
18 परन्तु जितनी लड़कियों ने पुरूष का मुंह
न देखा हो उन सभों को तुम अपने लिये
जीवित रखो।(गिनती३१:१४-१८)
35 और मनुष्यों में से जिन स्त्रियों ने पुरूष का मुंह
नहीं देखा था वह सब
बत्तीस हजार थीं।
इन महिलाओ ने न तो मारकाट की थी ओर ही युध्द मे भाग लिया | स्त्रियो का कत्ल के आदेश देने वाले ऐसे धर्मशास्त्र को ओर ऐसे व्यक्ति को कोई धार्मिक व्यक्ति ओर बाईबिल को धार्मिक किताब कहा जा सकता है क्या?
16 फिर स्त्री से उसने कहा, मैं
तेरी पीड़ा और तेरे
गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा;
तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न
करेगी; और तेरी लालसा तेरे
पति की ओर होगी, और वह
तुझ पर प्रभुता करेगा।(उत्पत्ति ३:१६)
ये देखिये स्त्री की अधीनता का यहौवा का फैसला|
स्त्री अधीन रहे-
34 स्त्रियां कलीसिया की सभा में
चुप रहें, क्योंकि उन्हें बातें करने
की आज्ञा नहीं, परन्तु
आधीन रहने की आज्ञा है:
जैसा व्यवस्था में लिखा भी है।
35 और यदि वे कुछ सीखना चाहें, तो घर में
अपने अपने पति से पूछें,(१कुरंथिनो१४:३४-३५)
5 परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर
प्रार्थना या भविष्यद्ववाणी करती है,
वह अपने सिर का अपमान करती है,
क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।
6 यदि स्त्री ओढ़नी न ओढ़े,
तो बाल भी कटा ले; यदि स्त्री के
लिये बाल कटाना या मुण्डाना लज्ज़ा की बात
है, तो ओढ़नी ओढ़े।(१कुरंथिनो११:५-७)
20 पर यदि तू अपने पति को छोड़ दूसरे
की ओर फिर के अशुद्ध हुई हो, और तेरे
पति को छोड़ किसी दूसरे पुरूष ने तुझ से प्रसंग
किया हो,ओर याजक उसे शापदेने वाली शपथ खिलाकर कहे,कि प्रभु तेरी जांघ सडाये ओर तेरा पेट फुलाये……..(गिनती ५:२०)
तो यह है स्त्रियो की दासता,अपमान ओर मुह बंद रखने का बाईबिल का न्याय|
बाईबिल के यहोवा के दंड विधान मे बेकसूर स्त्री की इज्जत को सरे आम निलाम करना-
11 यहोवा यों कहता है, कि सुन, मैं तेरे घर में से
विपत्ति उठा कर तुझ पर डालूंगा; और
तेरी पत्नियों को तेरे साम्हने ले कर दूसरे
को दूंगा, और वह दिन दुपहरी में
तेरी पत्नियों से कुकर्म करेगा।
12 तू ने तो वह काम छिपाकर किया; पर मैं यह काम
सब इस्राएलियों के साम्हने दिन
दुपहरी कराऊंगा।(२शमूएल १२:११-१२)
यानी स्त्री भी सजा का एक साधन हो गई| ये तो व्यभिचार की खुली छुट है यहोवा की|
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अब आप ही लोग फैसला करे क्या बाईबिल का यहौवा कोई ईश्वर है ओर क्या बाईबिल को कोई धर्म ग्रंथ माना जा सकता है|
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वास्तव मै बाईबिल कोई धर्मग्रंथ होई नही सकता ये तो बस एक इतिहास की पुस्तिका मात्र है जिसमे भी गप्पे है|
डीन फरार ने कहा था कि ‘बाईबिल बर्बर लोगो के लिये बर्बर युग मे लिखी गई,एक बर्बर किताब है|
शायद अब इस कथन पर सबको भरौसा कर लेना चाहिए|