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1373086003sexularism2इस लेख  का शीर्षक  पढ़ते ही हमारे प्रबुद्ध  पाठक  जरुर  चौंक  जायेंगे , लेकिन  यह  प्रश्न  उन  लोगों  के लिए हैं  , जो दावा करते हैं कि  भारत  एक सेकुलर  देश  है . और  जो लोग ऐसा मानते हैं  , वह कृपया  बताएं  कि हम  भारत को  सेकुलर  देश समझें  या एक इस्लामी  देश , जिसने सेकुलरिज्म   की खाल  ओढ़ी  हुई  हो . कारण  के लिए ध्यान  से पढ़िए ,
आश्चर्य तो यह है कि एक तरफ सरकार भारत को सेक्यूलर राज्य कहती है और दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइ्रयों को विशेष सुविधाएँ देती है जो पूर्णतया असंवैधिातिक है। इसके अलावा 15 प्रतिशत भारतीय मुसलमान किसी भी मापदण्ड में अल्पसंखयक नहीं हैं। फिर भी कांग्रेस व अन्य सेक्यूलर राजनैतिक दल राज्यों एवं केन्द्र सरकार में मुसलमानों  के लिए  अनेकों  असंवैधानिक  सुविधाओं  को स्वीकार कर रही है। देखिए कुछ प्रमाण-

1-धार्मिक सुविधाऐं-

 विश्व के 57  इस्लामी देशों में से कही भी मुसलमानों को हज्ज यात्रा के लिए आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है क्योंकि हज्ज के लिए आर्थिक सहायता लेना गैर-इस्लामी है। परन्तु भारत सरकार प्रत्येक हज्ज यात्री को हवाई यात्रा के लिए 28000 रुपये  की आर्थिक सहायता देती है। हजियों के लिए राज्यों में हज हाउस बनाए गये हैं। इतना ही नहीं जिद्‌दा में हाजियों की सुविधाएँ देखने के लिए एक विशेष दल जाता है, मानो वहाँ की एम्बेसी काफी नहीं है।

2-वक्फ बोर्ड-आतंकियों  का  बैंक 

 मुस्लिमों वक्फ बोर्डों के पास बारह लाख करोड़ी की सम्पत्ति है जिसकी वार्षिक आय 12000 करोड़ है। फिर भी सरकार वक्फ बोर्डों को आर्थिक सहायता देती है.
लेकिन  सरकार जो भी  रूपया  इन  वक्फ बोर्डों  को देती  है . उसका   हिसाब किताब  कभी सार्वजनिक  नहीं  किया जाता है .क्योंकि इसी रुपये से  जिहादी हथियार और विस्फोटक खरीदते हैं .जबकि  बाबा रामदेव   पर अक्सर छापे पड़ते रहतेहैं .

3-मदरसा या आतंकवाद   की फैक्ट्री 

विश्व के लगभग  सभी देश   मान  चुके हैं ,कि मदरसे  आतंकवादियों   को तैयार करने  वाले कारखाने  है . जितने भी आतंकी पकदे गए  वह कभीं कभी  मदरसा  में  पढ़े  हुए थे .
सरकार ने धार्मिक कट्‌टरवाद एवं अलगावदवाद को बढावा देने वाली मदरसा शिक्षा को न केवल दोष मुक्त बताया बल्कि उसके आधुनिकीकरण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए आर्थिक सहायता देती है। फिर भी मुसलमान इन मदरसों को केन्द्रीय मदरसा बोर्ड से
जुड़ने देना नहीं चाहते। यहाँ तक कि पाठ्‌यक्रम में सुझाव व अन्य किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं मानते. (1) पश्चिमी बंगाल सरकार ने 2010 तक 300 अंग्रेजी  माध्यम के मदरसा स्थापित करने का निर्णय लिया है।  (पायो. 23.12.2009), (2) सरकार ने अल्पसंखयकों के संस्थानों को उच्च शिक्षा में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए आरक्षण से मुक्त रखा। (3) इलाहाबाद हाई कोर्ट के विरोध के बावजूद अलीगढ़ विश्व विद्यलाय को अल्पसंखयक स्वरूप बनाए रखने पर बल दिया. (4) अल्पसंखयकों के कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पच्चीस लाख बजीफे दिए जबकि सवर्णों को नहीं हैं। (5) केरल सरकार ने मदरसों के मौलवियों के लिए पेंशन देने का निर्णय किया है. (6) बिहार में 10वीं की परीक्षा पास करने वाले मुस्लिम छात्र को 10000/- रुपये पुरस्कार मिलेगा. (7) राजस्थान में मुस्लिम विद्यार्थी निजी विद्यालयों में पढ़ते समय भी छात्रवृत्ति ले सकते हैं। (शिक्षा बचाओं आन्दोलन, बुले. 48 पृ. 32). (8) ….समिति की सिफारिशें के अनुरुप 1 से 12 कक्षा तक की पुस्तकें मदरसे  में तैयार होंगी। अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उर्दू में संचालित करने की योजना है’ (राजस्थान पत्रिका 9..7.2007). (9) पाठ्‌य-पुस्तकों में पिछली (1998-2003) सरकार द्वारा निकाले गए हिन्दू विरोधी और मुस्लिम-उन्मुख अंशों को दुबारा पुस्तकों में डाल दिया गया. (10) सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केन्द्र भोपाल, पुरी, किशनगंज (बिहार) मुर्शिदाबाद (पं. बगांल) व मुल्लूपुरम (केरल) में खोलने के लिए दो हजार करोड़ का अनुदान दिया। (वही. बुल. 48, पृ. 31). (11) अल्पसंखयकों के एम फिल ओर पी.एच.डी. करने वाले 756 विद्यार्थियों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा के बिना बारह से चौदह हजार रुपये महीना रिसर्च फैलोशिप मिलेगी। (दैनिक जाग. 23.12.2009) जबकि अन्यों को सरकारी रिसर्च फैलोशिप पाने के लिए ये परीक्षाएँ पास करना अनिवार्य है. (12) उच्च प्रोफेशनल कोर्सों में पढ़ने वाले अल्ससंखयक विद्यार्थियों की फीस सरकार देगी. (13) स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं के कोचिंग के लिए फीस भी सरकार देगी। ये सुविधाएँ सामान्य नागरिकों को नहीं है.

4 -राजनैतिक विशेषाधिकार 

जिनके  पूर्वजों  ने  भारत  के लिए   सर्वस्व  लुटा  दिया और आज  भी भारत को अपनी  माता   मानते है .इस सेकुलर सरकार   उनके अधिकार  छीन  कर  मुसलमानों  को  देती रहती  , जबकि  मुसलमान  हमेशा  भारत  विरोधी  कामों में  लगे रहते .फिर भी वोटों  के लिए सरकारें  मुसलमानों  खजाने  खोल देती है .जैसे ,

(1) अल्पसंखयकों के नाम पर, विशेषकर मुसलमानों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया और उनके लिए 11वीं पंचवर्षीया योजना में 15 प्रतिशत बजट रखा गया. (2) 2004 में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने आतंकवाद में फंसे मुसलमानों को बचाने के लिए पोटा कानून निरस्त कर दिया जिसके फलस्वरूप देश में आतंकवाद बढ़ रहा है. (3) मुस्लिम पर्सनल कानूनों और शरियत कोर्टों का समर्थन किया. (4) 13 दिसम्बर 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजलखां को फांसी की सजा आज तक लटकी हुई है. (5) 17 दिसम्बर 2006 को नेशनल डवलपमेंट काउंसिल की मीटिंग में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि ”भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।” शायद इसीलिए उन्हें रोजगार, ऋण, शिक्षा आदि में विशेष सुविधाऐं दी जा रही हैं. (6) सरकार बंगला देशी मुस्लिमों घुसपैठियों को निकालने में उत्साहहीन है जबकि वे भारत के इस्लामीकरण के लिए यहाँ बस रहे हैं

5-आर्थिक सहायता 

एक  तरफ तो मुसलमान  आबादी  बढ़ाने  में लगे रहते है .और दूसरी तरफ  अपनी गरीबी का  बहाना   बना कर  सरकार से आर्थिक   मदद  माँगते रहते  हैं . और इनकी  मांगे  कम होने की जगह  और बढती  जाती  हैं .और ऐसतब तक होता रहेगा जब तक भारत इस्लामी देश  नहीं बन जाता .इसलिए  मुसलमान  अपनी गरीबी और पिछड़ेपन का ढोंग  करके सदा  रोते रहते हैं .और सरकार ने उनकी इसी राक्षसी  भूक  को मिटाने के लिए  कई  कमेटियां  बना रखी  है ,जैसे ,

(1) सच्चर कमेटी द्वारा मुस्लिमों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए 5460 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया; (2) उनके लिए सस्ती ब्याज दर पर ऋण देने के लिए एक कारपोरेशन बनाया गया, (3) सार्वजनिक क्षेत्र में उदारता बरतें। इस अभियान की निगरानी के लिए एक मोनीटरिंग कमेटी’ काम करेगी।” (दैनिक नव ज्योति, 4/1/2006)। (4) अल्पसंखयक विद्यार्थियों को माइनोरिटी डवलपमेंट एण्ड फाइनेंस कारपो. से 3 प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है। (5) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 प्रतिशत आवंटन मुसलमानों के लिए किया गया। (वही. बृ. पृ. 32) (6) 13 अगस्त 2006 को सरकार ने लोक सभा में बतलाया कि मुस्लिम प्रभाव वाले 90 जिलों और 338 शहरों में मुसलमानों के लिए विशेष विकास फण्ड का प्रावधान किया गया है। (वही, बृ. 48, पृ. 33)।

अतः धर्म निरपेक्ष देश की सरकार धर्म के आधार पर एक वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए सभी उचित व अनुचित तरीके अपना रही हैं. इसीलिए उच्चतम न्यायालय ने सावधान करते हुए 18 अगस्त 2005 को कहा- ”राजनैतिक या सामाजिक अधिकारों में कमी को आधार बनाकर भारतीय समाज में अल्पसंखयक समूहों को निर्धारित करने और उसे मानने की प्रवृत्ति पांथिक हुई तो भारत जैसे बहुभाषी, बहुपांथिक देश में इसका कोई अन्त होने वालो नहीं। एक समुदाय द्वारा विशेषाधिकारों की मांग दूसरे समुदाय को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करेगी जिससे परस्पर संघर्ष और झगड़े बढ़ेगें।” परन्तु वोटों की लालची और सत्ता की प्यासी सेक्यूलर सरकारें इन चेतावनियों की परवाह नहीं करती हैं।

सबसे अधिक पीड़ा की बात तो यह है कि जिस भारत की स्वाधीनता व अखंडता के लिए हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया, लाखों योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किए और देश को इस्लामीकरण से बचाया आज जिन नेताओं को देश की रक्षा का उत्तरदायित्व सौंपा गया है वे ही स्वार्थवश कुछ दिन राज करने के लिए भारत के इस्लामीकरण में निर्लज्जता के साथ सहयोग दे रहे हैं। वे उन करोड़ों देशभक्तों के साथ विश्वासघात कर हरे हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान किए। कांग्रेस एवं अन्य सेक्यूलर पार्टियों का मुस्लिमों के सामने आत्म समर्पण एवं वोट बैंक की राजनीति करना देश की भावी स्वाधीनता के लिए चिन्ता का विषय है। सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण सारा देश इस्लामी जिहाद और आतंकवाद से पीड़ित है। क्या देश की सेक्यूलर पार्टियों को दिखाई नहीं देता कि पाकिस्तान एवं भारत के मुसलमान शेष भारत में इस्लामी राज्य स्थापित करना चाहते हैं? इनका मुस्लिम तुष्टीकरण करना उन लाखों करोड़ों देशभक्तों की शहादत का अपमान है जिन्होंने भारत को इस्लामी राज्य बनने से बचाया.

हमें  पूर्ण  विश्वास  है कि लेख पूरा  पढ़ने बाद  यदि आप  भारत को इस्लामी देश   होने से बचाना   हैं  , तो सेकुलरिज्म  का पाखण्ड त्याग कर  देश  भक्त  बनिए , और  हमारे अभियान  का  साथ  दीजिये .

http://www.hinduwritersforum.org/hamare-prakasan/jihada-kya-aura-kyom/adhyaya–9-jihada-kyom