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इस बात  से कोई  भी व्यक्ति इंकार नहीं   कर सकता कि सत्य को   सदा के लिए दबाना ,या मिटाना  असम्भव   है .और एक न एक दिन  सत्य   खुद  लोगों के सामने  प्रकट  हो जाता है , जिसे  लोगोंको स्वीकार  पड़ना  है .यह  बात  इस्लाम  के ऊपर  भी  लागु  होती  है . मुसलमान मुहम्मद  साहब को अल्लाह का रसूल  और  इस्लाम  का प्रवर्तक  मानते हैं.क्योंकि  23  साल  की    आयु में  सन 592 ईस्वी   में   मुहम्मद  पर  कुरान  की पहली आयत  नाजिल  हुई थी , उसी  दिन  से इस्लाम    का जन्म हुआ  , और  इसी  इस्लाम को  मनवाने के लिए मुहम्मद साहब  और उनके बाद   उनके  अनुयायी  जिहादियों  ने करोड़ों  निर्दोष  लोगों  को  मौत के घाट   उतार दिया . और  कई  देश   वीरान  कर  दिए .
यद्यपि  मुहम्मद साहब को अल्लाह का  सबसे  प्यारा  रसूल  कहा  जाता है ,लेकिन   कई  कई पत्नियां  होने पर भी  मुहम्मद साहब   के कोई  पुत्र    नहीं  हुआ . एक लड़का एक  दासी  मरिया  से हुआ था वह  भी अल्पायु  में  मर गया था .वास्तव  में  मुहम्मद साहब  वंश  उनकी  पुत्री फातिमा  से  चला    है ,जिसकी शादी  हजरत  अली  से हुई थी . इस  तरह  अली  और फातिमा   से मुहम्मद  साहब की वंशावली   वर्त्तमान  काल तक  चल  रही  है , 
अब  यदि  कोई   कहे कि उन्हीं  रसूल  के वंशज  बिना किसी  दवाब के   वेदों  पर आस्था  रखते हैं ,गायत्री  मन्त्र  पढ़ते हैं  .और  वैदिक  धर्म   ग्रन्थ   छह  दर्शनों  पर विश्वास  रखते हैं  , यही नहीं  भगवान  बुद्ध  को  भी अवतार  मानते हैं  . तो  क्या  आप  विश्वास   करेंगे ?  लेकिन  यह  शतप्रतिशत   सत्य  है , इसलिए  इस  लेख  को ध्यान  से पढ़िए ,

1- निजारी इस्माइली
यह तो  सभी  जानते हैं कि   मुसलमान  सुन्नी  और शिया दो  मुख्य  फिरकों  में  बटे  हुए  हैं , और शिया  अली  को अपना प्रथम  इमाम  मानते है .अली और फातिमा के छोटे  पुत्र  इमाम  हुसैन  को  परिवार  सहित  करबला  में  शहीद   करा  दिया गया था . केवन उनका एक बीमार पुत्र   बचा   रहा  , जिसका नाम  ” जाफर  सादिक ” था , जिसे  शिया  अपना  चौथा  इमाम  मानते हैं .कालान्तर में  उन्हीं  अनुयाइयों  ने   अलग   संप्रदाय  बना  लिया   जिसका  नाम  “अन  निजारियून –  النزاريون‎  “  है .जिनको  ” इस्माइलिया – اسماعیلیه‎  “  भी  कहा  जाता  है .जो  “शाह करीम  अल  हुसैनी चौथे   – ”  को अपना  इमाम  और धार्मिक  गुरु  मानते है ,   शाह  करीम   का जन्म  अली  और फातिमा    की  49  वीं   पीढी  में  हुआ   है .इनकी यह  वंशावली  तब से  आज  तक   अटूट  रूप से चली  आ  रही  है .इस्माइलिया   दुनिया के  25 में फैले हुए  हैं , और  इनकी संख्या करीब  डेढ़  करोड़  ( 15 million  )  है .इनकी मान्यता है कि   अल्लाह  बिना  इमाम  को दुनियां  को नहीं   रखता ,यानि हर  काल  में  एक इमाम  मौजूद  रहता है , जो लोगों का मार्गदर्शन   करता  रहता  है .इन  लोगों  की मान्यताएं  सुन्नी  और  शियायों  से बिलकुल   अलग  हैं .

2–किसी  भी दिशा में  नमाज 
निजारी इस्माइली  इबादत  के लिए   मस्जिद  की जगह  जमातखाने  में  में  जाते हैं ,इनके वर्त्तमान   इमाम  आगाखान करीम  शाह  अल  हुसैनी  और उनके भाई अयमान  मुहम्मद   ने अरबों  रुपये खर्च करके  विश्व  के कई  शहरों  में भव्य और सर्वसुविधा युक्त आधुनिक   जमातखाने  बनवा  दिए  है .जिनमे लोग इबादत  करते  हैं . लेकिन  निजारी   दूसरे  मुसलमानों  की तरह  मक्का के  काबा की  तरफ  मुंह  करके इबादत  नहीं  करते  , बल्कि   दीवार के सहारे  खड़े होकर  किसी तरफ  मुंह  करके   प्रार्थना  करते हैं .इनका  कहना है कि  अल्लाह   तो  सर्वव्यापी   है , जैसा  खुद  कुरान में  कहा   गया है ,
” पूरब  और पश्चिम  अल्लाह के ही हैं ,तो तुम जिस  तरफ ही रुख  करोगे ,उसी  तरफ   ही अल्लाह का रुख  होगा . निश्चय ही अल्लाह   बड़े  विस्तार  वाला  और  सब  कुछ  जानने  वाला  है 
” सूरा – बकरा  2 :115
इसलिए  पश्चिम   में स्थित  मक्का  के काबा की तरफ मुंह  करके  नमाज  पढ़ने की कोई जरुरत नहीं  है .

3-अली  अल्लाह  का अवतार 
निजारी  इस्माइली मानते   हैं  कि  अल्लाह  इमाम  के रूप में अवतार (incaarnation )     लेता  है . और अली अल्लाह के अवतार थे . निजारी  यह  भी आरोप  लगाते हैं ,कि   कुरान  में  इस बात का  उल्लेख   था ,लेकिन सुन्नियों ने उन आयतों  गायब कर दिया था ,जिनमे  अली  को अल्लाह का अवतार  बताया गया था .  आज  भी निजारी अली  को अल्लाह का अवतार  मानते  है  और उसकी प्रार्थना  करते हैं , ऐसी  एक  सिन्धी – गुजराती  मिश्रित  भाषा   की प्रार्थना  का नमूना   देखिये .
” हक़ तू ,पाक तू बादशाह मेहरबान   भी ,या अली तू  ही  तू .1 
रब तू ,रहमान  तू ,या  अली अव्वल आखिर  काजी , या अली तू  ही तू .2 
ते उपाया  निपाया  सिरजनहार  या अली तू  ही तू .3 
जल  मूल  मंडलाधार  ना  या अली  हुकुम  तेरा या अली तू  ही तू .4 
तेरी दोस्ती  में बोलिया  पीर शम्श  बंदा  तेरा या अली तू  ही तू .5 
(पीर शम्श  कलंदर  दरवेश )
4-इस्माइली  कलमा 

निजारी  इस्माइली  सपष्ट  रूप से मुहम्मद  साहब  के चचेरे  भाई अली  को ही अल्लाह  का अवतार  मानते हैं  .  और इनका  कलमा   इस प्रकार  है ,
“अली अमीरुल  मोमनीन , अलीयुल्लाह “
“عليٌّ امير المومنين عليُ الله  “
अर्थात – ईमान वालों  के  नायक  अली   अल्लाह  .और  हर दुआ  के बाद  यह  कहते  हैं
“अलीयुल्लाह –  عليُ الله   ”   यानि अली   अल्लाह  है .(The Ali, the God)
http://www.mostmerciful.com/dua-one.htm

5-इस्माइली  दुआ 

ला फतह इल्ला  अली व् ल सैफ अल जुल्फिकार “
“لا فتح الّا علي و  سيف الذوالفقار  “
“तवस्सिलू  इन्दल  मसाईब बिल  मौला अल  करीम हैदिरिल  मौजूद शाह  करीम  अल हुसैनी “
” توصّلو عند المصايب بالمولا كم حيدر الموجود شاه كريم الحسينِ     “
अर्थ -अली  जैसा कोई  नायक नहीं  , और जुल्फिकार जैसी  कोई तलवार नहीं , इसलिए  मुसीबत के समय  मौजूदा  इमाम  शाह  करीम  अल हुसैनी   से मदद  मांगो .इसके अलावा  एक दुसरे का  अभिवादन  करते समय  कहते हैं ,
“شاه جو ديدار “(शाह  जो दीदार )अर्थात  शाह के दर्शन , तात्पर्य आपको इमाम  के दर्शन   हों 

6-रसूल  के वंशज पीर  सय्यद  सदरुद्दीन 
इसी  तरह   इमाम जाफर  सादिक  की 21  पीढ़ी  में यानि रसूल  के वंश  में   सय्यद  सदरुद्दीन   का  जन्म  हुआ  जो ईरान से  हिजरत   करके  भारत  के गुजरात  प्रान्त  में आकर बस गए  ,उस समय   इमाम कासिम  शाह (  bet. 1310 C.E. and 1370 C.E.)   )  की इमामत  थी . बाद में इमाम  इस्लाम  शाह ( 30th Imam  ) ने   सदरुद्दीन   को   ” पीर  ” की पदवी  देकर सम्मान  प्रदान  किया .सदरुद्दीन    वैदिक  धर्म  से  इतने प्रभावित  हुए कि उन्होंने  जितने भी ग्रंथ  लिखे  हैं  , सभी  वैदिक  धर्म  पर आस्था प्रकट  की है .इनमे से कुछ के नाम  इस प्रकार  हैं .

7-इस्माइली  ज्ञान 
इस्माइली धार्मिक  पुस्तकों  को ” ज्ञान ”   ( उर्दू – گنان  )  गुजराती में “ गिनान-ગિનાન  “कहा  जाता  है .ज्ञान  का अर्थ Knoledge है  .इनकी संख्या 250  से अधिक  बतायी  जाती  है .इन में अल्लाह और हजरत  अली  की स्तुति ,चरित्र शिक्षा ,रीति  रिवाज  सम्बन्धी  किताबें  , और  नबियों  की कथाएं वर्णित हैं .आश्चर्य  की  बात है कि  इस्माइली  अथर्ववेद   को भी अपनी ज्ञान  की किताबों  में शामिल  करते हैं .
8-रचनाएँ ग्रन्थ 

इमाम जाफर सादिक  की 20 वीं  पीढ़ी  में पैदा हुए “ पीर शिहाबुद्दीन   ”  ने ज्ञान  की  इन  किताबों   का उल्लेख  किया  है ,
1.बोध निरंजन -इसमे अल्लाह  के  वास्तविक  स्वरूप  और उसे   प्राप्त  करने की  विधि बतायी  गयी है.
2.  आराध -इसमे अल्लाह और अली की स्तुति  दी गयी है .
3. विनोद -इसमे अली  की महानता  और सृष्टि   की रचना  के बारे में  बताया  है
4. गायंत्री -यह   हिन्दुओं   का गायत्री  मन्त्र  ही  है ,
5. अथरवेद -अर्थात  अथर्ववेद   जो चौथा  वेद   है .  इस्माइली  इसे  भी अल्लाह की  किताब मानते  हैं
 6.  सुरत  समाचार -इसमे   उदाहरण  देकर  बाले और  बुरे     लोगों  की तुलना  करके  बताया है कि  भले लोग बहुत कम  होते हैं  ,  लेकिन   हमें उनका ही साथ देना चाहिए .
  6.गिरभावली -इसमे   शंकर पार्वती   की  वार्तालाप   के रूप में  संसार की रचना के  बारे में  बताया गया है.
7.बुद्ध  अवतार-इसमे विष्णु  के  नौवें  अवतार  भगवान  बुद्ध   का  वर्णन  है .
8. दस अवतार –इसमे विष्णु  के   दस  अवतारों  के  बाद  हजरत  अली  के अवतार  होने  का  प्रमाण
9.बावन घटी -इसमे  52  दोहों  में  फरिश्तों  और अल्लाह   के   बीच  सवाल  जवाब  के रूप में  मनुष्यों    में अंतर के बारे में  बताया है .
10. खट  निर्णय -सृष्टि  और  सतपंथ   के   6  महा पुरुषों     की जानकारी .
11.खट दरसन -वैदिक  धर्म  के छह  दर्शन  ग्रन्थ ,  जिन्हें  सभी  हिन्दू  मानते हैं  .
12. बावन बोध -इसमे  52  चेतावनियाँ   और  100  प्रकार  की रस्मों  के बारे में बताया है .
13. स्लोको ( श्लोक )– नीति  और  सदाचार के  बारे में छोटी  छोटी   कवितायेँ
14.दुआ- कुरान की  आयतों   के साथ  अल्लाह और  इमामों  की स्तुति ,के  छंद और  सभी इमामों  और पीरों  का  स्मरण

10-सत  पंथ 
फारसी  किताब ” तवारीख  ए पीर “  के अनुसार  इस्लाम  क उदय के सात सौ साल  बाद मुहम्मद  साहब  के वंशज  और इमाम  जाफर  सादिक   की  20  वीं  पीढ़ी  में जन्मे “सय्यद शिहाबुद्दीन  -”  ( سيّد شهاب الدين  ) भारत में  आये  थे . और गुजरात में  बस गए  थे .यह  पीर “सदरुद्दीन  हुसैनी ” के  पिता  थे .इन्होने  भारत में  रह  कर  वैदिक हिन्दू धर्म  का गहन  अध्यन  किया . और  जब  उन्हें   वेदी धर्म   की सत्यता   का  प्रमाण  मिल  गया  तो  , उन्होंने  इस्माइली  फिरके में ” सतपंथ ”  नामका  अलग  संप्रदाय   बना दिया .इन्हीं   के  पुत्र  ” पीर  सदरुद्दीन ( 1290-1367 )  ” थे . जो इमाम जाफर  सादिक   की 21  वीं   पीढ़ी में पैदा  हुए . इन्होने पूरे पंजाब  , सिंध   और गुजरात  में सतपंथ   का  प्रसार किया .जिसका  अर्थ  Path  of Truth  होता  है .सतपन्थियों   के  अनुयाइयों  को  ” मुरीद ” यानि शिष्य  कहा  जाता  है . सत्पंथी    मानते हैं कि  इमाम    एक  बर्तन  की  तरह  होता  है ,जिसमे अल्लाह का नूर  भरा  होता है .और  इमाम को उसके शब्द  यानि फरमान   से पहचाना  जा  सकता  है .इमाम  के   दो  स्वरूप  होते  हैं  , बातिनी  यानी  परोक्ष (esoteric )   और   जाहिरी    यानी  अपरोक्ष (exoteric  ).सतपंथी इमाम  के प्रत्यक्ष  दर्शन   को ” नूरानी  दीदार-vision of light  ”  कहते  हैं .

11-सत्यप्रकाश 
निजारी  इस्माइली   पीर   ने “ सत्यप्रकाश  (The True Light) )” नामकी  एक  पुस्तक  गुजराती  भाषा में   लिखी  थी , जिसका दूसरा  संसकरण  भी  प्रकाशित  हो गया  है . इसमे   निजारी  पंथ  के बारे में  पूरी  जानकारी  दी गयी  है . आप  इस लिंक से किताब  डाउन  लोड  कर सकते  हैं ,
ખુબ સંતોષની અનુભૂતિ સાથે મને કહેતાં અત્યંત ખુશી થાય છે કે અત્યંત લોકપ્રિય ગણાતી સત્ય પ્રકાશ નામની પુસ્તકની બીજી આવૃત્તિ બહાર પાડવામાં આવેલ છે. 
गुजराती  में इसके विज्ञापन का अर्थ ,खूब संतोष  की अनुभूति  के साथ ,अत्यंत  ख़ुशी की  बात है कि अत्यंत  लोकप्रिय  गिनी   जाने वाली “सत्यप्रकाश  ”  नामक  पुस्तक  की  दूसरी  आवृति   प्रकाशित  हो गयी  है ,
http://www.realpatidar.com/a/series40

इस  लेख  में दिए  अकाट्य  प्रमाणों  के आधार पर  ,हम  उन जिहादी   मानसिकता   वाले  मुसलमानों   से  पूछना  चाहते हैं  ,जो वैदिक  हिन्दू  धर्म  मानने  वालों  को  काफ़िर और  मुशरिक   कहते  हैं . ऐसे लोग  बताएं कि  जब  मुहम्मद  साहब के वंशज   वेद  को प्रमाण  मानते हैं , और गायत्री  मन्त्र  को पवित्र  मान कर  जप  करते हैं  , और  अल्लाह  का अवतार   भी  मानते हैं  , तो  क्या मुसलमान    उनको  काफ़िर  और  मुशरिक  कहने की हिम्मत  करेंगे ? और   फिर भी   कोई  मुसलमान  ऐसा  करेगा  तो उसकी   सभी  नमाजें   बेकार  हो जाएँगी . क्योंकि  मुसलमान  नमाज  में   दरुदे  इब्राहीम  भी पढ़ते  हैं , जिसमे   मुहम्मद  साहब  के  वंशजों यानि ” आले मुहम्मद ”  के लिए बरकत की दुआ और अल्लाह  की दोस्ती प्राप्त  करने की दुआ  की जाती है .अर्थात जो भी  रसूल  की ” आल ” यानि  वंशजों  की  बुराई  करेगा  जहन्नम  में  जायेगा .इसलिए सभी मुसलमान  सावधान  रहे .
हम तो  मुहम्मद  साहब के ऐसे  महान  वंशजों   को   सादर    प्रणाम   करते  हैं 
   जो  पाठक  वैदिक  हिन्दू  धर्म  के  किसी भी  संगठन  के सदस्य  हों  या    कोई  वेबसाईट  चलाते  हों  वह इस  लेख को  हर जगह  पहुंचा  दें .ताकि  .  कट्टर  मुल्लों   का  हमेशा के लिए  मुंह  बंद   हो  जाये .

http://ismaili.net/heritage/node/30522