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2वेदों को दूषित करके सनातनी व् वैदिक परंपरा को दूषित करने का एक और इस्लामिक षड्यंत्र का पर्दाफाश :

सौजन्य से – रोहित कुमार

जिस प्रकार हम जानते है इस्लाम पिछले 1200 सालो से भारत में गजवा हिन्द(भारत में इस्लामिक राज्य) के सपने देख रहा है, जब 711 ई में मुहम्मद बिन कासिम भारत आया था तो उसने देश में लुट और बलात्कार की इस्लामिक निति का अनुसरण किया, यही काम मुहम्मद गौरी और महमूद गजनवी ने किया, 300 साल के जबरदस्त इस्लामिक आक्रमणों के बाद भी भारत में नाममात्र के मुसलमान थे, इसके बाद भारत में दिल्ली पर कुछ मुस्लिम सल्तनत और फिर मुगलों का राज आया पर इनमे से कोई भी ऐसा सुल्तान नहीं था जिसके राज्य में किसी हिन्दू राजा ने प्रतिशोध या विरोध न किया हो, एक समय में मराठा शासक शिवाजी महाराज ने तो मुग़ल सल्तनत को उखाड़ कर दिल्ली पर मराठो का राज्य कायम किया था,

ऐसे में जब मुगलों व् मुसलमानो को लगने लगा की शक्ति से वे हिन्दुओ को ख़त्म नहीं कर सकते तो उन्होंने भारत को सांस्कृतिक व् धार्मिक आधार पर तोड़ने के षड्यंत्र रचे, इन षड्यंत्रों में हिन्दुओ में फुट डालना वेदों, धार्मिक पुस्तकों, ग्रंथो को भ्रष्ट करके धर्म को समाप्त करना प्रमुख था

ऐसे ही एक षड्यंत्र का पर्दाफाश हम आपके सामने कर रहे है जिसमे मुसलमान ब्लॉगर और विद्वान(जाकिर नायक) अक्सर वेदों के मंत्रो का गलत अनुवाद करके भारतीय जनमानस को पथभ्रष्ट करके इस्लामिक की और लाने का षड्यंत्र रचा,

वेदों का गलत अनुवाद

1) पहला गलत अनुवाद –

Rigveda (10/85/13) declares, “On the occasion of a girl’s marriage oxen and cows are slaughtered.”
सूर्याया वहतुः परागात सविता यमवास्र्जत |
अघासुहन्यन्ते गावो.अर्जुन्योः पर्युह्यते ||

इस मन्त्र का सही अनुवाद-

पतिगृह में जाते समय पिता सूर्य ने प्रेम से दिया हुआ सूर्या का गौ आदि धन, पहले हे भेज दिया था..
अघासु गावः हन्यते = मघा नक्षत्र में बिदाई में दी गयी गाय को डंडे से हांका जाता है..अजुन्यो परी उहदते= और फाल्गुनी नक्षत्र में पति के घर पहुचाया जाता है..

2) दूसरा गलत अनुवाद :

Rig Veda (RV: VIII.43.11) Agni is described as “fed on ox and cow”
suggesting that cattle were sacrificed and roasted in fire.

Rigveda 8.43.11 का असली अनुवाद ये है-

यश अग्नि सब धन्यो को रस से सिंचित करती है..
यह अग्नि हे सूर्या और चन्द्र का रूप धारण करके धान्यो और वनस्पतियों में रस भरता है
इस प्रकार उन्हें रमणीय बनता है..
ऐसे अग्नि को सब समिधाओ से प्रज्वलित करते हैं

3) तीसरा गलत अनुवाद:

पिबा सोममभि यमुग्र तर्द ऊर्वं गव्यं महि गर्णानैन्द्र |
वि यो धर्ष्णो वधिषो वज्रहस्त विश्वा वर्त्रममित्रिया शवोभिः ||

गलत अनुवाद – Rigveda (6/17/1) states that “Indra used to eat the meat of cow, calf, horse
and buffalo.”

असली अनुवाद/Original Translation-

जो मनुष्य ब्रह्मचर्य,विद्या और सत्कर्म से दुष्टों को दूर करके श्रेष्ठो को स्वीकार करते हैं वे शत्रुओ का नाश करते हैं..

वेदों का गलत मन्त्र और सूक्त

1) पहला गलत मन्त्र

जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है ,जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्छेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ मे भेज दे ।
– ऋग्वेद 10,16,92

एक और झूठ, ऋग्वेद के दशम मंडल के 16वे सूक्त में केवल 14 मन्त्र है,

2) दूसरा गलत  मन्त्र –

इंद्रा कहते है ,इंद्राणी के द्वारा प्रेरित किए गए यागिक लोग 15-20 सांड काटते और पकाते है । मै उन्हे खाकर मोटा होता हू । -ऋग्वेद 10,83,14

ऋग्वेद के दशम मंडलम के त्र्यशीएतितम सूक्त में सिर्फ १ से लेकर ७ मंत्र हैं १४वें मंत्र का कही उल्लेख नहीं है..