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4इस्लाम की मान्यताएं अन्तर्विरोध से भरी पड़ हैं .फिर भी इन मान्यताओं के आधार पर इस्लाम सभी गैर मुस्लिमों को पापी और अपराधी मानकर क़त्ल के योग्य समझता है .क्योंकि इस्लाम की नजर में ,हत्या ,बलात्कार , चोरी , जनसंहार जैसे अपराध छोटे और क्षमा योग्य है . परन्तु “ शिर्क ” को सबसे बड़ा और ऐसा अपराध माना गया है ,जिसे कभी माफ़ नहीं किया जा सकता है .लेकिन बड़ी विचित्र बात है कि रसूल (मुहम्मद ) ने हदीसों में जिस कार्य को शिर्क और महापाप बताया है .और उसी कार्य को अल्लाह बार बार करता है .इस विषय को स्पष्ट करने के लिए हमें शिर्क की परिभाषा समझना जरुरी है ,कुरान के हिंदी अनुवाद के अंत में जो “पारिभाषिक शब्दावली “ दी है उसमे “शिर्क ” की व्याख्या दी गयी है ,हिंदी कुरान पारिभाषिक शब्द शिर्क पेज 1245.मकतबा . अल हसनात रामपुर 

1-शिर्क क्या है ?
इस्लामी परिभाषा में अल्लाह की सत्ता में किसी को शामिल करना (To associate anyone with Allah Taala) शिर्क شرك‎  कहा जाता है .शिर्क को बहुदेववाद (Polytheism  ) का पर्याय माना जाता है . जो एक अक्षम्य अपराध है .और शिर्क करने वालों को अरबी बहुवचन में ” मुश्रिकून مشركون” कहा जाता है .कुरान के अनुसार जो भी व्यक्ति मुशरिक रहते हुए मर जायेगा , वह सदा के लिए जहन्नम की आग में जलता रहेगा .हदीसों में शिर्क के कई रूप बताये गए हैं .यहांतक अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के नाम पर कसम (Swearig )खाना या सौगंध ( Oath ) लेना भी शिर्क माना गया है .अरब के मुसलमान बात बात पर अपने बाप दादा और काबा की कसम खाया करते थे . मुहम्मद साहब ने इसे भी शिर्क बताया .और सिर्फ अल्लाह के नाम की कसम खाने का हुक्म दिया . जैसा इन हदीसों में कहा गया है .

2-सिर्फ अल्लाह की कसम खाओ 
कुरान और हदीसों में शपथ और कसम के “हलफ حلف”और “कसम قسم” शब्द प्रयोग किये गए हैं .इन हदीसों में अल्लाह के अलावा किसी वस्तू या व्यक्ति की कसम खाने को शिर्क माना गया है ,

1.बाप दादा की कसम 

उमर ने कहा कि कुरैश के लोग अकसर अपने बाप दादाओं की कसम खाया करते थे ,रसूल ने उनको सिर्फ अल्लाह की कसम खाने को कहा . जो भी अल्लाह के सिवा अपने बाप दादा की कसम खाता है ,वह मुशरिक है .बुखारी -जिल्द 5 किताब 58 हदीस 177

2.-काबा की कसम 
“सअद इब्न उदैबा ने कहा कि एक व्यक्ति ने उमर सामने कहा “काबा की कसम ” उमर यह बात रसूल को बताई तो रसूल बोले ,जो भी व्यक्ति अल्लाह के अलावा किसी और चीज की कसम खाता है ,वह मुशरिक है ” 

عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ قَالَ  سَمِعَ ابْنُ عُمَرَ رَجُلًا يَحْلِفُ لَا وَالْكَعْبَةِ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عُمَرَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ حَلَفَ بِغَيْرِ اللَّهِ فَقَدْ أَشْرَكَ “
सुन्नन अबी दाऊद -किताब 21 हदीस 2151

( इस हदीस में “हलफ حَلَفَ” शब्द आया है . जिसका अर्थ शपथ Swear होता है )

3-.सिर्फ अल्लाह की कसम खाओ 

“अब्दुल्लाह ने कहा कि रसूल ने कहा है कि सिर्फ अल्लाह की कसम खाया करो . और अल्लाह के सिवा किसी की कसम खाना शिर्क है “
बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 844
इन हदीसों से सिद्ध होता है कि अल्लाह के अतिरिक्त किसी की कसम खाना शिर्क है , चाहे कोई अल्लाह के घर काबा की कसम भी खाए वह मुशरिक माना जायेगा , और मर कर जहन्नम जायेगा .
लेकिन जब कुरान में अनेकों बार खुद अल्लाह ही ऐसी चीजों की कसमें खाता है , जिनकी कसमें खाना हदीसों में शिर्क बताया गया ,तो इस्लाम के शिर्क की परिभाषा में शंका होती है ,कुरान से ऐसे कुछ सबूत दिए जा रहे हैं
4-अल्लाह किसकी कसमें खाता है ?
अक्सर देखा गया है कि जब किसी के पास कोई पुख्ता प्रमाण नहीं होते , तो वह अपनी सत्यता साबित करने के लिए कसम खाता है .इसीलिए अल्लाह ने अपनी बातों सही साबित करने के लिए हर चीज की कसमें खा डाली हैं , जिनके कुछ नमूने देखिये .
1.चाँद की कसम 
चाँद का इस्लाम में बहुत महत्त्व है ,चाँद देख कर ही रोज खोला जाता , ईद होती है , इसलिए अल्लाह ने चाँद की कसम खायी होगी ,और कहा ,
कसम है चाँद की “सूरा -मुदस्सिर -74:32
कसम है चाँद की ,जब वह छुप जाये “सूरा -शम्श 91:2 
2.रात की कसम 
सब जानते हैं कि चोरों को हमेशा घनी काली अँधेरी रात अच्छी लगती है , शायद इसीलिए अल्लाह ने रात की कसम खायी होगी ,और कहा ,
कसम है रात की जब वह पूरी तरह से छा जाये “सूरा -लैल 92:1
3.देखी अनदेखी चीजों की कसम 
इस आयत से साफ सिद्ध होता है कि मुसलमानों का अल्लाह सर्वद्रष्टा नहीं बल्कि कोई अरबी व्यक्ति था , वर्ना वह ऐसी कसम नहीं खाता ,
मैं खाता हूँ उन चीजों की ,जो दिखाई देती है ,और उन चीजों की भी कसम खाता हूँ जो दिखाई नहीं देती “सूरा -हक्का 68:38-39 
4.कुरान की कसम 
जब मुसलमान कुरान की आयतों को अल्लाह के वचन कहते हैं तो अल्लाह को खुद अपनी कही बातों की कसम खाने की क्या जरुरत पड़ गई , जो ऐसी कसम खा डाली .
कसम है इस नसीहत भरे कुरान की ” सूरा -साद 38:1
कसम है कुरान मजीद की “सूरा -काफ -50:1
कसम है इस लिखी हुई किताब की “सूरा -अत तूर -52:2
5-कलम की कसम 
मुसलमानों का दावा है कि मुहम्मद अनपढ़ थे , उन्हें संबोधित करके अल्लाह के कलम की कसम क्यों खायी , और यह क्यों कहा
कसम है उस कलम की , जिस से तुम ( कुरान ) लिखते हो सूरा -कलम 68:1
( चूँकि अल्लाह ने मुहम्मद को संबोधित करके यह कसम खायी है ,इस से सिद्ध होता है मुहम्मद अनपढ़ नहीं थे ,वह लिख पढ़ सकते थे )
6.मुहम्मद के जीवन की कसम 
अगर मुहम्मद सचमुच अल्लाह के प्यारे रसूल थे , तो अल्लाह के खुद अपनी कसम क्यों नहीं खायी ,
“हे मुहम्मद तेरे जीवन की कसम है “सूरा -अल हिज्र 15:72
7.मक्का की कसम 
इस्लाम के परस्पर विरोधी नियमों का इस से बड़ा प्रमाण और कौन हो सकता कि एक् तरफ रसूल काबा की कसम खाने को भी शिर्क बताता है . और दूसरी तरफ खुद अल्लाह मक्का जैसे उजाड़ वीरान शहर की कसम खा रहा है , और कहता है
“नहीं ! मैं उस नगर (मक्का ) की कसम खाता हूँ ,तू ( मुहम्मद ) जिस नगर में रहता है ” सूरा -अल बलद 90:1-2
“لَا أُقْسِمُ بِهَٰذَا الْبَلَدِ  “90:1
“وَأَنْتَ حِلٌّ بِهَٰذَا الْبَلَدِ  “90:2
( इस आयत की तफ़सीर में बताया है कि ,मक्का नगर नगर की भूमि बंजर और अनउपजाऊ है ,और न वहां पशुओं को चराने के लिए हरे भरे मैदान हैं .इसलिए मक्का के इन्हीं गुणों कारण अल्लाह ने मक्का नगर की कसम खायी है .)
अल्लाह के द्वारा खायी गयी कसमों के बारे में पूरे जानकारी के लिए देखिये यह विडियो 
http://www.answeringmuslims.com/2011/10/does-allah-commit-shirk.html

हम इस लेख के माध्यम से उन मुल्लों से पूछना चाहते हैं ,जो शिर्क की अंतरविरोधी , बेतुकी परिभाषा के आधार पर हिन्दू और ईसाइयों को मुशरिक बताकर उन पर जिहाद करते हैं .वह मुल्ले बताएं कि हदीस और कुरान के इन सबूतों के आधार पर हम अल्लाह को ही सबसे बड़ा मुशरिक क्यों नहीं कहें ?यातो हदीस झूठी है या कुरान झूठी है ?अब यदि कोई किसी गैर मुस्लिम को मुशरिक कह कर अपमानित करेगा तो सब मिल कर अल्लाह को ही सबसे बड़ा मुशरिक कहने लगेंगे .

http://wikiislam.net/wiki/Allah_the_Polytheist