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फ़्रांस विरुद्ध का रक्त रंजित जिहाद

(७३२ से ७४० तक)

साभार: Vikramadity Dalvi

विशेष सुचना: वाचको से विनती है की लेख माला से जुड़े चित्र अवश्य खोल के देखे!

१८५७ का युद्ध अंग्रेजो के विरुद्ध भारत में लड़ा गया ये हम सब जानते है! इस युद्ध काल में अंग्रजो के विरुद्ध जो घोषणा सारे भारत में गूंज उठी वो थी….. “मारो फिरंगी को”! इतिहास का तनिक अध्ययन करने पर हमे ये ज्ञात होता है की, पुर्तुगालीयो, फ़्रांसिसी और सारे यूरोपियन्स को उस समय और आज भी फिरंगी कहा जाता है! “फिरंगी” यह आदर जानक नही किन्तु अपमान जनक उच्चार है!

क्या हम में से कोई इसका अर्थ जानता है! कुछ अध्ययन करने पर ये पता चलता है की भारत में मुघल शासन काल से ये “फिरंगी” शब्द यूरोपीय लोगों के लिए उपयोग में आया! यह एक अरबी शब्द है जो की यूरोपियन्स के लिए एक अपमान या द्वेष की भावना से उच्चारा जाता है!

क्या आप जानते है की इस शब्द से इस्लामी इतिहासकारो को इतनी कटुता और तिरस्कार क्यों है?

इस के पीछे एक रोमांचक इतिहास का पन्ना जुड़ा है! जिसे आज हम आपके सामने खोलने जा रहे है!

भारत में गाँधी-नेहरु शासन काल में पिछले ८० वर्षों से हिंदु मानबिन्दु को आहात करने वाला इतिहास लिखा और पढाया गया! इस का परिणाम हम अपने आस पास देख सकते है! जैसे की आप किसी सामान्य हिंदु से ही नही किन्तु किसी कट्टर हिंदुत्ववादी से हिंदु इतिहास के विषय में चर्चा करे तो इस गाँधी-नेहरु लिखित इतिहास को ब्रम्ह वाक्य मान कर वो अनजाने में हिंदु अस्मिता को कोसेगा, गाली देगा इत्यादि! उधाहरण के लिए

हिंदुओ में संगठन नही है!

हिंदुओ पर १००० वर्ष मुघलो ने राज किया!

हिदू राजाओ ने गद्दारी की इस लिए मुस्लिम सत्ता भारत में स्थापन हो सकी!

यदी एक वाक्य में हम कहे तो सारे नकारात्मक गुण हममे भरे पड़े है! हम निकम्मे है कुछ नही कर सकते! मुस्लिम आक्रमण जैसा संकट केवल भारतवासीयो पर ही आ टुटे!

इस का परिणाम ये होता है की हम सोचने लगते है, अजी छोडो!! पिछले १००० वर्षों से हम गुलाम थे, अब क्या उखाड लेंगे! हमारा शत्रु जो हमे ये गलत इतिहास लगातार पढवा रहा है वो तो यही चाहता है की हम इस आत्मग्लानी के शिकार हो कर जिहाद के विरुद्ध युद्ध हार जाए!

किन्तु ये सारे हिंदु इतिहास पर लगाए गए आरोप शत प्रतिशत असत्य है, ऐसा इतिहास हमे बताता है! हमे ये ध्यान में रखना चाहिए की गाँधी-नेहरु की गलिया खाना ये इतिहास नही हो सकता; क्यों की उसको कोई तर्क प्रमाण नहीं है! ऐसे गलत इतिहास को पढ़ने के उपरांत हमारी सोच भी गलत ही बनती है! जिसका उदहारण है श्री. राजीव दीक्षित, जो कहते थे की अंग्रेज आने से पहले मुस्लिम शासन काल में गो-हत्या पर संपूर्ण प्रतिबंध था! ये सत्य है की अंग्रजो से पूर्व गोहत्या पर प्रतिबंध था क्यों की सारे भारत में १८५७ से १५० वर्ष पहले मुस्लिम सत्ता नष्ट हो चुकी थी और भगवी पताका सारे भारत वर्ष पर मराठा और सीख वीरो ने फहरा दी थी! जीसके चलते गोहत्या भारत में प्रतिबंधित थी!

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इस लिए हमे ये जानना बड़ा आवश्यक है की इस्लाम का संकट क्या है और कितना विशाल, भीषण और भयानक है!

६३२ ई.स. में महमद की मृत्यु हुई! महमद ने अपने कार्य काल में ८६ सैनिक अभियान अमुस्लिमो (Non Muslim) के विरुद्ध छेड़े थे! युद्ध में हारने वाली टोली को मृत्यु की यातनाए देकर मुस्लिम बनाया जाता था! इस ८६ में से २७ सैनिक आक्रमण ऐसे थे जिसका नेतृत्व स्वय महमद ने हाथ में तलवार ले कर किया था! (http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_expeditions_of_Muhammad)

महमद के मृत्यु समय सारा अरबस्तान तलवार की नोक पर मुस्लिम बन चूका था! महमद की असाधारण प्रतिभा ये थी की उसने अपने पीछे कुरान, हदीस (महमद की कथनी और करनी) तथा सिरा (महमद का आत्मचरित्र) इसे साहित्य के रूप में इस्लाम की अरब साम्राज्यवाद को जीवित रखा!

533525_386847358071051_2705632_nफिर आरंभ हुई एक भयानक युद्ध और रक्तपात की शृखला! जिहाद!!!!!!! जिसमे देश के देश अपनी धर्म संस्कृती समेत नष्ट हो गए! अरब मुस्लिम आक्रामक पराजित देशो की प्रजा को इस्लाम अथवा मृत्यु का विकल्प देते थे! जो देश ‘जिहाद की बाढ़’ में खड़े ना रह सके वे सब १००% मुस्लिम बन गए! आज के ५८ मुस्लिम देश उस पराजित प्रजा के वंशज है जो इस्लाम के आगे टिक ना सके!

इतिहास बताता है की इस्लाम की स्थापना के केवल ७५ वर्षों में अरब मुस्लिम सेना ने इस्लाम की प्ररणा से उस समय के जगत का ४५% प्रदेश जीता! इतना ही नही किन्तु सारे उत्तर अफ्रिका (जहा आपको एक भी निग्रो देखने को नही मिलेगा) वहा के मूल निवासी पुरषों का वंश संहार किया और उनकी स्त्रीया लुटी (जिसे आप पवित्र? मानते हो उस कुरान का ८ वा अध्याय अर्थात सूरा अल अनफल इन लुटी हुई महिलाए और संपत्ति का वितरण मुस्लिम सेना में कैसे करे इस विषय में मार्गदर्शन करता है!http://en.wikipedia.org/wiki/Al-Anfal)! यह क़त्ल इतनी भयानक थी की सारे उत्तर अफ्रिका में से काले वंश (निग्रो) के लोग लगभग समाप्त हो चुके!

इन ७५ वर्षों में इस्लामी सत्ता की सीमा भारत के सिंध प्रांत से आरंभ होकर अफ्रिका के पशिम तट तक फैली थी!

तब इस्लामी आतताई सेनाओ की दृष्टी पड़ी यूरोप के दक्षिण तट पर अर्थात स्पेन देश पर! जो यूरोप का प्रवेश द्वार माना जाता है! इस सैनिक अभियान का नेतृत्व तारिक नाम के एक अरब मुस्लिम सेनानी ने किया! जब जिब्राल्टर की खड़ी (जो की अफ्रिका और दक्षिण यूरोप के बीच है)पार करके मुस्लिम सेना स्पेन में घुसी ७१९ ई.स.! कौट जूलियन नामक एक स्पेनिश सेनापति ने गद्दारी करके मुस्लिमो को सहायता की जीसके चलते स्पेन और पुर्तुगाल पर मुस्लिम सत्ता स्थापन हुई!

स्पेन और पुर्तुगाल आज १००% रोमन कथोलिक ईसाई देश है! जो की ८०० वर्षों तक मुस्लिम सत्ता में रहा था! जीस के दौरान अनगिनत स्पनिश लोगों को मुस्लिम बनाया गया, उनकी स्त्रीया लुट के रूप में अरब देशो में बेचीं गई! स्पेन ने इस्लाम के पंजे से अपनी मुक्ती कैसे की यह आप “स्पेन और पुर्तुगाल विरुद्ध का रक्तरंजित जिहाद (७११ से १४९२ तक)” इस स्वतंत्र और रोमहर्षक अध्याय में अवश्य पढिये!

भारत और स्पेन इस्लामी जिहाद के दो भिन्न अध्याय!

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इतिहास का एक विचित्र संयोग है की भारत और स्पेन पर ७११ इसी वर्ष में मुस्लिम आक्रमण हुआ! आपने सुना होगा की महमद बीन कासम नामक अरब से क्या आप जानते है भारत और स्पेन में कितना अंतर है! लगभग ८५०० किलोमीटर का! जिसे पार करने में आज विमान को १२ घंटे लगते है! आप सोचिए की महमद और उसके दिए कुरान की सोच कितनी आक्रामक और भूमी की भूखी है! क्योकि भारत से स्पेन के बीच का सारा प्रदेश अरब मुस्लिमो ने जिहाद से प्रेरित होकर केवल ७५ (६२२ से ७११ तक) वर्षों में जीता, वो भी उस समय जब यातायात के लिए केवल घोड़े ही थे! इतने विशाल अरब साम्राज्य (http://en.wikipedia.org/wiki/Umayyad_Caliphate) का प्रमुख था खलीफा मुआविया! इससे जिहाद और कुरान के सीख का भयानक परिणाम क्या है इसकी कल्पना आप कर सकते है! हमारा दुर्भाग्य ये है की श्री. श्री रवीशंकर जैसे साधू सन्यासी इस्लाम को जाने बीना और इस इतिहास को अनदेखा करके कुरान और इस्लाम को शांती और अहिंसा का प्रमाण पत्र दे देते है! इतना बड़ा असत्य बोलकर ये लोग सारे मानव समाज की आँखों में धुल झोक रहे है! जो की बहुत बड़ा महा-पाप है!नापति ने भारत के सिंध प्रांत पर आक्रमण कर उस पर अगले ९० वर्षों तक सत्ता बनाए रखी! उसी वर्ष तारिक नामक मुस्लिम सेनानी ने स्पेन पर उसके खलीफा की सत्ता स्थापन कर दी!

उस समय स्पेन और पुर्तुगाल एक देश थे, जब उसे अरब मुस्लिमो ने जीता! इस्लामी इतिहासकार इस प्रदेश को अल-अंडालूस कहते थे! स्पेन के उत्तर में फ़्रांस देश है! फ़्रांस और स्पेन की सीमा पिरानिज नामक पर्वतो से घिरी हुई है! जहा पर घना जंगल है! किसी भी इस्लामी सत्ता का पहला कर्तव्य होता है इस्लाम को फैलाना जिसका माध्यम है “जिहाद”! इस लिए दमास्कस से खलीफा ने ‘अब्द-रहमान-अल-घफिकी’ नामक एक सेनापती पर फ़्रांस और आगे फैले सारे यूरोप को जितने का अभियान सौपा! उत्तरी ध्रुव तक इस्लाम फ़ैलाना खलीफा की मनीषा थी!

यदी ये अभियान सफल हुआ होता, तो सारा यूरोप आज संपूर्ण मुस्लिम बन चूका होता! फिर कदाचित मुस्लिम अंग्रज, मुस्लिम जर्मन अथवा मुस्लिम फ़्रांसिसीयो का इतिहास हमें पढ़ना पड़ता! इस से ये वास्तव विदित होता है की जब कोई राष्ट्र अथवा व्यक्ति मुस्लिम बनती है तो उन्हें अपना सब कुछ त्यागकर जो जो अरबी उसे स्वीकारना पड़ता है!

  • जैसे की महमद, अब्दुल, इब्राहीम, याकूब इत्यादि अरबी नाम स्वीकारने पड़ते है!
  • इनका इश्वर अल्ला भी अरबी
  • उसका दूत महमद भी अरबी!
  • इस्लाम की भाषा भी अरबी!
  • इस्लाम भी अरबी
  • आप अरब नही हो फिर भी दिन में ५ बार अरब भूमी के आगे माथा टेकना पड़ेगा!
  • कपडे और वेश भूषा भी अरबो के जैसी ही करनी पड़ेगी, जिसे हम लोग मुस्लिम वेश भूषा कहते है!
  • सारे सभ्याचार अरबो के! जैसे की सलाम वालेकुम, निकाह, सुन्ता/खतना, वजू इत्यादि!
  • ये सारे लोग अपने कमाई का एक भाग सौदी अरब में “जकात” के रूप में भेजते है!
  • अपने घर बार बेच कर ये लोग हज की यात्रा करते है! इस हज के माध्यम से सौदी अरब को इतना धन मिलता है की यदी सारा तेल समाप्त भी हो जाए तो भी ये अरब देश राजा के समान जीवन जी सकते है!
  • जो मुस्लिम होते है उनकी अपनी कोई भाषा नही होते! ये लोग अरबी (जो इस्लाम की भाषा है) को ही अपनी भाषा मानते है! चुकी इन्हें १००% अरबी बोलना संभव नही इस लिए ये इनकी स्थानिक भाषाओ में अरबी शब्द घुसा के उनकी अपनी भाषा को इस्लामी बनाते है! जैसे की उर्दू जो की हिंदी ही है जिसमे हिंदी के स्थान पर अरबी शब्दों का उपयोग किया गया है!दक्षिण भारत के मुस्लिम उर्दू को नही किन्तु दख्खनी को अपनी भाषा मानते है! दख्खनी जो की मराठी, तमिल इत्यादि भाषाओ में अरबी शब्दों को मिलाकर बनी हुई है!

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इन सभी अरबी आचारो को पलना ही इस्लाम है! यदी नही तो नर्क में जाओगे! इसका सीधा अर्थ ये है की आप अरबो की श्रेष्ठता को स्विकरोगे तो ही स्वर्ग नही तो सड़ो नर्क में! क्या ये धर्म है?

यदी इसे धर्म कहते है तो फिर साम्राज्यवाद किसे कहेंगे?

ये सब देखकर ये सिद्ध होता है की इस्लाम सारे विश्व को ‘अरब कोलोनी’ बनाने का साम्राज्यवादी अभियान है! केवल ये इश्वर की आड में साम्राज्य विस्तार का काम चल रहा है!

अपने मूल विषय पर आते है! अब्दल-रहमान-अल-घफिकी (http://en.wikipedia.org/wiki/Abdul_Rahman_Al_Ghafiqi) ने ३.५ लाख मुस्लिम सेना को इकठ्ठा कर फ़्रांस की ओर कुच की (सितंबर ७३२)! इतिहासकार बताते है की उस विशाल सेना में लगभग २.५ लाख घोड़े थे! लड़ने वाले सैनिक अलग अलग वंश, रंग, रक्त और शारीर रचना के थे! भारत, इरान, अरब, तुराण, इफ्रिकी (यह अफ़्रीकी का अरबी उच्चार है!) और रूमानी (रोमन) ऐसे सारे वर्णों और वंशो से ये इस्लामी सैनिक ‘जिहाद’ के लिए आये थे! आप सोचिए इन सारी राष्ट्रीयता के लोगों को इस्लाम की तलवार ने मुस्लिम बनाया और उनकी सारी सभ्यता सदैव के लिए समाप्त हो गई! इनका अस्तित्व केवल अरब सभ्यता के “उपग्रह” मात्र रह गया!

अब्दुल रहमान स्वय एक धर्मान्तरित बेरबर मुस्लिम था! ये बेरबर लोग अरब मुस्लिम सैनिक और उत्तर अफ्रिका की पराजित निग्रो महिलाओ की संतान है! उसके सेना में घुडसेना बड़ी शक्तिशाली थी! मुस्लिम सेना के पास भारी शस्त्र थे! जब सेना ने पिरानिज पर्वत पार किया तब उन्हें गुप्तचरो से जानकारी मिली, की पर्वत के पार फ़्रांस की भूमी पार नर्बोनी नामक जो नगर है वहा के चर्च और ईसाई मठ में बहुत सम्पति और सोना है! इस जानकारी को पाते ही सेना की एक बड़ी टुकड़ी ने नर्बोनिया पार धावा बोल दिया! सारा मठ लुटा गया! आस पास के गाव भी लूटे और जलाए गए!

लुट के पहले ही दिन में २००० फ़्रांसिसी महिलाओ पर बलात्कार किये गए! बहुत सी महिलाए और संपत्ति लुट कर मुस्लिम शासित अल-अंडालूस (स्पेन) में भेजी गई! जहा से उसे अरब देशो में बेचने के लिए खलीफा के पास भेजा गया!

http://en.wikipedia.org/wiki/Battle_of_Toulouse_(721)

“फ़्रांस विरुद्ध का जिहाद” क्या इस आश्चर्य जनक इतिहास को आप ने कभी सुना है?

556814_386847341404386_1465895727_nनर्बोनी पर मुस्लिम आक्रमण की वार्ता आग के जैसे पेरिस (Paris) में फैली! उस समय फ़्रांस पर चार्ल्स नामक राजा राज्य कर रहा था! वो एक उत्कृष्ट सेनापती और कट्टर योद्धा था! फ़्रांसिसी लोग जर्मेनिक वंश के है! स्पेनिश लोश भी इसी वंश के है! जब स्पेन मुस्लिम सत्ता में जल रहा था तब अगणित लोग अपने घर बार छोडकर वहा से भागे (ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान और कश्मीर में इस्लामी सत्ता आते ही वहा के हिंदु भारत में भागे) और फ़्रांस में शरण ली! इन शरणार्थी लोगों के द्वारा फ़्रांसिसी लोगों तक मुस्लिम सत्ता के भयानक अत्याचार और उनकी अमुस्लिम महिलाओ को देखने की धृणित दृष्टी इस बारे में बहुत सी कहनिया ज्ञात हो चुकी थी! इस कारण मुस्लिमो (जिन्हें फ़्रांसिसी लोग “सारासेन” कहा करते थे) के विरुद्ध फ़्रांसिसी लोगों का जनमत क्रुद्ध था!

चार्ल्स ने अपनी १५००० सेना को शीघ्र ही नर्बोनी की ओर कूच का आदेश दिया! लड़ने में कड़वी इस सेना के साथ २००० स्पनिश शरणार्थीयो की एक छोटी सैनिक टुकड़ी भी चार्ल्स के साथ थी! इन सब से ऊपर चार्ल्स के साथ था उसका “घण” अर्थात एक विशाल हतोडा जिसे फ्रेंच भाषा में “मार्टेल” कहा जाता है! इस हतोड़े के कारण उसका नाम चार्ल्स ‘मार्टेल’ पड चूका था! चार्ल्स ‘मार्टेल’ ये जानता था की यदी वो इस मुस्लिम (सारासेन) सेना को हराने में असफल रहा तो यूरोप में दूसरी कोई शक्ति नही है जो इस बाढ को रोक सके!

टूर्स का युद्ध!21743_386847388071048_1035951647_n

कुछ ही दिनों में चार्ल्स ‘मार्टेल’ अपनी सेना लेके नर्बोनी के पर्वतो में पहुच चूका था! चार्ल्स अपनी सेना लेके युद्ध क्षेत्र में पहुच चूका है, इस बात की भनक मुस्लिम सेना को तनिक भी न थी! वे तो नर्बोनी तथा पोंटिर नगर को लूटने में व्यस्त थे!

और कुछ ही समय में मुस्लिम सेनापती अब्दुल रहमान तक ये जानकारी पहुच गई के फ़्रांसिसी सेना युद्ध की तयारी में आ पहुची है! अरब अभिलेख (Records) में फ़्रांसिसीयो का उल्लेख ‘फेरंघी’ इस शब्द से मिलता है! अरब इतिहासकार Frankish इस शब्द का उच्चार ‘फेरंघी’ ऐसा करते थे! फिरंगी ये Frankish शब्द का भ्रष्ट अरबी उच्चार है!

अरब सेना को उत्तरी यूरोप के ठंडे वातावरण में लड़ने का अनुभव नही था! मुस्लिम सैनिक भारत, इरान, अफ्रिका तथा अरबस्तान जैसे उष्ण देशो के निवासी थे! उनके कपडे ठण्ड के लिए नही थे!

दूसरी बात, चुकी अरब मुस्लिम सेना के पास घुड-सेना थी जो की इन पर्वतीय युद्ध में किसी काम की नही थी! अब्दल रहमान को शत्रु सैनिको की ठीक संख्या भी ज्ञात नही थी!

सारी फ्रेंच सेना पर्वतो के ऊपर थी और सारासेन (मुस्लिम) सेना नीचे मैदान में!

फ़्रांसिसी सैनिक उनके कुशल सेनापती चार्ल्स के आदेश अनुसार पर्वतो पर फ़ैल गए! इस चतुराई के चलते अब्दल रहमान ये समझ बैठा की फ़्रांसिसीयो का सेना बल ८ से १० गुना बढ़ा है! अब्दल रहमान उतावला हो रहा था फेरंघीयो पर धावा बोलने के लिए पर पर्वतो पर चढ़कर आक्रमण करना वो भी घुडसवारो समेत असंभव था!

इस लिए मुस्लिम सेना के पास एक ही विकल्प बचा था! फ़्रांसिसी सेना के आक्रमण की प्रतीक्षा करना! पर्वतो से घिरे उस जंगल में फ़्रांसिसी सेना ने अब्दल रहमान के लौटने का मार्ग रोक रखा था!

अब क्या करे?

29631_386847348071052_916593857_nना तो फ़्रांसिसी सेना पर आक्रमण कर सकत है ना वापस लौट सकते है! एक के ऊपर एक दिन बीतने लगे! ठण्ड का प्रकोप बढ़ रहा था! इस अवस्था में अब्दल रहमान ने अपनी सेना का एक छोर लोरी नदी तक लाया और फ़्रांसिसी सेना का पाश तोड़कर जाने का प्रयास किया! कुछ स्थानों पर रात के अँधेरे में फ़्रांसिसी सैनिक उनके ‘घण’ जैसी भारी कुल्हाड़ी लेके मुस्लिम सेना पर टूट पड़ते थे और जो मिले उसका सर फोड कर जंगल पर्वतो में छुप जाते थे!

http://en.wikipedia.org/wiki/Battle_of_the_River_Garonne

http://en.wikipedia.org/wiki/Battle_of_the_River_Berre

इस प्रकार ६ दिन बित चुके और अब्दल रहमान ने आक्रमण का निर्णय लिया वो भी घुड सवारों को पहड़ी पर चढा कर! अचानक से हिम-वृष्टि (Snow Fall) आरंभ हुई! उष्ण देश में रहने वाले उन मुस्लिम सैनिको ने कभी बर्फ की वर्षा देखि ना थी! इस भयानक ठंड में सब शारीर काप रहे थे! उसी में भेडिये की भेसुर चीत्कार सुनाई पड़ती थी! इस भयानक वातावरण में भूख से त्रस्त उन मुस्लिम सैनिको की रिब की हड्डी में भय का कंपन निर्माण हुआ! उनका मनोबल लगभग टूटू चूका था!

इस परिस्थिति का लाभ उठाकर चार्ल्स ‘मार्टेल’ ने उसकी सेना को चढाई का आदेश दिया! रात के अँधेरे में उस भयानक ठण्ड और जंगली जानवरों की चीत्कार से अधमरे और डरे हुए मुस्लिम सेना पर फ़्रांसिसी सेना एक दम टूट पड़ी! भयानक कत्तल हुई!

एक गुप्तचर ने चार्ल्स को जानकारी दी की नीचे नर्बोनी नगर के चर्च में लुट का सोना मुस्लिम सेना ने इकठ्ठा किया है! इस सूचना को पते ही चार्ल्स ने सेना की एक छोटीसी टुकड़ी उस चर्च की ओर भेज दी, जिसने अचानक हमला किया! जब यह वार्ता अब्दल रहमान के मुस्लिम सैनिको तक पहुची की लुट के गोदाम पर आक्रमण हुआ है तब उनमे से बहुत से सैनिक अब्दल रहमान को एकेला छोड कर उस लुट के माल को बटोरने के लिए मुख्या नगर की ओर भागे! इसका लाभ उठा कर चार्ल्स ‘मार्टेल’ ने स्वय पहाड़ी से उतरकर अब्दल रहमान के छावनी पर धावा बोल दिया! इस निर्णायक युद्ध में चार्ल्स और उसकी सैनिक टुकड़ी ने प्रत्यक्ष अब्दल रहमान का शीर्ष धड से अलग कर दिया! इस भयानक घटना की जानकारी मुस्लिम सेना में पहुची तो उनमे भय का वातावरण बन चूका था!

इस परिस्थिति का लाभ उठा कर फ़्रांसिसी सेना ने एक एक मुस्लिम सैनिक को काट काट कर उनके शव मैदान और जंगल में फैके! कई मुस्लिम सैनिक लोरी नदी में कूद कर ठंडी धारा में बह गए!

अगले १५ दिन में ३.५ लाख मुस्लिम सेना की कत्तल फ़्रांसिसीयो ने की! इस सारे घटना क्रम में चार्ल्स की एकमात्र युद्ध नीति ये थी के “शत्रु का एक भी सैनिक जीवित नही बचना चाहिए”!

टूर्स के युद्ध का अंतिम परिणाम ये हुआ की यूरोप ‘यूरोप’ रहा, उसका ‘युरेबिया’ (अर्थात अरेबिया का उपग्रह) नही बना! यदी फ़्रांसिसी टूर्स का युद्ध हार जाते तो आज सारा यूरोप १००% मुस्लिम होता ठीक सौदी अरब के जैसा!

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इस युद्ध का परिणाम सूक्ष्म इतिहासिक है! अर्थात, यदी इस युद्ध में फ़्रांसिसीयो की हार होती तो सारा यूरोप ३.५ लाख सेना की बाढ़ में बह जाता! उत्तरी ध्रुव तक इस्लामी सत्ता फैलती! यदी ऐसा होता तो यूरोप के सारे देश आज १००% मुस्लिम होते ठीक सौदी अरब के जैसे! इस युद्ध में फ्रांसीसियो की विजय के कारण यूरोप ‘यूरोप’ रह सका! नही तो उसका “युरेबिया” बन चूका होता! अर्थात अरेबिया का यूरोपीय अवतार, जिसे अपने आप में कोई अस्तित्व नही है, केवल अरेबिया का एक उपग्रह मात्र रह जाता!

इस युद्ध के विजय ने यूरोपीय देशो के बीच उत्साह निर्माण किया! इस विजय से प्रेरणा लेकर उन स्पनिश शरणार्थियों ने अल अंडालूस की (स्पेन और पुर्तुगाल) मुस्लिम सत्ता को ललकारा! इस विजय ने ईसाई मत के विजय का एक अध्याय आरंभ हुआ! अगले ८०० वर्षों तक इन स्पनिश योद्धाओ ने उनके देश को इस्लाम की पकड़ से मुक्त किया! इतना ही नही जीन स्पानिश और पुर्तुगालियो को इस्लामी सत्ता में मुस्लिम बनाया गया था, उन्हें मृत्यु की यातनाए देकर इन स्पनिश लोगों ने फिर से ईसाई मत में लाया! यह सब एक इतिहास का रोमांचक अध्याय है! “स्पेन और पोर्तुगाल विरुद्ध का रक्तरंजित जिहाद”!http://www.islam-watch.com/HistoryOfJihad/Jihad_Spain.htm

ये सारा अध्याय Spanish Reconquesta अर्थात स्पनिश प्रतिविजय के नाम से इतहास में प्रसिद्ध है! ऐसा ही प्रतीविजय भारत में मराठा और सीख जैसे वीर हिंदु योद्धाओ ने आपने तलवार से लिखा है! इसका स्वतंत्र अध्याय Hindu Reconquesta of India. इस मराठा और सीख वीरो के कारण भारत “भारत” रहा नही तो उसका भी “भारेबिया” बन चूका होता!

इन हिंदु वीरो की वीरता को आज का गाँधी-नेहरु शासित इतिहास गाली देता है, की ये १००० वर्ष इस्लामी सत्ता में गुलाम थे!

हिंदु राष्ट्र की इस असाधारण वीरता का उलेल्ख उनके शत्रुओ ने किया है!

जीन ३०० वर्षों में इस्लाम अरेबिया से स्पेन तक फैला उन्ही ३०० वर्षों में जिहाद सिंध प्रांत के आगे एक कदम भी न रख सका!

इस युद्ध के अंतिम चरम में १७ वी शताब्दी हिंदु विजय की साबित हुई! जब मराठा और सीख वीरो ने अफगानिस्थान तक भगवा लहराया!

इस हार का वर्णन स्वय एक मुल्ला ने ‘मुसद्दस’ में किया है!

वोह दीन ए हिजाज का बेबाक बेडा

निशान जिसका अक्साई आलम में पंहुचा

गए मिस्त्र, गए रूम, गए यूनान

किए पस्सी पार जिसने सातो समंदर

आखिर डूबा दरिया ए गंगा में आकर

अर्थात अरब भूमी से दीन/मजहब की नाव निकली

जिस पर इस्लाम का झंडा लहरा रहा था!

उसने यूनान अर्थात ग्रीस, इजिप्त तथा इरान जीते!

जिस नाव ने जग के सातो समंदर पार ही नही किये किन्तु उन पर निर्णायक विजय प्राप्त की

वो आखिर डूबी दरिया ए गंगा में आ कर!

क्या सीखे हम?

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क्रूरता, बर्बरता और निर्दयता में मुस्लिमो को भी फ़्रांसिसीयो ने मात दी! यही एक मात्र कारण सिद्ध हुआ फ़्रांसिसी विजय का! टूर्स के युद्ध में फ़्रांसिसी सैनिको ने ३.५ लाख अरब मुस्लिम सेना की उनके सेनापति ‘अब्दल-रहमाल-अल-घफिकी’ समेत भीषण कत्तल की! मुस्लिम सेना का ये संहार ‘हड्डीयो में कपकपी निर्माण करनेवाला’ भयानक था, जीसके चलते आगे १००० वर्षों तक जिहादियों को पश्चिम यूरोप पर आक्रमण करने का साहस नही हुआ!  

154597_386847401404380_1330854264_nइस युद्ध में फ़्रांसिसी सैनिको ने असाधारण साहस और शौर्य का परिचय दिया! इतना ही नही, क्रूरता बर्बरता और बड़ी निर्दयता पुर्वक मुस्लिम सेना की कत्तल की! किसी एक भी मुस्लिम सैनिक को जीवन दान नही दिया! इस्लामी सेना की इतनी भयंकर कत्तल कदाचित ही किसने की हो! ३.५ लाख मुस्लिम सैनिको के शव जंगल और पर्वतो में सड रहे थे! कहा जाता है की अगले ३ वर्षों तक सारी घाटी में गुर्गंध का वातावरण फैला था और सारे प्रदेश में हडियो का ढेर पड़ा था!

मुस्लिम सेना की इस भयानक और हड्डीयो में कप कपी निर्माण करने वाली हार ने सारे मुस्लिम जगत में भय और शंका का वातावरण फैल गया! इसका भीषण परिणाम ये निकला की अगले १००० वर्षों तक इस्लामी आक्रमको ने दक्षिण यूरोप पर आक्रमण करने का साहस नही जुटाया!

यूरोप में ये कहा जाता है की चार्ल्स ने अपने ‘घण’ के भीषण आघात से मुस्लिम आक्रमणकर्ताओ का सर चूर चूर कर दिया! जीसके भय से इस्लामी आक्रान्ताओ ने फिर फ़्रांस की ओर मुह तक नही फेरा! इस “घण” के कारण उसका नाम चार्ल्स ‘मार्टेल’ हुआ!

भारत में अंग्रेजो को फिरंगी क्यों कहा जाता था? इस रहस्य का भेद!

भारत में मुघलो की सेना में अनेक यूरोपियन्स थे! अरबी भाषा में इन यूरोपियन्स को ‘फेरंघी’ कहा जाता है! ये शब्द अरबी में कैसे आया ये आप ने अभी अभी देखा! मुघल शासन काल में ये अरबी शब्द फेरंगी जिसका उर्दू उच्चार “फिरंगी” है उत्तर हिन्दुस्थान में प्रचलित हुआ!

उर्दू का यूरोपीय रूप है ‘अल अंडालूसी’ जो आज एक मृत बोली है!

स्पेन और पुर्तुगाल पर जब मुस्लिम सत्ता थी तब उन ८०० वर्षों में स्पनिश भाषा में अनगिनत अरबी शब्द घुस गए! जीन स्पनिश लोगों को मुस्लिम बनाया गया वो ना तो अरब बन सके ना तो पुरे स्पनिश! खिचड़ी बन गई! इन स्पनिश मुस्लिमो की भाषा थी स्पनिश! चुकी इस्लाम अरब देश का वर्चस्व है! इस लिए उन स्पनिश मुस्लिमो की स्पनिश अरबी मिश्रित रहती थी! ठीक वैसी ही जैसे हिंदी में अरबी शब्द घुसेड कर वो ना तो हिंदी रह पाई ना तो अरबी बन सकी! खिचड़ी बन गई “अल अंडालूसी” की तरहा!

८०० वर्षों के युद्ध काल उपरांत सारे स्पेन से मुस्लिम सत्ता तो नष्ट हो चुकी और जीन स्पनिश लोगों को मुस्लिम बनया गया था उन्हें फिर तलवार की धार से ईसाई बनाया गया!

इस स्पेन की ईसाई सत्ता ने अल अंडालूसी पर प्रतिबंध लगाया! सारे अरबी शब्दों के उच्चारण पर मृत्यु दंड की घोषणा कर दी! इसका परिणाम ये हुआ की आज स्पेन में कोई


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बंगलादेश अथवा पाकिस्तना नही बन पाया! http://en.wikipedia.org/wiki/Andalusian_Arabic

टूर्स की लड़ाई क्या सिखाती है!

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टूर्स के युद्ध में फेरंघी सेना ने तब तक अरब मुस्लिमो की कत्तल की जब तक के उनका अंतिम सैनिक मारा ना जाए! इस युद्ध की विशेषता ये थी की फ़्रांसिसी सेना ने एक भी युद्ध बंदी नही बनाया! जो भी शत्रु जैसे भी हाथ लगे उसे समाप्त किया! ये जिहाद की हिस्त्र परंपरा जब अरब मुस्लिम सेना ने अपने ही उपर लौटते देखी तो उनका मनो बल पूरी तरहसे टूट गया!

ये है एकमेव रहस्य ऐसे खुखार शत्रु पर विजय पाने का,जिसका एकमात्र उदेश्य तुम्हारा विनाश हो तब ऐसे शत्रु को कोई दया ना दिखाते हुए उसकी सेना समेत संपूर्ण कत्तल ही उचित रणनीति है!

संदर्भ:

http://www.islam-watch.com/HistoryOfJihad/jihad-against-franks-france.htm

http://en.wikipedia.org/wiki/Mohiuddin_Ibne_Arabi#Mystical_Great_Vision_in_Cordoba