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कुरान अल्लाह की किताब है ,यानि उसमे लिखे हरेक शब्द अल्लाह के वचन है .और प्रमाणिक हैं . उसी तरह हदीसें भी प्रमाणिक है क्योंकि उनमे अल्लाह के रसूल के वचन मौजूद हैं. ऐसा मुसलमानों का दावा है . और उनका यही आग्रह रहता है कि दुनियां के सभी लोग उनकी तरह ही अपनी बुद्धि बेच डालें और कुरान और हदीसों की परस्पर विरोधी तर्कहीन ” उलटवाणियों” पर इमान ले आयें .और ऐसी बेतुकी बातों पर विश्वास कर लें .यद्यपि कुरान और हदीसों में ऐसी अनेकों बातें मिल सकती हैं , लेकिन यहाँ पर नमूने के लिए केवल दो ही उदहारण दिए जा रहे हैं . और उनके माध्यम से इस्लाम के विद्वानों और प्रबुद्ध पाठकों से निवेदन है कि वह दिए गए हवालों के आधार पर इन प्रश्नों पर उचित निर्णय करें .प्रश्न हैं 1 .क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ? 2 . क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ?
इन प्रश्नों का उत्तर इसी लेख में छुपा है .इसलिए लेख को ध्यान से पढ़िए –
पहला प्रश्न -क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ?
1-भाई का मांस खाना गुनाह है
कुरान में किसी की पीठ पीछे बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के समान बताकर गुनाह माना गया है , कुरान में कहा है ,
“किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के बराबर है “सूरा -अल हुजुरात 49 :12
लेकिन मुसलमान खुले आम ईमान वालों का मांस खाते हैं , क्योंकि कुरान के अनुसार पक्षी और जानवर भी नमाज पढ़ते और तसबीह करते हैं
2-पशु पक्षी भी मुसलमान हैं
इस्लामी परिभाषा के अनुसार जो भी अल्लाह की तस्बीह करता है और , नमाज पढ़ता है उसी को मोमिन कहा जाता है .कुरान में कहा है
क्या तुम नहीं देखते कि धरती पर चलने वाले जानवर और आकाश में पंख फैला कर उड़ने वाले पक्षी भी अल्लाह की तसबीह करते रहते हैं ,और अपनी नमाज अदा करते रहते हैं .और अल्लाह इस बात को जनता है ” सूरा -नूर 24 :41
आकाश में उड़ने वाले और धरती पर रहने वाले सभी प्राणी उसी अल्लाह की तसबीह (प्रार्थना ) करते हैं . और कोई ऐसा प्राणी नहीं है , जो अल्लाह की इबादत नहीं करता हो .लेकिन तुम उनकी नमाज को नहीं जानते ” सूरा -बनी इस्राएल 17 :44
इन आयतों अनुसार नमाज पढ़ने वाले सभी प्राणी ईमानवाले , और भाई माने गए हैं .और कहा गया है ,
सभी ईमान वाले आपस में भाई भाई हैं “सूरा-अल हुजुरात 49 :10
3-अपने भाई का मांस खाओ
क्या कोई मुसलमान जवाब देगा कि क्या कारण है , एक तरफ तो अल्लाह नमाज पढ़ने और तसबीह करने वालों को ईमान वाला और आपस में भाई बता रहा है , और दूसरी तरफ उन्ही को खाने की अनुमति दे रहा है . और कहता है ,
और अल्लाह ने ही पशु भी बनाये हैं ,जिनसे गर्मी पैदा करने का सामान ( ऊन ) मिलता है ,और तुम जिनको खाते भी हो ” सूरा -नहल 16 :5
तुम पर सिर्फ मुरदार को ,सूअर को ,खून को और जिन जानवरों पर अल्लाह के आलावा किसी का नाम लिया गया हो उस जानवर को हराम किया गया है . इनको छोड़ कर तुम सभी जानवरों को खा सकते हो ” सूरा -बकरा 2 :173
इस प्रकार यदि हम कुरान की इन सभी आयतों का भावार्थ और तात्पर्य समझें तो यही स्पष्ट होगा कि आजकल मुसलमान अपने भाई ( पशु , पक्षिओं ) का मांस खाते हैं , क्योंकि वे सब नमाज पढ़ते है , और अल्लाह की तसबीह करते हैं .यनि सभी मुसलमान अपने भाइयों के हत्यारे हैं
इसी तरह मुसलमानों का दावा है कि सारे जीव अकेले अल्लाह ने ही बनाये है , और उसका कोई सहभागी नहीं है , लेकिन खुद अल्लाह का रसूल इस से उलटी बात बता रहे हैं , इसका नमूना देखिये
दूसरा प्रश्न -क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ?
1-सभी प्राणी अल्लाह ने बनाये
कुरान का दावा है कि दुनियां की सभी चीजें और प्राणी अल्लाह ने ही बनाये है .जैसा इन आयतों में कहा है
-केवल अल्लाह ही हरेक को पैदा करने वाला है “सूरा -अज जुमुर 39 :62
अल्लाह ने ही चौपाये बनाये हैं ,जिन पर तुम सवारी करते हो “सूरा -अज जुखुरुफ़ 43 :12
क्या लोग ऊंटों को नहीं देखते कि अल्लाह ने इनको कैसा बनाया है “सूरा -अल गाशिया 88 :17
2-अल्लाह का कोई सहभागी नहीं
मुसलमान समझते हैं कि अल्लाह इतना शक्तिशाली है कि कोई उसके बराबर नहीं है .और अल्लाह अकेला ही सारे काम कर सकता है . उसे किसी सहयोगी कि जरुरत नहीं है . और अल्लाह का कोई सहभागी मानना अक्षम्य अपराध है . कुरान के कहा है ,
ऐसा कोई नहीं है , जो अल्लाह की बराबरीकर सके ” सूरा -इखलास 112 :4
अल्लाह का कोई सहभागी ( Partner ) नहीं है ” सूरा -अनआम 6 :163
अल्लाह ने न तो किसी को अपना बेटा बनाया और न ही उसकी सत्ता में कोई उसका सहभागी है “सूरा -बनी इस्राइल 17 :111
अल्लाह इस बात को कभी क्षमा नहीं करेगा कि कोई किसी को अल्लाह का सहभागी ठहराए ” सूरा -निसा 4 : 48
3-ऊंट शैतान ने बनाये हैं
लेकिन अल्लाह के रसूल हदीसों में दावा कर रहे हैं कि ऊंट शैतान ने बनाये हैं . यानि अल्लाह और शैतान में बराबर शक्ति है , हदीसें देखिये
अल बरा इब्न अजीब ने कहा कि रसूल ने कहा है तुम ऊँटों के रहने कि जगह नमाज नहीं पढो , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये हैं (Camels were created from devils)

” فإنها خلقت من الشياطين ”
सुन्नन अबू दाऊद- किताब 1 हदीस 184
अब्दुल्लाह बिन मुगफ्फल अल मुजानिन ने कहा कि रसूल ने तुम भेड़ों आराम करने कि जगह नमाज पढ़ा करो ,लेकिन ऊंटों के रहने कि जगह नमाज कभी नहीं पढना , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये है “इब्न माजा

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ” صَلُّوا فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَلاَ تُصَلُّوا فِي أَعْطَانِ الإِبِلِ فَإِنَّهَا خُلِقَتْ مِنَ الشَّيَاطِينِ ” .

Sunan Ibn Majah : The Book On The Mosques And The Congregations

English reference : Vol. 1, Book 6, Hadith 769
Arabic reference : Book 5, Hadith 818

यही हदीस इमाम हम्बल में मुसनद में भी दर्ज कि है . ऊंट शैतान ने बनाये हैं musnad ahmad

وفي المسند أيضا, من حديث عبد الله بن المغفل قال: قال رسول الله صلى الله تعالى عليه وآله وسلم “صلوا في مرابض الغنم ولا تصلوا في أعطان الإبل, فإنها خلقت من الشياطين”.

4-ऊंट के बारे में फतवा
ऊंट शैतान ने बनाये हैं ,और ऊंट का मांस खाने से मुसअल्लाह और रसूल की उलटवाणियाँ !!
कुरान अल्लाह की किताब है ,यानि उसमे लिखे हरेक शब्द अल्लाह के वचन है .और प्रमाणिक हैं . उसी तरह हदीसें भी प्रमाणिक है क्योंकि उनमे अल्लाह के रसूल के वचन मौजूद हैं. ऐसा मुसलमानों का दावा है . और उनका यही आग्रह रहता है कि दुनियां के सभी लोग उनकी तरह ही अपनी बुद्धि बेच डालें और कुरान और हदीसों की परस्पर विरोधी तर्कहीन ” उलटवाणियों” पर इमान ले आयें .और ऐसी बेतुकी बातों पर विश्वास कर लें .यद्यपि कुरान और हदीसों में ऐसी अनेकों बातें मिल सकती हैं , लेकिन यहाँ पर नमूने के लिए केवल दो ही उदहारण दिए जा रहे हैं . और उनके माध्यम से इस्लाम के विद्वानों और प्रबुद्ध पाठकों से निवेदन है कि वह दिए गए हवालों के आधार पर इन प्रश्नों पर उचित निर्णय करें .प्रश्न हैं 1 .क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ? 2 . क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ?
इन प्रश्नों का उत्तर इसी लेख में छुपा है .इसलिए लेख को ध्यान से पढ़िए –
पहला प्रश्न -क्या मुसलमान मुसलमानों का मांस नहीं खाते हैं ?
1-भाई का मांस खाना गुनाह है
कुरान में किसी की पीठ पीछे बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के समान बताकर गुनाह माना गया है , कुरान में कहा है ,
“किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई करना , अपने ही भाई का मांस खाने के बराबर है “सूरा -अल हुजुरात 49 :12
लेकिन मुसलमान खुले आम ईमान वालों का मांस खाते हैं , क्योंकि कुरान के अनुसार पक्षी और जानवर भी नमाज पढ़ते और तसबीह करते हैं
2-पशु पक्षी भी मुसलमान हैं
इस्लामी परिभाषा के अनुसार जो भी अल्लाह की तस्बीह करता है और , नमाज पढ़ता है उसी को मोमिन कहा जाता है .कुरान में कहा है
क्या तुम नहीं देखते कि धरती पर चलने वाले जानवर और आकाश में पंख फैला कर उड़ने वाले पक्षी भी अल्लाह की तसबीह करते रहते हैं ,और अपनी नमाज अदा करते रहते हैं .और अल्लाह इस बात को जनता है ” सूरा -नूर 24 :41
आकाश में उड़ने वाले और धरती पर रहने वाले सभी प्राणी उसी अल्लाह की तसबीह (प्रार्थना ) करते हैं . और कोई ऐसा प्राणी नहीं है , जो अल्लाह की इबादत नहीं करता हो .लेकिन तुम उनकी नमाज को नहीं जानते ” सूरा -बनी इस्राएल 17 :44
इन आयतों अनुसार नमाज पढ़ने वाले सभी प्राणी ईमानवाले , और भाई माने गए हैं .और कहा गया है ,
सभी ईमान वाले आपस में भाई भाई हैं “सूरा-अल हुजुरात 49 :10
3-अपने भाई का मांस खाओ
क्या कोई मुसलमान जवाब देगा कि क्या कारण है , एक तरफ तो अल्लाह नमाज पढ़ने और तसबीह करने वालों को ईमान वाला और आपस में भाई बता रहा है , और दूसरी तरफ उन्ही को खाने की अनुमति दे रहा है . और कहता है ,
और अल्लाह ने ही पशु भी बनाये हैं ,जिनसे गर्मी पैदा करने का सामान ( ऊन ) मिलता है ,और तुम जिनको खाते भी हो ” सूरा -नहल 16 :5
तुम पर सिर्फ मुरदार को ,सूअर को ,खून को और जिन जानवरों पर अल्लाह के आलावा किसी का नाम लिया गया हो उस जानवर को हराम किया गया है . इनको छोड़ कर तुम सभी जानवरों को खा सकते हो ” सूरा -बकरा 2 :173
इस प्रकार यदि हम कुरान की इन सभी आयतों का भावार्थ और तात्पर्य समझें तो यही स्पष्ट होगा कि आजकल मुसलमान अपने भाई ( पशु , पक्षिओं ) का मांस खाते हैं , क्योंकि वे सब नमाज पढ़ते है , और अल्लाह की तसबीह करते हैं .यनि सभी मुसलमान अपने भाइयों के हत्यारे हैं
इसी तरह मुसलमानों का दावा है कि सारे जीव अकेले अल्लाह ने ही बनाये है , और उसका कोई सहभागी नहीं है , लेकिन खुद अल्लाह का रसूल इस से उलटी बात बता रहे हैं , इसका नमूना देखिये
दूसरा प्रश्न -क्या शैतान अल्लाह का सहभागी नहीं है ?
1-सभी प्राणी अल्लाह ने बनाये
कुरान का दावा है कि दुनियां की सभी चीजें और प्राणी अल्लाह ने ही बनाये है .जैसा इन आयतों में कहा है
-केवल अल्लाह ही हरेक को पैदा करने वाला है “सूरा -अज जुमुर 39 :62
अल्लाह ने ही चौपाये बनाये हैं ,जिन पर तुम सवारी करते हो “सूरा -अज जुखुरुफ़ 43 :12
क्या लोग ऊंटों को नहीं देखते कि अल्लाह ने इनको कैसा बनाया है “सूरा -अल गाशिया 88 :17
2-अल्लाह का कोई सहभागी नहीं
मुसलमान समझते हैं कि अल्लाह इतना शक्तिशाली है कि कोई उसके बराबर नहीं है .और अल्लाह अकेला ही सारे काम कर सकता है . उसे किसी सहयोगी कि जरुरत नहीं है . और अल्लाह का कोई सहभागी मानना अक्षम्य अपराध है . कुरान के कहा है ,
ऐसा कोई नहीं है , जो अल्लाह की बराबरीकर सके ” सूरा -इखलास 112 :4
अल्लाह का कोई सहभागी ( Partner ) नहीं है ” सूरा -अनआम 6 :163
अल्लाह ने न तो किसी को अपना बेटा बनाया और न ही उसकी सत्ता में कोई उसका सहभागी है “सूरा -बनी इस्राइल 17 :111
अल्लाह इस बात को कभी क्षमा नहीं करेगा कि कोई किसी को अल्लाह का सहभागी ठहराए ” सूरा -निसा 4 : 48
3-ऊंट शैतान ने बनाये हैं
लेकिन अल्लाह के रसूल हदीसों में दावा कर रहे हैं कि ऊंट शैतान ने बनाये हैं . यानि अल्लाह और शैतान में बराबर शक्ति है , हदीसें देखिये
अल बरा इब्न अजीब ने कहा कि रसूल ने कहा है तुम ऊँटों के रहने कि जगह नमाज नहीं पढो , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये हैं (Camels were created from devils)

” فإنها خلقت من الشياطين ”
सुन्नन अबू दाऊद- किताब 1 हदीस 184
अब्दुल्लाह बिन मुगफ्फल अल मुजानिन ने कहा कि रसूल ने तुम भेड़ों आराम करने कि जगह नमाज पढ़ा करो ,लेकिन ऊंटों के रहने कि जगह नमाज कभी नहीं पढना , क्योंकि ऊंट शैतान ने बनाये है “इब्न माजा

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ” صَلُّوا فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَلاَ تُصَلُّوا فِي أَعْطَانِ الإِبِلِ فَإِنَّهَا خُلِقَتْ مِنَ الشَّيَاطِينِ ” .

Sunan Ibn Majah : The Book On The Mosques And The Congregations

English reference : Vol. 1, Book 6, Hadith 769
Arabic reference : Book 5, Hadith 818

यही हदीस इमाम हम्बल में मुसनद में भी दर्ज कि है . ऊंट शैतान ने बनाये हैं musnad ahmad

وفي المسند أيضا, من حديث عبد الله بن المغفل قال: قال رسول الله صلى الله تعالى عليه وآله وسلم “صلوا في مرابض الغنم ولا تصلوا في أعطان الإبل, فإنها خلقت من الشياطين”.

4-ऊंट के बारे में फतवा
ऊंट शैतान ने बनाये हैं ,और ऊंट का मांस खाने से मुसलमानों में शैतानी ऊर्जा बढ़ती है . इस बात को साबित करने के लिए जो फतवा दिया गया है उसका मुख्य अंश इस प्रकार है ,
“ऊंटों में शैतान की शक्ति होती है . इसलिए जो भी ऊंटों का मांस खता है ,उसमे शैतान प्रकृति का विकास हो जाता है .फलस्वरूप उसमे शैतान का स्वभाव बढ़ जाता है .
The camel has a devilish nature, so whoever eats its meat will develop some devilish energy as a result; so it is prescribed to take away that energy.
http://islamqa.info/en/ref/130871
इतना जानने के बाद भी लोगों से वही उलटी बातें बता कर गुमराह करते रहते है , जो उस समय मुहम्मद साहब अपने जाहिल जिहादियों से कहते थे कि
हे नबी तुम लोगों से कह दो ,कि यदि तुम मुझ से प्रेम करते हो तो ,मेरा अनुसरण करो .और अल्लाह के साथ रसूल की बात पर भी विश्वास करो ”
सूरा -आले इमरान 3 : 31 -32
5-निष्कर्ष
लेख में दिए गए कुरान और हदीसों के प्रमाणों का अध्यन करने से यही साबित होता है कि ऊंटों का मांस खा खा कर अरब के मुसलमानों में शैतानी शक्तियां बढ़ गयी हैं .चूँकि अरब इस्लाम का जन्म स्थान है .इसलिए शैतानी शक्तियां अरब से निकल कर भारत तक फ़ैल रही हैं .और यही कारन है कि मुसलमान हर जगह आतंक फैलाते रहते हैं .यदि ऐसा नहीं तो मुसलमान स्वीकार करें कि यह कुरान कि आयतें और रसूल की बातें झूठ है . और रसूल झूठे थे .लमानों में शैतानी ऊर्जा बढ़ती है . इस बात को साबित करने के लिए जो फतवा दिया गया है उसका मुख्य अंश इस प्रकार है ,
“ऊंटों में शैतान की शक्ति होती है . इसलिए जो भी ऊंटों का मांस खता है ,उसमे शैतान प्रकृति का विकास हो जाता है .फलस्वरूप उसमे शैतान का स्वभाव बढ़ जाता है .
The camel has a devilish nature, so whoever eats its meat will develop some devilish energy as a result; so it is prescribed to take away that energy.
http://islamqa.info/en/ref/130871
इतना जानने के बाद भी लोगों से वही उलटी बातें बता कर गुमराह करते रहते है , जो उस समय मुहम्मद साहब अपने जाहिल जिहादियों से कहते थे कि
हे नबी तुम लोगों से कह दो ,कि यदि तुम मुझ से प्रेम करते हो तो ,मेरा अनुसरण करो .और अल्लाह के साथ रसूल की बात पर भी विश्वास करो ”
सूरा -आले इमरान 3 : 31 -32
5-निष्कर्ष
लेख में दिए गए कुरान और हदीसों के प्रमाणों का अध्यन करने से यही साबित होता है कि ऊंटों का मांस खा खा कर अरब के मुसलमानों में शैतानी शक्तियां बढ़ गयी हैं .चूँकि अरब इस्लाम का जन्म स्थान है .इसलिए शैतानी शक्तियां अरब से निकल कर भारत तक फ़ैल रही हैं .और यही कारन है कि मुसलमान हर जगह आतंक फैलाते रहते हैं .यदि ऐसा नहीं तो मुसलमान स्वीकार करें कि यह कुरान कि आयतें और रसूल की बातें झूठ है . और रसूल झूठे थे .