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मेरे एक मित्र है विक्रमिदित्य दलवी
कुछ दिन पहले मैंने शिर्डी के साईं के पाखंड और उनसे द्वारा हिन्दुओ के मन को घोर इस्लामिक बनाने के षड्यंत्र और कुछ मुसलमानों द्वारा शिर्डी साईं के नाम का फायदा उठा कर हिन्दुओ को सेकुलर और फिर सेकुलर से धर्मांतरण करने के षड्यंत्र को जोर शोर से उठाया था, कुछ हद तक मैं उसमे सफल भी हुआ, पर इसी बीच एक मित्र से बात हुई, उन्होंने मुझसे मेरा मेल एड्रेस माँगा और कहा की उनके पास साईं के बारे में कुछ लेख है जिसे वे मुझे देना चाहते है, मेरे मन में उत्सुकता बढ़ी और जब आज उन्होंने वो जानकारी मुझे दी, मैं भी उस जानकारी को आप सभी के सामने सार्वजनिक कर रहा हु,मेरा मत है की इसे पढ़ कर शायद शिर्डी साईं के अंध भक्तो में कुछ तो जाग्रति आये और वो इस पाखंड को छोड़ कर धर्म के रास्ते पर आ जाये, वो जानकारी मैं आप सभी के सामने रख रहा हु

नमस्कार भाई,
मैने आपको साई बाबा के विषय मे सूचना देणे के बारे मे संपत्र लिखा था! जब मैने आपका ब्लॉग देखा, जिसमे आपने साई के मुस्लीम होणे के प्रमाण दिये है! उससे ये प्रमाणित तो हो जाता है की वह इस्लाम को माननेवाला था, किंतु बहुत से लोग (जो ब्लॉग मे अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे) ऐसे थे जीनको साई के मुस्लीम होणे मे कोई आपत्ती नही थी! इस का कारण ये है की भारत मे गांधी-नेहरू द्वारा चालये हुये असत्य प्रचार के प्रभाव मे ये सब लोग है! जो ये कहता है की “सभी धर्म एक समान” (जिसमे इस्लामी भी एक है ऐसा ये लोग मानते है)
इस लीये केवल साई मुस्लीम था इतना कहना अधुरा कार्य होगा! हमे इन लोगो को बताना होगा की इस्लाम को मानने का अर्थ, मानवता का सबसे बडा द्रोह है! वो ऐसे की इस्लाम विश्व का विभाजन दो युद्धमान समूहो मे करता है, एक अल्ला के पक्ष से लढने वाले मोमीन (मुसलमान) और दुसरे काफिर (इस्लाम को न मानने वाले, जिसमे सारे अमुस्लीम (NON MUSLIM) आते है). इन काफिरो को बरबरता से मारने पर स्वर्ग मे सुंदर सुंदर ७२ अप्सराओ का उपभोग मिलता है! ऐसी विकृत धारणा को मानने से वह व्यक्ती मुस्लीम बनता है! अब वाचक वर्ग को सोचना चाहिये की ऐसी सोच वाला (इस्लाम की मानवता विरोधी धारणा) व्यक्ती साधू पुरुष (इस में साईं आता है) या पूजा योग्य कैसे हो सकता है?

इस विषय को समझाने के लीये मै स्वयं अपना उदाहरण देता हु. चाहे तो आप इस उदाहरण को वाचकों के समक्ष रख सकते है…

एक समय मै भी साई बाबा का निस्सीम भक्त हुवा करता था! प्रती गुरुवार को साई का दर्शन करना मेरी दैनंदिनी का भाग था! ऐसे ही कुछ वर्ष बीत गये और १९९३ मे मुस्लीम दंगे हुए, मै मुंबई में जिस भाग में रहता था वहा राधा बाई चाल नामक हिंदु बस्ती को जलते हुए मैंने देखा, मस्जिदों में से विद्वेष पूर्ण भाषण दिए जाते थे! हिंदु बस्ती पर हमला करने का मार्ग दर्शन खुले आम मस्जिद से किया जाता था! इस विद्वेष को फैलाने में मस्जिद का मुल्ला कुरान और हदीथ जैसे इस्लामी साहित्य का संदर्भ देता था! जब ये सब मैंने अपने आखो से देखा तो साईं बाबा की सीख (जो कहती है “सभी धर्म एक सामान”) के प्रती मेरे मन में संदेह के प्रश्न उठने लगे!

आगे चलकर जब इस्लामी साहित्य का अध्ययन (कुरान, हदीथ, सीरा [महमद का आत्मचरित्र] और सुन्ना) किया, तब “सभी धर्म एक समान” का असत्य बुलबुला मेरे मन से फुट गया!
मेरे प्रिय साईं भक्तो, क्या आप जानते है, की इस्लाम में हर एक मुस्लिम को श्रेष्ठ मुस्लिम बनने के लिए इस्लामी जीवन शैली का अनुसरण करना पड़ता है! जिससे वह स्वर्ग पोहोचाता है! इस व्याख्या को इस्लाम ने बहुत सहज बनाया है! महमद का आचरण एक आदर्श आचरण है! हर एक व्यक्ति जो मुस्लिम है वह मुस्लिम बने रहने के लिए अपने जीवन में महमद का आचरण करता है! इस आचरण करने को सुन्ना पालना कहते है और वैसे आचरण करने वाले सुन्नी!

  • जैसे की मुल्ले दाढ़ी रखते है! (महमद दाढ़ीधारी था और एक विशिष्ट प्रकार से उस पर हाथ घुमाता था, मुस्लिम भी ठीक वैसे ही अपनी दाढ़ी पे हाथ घुमाते है)
  • उस दाढ़ी को लाल रंग में रंगते है (क्योंके महमद लाल डाई का उपयोग करता था),
  • इस्लामिक टूट ब्रश का उपयोग करते है जिसे मिस्वाक कहते है (महमद इसका उपयोग करता था)
  • बड़े भाई का कुरता (घुटनों के नीचे तक आने वाला लंबा झब्बा) और छोटे भाई का पैजामा (छोटा पैजामा जिसमे पैरों की एडिय दिखती है) पहनते है (बिलकुल महमद जैसा)!
  • बैठ कर मूतते है और ईट को अपने लूली पे विक्षिप रूप से घुमाते है जैसे महमद करता था!
  • नदी के तट पे घर हो फिर भी ये मुल्ले जुम्मे से जुम्मे क्यों नहाते है? ये भी आप समझ चुके होगे! इतना भी नही सोचते की रेगिस्थान में रहनेवाला महमद चाहकर भी प्रतीदिन नहा नही सकता था!
  • मुसलमान कहते है, हम वंदेमातरम नही कहेंगे क्यों की हम मातृभूमि को नही मानते तो फिर ये महमद की अरब भूमी के आगे दिन में ५ बार माथा क्यों रगड़ते है (ये भी महमद का सुन्ना है जिसके आधार पर महमद सारे विश्व को उसकी मातृभूमि के आगे झुकाता है)
  • ये मुल्ले अपने बच्चो के नाम सारे अरबस्तान से आयात (Import) करते है! क्यों? महमद ने कहा इस लिए! ये तो इस्लाम, जैसे धर्म की आड में अरब श्रेष्ठता का विषयला साम्राज्यवाद ही हो ऐसा प्रतीत होता है!
  • इतना ही नही ये मुस्लिम अपनी कमाई में से कमसे कम १०% जकात के रूप में महमद की मातृभूमि अरब देशो को भेजते है! यह भी इस्लामी सुन्ना है!
  • अपना घर बार बेचकर हज की यात्रा करने वाले कई मुस्लिम आप को भारत पाकिस्तान और अफ्रीका के अनेक भागो में मिलेंगे! इससे अरब राष्ट्रों को इतना पैसा मिलता है की कोई भी काम किये बिना वे राजा के समान जीवन बिता सकते है! यदी उनका तेल समाप्त हो जाए तो भी !!

महमद का इस्लाम उसके देश बंधूओ (अरबो) के लिए एक वरदान सिद्ध हुआ है और अरबेतर (जो मुस्लिम अरब नही है वे) अरब राष्ट्र के गुलाम, जिन्हें अपने आप में कोई अस्तित्व नही!
इसी महमद की सीख है की उसे न मनने वाले काफिरो है! जिन्हें कतल करना भी महमद का सुन्ना (आचरण) है! काफ़िर वे है जो महमद का आचरण नही करते! इस लिए वे सब के सब नर्क में सड़ेंगे! क्या ये विचार धारा का पाठ पढा के शांति और सुखी जीवन संभव है?

यदि कोई मुस्लिम इस सुन्ना को नही पलता तो वह नर्कभागी काफ़िर हो जाएगा यही इस्लामी साहित्य बताता है!

यहा मै साईं भक्तो से पूछना चाहता हू की क्या दाढ़ी बढ़ाना या किसी विशिष्ठ रंग से उसे रंगना मोक्ष प्राप्ति का साधन आप मान सकते है?
आप मानते हो “सभी धर्म एक समान” तो क्या आप मानते है की बैठ कर मूतने में और फिर किसी सड़ी हुई ईट को अपनी लूली पर घुमाने में कोई महान अध्यामिक रहस्य छुपा है?

क्या इस्लाम कोई धर्म है या लोगो को एक व्यक्ति की कार्बन कोपी बनाने की प्रकिया? जिस प्रक्रिया में धर्म के समोहन से उन्हें अरब श्रेष्ठता का दास बनाया जाए?

महमद का सुन्ना मुसलमानों को ये भी सिखाता है की जब बल से काफिरों को मुस्लिम बनाना संभव नही हो तो तुम झूठ बोल कर इस्लाम को फैला सकते हो!
— Qur’an (16:106) http://www.cmje.org/religious-texts/quran/verses/016-qmt.php#016.106
— Qur’an (2:225) http://www.cmje.org/religious-texts/quran/verses/002-qmt.php#002.225

यह झूठ बोलना, जो इस्लाम का प्रसार करने हेतु है उसे अल-तकिया कहा जाता है! संदर्भ: http://wikiislam.net/wiki/Lying_and_Deception_in_Islam
http://en.wikipedia.org/wiki/Taqiyya

अब इस्लाम की इस पार्श्व भूमी को जानकर हम साईं बाबा की कहानी को देखते है! मै स्वयं एक समय साईं भक्त था इस लिए कई बार साईं सतचरित पढ़ चूका हू और आपने भी पढा होगा? चलो हम उसकी घटनाओ को फिर से देखेंगे……

साईं बाबा नियमित रूप से नमाज पढते थे और कुरान का अध्ययन करते थे जिसकी शुरुवात अल फातिया (कुरान का पहला अध्याय) से करते थे!

मित्रों, कुरान का अध्ययन और पठन साईं बाबा नियमित रूप से करते थे और उपदेश करते थे की सभी धर्म और धर्म ग्रन्थ (जिसमे वे इस्लाम को भी एक मानते थे) मानवता की सीख देते है!

चलो आज हम देखते है उस कुरान में क्या दिया है? कुछ आयते आप स्वय पढ़िए और निर्णय कीजिये!

“O ye who believe! Murder those of the disbelievers (kafirs) …. and let them find harshness in you.” (Repentance: 123)


कुरान सूरा ९ आयात १२३

http://quranhindi.com/

“Humiliate the non-Muslims to such an extent that they surrender and pay tribute.” (Repentance: 29)

कुरान सूरा ९ आयात २९

“Certainly, God is an enemy to the unbelievers.” ( The Cow: 90 )
कुरान सूरा २ आयात ९०

“God has cursed the unbelievers, and prepared for them a blazing hell.” ( The Confederates 60 )

“Do not let non-Muslims enter mosques. They will go to hell.” ( Repentance: 17 )

“O ye who believe! The non-Muslims are unclean. So let them not come near the Inviolable Place of Worship.” (Repentance: 28)
कुरान सूरा १७ आयात १७

“I [Allah] shall cast terror into the hearts of the unbelievers. Strike them above the necks, smite their finger tips”. (Qur’an 8.12)

काफिरों के प्रति इतनी क्रूरता और घृणा करने वाला कुरान शांति और प्रेम का संदेश कहा दे रहा है? सामान्य द्वेषान्ध मुस्लिम कुरान के इस सीख का जीता जगता प्रमाण है!

फिर साईं भक्तो से मेरा प्रश्न है की साईं बाबा ने कुरान शांति का संदेश देता है ऐसा झूठ क्यों बोला?

यदि तुम ऐसा कहोगे की साईं बाबा कुरान ठीक से पढ़ नही पाए तो भी ठीक नही, क्योके तुम मानते हो की वे तो “अनंत कोटि ब्रम्हांड नायक और अंतर्यामी है”

इसका उत्तर तुम नही दे सकते! क्यों की तुम साईं के अल तकिया का शिकार हो (जैसे एक समय मै भी था)! उसके समोहन में तुम इतने अंधे हो चुके हो की सत्य को भी नही देख सकते!

आज लव जिहाद में फसकर इस्लाम के चंगुन में अटकने वाली लड़किया अपने इस्लाम पूर्व जीवन में इसी साईं के “सभी धर्म एक समान” के अल तकिया का शिकार होती है! अर्थात, लोगो को इस्लाम के जाल में फासने के लिए इन जिहादियों की साईं बाबा मरणोपरांत बहुत सहायता कर रहे है!

तुम कहते हो की इश्वर को हम किसी भी नाम से कहे तो क्या फर्क पड़ता है फिर हम उसे अल्ला ही क्यों न कहे! अब आप ने देखा की कुरान का अल्ला काफिरों को नर्क की आग में झोक देता है, केवल इस लिए की वे महमद को नही मानते! क्या ऐसे दुरात्मा को भी तुम भगवन कह सकते हो?
यदि हा! तो इश्वर और शैतान में अंतर ही क्या है?

साईं के समोहन से निकलो जो तुम्हे अज्ञान के अंधकार में डूब्बो कर इस्लाम की अरब काल-कोठडी में डाल देगा! समय है इस अंधकार जे जाग कर सत्य के प्रकाश की और चलने का!

एक भूतपूर्व साईं भक्त