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सौजन्य से – आर. के शर्मा

भारतीय धर्मों में शरीर की पवित्रता के साथ विचारों की पवित्रता होने को भी आवश्यक माना गया है. इसलाम में पवित्रता को पाकीजगी या तहारत कहा जाता है. यद्यपि कुरान में शरीर की शुद्धता के बारे में बहुत विस्तार से नहीं लिखा है, परन्तु प्रमाणिक हदीसों में शरीर की शुद्धता के बारे ने बड़ी बारीकी से लिखा है.

यहां तक शौच के बारे में भी नियम बना दिए हैं. जिनको “शौचालय शिष्टाचार (Toilet Etiquette) या “अम्र अल हाजअल अदब “المرحاض الآداب”” कहा जाता है.

इन नियमों को पढ़ने के बाद आपको इस्लाम की महानता, उसकी वैज्ञानिक सोच और मानसिकता का अंदाजा हो जायेगा. क्योंकि हदीसों से जो बात छूट गयी थी, उसे मौलवियों में अपने फतवों से पूरी कर दी है. पहले कुरान, फिर हदीस और अंत में फतवे से इस बात को स्पष्ट करते हैं. देखिये –

1-औरतें नापाक होती हैं —

बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस्लाम में भी छुआ छोत मानी जाती है. क्योंकि किसी भी स्त्री को छू जाने से पुरुष अशुद्ध समझा जाता है. कुरान में इसका यह उपाय बताया है.

“अगर तुम में से कोई शौच करके आया हो, या स्त्री को हाथ लगा दिया हो, और उस समय पानी नहीं हो, तो वह ऊंची जगह जाकर अपने मुंह और हाथों को मिट्टी से रगड़ दे. क्योंकि अल्लाह तुम्हे नहाने कि परेशानी में नहीं डालना चाहता “सूरा -मायादा 5 : 6.

2-शौचालय में शरण —

क्यों इस्लाम में जिन्नों, टोना करने वालों और बुरी नजर वालों के डर से बचने के लिए शौचालय में शरण लेने को कहा गया है, जो इन हदीसों से साबित होता है.

जैद बिन अकरम ने कहा कि तुम जब भी शौचालय जाओ, तो जिन्नों से बचने के लिए यह दुआ पढ़ते रहो “अल्लाह मैं बुरे पुरुष और स्त्री शैतानो से बचने के लिए इस जगह तेरी शरण में आता हूँ “अबू दाऊद-किताब 1 हदीस 6.

“अनस बिन मालिक ने कहा कि, जब भी रसूल शौचालय जाते थे तो, यह दुआ पढ़ते रहते थे “मैं जादूगरों और बुरी नजर वालों की नजर से बचने के लिए इस जगह अल्लाह की शरण में आता हूँ “सही मुस्लिम -किताब 3 हदीस 729.

“अनस बिन मालिक ने कहा कि रसूल शौचे जाते समय यह दुआ पढ़ते थे “अल्लाहुमा इन्नी अऊजू बिक मिनल खुबुसी वाल खुबैसिया “यानी अल्लाह मैं हरेक बुरे और बुरी शक्तियों से बहाने के लिए यहाँ तेरी शरण में आता हूँ “बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 144.

3-अल्लाह का निवास शौचालय —

जो लोग मक्के के काबा को, और किसी मस्जिद को अल्लाह का निवास समझते हैं, वह अज्ञानी हैं, वास्तव में अलह का निवास शौचालय में है, जो इस हदीस से साबित होता है.

“अबू सईद अल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा कि जो लोग शौचालय में एक दूसरे के साथ अभद्र बातें करते हैं,vवह सब बातें वहां मौजूद अल्लाह सुनता रहता है.vऔर क्रोधित होता है. और क़यामत के दिन उनको सजा देगा “अबू दाउद- किताब 1 हदीस 15.

4-विषम संख्या के पत्थर —

क्यों मुसलमान मल त्याग के बाद अपनी मलेंद्रिय को पानी से धोने की बजाय पत्थरों से रगड़ देते हैं. और बिना किसी वैज्ञानिक कारन के रसूल अपने अंध विश्वास के कारण मलेंद्रिय को घिसने के लिए विषम संख्या (Odd Number) के पत्थरों का प्रयोग करने को कहते हैं, देखिये.

“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि, जो भी व्यक्ति शौच के बाद अपनी मलेंद्रिय (Anus) को साफ करना चाहे तो उसे इसके लिए विषम संख्या के पत्थर लेना चाहिए. “बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 162.

“सलमान ने कहा कि रसूल ने कहा कि मलत्याग के बाद अपनी मलेंद्रिय को घिसने के लिए कम से कम तीन पत्थर जरूर रख लेना चाहिए.”सही मुस्लिम -किताब 2 हदीस 505.

यही कारण है कि मलत्याग के बाद पानी का प्रयोग न करने से मुसलमानों के शरीरों से दुर्गन्ध निकलती रहती है , जिसे छुपाने के लिए वह इत्र लगते रहते हैं.

5-ढाल की आड में पेशाब —

युद्ध के समय ढाल का प्रयोग तलवार के वारों से बचने के लिए होता है, लेकिन रसूल अपनी पेशाब के छींटों से खुद को बचने के किये ढल का इस्तेमाल करते थे. इस हदीस से साबित है —

“अम्र इब्न अल आस ने कहा कि मैं और अब्दुर्रहमान रसूल के पास गए तो वह एक चमड़े कि ढल की आड़ लेकर एक औरत की तरह छुप कर पेशाब कर रहे थे. और जब उन्होंने हमारी बातें सुनी तो बोले क्या तुम नहीं जानते कि बनी इस्रायेल के लोग अपनी जमीं से वंचित क्यों हो गए. क्योंकि उनकी पेशाब के छींटे जमीन पर गिरे थे. इसीलिए मैं ढल से पेशाब के छींटे रोक रहा हूँ “अबू दाउद -किताब 1 हदीस 22.

6-नदी में मलत्याग —

मुसलमान भी नए नए तरीके खोज सकते हैं, यह इस हदीस से पता चलता है, जिहादी नदी के बहते हुए पानी में ही मलत्याग करते थे. और अपने अफ साफ हो जाते थे. उनको पत्थरों कि जरूरत नहीं होती थी. यह इस हदीस का आशय है, देखिये —

“अबू हुरैरा ने बहत्त कहा कि हम लोग रसूल के साथ अरफात के युद्ध के बाद वापस आ रहे थे, फज्र का वक्त होने वाला था, तो लोगों ने पानी की बहती धारा ही शौच कर दिया. यह देख कर रसूल ने कहा कि अब इन लोगों को सुद्ध होने कि कोई जरुरत नहीं है. क्योंकि यह अपने आप ही शुद्ध हो गए हैं फिर रसूल ने सूरा तौबा 8 :108 आयत सुना दी “अबू दौउद -किताब 1 हदीस 44.

जिस समय जिहादी नदी के पानी में मलत्याग कर रहे थे, तब रसूल ने जो आयत सुनाई थी, वह इस प्रकार है.

“तुम ऐसी जगह में खड़े हो (पानी में) और कुछ ऐसे लोग हैं, जो उसी में पाक होना चाहते हैं, और अलह ऐसे ही पाक लोगों को पसंद करता है. “सूरा -तौबा 9 :108.

7-बाइबिल के पन्नों से मल साफ करो —

यहाँ तक इसलाम की शरीर सम्बन्धी पवित्रता और अंधविश्वास के बारे में थोड़ी सी जानकारी दी गयी है. अब मुसलमानों में दुसरे धर्मों के प्रति कितनी नफ़रत है, इसका उदहारण आपको इस फतवे से मिल जायेगा. जिसमे यहूदियों और ईसाइयों के पवित्र ग्रंथों तौरेत और इंजील यानि बाइबिल को मलत्याग के बाद अपनी (anus) को साफ करने के लिए टोइलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करने को उचित और जायज बताया गया है. यहाँ पर हिंदी अनुवाद के सहित अंगरेजी और अरबी भी दी जा रही है.

सवाल – क्या किसी व्यक्ति को तैरत और इंजील का अपमान करने पर इस अधर पर काफ़िर घोषित किया जा सकता है, कि इन किताबों में अल्लाह ताला के वचन शामिल हैं ?

Question: “Does someone who insults the Torah or the New Testament engage in apostasy, given that these include some words of God?

जवाब -ऐसा करने कि अनुमति नहीं दी जा सकती है, कि तौरेत और इंजील में अल्लाह टला का नाम है, और वह पूरी तरह से सच हैं. क्योंकि काजी शमशुद्दीन आर रूमी (1004) ने अपनी किताब “फिक्का अल निहायत “में कहा है कि इन किताबों का आदर करने कि अनुमति नहीं है. उन्होंने फिक्का में कहा कि फिलोसोफी कि किताबें, तौरेत और बाइबिल का नया नियम भ्रष्ट किताबें हैं, जिनामे अल्लाह का नाम कहीं नहीं है. और इन किताबों का उपयोग मलत्याग के बाद अपनी गुदा (anus) साफ करने के लिए करना चाहिए.

Answer: “It would be impermissible to disdain the Torah and New Testament if they contained the truth and the name of the exalted, such as the name of God the Most High. Whoever does this [i.e., disrespect the books] knowingly and by choice would be considered an apostate and would be despised by God. But [in fact] the Torah and New Testament do not have anything exalted in them. They are known to have been corrupted, so there is no problem disdaining them.

Ash-Shams[ad-Din] Ar-Ramli [d.1004 A.D.] said in [his book of fiqh] Nihayat al-Muhtaj: “It is impermissible to use respected books like those of hadith and fiqh for anal cleansing after defecation (al-istinja’,الأستنجاء ), but non-respected books like philosophy, Torah and the New Testament, which are known as corrupt and which do not contain exalted names, can be used for anal cleansing after defecation.”Mawsu’at al-Fatawi, Islamweb, Fatwa No. 40378, November 23, 2003”.

فتوى أزهرية بإهدار دم الألمانية دينا ميلانى بعد ان عبرت عن رأيها عن القرأنكتب عمرو جادأفتى الشيخ على أبو الحسن رئيس لجنة الفتوى الأسبق والمستشار السابق لشيخ الأزهر، بإهدار دم الفتاة الألمانية دينا ميلانى والتى تبنت دعوة على الفيس بوك لاستخدام القرآن كورق” تواليت”، مؤكدا أنه فى حال صحة ما نسب إليها فيجب قتلها إذا أمكن الوصول إليها.

وقال أبو الحسن لليوم السابع، رغم أن هذه الفتاة لا تخاطب بأحكام الشريعة نظرا لاختلاف ديانتها إلا أن ما فعلته وما تدعو إليه هو “سفالة” لا يمكن الرد عليها بالسباب فقط، لأن الله يأمرنا بألا نسب أصحاب الديانات الأخرى فيسبوا ديننا، ولكنها ارتكبت جريمة لا يقبلها أى إنسان لديه ذرة من الإيمان”.

وأضاف أبو الحسن أنه يجب على الدولة المصرية أن تخاطب نظيرتها الألمانية لاتخاذ كافة الإجراءات القانونية ضد هذه الفتاة “الجاهلة” لازدرائها الدين الإسلامى .” .

و يجدر الاشارة ان جامع الازهر هو المسؤول عن احداث الفتنة الطائفية في مصر بين المسلمين و الاقباط و التي تسببت اخرها بمقتل قبطي و جرح ثلاثة.

و من جهة اخرى اعلنت دينا ميلاني انها لا تكره المسلمين و لكن تكره الاسلامو هي لا تحقد على اي شخص.

و قالت “اشعر بالشفقة على المسلمين المساكين الذين هم ضحيه لارهاب شيوخ جامع الازهر الارهابيين.

पाठकों से निवेदन – इस लेख और इस निंदनीय फतवे को पढ़ने बाद भी क्या आप जकिया नायक जैसे इस्लामी प्रचारकों और मक्कार मुस्लिम ब्लोगरों की इन बातों पर विश्वास करेंगे कि इस्लाम प्रेम का सन्देश देता है. और सभी धर्मों का आदर सिखाता है और नफ़रत तो हिन्दू फैलाते हैं.

बताइये यदि इस फतवे कि जानकारी ईसाई मित्रों को पता चले और वह कुरान के बारे में सवाल करते किसी पादरी से ऐसा ही आदेश निकलवा लायें तो क्या होगा. अभी भी ईसाईयों की संख्या सबसे अधिक है जो बाइबिल को मानते है. और बाइबिल में तौरेत और इंजील शामिल है.यह निर्विवाद सत्य है जिनका शरीर हमेशा गन्दा रहता है, उनके विचार भी उतने गंदे होंगे.

http://wikiislam.net/wiki/Qur’an,_Hadith_and_Scholars:Toilet_Etiquette

http://wikiislam.net/wiki/Fatwa:_It_is_Permissible_to_Use_the_%22Torah_and_the_New_Testament…_for_Anal_Cleansing_after_Defecation%22