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सौजन्य से – आर. के शर्मा

विश्व में अनेकों धर्म और संप्रदाय प्रचलित हैं. लेकिन इस्लाम केवल अपनी मान्यताओं और विश्वास को ही प्रमाण मानता है. और दूसरों को मनवाने का प्रयास करता रहता है. इस्लामी परिभाषा में इस विश्वास को ही ईमान कहा जाता है. भले ही ऐसा विश्वास या मान्यता तर्क सम्मत नहीं हो. मुसलमान उसे सही मानते हैं.

साधारण लोग इस्लाम के सुन्नी और शिया समुदाय के बारे में जानते हैं. और उनकी अधिक संख्या होने के कारण उन्हीं को इस्लाम का सही रूप समझ लेते हैं. क्योंकि इन दौनों फिरकों का मुख्य आधार अल्लाह और कुरान ही हैं. और बाकी मान्यताएं जैसे, रसूल, जन्नत -जहन्नम, कियामत, कलमा और नमाज आदि इन दौनों से सम्बंधित हैं.

मुसलमान अल्लाह को साबित करने के लिए तर्क देते हैं कि ऐसा कुरान में लिखा है, और जब कुरान की प्रमाणिकता की बात आती है तो कहते हैं यह अल्लाह की किताब है. जबकि यह दौनों बाते एक दूसरे पर आधारित है. लेकिन बहुत लोगों को नहीं पता होगा कि मुसलमानों का एक ऐसा काफी बड़ा फिरका भी है जो अल्लाह और कुरान के अलावा अन्य बातों के बारे में बिलकुल विपरीत विचार रखता है. इस इस्लामी समुदाय को ” अलवीعلوية” मुसलमान कहा जाता है.

इनके बारे में इसलिए बताना जरुरी है, क्योंकि इन्हीं के साथ अल्लाह की मौत का रहस्य भी जुड़ा हुआ है. इसलिए इस लेख को ध्यान से पढ़िए.

1-अलवी लोगों का परिचय —-

मुहम्मद साहब के समय में ही मुसलमानों में गुटबंदी और मतभेद होने लगे थे. क्योंकि इस्लाम तर्क हीन मान्यताओं पर आधारित था. और मुहम्मद साहब के ससुर हुकूमत चाहते थे. मुहम्मद साहब अपने चचरे भाई और दामाद अली को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे. क्योंकि उसी के योगदान से इस्लाम फैला था. लेकिन मुहम्मद साहब के ससुर अबू बकर ने छल करके खुद को खलीफा बना लिया. इससे अली के समर्थक अलग हो गए, जिन्हें अज शिया कहा जाता है.

ऐसा ही एक फिरका ” अलवी” है, जिसे ” नुसैरिया نصيريون‎ ” भी कहा जाता है. यह नाम शियाओं के 11 वें इमाम हसन अल अस्करी इब्ने नुसैर के नाम से लिया गया, जिसका जन्म सन 873 में हुआ था. अलवी अधिकांश सीरिया, लेबनान, इराक और कुछ पाकिस्तान में भी हैं. इनकी कुल संख्या एक करोड़ पैंतीस लाख है. सीरिया का राष्ट्रपति ” हाफिज अल असद” भी अलवी है. जो सन 1970 में राष्ट्रपति बना था. कुछ लोग अलवियों को शिया कहते हैं, लेकिन यह सुन्नी और शिया से बिलकुल अलग और विपरीत विचार रखते हैं. जो इस प्रकार हैं.

2-अलवी मान्यताएं —

सभी अलवी खुद को ” अब्दुन्नूर ” यानि प्रकाश का दास कहते हैं. और मानते हैं कि जड़ चेतन सभी प्रकाश से उत्पन हुए है. और प्रकृति खुद ही चल रही है. और उसको बनाने वाला अल्लाह नहीं है. समस्त जगत सदा से है और हमेशा रहेगा . और आत्मा भी अजर और अमर है. अलवियों के पांच विभाग हैं.

1.शम्शिया (सूर्य के उपासक)

2. कमरिया (चन्द्र के उपासक)

3. मुर्शिद (सलमान फारसी के भक्त)

4. हैदरिया (हैदर के भक्त)

5. गैबिया (रहस्यवादी).

लेकिन यह सभी अली इब्न अबूतालिब को ही अल्लाह मानते हैं, जिसने इस पृथ्वी पर अवतार लिया था. इसके अतिरिक्त अलवी आत्मा के पुनर्जन्म को भी मानते है और मानते हैं कि पापी लोग मर कर अन्य प्राणियों कि योनी में जन्म लते हैं. और जन्नत और जहन्नम कोई चीज नहीं है. कर्मों का फल यहीं या अगले जन्म में मिल जाता है.

3-कुरान कलमा से इंकार —

अलवियों का दावा है कि कुरान अली ने बनायी थी और मुहम्मद को सिखाई थी. और मुहम्मद की मौत के बाद सुन्नी खलीफाओं ने कुरान को बदल दिया था. वर्त्तमान कुरान नकली है. इसलिए अलवी “किताबुल मजमूअ كتاب المجموع‎ ” नामकी किताब पढ़ते हैं जिसमे सिर्फ 16 सूरा (Chapters) हैं. जिसे सिर्फ फ्रेंच भाषा में अनुवादित किया गया है. इसमे कुरान की वह आयतें हैं जिसमे अली को अल्लाह बाताया गया है, लेकिन कुरान से निकाल दिया गया. इसके अतिरिक्त अलवी ” किताबुल मशायख ” यानि Manual of Shaikhs और ” किताब तालीम दीनिया अल नुसैरिया ” भी पढ़ते हैं जिसमे उनके नियम दिए गए हैं अलवी कुरान के साथ नमाज भी नहीं पढ़ते, यहाँ तक इस्लाम का मुख्य आधार कलमा भी नही पढ़ते, लेकिन कलमा की जगह यह प्रार्थना बोलते है.

‘”أشهد أن لا إله إلا == حيدرة الأنزع البطين” अशहदु अन्ना ला इलाह हैदर अंज अल मतीन ”

و لا حجاب عليه إلا == محمد الصادق الأمين” व् ला हिजाब अलैहि मुहम्मद अस्सादिक अल अमीन ”

و لا طريق إليه إلا == سلمان ذو القوة المتين” व तरीक इलैह इल्ला सलमान जुल कुव्वत अल मतीन ”

अर्थ – मैं गवाही देता हूँ कोई अल्लाह नहीं है, सिवा अली इब्न अबू तालिब के वही इबादत के योग्य है. इसमें पर्दा नहीं कि मुहम्मद सच्चा था और सलमान के अलावा कोई द्वार नहीं है.

“I testify that there is no God but ‘Ali ibn-Talib the one to be worshipped, no Veil but the Lord Muhammad worthy to be praised, and no Gate but the Lord Salman al-Farisi the object of love”.

अलवी मुसलमानों के वर्त्तमान कलमा को बेकार बता कर उस से इंकार करते हैं, देखिये विडियो —

Islamic Kalma rejected by Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri) as he says Ali Mabood

अलवी क़ुरबानी की ईद भी नहीं मनाते और न लड़कों की खतना करते हैं. और न किसी को अपने धर्म में शामिल करते हैं.

4-कुरान अली की बनायीं —

यद्यपि मुसलमान दावा करते हैं कि कुरान अल्लाह के द्वारा भेजी गयी किताब है. उसने अपने रसूल मुहम्मद पर नाजिल किया था. लेकिन अलवियों का दावा है लोग जिसे अल्लाह बता रहे हैं वह अली ही था. जो छुप छुप कर मुहम्मद को कुरान सिखाता था. सुन्नी खलीफाओं ने कुरान में हेराफेरी करके इस बात को दबा दिया था. लेकिन इस आयात से अलवियों कि बात सत्य साबित होती है.

“वह परदे के पीछे रहकर किसी को भी “वही ” (कुरान की आयतें) भेज सकता है, बेशक अली महान तत्वदर्शी है ” सूरा-अश शूरा 42 :51.

” وَرَاءِ حِجَابٍ أَوْ يُرْسِلَ رَسُولًا فَيُوحِيَ بِإِذْنِهِ مَا يَشَاءُ إِنَّهُ عَلِيٌّ حَكِيمٌ ” 42:51

from behind a veil, reveal, by His leave, whatever He wills to revealfor, verily, He is exalted, wise. (42:51).

कुरान की यह एक ही आयत यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि अली ही गुप्त रूप से कुरान बनाया करता था. और मुसलमान भी कुरान बनाने वाले को अल्लाह बताते हैं.

5-अलवी त्रैतवाद —

हिन्दू और ईसाईयों की तरह अलवी भी तीन शक्तियों पर विश्वास करते है.

पहिला अली है जिसे “मायनी” अर्थात Meaning कहा जाता है.

दूसरी शक्ति मुहम्मद है जिसे “इस्म” कहा जाता है इस्म अर्थ नाम (Name) होता है. जिसे अली बनाया है. जैसे नाम मायने के बिना बेकार होता है उसी तरह अली के बिना मुहम्मद बेकार होता है.

तीसरी शक्ति सलमान फारसी है जिसे “बाब” अर्थात द्वार (Gate) कहते हैं. बाब इस्म को मायनी से मिलाने का साधन है.

अलवी प्रार्थना में कहते हैं कि मैं बाब के रस्ते से निकल कर इस्म (मुहम्मद) को सलाम करता हूँ और आगे बढ़कर मायनी (अली) की इबादत करता हूँ. अलवी मानते हैं कि अली ही वह शक्ति है जो हरेक युग में अवतार लेता है. और किसी न किसी व्यक्ति के द्वारा किसी को दर्शन और ज्ञान देता है जैसे अली ने सलमान फारसी के द्वारा मुहम्मद को कुरान बना कर दी थी. अलवी अपनी आत्मशुद्धि के लिए रोज अली, फातिमा, हसन, हुसैन और मुहसिन को याद करते हैं यही उनकी इबादत है.

6-अली ही अल्लाह था —

जैसे कोई अपराधी समझता है कि मैंने अपने किये सभी अपराधों के सभी सबूत मिटा दिए हैं. लेकिन उसके कुछ न कुछ सबूत बचे रहते हैं. और उन्हीं सबूतों के अधर पर वह पकड़ा जाता है इसी तरह कुरान में कुछ ऐसे सबूत अभी भी बाकी हैं जिन से आसानी से सिद्ध किया हो जाता है कि अली ही अल्लाह था. कुरान कि इन आयतों को गौर से पढ़िए-

,.”और उसी ने इंसान को पैदा किया, और फिर ससुराली रिश्ता कायम किया ” सूरा- फुरकान 25 :54.

“وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرً”25:54″

उसने दयालुता से अपना हिस्सा दे दिया और, उसे सचमुच उच्च ख्याति मिली ” सूरा -मरियम 19 :50.

“وَوَهَبْنَا لَهُمْ مِنْ رَحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا “19:50.

तफसीरुल मीजान में इन आयतों की व्याख्या ने कहा है उसने अली यानि अल्लाह ने जगत बनाया और फिर इन्सान के अवतार में मुहम्मद से ससुराली सम्बन्ध किया. (अली ने मुहम्मद की बेटी फातिमा से शादी की थी. इसलिए मुहम्मद उसका ससुर बन गया) दूसरी आयत में बताया है, कि अली ने कुरान बनाने का सारा श्रेय अपने ससुर को दे दिया. जिस से मुहम्मद का नाम हो गया और लोग मुहम्मद को ही रसूल कहने लगे. इस आयत में “अलिय्या” शब्द आया है. जो अली का नाम सूचित करती है इसके अतिरिक्त कुरान कि इन आयतों में भी अली का उल्लेख है जो उसे अल्लाह साबित करती हैं.

देखिये विडियो —

Mola Ali is Superior than Allah. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri).

इसके अलावा इन आयतों से भी अली की अल्लाह से तुलना की गयी है.

1-वह अली उच्च और सबसे महान है” सूरा -बकरा وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ ” 2:255

2-वह अली उच्च और महान है ” كَانَ عَلِيًّا كَبِيرً”सूरा – निसा 4:34

3- वह अली उच्च और सबसे महान है “هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ “सूरा – लुकमान 31:30

4-वह अली सबसे बड़ा और महिमाशाली है ” وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ “सूरा- अश शूरा 42:4

सुन्नी चालाकी से अली शब्द को संज्ञा (Noun) की जगह विशेषण (Adjective) बताते हैं. जबकि इन चारों आयातों में अली को सबसे बड़ा और सबसे महान कहा गया है, जो सिर्फ अल्लाह के लिए ही कहा जाता है.

इससे भी साबित होता है की अली ही अल्लाह बना हुआ था और सबूत के लिए देखिये विडियो —

Prooving Mola Ali as Allah from Quran. Ghazanfar Abbas Tonsvi (Nusehri)

7-अल्लाह की मौत —

इन सभी प्रमाणों से स्पष्ट सिद्ध हो गया है कि अल्लाह नाम की कोई शक्ति या वास्तु नहीं थी. यह मुसलमानों का पाखंड था ताकि लोगों को डराकर मुसलमान बनाया जा सके और कुरान कोई आसमानी किताब नहीं है. वह अली ने बनायीं थी जो अल्लाह बना हुआ था और एक मनुष्य था और जैसे सभी मनुष्य एक दिन मर जाते हैं वैसे ही 27 जनवरी सन 661 को (तदनुसार 21 रमजान हि० 40) में 63 की आयु में इराक के कूफा शहर में मर गए उनकी हत्या कर दी गयी थी और उसका मजार कुफा में मौजूद है. इस तरह असली अल्लाह उर्फ़ अली तो मर गया है और मर कर तारा बन गया. उससे डरना और उसकी इबादत बेकार है. सभी लोग अल्लाह की मौत की तारीख याद रखें और सबको बता दें.