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सौजन्य से – आर. के शर्मा

अल्लाह मियाँ अस्सलामु अलैक,

सबसे पहले तो हम आपसे इस बेअदबी के लिए माफ़ी मंगाते हैं, कि हमने रिवाज के खिलाफ आपको “अस्सलामु अलैकुमالسلام عليكم ” कि जगह “अस्सलामु अलैकالسلام عليك” कहा है. क्योंकि हमें आपके रसूल ने ही कहा था कि अल्लाह एक है. और अगर हम “अलैकुम عليكم” लफ्ज का इस्तेमाल करते तो आप एक कि जगह पूरी टीम माने जाते. आप तो अरबी की व्याकरण जानते ही होंगे.

आपको पता ही होगा कि मुहम्मद इकबाल नाम के एक आदमी ने भी आपसे इसी तरह शिकवा किया था और उसी इकबाल ने पाकिस्तान की बुनियाद रखी थी. लेकिन आज मजबूर होकर एक काफ़िर मुल्क में रह रहे हैं. और इकबाल की तरह हम भी आपके दरबार में अपनी शिकायत पेश कर रहे है. और ईमेल कर रहे हैं.

आप तो जानते हैं कि इकबाल के ज़माने में कंप्यूटर वगैरह नहीं थे. मुझे पूरा यकीन कि आपकी जन्नत में नेट का कनेक्शन जरुर लग गया होगा. हमें इसलए फ़िक्र हो रही है कि इन काफिरों ने साइंस में इतनी तरक्की कर ली है कि कहीं यह लोग आपकी जन्नत पर कब्ज़ा न कर लें

वैसे इन काफिरों का यह भी कहना है कि उन्होंने सारे ब्रह्माण्ड में खोज की है लेकिन आपका, आपके फरिश्तों, और आपकी जन्नत का कोई साबुत नहीं मिला है. आप जल्दी से किसी फ़रिश्ते को भेजिए ताकि इन काफिरों का मुंह बंद हो जाये. हम आपसे वादा करते हैं कि हम हरेक दस कदम पर मस्जिदें बनवा देगे, जिससे हमारा मुस्तकबिल महफूज रहे. और इस मुल्क के काफ़िर और मुशरिक हमेशा हमसे डरते रहें , क्योंकि हम इन्ही मस्जिदों में हथियार छुपाते है.

लेकिन हमारी कुछ समस्याएं है जो हमारी जिंदगी से जुडी हुई है. आप इसे हमारी शिकायत भी समझ सकते है. आपने कुरान में कहा है –

“सभी मुशरिक नापाक हैं “सूरा -तौबा 9 :28.

इसलिए हम इन मुशरिकों के स्कूलों में न तो अपने बच्चों को पढ़ाते और न उनके यहाँ काम करते हैं. हम अपना निजी धंदा करने पर मजबूर हैं. जैसे नकली नोट छापना, स्मगलिंग और नशे का व्यापर वगैरह. हमारे बड़े बच्चे भी इधर उधर लूट और गाड़ियों की चोरी करके घर का पेट भर रहे है. इतना होने पर भी हमारा और हमारे दस बच्चों को खाना मुश्किल से मिलता है.

आपने अपनी किताब कुरान में लिख दिया है,–

“जिस पर अल्लाह के आलावा किसी और का नाम लिया गया हो वह हराम है “सूरा -बकरा 2 :173.

इसलिए हम इन काफिरों और मुशरिकों द्वारा बनाई गयी किसी चीज को नहीं खाते है, कि पता नहीं उस पर किस का नाम लिया हो. हम तो बस सिर्फ हलाल गोश्त ही खाते है. अब तक हमने 7 ऊंट, 32 गाय बैल. 244 बकरे और हजारों मुर्गे मुर्गियां हजम कर ली हैं. इससे हमारे पूरे बदन से जानवरों की बदबू निकलती रहती है. और हमें इत्र लगाना पड़ता है.

हमारी इन्हीं गन्दी आदतों और अपराधी चरित्र के कारण लोग हमसे नफ़रत करते हैं. इसके बावजूद हम अपने आसपास के लोगों को गुमराह करने के लिए आपकी कुरान की यह आयत सुना देते हैं.

“जो इस्लाम के अलावा कोई दूसरा धर्म पसंद करेगा, तो उसे कबूल नहीं किया जायेगा, और ऐसा व्यक्ति आखिरत में घाटा उठाने वाला होगा ” सूरा -आले इमरान 3 :85.

कभी हमारी यह चाल सफल हो जाती है, और कुछ अकल के अंधे इस आयत की बात को सच समझ बैठते हैं, और हमारे जाल में फंस जाते हैं. फिर हम ऐसे लोगों को जिहाद के काम में लगा देते है अपना धर्म छोड़कर मुसलमान बनाने वाले लोग हमारे किये काफी उपयोगी होते हैं.

क्योंकि जब भी हम ऐसे लोगों से कहीं विस्फोट करवाते हैं, तो यही लोग फंस जाते हैं. और हम साफ़ बच जाते है. अल्लाह आप तो जानते हैं कि इन काफिरों के पास धन कि कोई कमी नहीं है, और हमारे मुल्क में इन्ही काफिरों की सरकार है. जो हमारे वोटों की खातिर कुछ भी कर सकती है. लेकिन बिना दवाब के यह काफ़िर सरकार आसानी से कुछ नहीं देती. इसलिए हम कुरान की इस आयत का पालन करते हैं. —

“और कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास धन दौलत का ढेर है, और अगर तुम उनसे मांग करोगे तो वह दे देंगे, लेकिन जब तक तुम उनके सरों पर सवार नहीं हो जाओ “सूरा -आले इमरान 3 :75.

अल्लाह हम आपके इसी हुक्म का पालन करते हुए इस काफी सरकार से रोज कोई न कोई मांग करते रहते हैं. और सरकार को कंगाल करने में लगे रहते हैं. आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि सेकुलर नामके कुछ मुशरिक हमारा पूरा समर्थन करते हैं, और हमारी हरेक नाजायज मांग को भी जायज साबित कर देते है, यही नहीं जब भी हम कोई भी अपराध या बम विस्फोट कर देते हैं यह सेकुलर लोग दूसरे लोगों पर आरोप लगा देते है.

हम तो इस मुल्क से सभी गैर मुस्लिमों का सफाया करना चाहते है. चाहे इसके लिए कितने भी गैर मुस्लिमों की क़ुरबानी क्यों न देना पड़े. हम इस्लाम के लिए कुछ भी कर सकते है, अगर मौका मिलेगा तो इन सेकुलर लोगों को भी ठिकाने लगा देंगे, यह कौन से हमारे वफादार हैं. यह भी सिर्फ सत्ता के लालची हैं. लेकिन आपने एक आयत ऐसी भेज दी है जो हमें समाझ में नहीं आ रही है, कि हम क्या करें, आपने कुरान में यह क्यों लिख दिया.

“कोई जीव बिना अल्लाह की मर्जी के ईमान नहीं ला सकता, और अल्लाह ही है जो लोगों पर कुफ्र और शिर्क की गन्दगी डाल देता है “सूरा -यूनुस 10 :100.

इस आयत ने हमारे इरादों पर रोक लगा दी है. अब लोग आपकी कुरान पर भी शक करने लगे हैं. कुछ लोग तो यह भी कहते है कि, लोगों को आप ही काफिर और मुशरिक बनाते रहते हो. और जब हम लोगों को मुसलमान बनने को कहते हैं, तो वह लोग कहते हैं. —

“हम तब तक कभी ईमान नहीं लायेंगे, जब तक कि वैसी ही किताब हमें नहीं दी जाये, जैसी अल्लाह ने दूसरों के रसूलों को दी थी “सूरा -अल अनआम 6 :125.

अल्लाह, अपने तो किताबों का प्रेस ही बंद कर दिया, और न ही आपका कोई फ़रिश्ता ही नजर में आया, हम लोगों को कैसे समझाएं.और अगर हम लोगों के सवालों का सही जवाब देते हैं तो हमें आपके इस्लाम की पोल खुलने का डर लगता है.

आजकल साइंस का जमाना है, बच्चा बच्चा होशियार हो गया है जब कोई तर्कपूर्ण सवाल करता है, तो हमारी हालत ऐसी हो जाती है.

“तुम ऐसी बातें न पूछो जो यदि खोल दी जाएँ तो खुद तुम्हे ही बुरा लगेगा. इसलिए तुम्हें सावधान रहना होगा “सूरा -मायदा 5 :101.

इसीलिए जब भी कोई हम से इस्लाम के बारे में कोई सवाल करता है, तो हम निरुतर हो जाते हैं, और दूसरे मजहब की बुराइयाँ निकालने लगते है, फिर जब इस से भी काम नहीं चलता तो हम गालियों पर उतर जाते है. क्योंकि हम अच्छी तरह से जानते हैं की अगर हम लोगों के सवालों का सही जवाब दे देंगे तो उसका उल्टा ही नतीजा होगा.

आप चाहें तो अपने रसूल से पूछ कीजिये, उन्हीं ने कहा है.

“तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे, और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए, तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए “सूरा -मायदा 5 :102.

इसीलिए हम इस्लाम के बारे में किसी प्रकार के सवाल जवाब से बचते हैं. इससे वक्त की बर्बादी है. वैसे भी हम अपनी कमजोर अकल पर जोर नहीं डालना चाहते. वाद विवाद और शाश्त्रार्थ तो यह काफ़िर हिन्दू किया करते हैं, हमें तो अपने रसूल की यही नीति पसंद है, जो कुरान में है. –

“और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये, तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना, और इस तरह उनको कुचल देना “सूरा -मुहम्मद 47:4.

अल्लाह मियां हम आपको भरोसा दिलाते है, और कसम खाते हैं कि इस दुनिया को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, आपको फरिश्तों ने खबर भेज दी होगी कि. पूरा अरब बर्बाद होने जा रहा है. मुसलमान आपस में ही लड़ रहे हैं. मुझे डर है कि यह झगडा आपकी जानत तक न पहुँच जाये. क्योंकि मुसलमान जहाँ भी हों लड़ाई जरुर करते हैं आपनी हूरों को छुपा दीजिये, गदाफी आने वाला है और उसे जन्नत में महिला बोडी गार्ड की जरुरत पड़ेगी. लिखना तो बहुत कुछ है लेकिन यहाँ समय की कीमत होती है, हमारा मेल मिलते ही जवाब जरुर भेजिए ताकि हम जिहाद की नयी जोजनाएं बना सकें.

आपके खिदमतगार.

नोट – कुछ समय पहले यह मेल एक मुस्लिम ने अंगरेजी में अल्लाह को भेजा था. उस से प्रभावित होकर यह मेल हिंदी में अल्लाह को भेजा गया है.और स्थान,परिस्थिति और समय को ध्यान में रखते हुए अंगरेजी मेल में कुछ परिवर्तन किया गया है. ताकि भाषा का प्रवाह बना रहे.मूल मेल की लिंक नीचे दी गयी है.

http://www.faithfreedom.org/Articles/abulkazem/email_to_allah.htm नाम शिकायती ईमेल

http://bhaandafodu.co.cc/