Tags

, , , , , , , ,


By: Saffron Hindurashtra

अभी तक मैं शिर्डी साईं के बारे मैं बहुत से लेख लिख चूका हु, हर लेख में कुछ नया पर उस पर आने वाले जवाब वही पुराने, साईं हिन्दू है और भगवान् भी है, पर किसी ने आज तक साईं के अवतारी या उसके चमत्कारी होने का प्रमाण नहीं दिया,

कुछ लोगो ने एक महिना पहले मेरे गुरूवार तक कुछ बुरा होने की बात खी थी और साईं कटुवे के प्रकोप का डर दिखाया था जो पूरी तरह गलत और झूठ साबित हुआ,
साईं की पूजा सनातन धर्म के अनुसार के विपरीत ही नहीं है बल्कि ये सनातन धर्म का खुले तौर पर अपमान और सनातनी परम्पराओं का सरेआम उल्लंघन करने जैसा है,
सनातन धर्म केवल मनुष्यों का धरम नहीं बल्कि सनातन तो प्राणी मत्र्के कल्याण और उनके पालन पोषण से लेकर उनके संरक्षण तक की एक सत्य अवधारणा है जो लाखो सालो से चल रही है,

सनातनी परंपरा में केवल इश्वर, अवतार, या देवता की पूजा ही मान्य है उसके अलावा सभी एक तरह से पाखंड ही है,

मंदिर में विग्रह स्थापना और इष्ट देवता की प्राण प्रतिष्ठा इन सबका एक विधान है पर साईं की पूजा करने वाले और उसके मंदिर बनाने वालो ने सभी मान्यताओं और परम्पराओं को ताक पर रख कर सनातन धर्म को एक अक्षुण हानि पहुंचाई है और आगे भी पहुंचा रहे है कैसे ये पढ़े,
इष्ट देव जो कुलदेवता या कुलदेवी होती है, साईं इनमे से दोनों ही नहीं है, क्युकी हर परिवार किसी न किसी कुल से जुड़ा हुआ है और हर कुल में कोई न कोई इष्ट प्रधान हुआ है, जैसे की कश्यप ऋषि के वंशज नाम के साथ कश्यप लगाते है और अपने मान्य कुल देवता को पूजते है,

इसी प्रकार से सभी जातियों में ये परमम्परा हजारो लाखो सालो से चली आ रही है, मेरी कुलदेवी भी माता शकुम्भरा है जो सहारनपुर में है, अब क्या साईं इन कुलो के जनम के समय से तो नहीं है क्युकी इसे तो मरे हुए भी १०० साल नहीं हुए है, तो ऐसे में इसका इष्टदेव होना संभव नहीं और इस नाते ये मंदिर के गर्भ गृह में नहीं बैठ सकते,

अब आगे है अवतार, भारत में अवतार परम्परा भगवान विष्णु के कुर्म अवतार के बाद से प्रारम्भ हुई है, उसके बाद अब तक नौ अवतार हो चुके है और दसवे अवतार है भगवान् कल्कि जो कलयुग के आखिरी पहर में जनम लेकर दुष्टों का वध करेंगे, साईं का इन में से किसी अवतार में जिक्र नहीं है, मानने वाले वेदों और पुरानो को झुठला कर उनका अपमान शौक से कर सकते है,

विष्णु के नौ अवतारों में से सिर्फ २-३ ही अवतार हि पूज्य है जैसे श्री राम, श्री कृष्ण, कही कही भगवान् परशुराम की पूजा होती है, बाकी किसी भी अवतार की पूजा कही नहीं होती, क्या ये है हमारी आस्था, की अपने भगवानो को जीवन भर न पूजे एक मुसलमान को गले लगाये फिरते है, साईं न ही रूद्र अवतार भी नहीं है इसलिए अवतार न होने के नाते मंदिर में इसे गर्भ गृह में नहीं बिठाया जा सकता,,

अब अगले है देवता, साईं न वायु देव है, न अग्नि देव, न पवन दे, प्राचीन काल में इन्द्र की पूजा होती थी और यज्ञ का एक भाग इन्द्र को मिलता था, अब इन्द्र पूजा भी बंद हो गयी है, सिर्फ दक्षिण भारत या उड़ीसा के कुछ भागो में इन्द्र पूजा होती है, किसी भी देवता में साईं का नाम नहीं आता तो इस कारण साईं को गर्भ गृह में नहीं बिठाया जा सकता,

अब बात आती है सनातन धर्म की मान्यताओं की, कुछ मुर्ख पाखंडियो ने धर्म को व्यापार बना कर रख दिया है, साईं को गुरु बना कर उसकी पूजा करने में लगे हुए है, अब इसी पर एक प्रसंग सुनिए

आदि गुरु शंकराचार्य के सामने कपाली ब्राहमणों ने शास्त्रार्थ की चुनोती रखी और आदि गुरु ने उन्हें हरा दिया, हार मानने के बाद कपाली ब्राह्मणों ने आदि गुरु शंकराचार्य को गुरु मान कर उनका मंदिर बना कर उनकी प्राण प्रतिष्ठा करके पूजा करने की बात कही,

ये सुनकर गुरु जी ने कहा की गुरु कितना भी महान हो वो भगवान् नहीं हो सकता और ये तर्क सही नहीं तो ये सोचिये की आप मेरी प्राण प्रतिष्ठा करके मुझे मंदिर में विराजित कर देंगे, इस कारण मेरी आत्मा यही रुक जाएगी और परमात्मा से उस आत्मा का मिलन नहीं हो पायेगा, जब मिलन ही नहीं हो पायेगा तो मैं आपको कैसे परमात्मा से मिलन करवा सकूँगा और जब परमात्मा से आपका मिलन नहीं करवा सका तो मैं गुरु कैसे हुआ..

ये सुनकर कपाली ब्राहमण गुरुवर की जय जय कार कर उठे और उनका मंदिर बनाने का विचार त्याग दिया,

अब आप ही सोचिये, अगर आप साईं को गुरु भी मानते है तो क्या ऐसा व्यक्ति गुरु हो सकता है जिसकी आत्मा यही रह गयी हो, क्युकी भगवान् तो ये है नहीं, जो प्रमाणित हो चूका है, इसलिए पाखंड से बाहर निकले और सत्य धर्म को पहचाने,

जो कुछ साईं दे सकता है क्या वो श्री राम नहीं दे सकते अगर दे सकते है तो साईं यानी बिचोलिये की क्या जरुरत और नहीं दे सकते तो साईं को राम से क्यों जोड़ रहे है,

अब भी किसी की आँखे न खुली हो तो मैं कुछ नहीं कह सकता ऐसे अन्धो के लिए, क्युकी ये आँख वाले अंधे है, प्राण से मरे हुए को मारा हुआ कहते है पर मन से मरे हुए को क्या बोले???
जय श्री राम
जय हिन्दुराष्ट्र