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परम्परा के अनुसार हरेक व्यक्ति का केवल एक ही व्यक्तिगत नाम (personal name) होता है. जिस के माध्यम से उसे पुकारा या पहिचाना जाता है.लेकिन वह व्यक्ति अपने नाम का जितना प्रयोग करता है, उससे अधिक लोग उसके नाम का प्रयोग या दुरुपयोग करते हैं. और यह बात अल्लाह के बारे में सही उतरती है. लोगों ने अकेले अल्लाह के नाम पर अनेकों युद्ध किये हैं, जिसमे करोड़ों निर्दोष लोग मारे गए. यही नहीं रोज लाखों जानवर अल्लाह के नाम पर मारे और खाए जाते है. यद्यपि अल्लाह ने अपने मुंह से अपना नाम बहुत कम जगह बताया है. और जिन लोगों ने अल्लाह के 99 नाम गढ़ लिए हैं वह सिर्फ अल्लाह गुण हैं, या विशेषताएं है, जिन्हें ” सिफात” कहा जाता है. और इन सिफातों के द्वारा अल्लाह की बढ़चढ़ कर तारीफ़ की जाती है, लेकिन अल्लाह के उस बुरे नाम को छुपा दिया जाता है, जो खुद अल्लाह न कुरआन में 5 बार बताया है हकीकत तो यह है कि जिस तरह अल्लाह को अजन्मा, और निराकार बताया जाता है उसी तरह अल्लाह ” अनामी name less ” भी है. जैसा कि इन हवालों से पता चलता है .

1- बेनाम के अनेकों नाम —

बच्चों का नाम उसके माता पिता रखते हैं, इसलिए अल्लाह का कोई व्यक्तिगत नाम नहीं है, जैसा कि मौलाना रूम में अपनी मसनवी में बिस्मिल्लाह की जगह यह लिख दिया है.

“بنامِ آں کہ او نامے ندارد، بہر مامِ کہ خوانی سربرآرد ”
“बनामे आं कि ऊ नामे नदारद , बहर नामे कि खुवानी सर बिरारद ”

यानी उसके नाम से शुरू करता हूँ जिसका कोई नाम ही नहीं है, उसे किसी भी नाम से पुकारो काम चल जाता है. मौलाना रूम की इस बात का कुरान भी समर्थन करती है, कुरान में लिखा है —–

“और सभी भले गुणों वाले नाम अल्लाह के ही हैं, तो तुम उसे उन्हीं नामों के द्वारा पुकारो “सूरा -अल आराफ 7 :180.”
“وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ”
“और तुम्हारे रब ने कहा कि तुम मुझे नाम से पुकारो ,मैं तुम्हारी पुकार का उत्तर दूँगा “सूरा -अल मोमिन 40 :60.”

इन आयतों यह खास बात है कि अल्लाह के केवल अच्छे नामों की बात कही गयी है , और अल्लाह के बुरे नामों को छुपा दिया गया है.

2-अल्लाह की झूठी कसम —

सब जानते हैं कि अल्लाह अपना राज्य चलाने के लिए फरिश्तों, नबियों और रसूलों कि मदद लेता है, लेकिन खुद को सर्वशक्तिमान और अकेला समर्थ साबित करने के लिए कभी एक वचन का प्रयोग भी करता है.जैसे —

” और वही है , जो तुम पर रहमत भेजता है , और उसी के फ़रिश्ते भी हैं “सूरा-अल अहजाब 33 :43.”
“هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ ”

(इस आयत में अल्लाह ने ” हुवهُو ” शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ He होता है).

” और वही है , जो तुम्हें रात को ग्रस्त कर लेता है ” सूरा -अल अनआम 6 :60″
“وَهُوَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ بِاللَّيْلِ ”

और फिर अल्लाह खुद को एक साबित करने के लिए अपनी गवाही के साथ फरिश्तों की गवाही भी देता है. जैसे —

” खुद अल्लाह की, फरिश्तों की और ज्ञान वालों की गवाही है. कि उसके सिवा कोई उपास्य नहीं है “सूरा-आले इमरान 3 :18.”

इस से सिद्ध होता है कि अल्लाह चाहता था कि काम तो फ़रिश्ते करें और लोग इबादत अल्लाह की करें .

3-अल्लाह शब्द में कई लोग शामिल —

हालांकि अल्लाह ने और उसके डर फरिश्तों ने गवाही देदी कि अल्लाह की सत्ता में कोई दूसरा शामिल नहीं है. अल्लाह के इन बयानों से यह बात झूठ साबित होती है, क्योंकि जगह जगह अल्लाह अपने लिए हम We (अरबी में नहनु ) शब्द प्रयोग करता है, जैसे —

“हमने तुमसे पहले भी मनुष्यों को रसूल बना कर भेजा है ” सूरा -नहल 16 :43″.

“और हमने लोगों की आँखों पर जादू कर दिया है “सूरा – अल हिज्र 15 :15.”

” निश्चय ही हमने मनुष्य को मिट्टी के सत से बनाया है “सूरा- अल मोमिनून 23 :12.”

” बेशक यह याद दिहानी ( reminder ) हमने उतारी है , और हम ही इसके रक्षक हैं “सूरा -अल हिज्र 15 :9.”
“إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ ”

( इस आयात में अल्लाह ने ” नहनुنحنُ” शब्द प्रयोग किया है जो वहुवचन we होता है )

अर्थात अल्लाह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक समूह (group ) है और जिसके Admin रसूल है, यह बात इस आयत से और स्पष्ट होती है.

“हे हमारे अल्लाह , राज सिंहासन के मालिक , आप जिसे चाहें राज्य प्रदान करें या छीन लें “सूरा -आले इमरान 3 :26.”
“قُلِ اللَّهُمَّ مَالِكَ الْمُلْكِ تُؤْتِي الْمُلْكَ ”

(इस आयत में अल्लाहुम्म اللَّهُمَّ शब्द से अल्लाह को पुकारा गया है, जिसका अर्थ हमारे अल्लाहो होता है. यानी सभी अल्लाह, यदि एक अल्लाह होता तो उसे “یا الله या अल्लाह ” कहा जाता ).

4-अन्य धर्मग्रंथों में ईश्वर के निजी नाम —

यदि कुरान और हदीसों का अध्यन करें तो अल्लाह ने अपने मुंह हे अपना नाम कभी नहीं बताया है. और न मुहम्मद साहिब को बताया था. परन्तु अल्लाह की किताब ” तौरेत ” यानी बाइबिल में एक जगह खुद मूसा को अपना असली निजी नाम बता दिया था.

” और जब मूसा ने पूछा कि मैं लोगों को तेरा क्या नाम बताऊँ जिस से उनको यकीन हो जाये तो जवाब आया कह देना मैं हूँ जो हूँ (हिब्रू में ” ये ही अशेर येही “और लेटिन में Ego sum qui sumAnd God said unto Moses: ‘I AM THAT I AM’ Exodus3:14.

“, אֶהְיֶה אֲשֶׁר אֶהְיֶה ”

इसी प्रकार जब पैगम्बर जरदुश्त ने ईश्वर (अहुर मज्द) से उसका नाम पूछा था तो उसने यह जवाब दिया था ” वीसान्तेमो ” अह्मि यत अह्मि ” मझ्दाओ नाम ” यानि मेरा बीसवां नाम यह है, जो महान है .

વીસાંસ્તૅમો અહ્મિ યત અહ્મિ મઝ્દાઑ નામ
ખોરદૅહ અવૅસ્તા-હૉરમઝ્દ યશ્ત-પાના.૧૫૪

यदि हम इन दोनो धर्म के अनुसार ईश्वर के नाम का अर्थ समझें तो यह वही नाम है जिसका उल्लेख उपनिषदों में किया गया है और वेदांती लोग प्रयोग करते हैं यह शब्द है -‘सोऽहम “.

5- अल्लाह ने अपना यह नाम रखा —

मुस्लिम विद्वान् भले ही अल्लाह के 99 अच्छे नाम रख लेकिन जब अल्लाह को नाम रखने का समय मिला तो उसने अपना बुरा नाम ही रख दिया और कुरान में पांच बार इसका उल्लेख है. —

“उन्होंने मक्कारी की, और अल्लाह सबसे बड़ा मक्कार है “सूरा -आले इमरान 3 :54.”
” ومكروا ومكر الله والله خير الماكرين -3:54

“यह लोग अल्लाह की मक्कारी से बेफिक्र हो गए हैं , तो अल्लाह की मक्कारी से बेफिक्र होने वाले घाटे में पड़ने वाले हैं ”
सूरा -अल आराफ 7 :99.”
” افامنوا مكر الله فلايامن مكر الله الا القوم الخاسرون -7:99

” वे अपनी मक्कारी कर रहे थे, और अल्लाह अपनी मक्कारी कर रहा था. बेशक अल्लाह ही सबसे बड़ा मक्कार है “सूरा -अनफाल 8 :30”.
“واذ يمكر بك الذين كفروا ليثبتوك او يقتلوك او يخرجوك ويمكرون ويمكر الله والله خير الماكرين- -8:30

” कहदो ,कि अल्लाह मक्कारी में सबसे तेज है ” सूरा-यूनुस 10 :21.”
” واذا اذقنا الناس رحمة من بعد ضراء مستهم اذا لهم مكر في اياتنا قل الله اسرع مكرا ان رسلنا يكتبون ماتمكرون -10;21

“कह दो कि सारी मक्कारी तो बस अल्लाह के हाथों में ही है ” सूरा – रअद 13 :42″

وقد مكر الذين من قبلهم فلله المكر جميعا يعلم ماتكسب كل نفس وسيعلم الكفار لمن عقبى الدار -13:42

इन सभी आयतों में अल्लाह ने खुद को ” मकर مکر” करने वाला यानि धोखेबाज (Deceiver) बताया है. और अरबी व्याकरण के अनुसार मकर करने वाले को ” माकिर ماكر (Makir) कहा जाता है .

विचार करने के योग्य यह बात है कि जब अल्लाह ऐसा है उसे इसी नाम से क्यों न पुकारा जाये.

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http://www.answering-islam.org/Shamoun/allah_best_deceiver.htm