Tags

, , , , , , , , , , , ,


by: भांडाफोडू

इस्लामी धर्म ग्रंथों में कुरान के बाद हदीसों को ही प्रमाण माना जाता है . और इन्हीं के आधार पर ही इस्लामी कानून ” शरियत ” के नियम भी बनाए गए हैं . यहाँ तक मुसलमानों के रीति रिवाज , आचार विचार , खान पान के नियम भी अधिकाँश हदीसों के आधार पर ही होते हैं .क्योंकि मुसलमानों का दावा है कि जिस तरह कुरान में अल्लाह के वचन हैं , उसी तरह अल्लाह कि प्रेरणा से रसूल ने हदीसें भी बयान की थीं .बस अंतर इतना है कि कुरान का संकलन रसूल जीवन काल में ही हो गया था , और हदीसों का संकलन रसूल के इंतकाल के बाद हुआ था .इस से जो लोग इस्लाम के बारे में ठीक से नहीं जानते , उनको ऐसा भ्रम हो जाता है . कि शायद हदीसों में सदाचार , नैतिकता , या समाज को सुधारने के लिए निर्देश दिए गए होंगे .जिसकी प्रेरणा अल्लाह ने रसूल को दी होगी .परन्तु ऐसा नहीं है .मुहम्मद साहब को हदीसें कहाँ से सूझती थी ,और उनका क्या विषय था . यही इस लेख में दिया गया है ,
1-हदीस की प्रेरणा औरतों की फूहड़ बातें
चूँकि इस्लाम में औरतों के लिए पढ़ना , गाना बजाना , बाहर जाना , और किसी प्रकार के मनोरंजन पर पाबन्दी है . इसलिए वह अपना दिल बहलाने के लिए घर में ही कोई रास्ता निकाल लेती थी. ऐसा ही मुहम्मद साहब की सबसे छोटी पत्नी आयशा भी करती थी . वह अडौस पडौस की फालतू औरतों को घर में बुला लेती थी .और सब मिल कर हर तरह की बातें करते थे . कई बार औरतें बेशर्म होकर अश्लील और फूहड़ बातें भी करती थी . वैसे तो मुहम्मद साहब औरतों पर पाबन्दी लगाने की बात करते थे , लेकिन जब आयशा के साथ उनकी पत्नियाँ और पडौस की औरतें निर्लज्ज होकर उन्ही के सामने अश्लील बातें करती थीं ,तो मुहम्मद साहब आनंद विभोर हो जाते थे .और उनकी अश्लील बातों प्रभावित हो कर जो भी कह देते थे .उसको भी हदीस समझ लिया जाता था .,ऐसी ही एक बेशर्म औरत की हदीस देखिये –
2-उम्मे जारा की नंगी हदीस
अरबी में फूहड़ को Slutty ,وقحة और निर्लज्ज को صفيق ,shameless कहा जाता है .इस हदीस को उम्मे जरा की हदीस कहा जाता है .और यह हदीस इसलिए महत्वपूर्ण है कि इस हदीस में द्विअर्थी ( Double Meanings ) शब्दों का प्रयोग किया गया है . और इस से मुहम्मद साहब चारित्रिक स्तर का सही पता चलता है .पूरी हदीस इस प्रकार है ,
” आयशा ने कहा कि अक्सर मुझ से मिलने के लिए पडौस की औरतें आया करती थी . एक बार मी अपने घर ग्यारह औरतों को बुलवाया , और उन से कहा कि वह अपने पतियों के बारे में और उनके साथ दाम्पत्य संबंधों की सभी बातें बिना शर्म के खुल कर बताएं .जिस को सुन कर रसूल थोड़े में ही सारी बात समझ जाएँ .और अपना निर्णय सबको बता सकें .
1 . पहली औरत – बोली मेरा पति एक ऐसे ऊंट कि तरह है , लगता है उस पर मांस का थैला लदा हो . जो देखने में तो अच्छा लगता है , लेकिन ऊपर नहीं चढ़ सकता .
2 . दूसरी औरत – बोली मेरा पति इतना ख़राब है कि उसका वर्णन नहीं कर सकती , उसके आगे और पीछे की सभी चीजें किसी भी तरह नहीं छुप सकती है .
3 .तीसरी औरत – ने कहा , मेरा पति भोंदू है ,वह मुझे ठीक से संतुष्ट नहीं कर पाता,यदि मैं टोकती हूँ तो तलाक की बात करता है . और चुप रहती हूँ तो मेरे चरित्र पर शक करता है .क्योंकि उसे अपनी औरत को खुश करना नहीं आता है .
4 . चौथी औरत -बोली , मेरा पति मक्का की सर्द रात की तरह ठंडा है .इसलिए न तो मुझे उस से कोई डर है और न मैं उसकी परवाह करती हूँ .
5 .पांचवीं औरत – ने बताया , मेरा पति बाहर तो चीता बना रहता है , और घर आते ही मुझ पर शेर की तरह हमला कर देता है . लेकिन जरा सी देर में ठंडा हो जाता है .और जैसे ही मैं उसको जाने को कहती हूँ फ़ौरन भाग जाता है .
6 . छठवीं औरत – बोली , मेरा पति भुक्खड़ है . उसे सिर्फ खाने से मतलब रहता है . वह खाने की कोई चीज नहीं छोड़ता . और खाते ही चादर ओढ़ कर सो जाता है .लेकिन मेरे शरीर को हाथ भी नहीं लगाता. यही मेरी परेशानी है .
7 . सातवीं औरत . ने बताया , देखने में तो मेरा पति काफी उत्साही लगाता है , लेकिन वह नामर्द है . फिर भी मुझे गर्भवती करने के लिए असभ्य तरीके अपना कर मुझे दौनों तरफ से इस्तेमाल करता है . जिस से मेरा शरीर घायल हो जाता है .
8 .आठवीं औरत -बोली मेरा पति एक फल की तरह है . जिसकी सिर्फ सुगंध ही अच्छी लगती है . लेकिन उसे जहाँ से भी टटोल कर दबाओ वह नर्म और पिलपिला प्रतीत होता है .
9 . नौवीं औरत . ने कहा . मेरा पति ऐसी बुलंद ईमारत की तरह है , जिसके अन्दर राख भरी हो .और मेरा छोटा सा घर अन्दर से मजबूत है . फिर भी मेरा पति घर के सामने ही बैठ जाता है . कभी अन्दर नहीं घुसता .
10 .दसवीं औरत – ने बताया ,मेरे पति का नाम ” मालिक ” है , और वह सचमुच का मालिक है . वह मुझे सजा कर उस ऊंट की तरह तारीफ करता है . जिसे चराने के लिए छोड़ दिया जाता है .फिर गले में घंटियाँ बांध कर हलाल करने की जगह भेज दिया जाता है .
11 . ग्यारहवीं औरत – उम्मे जारा ने कहा , मेरा पति अबू जरा , खूब खाता है और मुझे भी खिलाता है . उसने मुझे जेवर भी पहिनाए है . लेकिन खाने में बाद अनाज की बोरी की तरह पडा रहता है . एक दिन उसे रस्ते में एक सुन्दर गुलाम औरत दिखी , जो दूध दुह रही थी .साथ में ही दो बच्चे भी खेल रहे थे. और मेरे पति ने उस औरत से शादी कर ली .मेरे घर में जगह की तंगी है , और जब मेरा पति उस औरत को घर में लाया तो मैंने विरोध किया . इस पर मेरे पति ने मुझे खजूर की टहनी से खूब मारा .और मुझे तलाक दे दी . बाद मैं मैंने एक दूसरे आदमी से शादी कर ली , जो एक घुड सवार और तीरंदाज है .अब मुझे डर है कि कहीं यह व्यक्ति भी मुझे तलाक न दे दे .
आयशा ने कहा कि रसूल ने उम्मे जारा और सभी औरतों की सभी बातों को ध्यान से सुना .और उनका असली अर्थ भी समझ लिया .फिर उन से कहा
” आज से मेरे लिए आयशा और तुम में कोई अंतर नहीं है ,यानि तुम मेरे लिए आयशा की तरह और आयशा मेरे लिए तुम्हारी तरह है ”

इसी हदीस को ” हिशाम बिन उर्वा” ने भी दूसरे शब्दों में बयान किया है . लेकिन रसूल का निर्णय दौनों जगह एक ही है .

3 -हदीस की प्रमाणिकता
यह हदीस सहीह मुस्लिम की किताब 31 में हदीस नंबर 5998 पर मौजूद है .जिसे इमाम मुस्लिम ने अपनी किताब में जमा किया था. इमाम मुस्लिम का जन्म हि० 202 यानि सन 821 में ईरान के शहर निशापुर में हुआ था .और मृत्यु हि ० 261 यानी सन 875 में हुई थी .इमाम मुस्लिम ने सारे अरब , सीरिया , इराक और मिस्र में घूम घूम कर लोगों से सहबियों के वंशजों का पता किया . और उन से पूछ पूछ कर तीन लाख हदीसें इकट्ठी कर लीं . और उन में से करीब 4 हदीसों को सही मन कर अपनी किताब में शामिल कर लिया . इमाम मुस्लिम का पूरा नाम “أبو الحسين مسلم بن الحجاج القشيري النيسابوري‎अबुल हुसैन इब्न हज्जाज इब्न मुस्लिम इब्न वरात अल कुशैरी निशापुरी ” है इसलिए मुसलमान इस हदीस को सही मानते हैं .और ऐसी फूहड़ बातों में भी अध्यात्म यानि रूहानियत की बात साबित करने को कोशिश करते रहते हैं .

4-हदीस का निष्कर्ष

चालाक मुस्लिम इस अश्लील हदीस की इस तरह से व्याख्या करते हैं कि सभी पुरुषों को दोषयुक्त साबित कर दिया जाये . और उनकी तुलना में मुहम्मद साहब को सर्वश्रेष्ठ ,चरित्रवान और पवित्र सिद्ध कर दिया जाये . जैसा इस विडिओ में दिया है ,
For The Flaws of Men: Hadith of Umm Zara

लेकिन मुसलमान कुछ भी स्पष्टीकरण देते रहे , बुद्धिमान लोग मुहम्मद साहब की असली मंशा समझ जायेंगे ,जैसे बिल्लियों के झगड़े में बंदर ने फायदा उठा लिया था . उसी तरह पति पत्नी के आपसी मन मुटाव का फायदा मुहम्मद साहब उठाना चाहते थे .इस हदीस से साबित होता है कि इतनी औरतें होने के बाद और 55 साल कि आयु हो जाने पर भी उनकी नजर दूसरों की औरतों पर थी .वह चाहते थे जो औरतें अपने पतियों से असंतुष्ट हों वह उंनके पास आ जाएँ .और इसके लिए उन्होंने आयशा का सहारा लिया था .

” क्या दूसरों की पत्नियाँ पटाने वाला भी रसूल हो सकता है ?

http://www.themasjid.org/node/34