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पाखण्ड और अंधश्रद्धा का कारण केवल अज्ञान और अशिक्षा है , मुसलमानों दवा है कि मुहम्मद साहब अनपढ़ और अशिक्षित थे.लेकिन वास्तव में वह काफी चतुर और दूरदर्शी थे .उनकी जीवनी पढ़ने से साफ पता चलता है कि उन्होंने न तो बच्चों के लिए कोई मदरसा या स्कूल बनवाया ,और न लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया था.यही नहीं कुरान और हदीसों में पढ़ने लिखने या शिक्षा प्राप्त करने का कोई आदेश नहीं मिलता है .मुहम्मद साहब की सभी औरतें निरक्षर थी .क्योंकि मुहम्मद साहब भली भांति जानते थे कि शिक्षित लोग उनके झूठ पर इमान नहीं लायेंगे .मुहम्मद साहब सिर्फ कुरान को याद करने को इल्म यानि शिक्षा बताते थे .और बाकी शिक्षा और पढाई लिखाई को बुरा बताते थे .यह कुरान और हदीस से पता चलता है , जैसे .

1-शिक्षा दिमाग की गन्दगी
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है मुल्लों द्वारा बच्चों को सरकार के निर्धारित विषय पढ़ाने और लड़कियों को पढ़ाने का विरोध करने के पीछे बच्चों को शिक्षा से दूर रखना है ,मुहम्मद शिक्षा को गन्दगी मानते थे ,”अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा अपने दिमाग में ज्ञान भरने से अच्छा है कि दिमाग में गन्दगी भर लो ” बुखारी – जिल्द 8 किताब 73 हदीस 176 “अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि अल्लाह कि आयतों के आलावा जो भी विद्या है सब फिजूल है “सही मुस्लिम – किताब 28 हदीस 5604

2-इस्लाम से पूर्व अरब में शिक्षा
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मुहम्मद साहब के सभी पूर्वज अनपढ़ और अशिक्षित थे . और अपने ऊंट किराये पर देते थे . जिन से काफिलों का सामान ढोया जाता था .लेकिन अरब में उस समय कई ऐसे शिक्षित लोग थे जो शायरी करते थे .अरब के लोग शायरों को सम्मान की नजर से देखते थे .उनमे कई महिलाएं भी थीं जो कविता करती थीं जो लोगों को कवितायेँ सुनाया करती थी .अरब के लोग शायरी के इतने शौक़ीन थे कि शायरी सुनाने के लिए जमा हो जाते थे . और उन्हीं दिनों मुहम्मद साहब ने जब लोगों के सामने कुरान को अल्लाह की किताब बता कर सुनना शरू कर दिया तो लोग उनकी बातें छोड़ कर शायरों के पास चले जाते थे.और मुहम्मद साहब को अपनी दुकान बंद होने का डर लगने लगा .और वह शायरों को कोसने लगे -“-रहे यह कवि लोग ,इनके पीछे तो बहके लोग है चलते हैं ” सूरा -अश शुरा 26 :221 “इब्न उम्र ने कहा कि रसूल ने कहा पढ़ लिख कर और शायरी करने से अच्छा है कि अपने दिमाग मे मवाद भर लो ” बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 175

3-कवियों से नफ़रत
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चूंकि मुहम्मद साहब कुरान को अल्लाह की किताब बताते थे , और मक्का के लोग उसे मुहम्मद की कविता मानते थे ,क्योंकि कुरान में हजारों गलतियाँ थी . और पढ़े लिखे शायर फ़ौरन गलती पकड़ लेते थे .और लोग मुहम्मद साहब का मजाक उड़ाते थे .इसलिए मुहम्मद साहब के दिल में शायरों के प्रति इतनी नफ़रत भर गयी कि वह गाली गलौच और मार पीट पर उतारू हो जाते थे . जो इस हदीस से पता चलता है -“सईदुल खुदरी ने कहा कि एक बार एक पढ़ा लिखा शायर रसूल के सामने अपनी किताब से शायरी पढ़ने के लिए आया .औत कविता पढ़ी .जैसे रसूल को पता चला कि वह विद्वान् है . तो रसूल ने चिल्ला कर कहा इस शैतान को पकड़ लो और और मारो .इसके दिमाग में ज्ञान नहीं मवाद भरा है “सही मुस्लिम -किताब 28 हदीस 5611

4-सुपारी देकर भी हत्या
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जिस तरह उल्लू और चोरों को दिनके उजाले से नफ़रत होती है , उसी तरह ढोंगी पाखंडियों को शिक्षित और बुद्धिमान लोगों से नफ़रत होती है ,यही कारण था कि कुछ ही समय के अन्दर मुहम्मद साहब को पढ़े लिखे शिक्षित और कवि लोगों से इतनी नफ़रत हो गयी कि उन्होंने आस पास के ऐसे सभी लोगों कि हत्या कर डाली .ताकि लोग उनकी कुरान के आलावा कुछ भी नहीं पढ़ें वैसे तो यह सूची कभी लम्बी है .लेकिन कुछ खास लोगों के नाम ,हत्या का समय , कारण , और जिनका हदीस में उल्लेख है वह सभी प्रमाण दिए जा रहे हैं .

1–कअब बिन अल अशरफ अरब का प्रसिद्द शायर था . इसकी किताब अभी तक मौजूद .लोग कुरान को छोड़ इसकी शायरी सुनते थे .चिढ के मारे मुहम्मद ने इसकी 12 सितम्बर सन 624 को इसकी हत्या कर दी .(बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 369 )

2-सल्लम इब्न अबुल हुकैक ( अबू रफ़ी एक विद्वान् और कवि था . इसने अपनी शायरी में कहा था ऐसा अत्याचारी रसूल नहीं हो सकता .इसलिए मुहम्मद ने इसे भी मार डाला .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 714 -715 )

3-अल नद्र बिन अल हरीसयह अरब का एक शायर था. जब सन 622 से मुहम्मद ने कुरान की आयतें सुना कर अल्लाह की सजा से डराना शुरू किया तो इसने लोगों से कहा यह मुहम्मद की कल्पना है .बाद में गुस्से होकर मुहम्मद ने उसे 3 मार्च सन 624 को क़त्ल करा दिया .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 133 -134 )

4-उकबा बिन अबी मुयात यह भी एक शायर था . इसने कुरान की झूठी बातों की हंसी उडाई थी . इसे भी मुहम्मद ने नद्र की तरह 2 मार्च सन 624 को क़त्ल करा दिया .(इब्ने हिशाम पेज 309 -314 )

5-अब्दुल्लाह बिन उबैय बिन सल्लूल अल औफीइसने अपनी शायरी में लिखा था कि जो लोग मुहम्मद को रसूल मान रहे हैं वह आफत मोल ले रहे हैं . जब मुहम्मद को पता चला तो मुहम्मद ने उसे क़त्ल कर दिया (बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 462 )

6-अज्ञात काना व्यक्ति यह भी एक शायर था , जिसने अपनी शायरी में कहा था कि मैं मरते दम तक मुसलमान नहीं बनूँगा . मुहम्मद ने उसी समय 7 जुलाई सन 625 को उसे क़त्ल कर दिया बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 286

7इब्ने सुनैना यह एक धनवान व्यापारी और कवि था . और कविता में अपने देवताओं कि तारीफ़ कर के लोगों से अपना धर्म नहीं छोड़ने को कहता था . इसलिए मुहम्मद ने उसकी 8 सितम्बर सन 624 को हत्या कर दी .(सुन्नन अबू दाउद- किताब 19 हदीस 2996 )

8-अब्द अल्लाह इब्ने साद इब्ने अबी सरह यह अरब का कवि था ,जब वह अपनी दो लड़कयों के साथ काबा देवताओं की स्तुति कर रहा था . तभी मुहम्मद ने हमला कर दिया . वह जब जान बचाने के लिए काबा के परदे के पीछे छुप गया तो भी मुहमद ने उसकी लड़कियों के साथ 9 जनवरी सन 630 को हत्या कर दी .( सीरत रसूल अल्लाह पेज 550 )

9-अबू आफाक यह अरब के एक कबीले का सरदार और मनात देवी का उपासक था . अरबी का विद्वान् था , इसने कहा था कि मैं कुरान से बढ़िया शायरी कर सकता हूँ .इस लिए मुहम्मद ने 4 अप्रेल सन 624 को इसकी हत्या कर दी (इब्न हिशाम -पेज 675 )

10-असमा बिन्त मरवानयह एक महिला कवियित्री थी .इसके पति का नाम यजीद बिन जैद था .इसके पांच बच्चे थे .इसने मुहमद के बारे में कविता लिखी थी .उसके कारण लोग मुहमद के विरोधी बन गए .नाराज होकर मुहम्मद ने रात में सोते समय उसे बच्चों सहित 30 मार्च सन 624 को हत्या कर दी .(सीरत रसूल अल्लाह पेज -675 -676

हम अक्सर सुनते रहते है कि मुस्लिम लीडर हमेशा मुसलमानों की गरीबी , पिछड़ेपन और अशिक्षा के लिए उनसे किये जा रहे भेदभाव को ही जिम्मेदार बताते रहते हैं . वास्तव में वह शिक्षित नहीं होना चाहते हैं .बल्कि सरकार से आर्थिक मदद चाहते हैं , जो हिन्दुओं से छीन कर उनको दे दी जाये .ताकि वह उस पैसों से आतंक फैला सकें . या जगह जगह मस्जिदें बना कर दूसरा पाकिस्तान बना सकें .इसके अतिरिक्त इस लेख से यह भी साबित होता है कि मुहम्मद साहब कि तरह मुसलमान भी सत्य का सामना करने से डरते हैं . और जब उनके पास कोई तर्क नहीं होता तो विरोधियों को क़त्ल कर देते हैं .हमारे सामने सलमान रश्दी और तसलीमा नसरीन का उदहारण है . जब मुल्लों ने उनका क़त्ल करने का फतवा देकर सुपारी दी थी .वास्तव में सुपारी देकर किसी की हत्या करवाने की तरकीब मुहम्मद साहब ने निकली थी .
समझ लीजिये “हरेक अपराध के पीछे कोई न कोई मुसलमान होता है . क्योंकि हरेक अपराध के जन्मदाता रसूल ही हैं ”

http://www.answering-islam.org/Authors/Arlandson/dead_poets.htm

http://www.answering-islam.org/Muhammad/Inconsistent/poetry.html