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मुस्लिम विद्वान् कुरान को अल्लाह की किताब बताते हैं , और कुरान में विभिन्न विषयों के बारे में जो भी नियम और कानून बताये गए हैं , उन्हें अटल और सब पर लागू होने वाला बताते हैं .यहाँ तक खुद मुहम्मद साहब भी अल्लाह के कानून से बाहर नहीं हैं .वास्तव में अल्लाह यही चाहता है कि सभी लोग उसके बनाये नियमों और कानूनों का पूरी तरह से पालन करें . और जो भी उसके कानूनों के विरुद्ध काम करेगा अल्लाह उसे कठोर सजाएँ देगा .इसके लिए अल्लाह ने कुरान में स्पष्ट चेतावनी दी है ,

1 – अल्लाह का आदेश

“अल्लाह चाहता है कि तुम पर हरेक बात स्पष्ट कर दे , और तुम्हें उसी के बताये रस्ते पर चलाये “सूरा -निसा 4 :26
“और जो कोई भी हद के बहार ज्यादती के काम करेगा ,उसे हम जल्द ही भयानक आग में झोंक देंगे . और ऐसा करना अल्लाह्के लिए बड़ा ही आसन है ” सूरा -निसा 4 :30
कुरान के अनुसार अल्लाह की नजर में वही लोग श्रेष्ठ हैं , जो गुनाहों और काम वासना से दूर रहते हैं , जैसा कुरान में कहा गया है ,

2-उत्तम लोग कौन हैं

“जो बड़े बड़े गुनाहों से , और अश्लीलता के कामों से बचते हैं ” सूरा-अश शूरा 42 :37 ” जो लोग बड़े बड़े गुनाहों और अश्लीलता के कामों से दूर रहते हैं ” सूरा -अन नज्म 53 :32

चूँकि मुसलमान मुहम्मद साहब को अल्लाह का रसूल और अपना आदर्श मानते हैं , मुहम्मद साहब को अल्लाह के हरेक कानूनों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए था . लेकिन मुहम्मद साहब ने अपनी काम वासना के वश में होकर अल्लाह के कानूनों के विरुद्ध अनेकों काम किये थे . जिन में से सिर्फ चार ही यहाँ पर दिए जा रहे हैं .

3 – रोजे की हालत में स्त्रीप्रसंग

“तुम्हारे लिए रोजे की हालत में अपनी स्त्रियों के पास जाना हराम है ,यह अल्लाह के द्वारा निश्चित सीमाएं हैं “सूरा -बकरा 2 :187
विरोध -आयशा ने कहा कि रसूल रोजे कि हालत में भी अपने आपको अपनी पत्नियों को आलिंगन में लेकर चूमने से नहीं रोक पाते थे .लेकिन उनकी इच्छा शक्ति काफी अधिक थी . जबीर तो सिर्फ औरतों को देख कर ही स्खलित हो जाता था . ” बुखारी -जिल्द 3 किताब 31 हदीस 149 जैनब बिन्त अबी सलमा , उम्मे सलमा ने कहा ,एक बार मैं रसूल के साथ एक ही कम्बल में घुस कर लेटी थी . रसूल ने पूछा कि क्या तुम मासिक से हो .जब मैंने हां कहा , और अपने कपडे ऊपर खिसका दिए .तब रसूल ने मुझे अपने पास खींच लिया और मुझे चूमने लगे .उम्मे सलमा ने यह भी कहा कि रोजे की हालत में भी औरतों को चूमते थे , और एक ही बर्तन में उनके साथ नंगे नहाते थे “बुखारी -जिल्द 1 किताब 6 हदीस 319

4 -इद्दत का नियम तोडा

“तलाक पाने वाली औरतें अपनी तीन माहवारी आने तक खुद को प्रतीक्षा में रखें ” सूरा -बकरा 2 :228 “और जिन लोगों का देहांत हो गया हो , उनकी विधवाएं , अपने आप को चार महीने और दस दिन तक प्रतीक्षा में रखें “सूरा – बकरा 2 :234 विरोध -मुहम्मद साहब ने खैबर के युद्ध में एक यहूदी कबीले के सभी पुरुषों की हत्या करवा दी .और उनकी औरतें लोगों में बाँट दी .और कबीले के मुखिया की विधवा साफिया को अपने लिए पसंद कर लिया . फिर उसी जगह तुरंत शादी का इंतजाम करके साफिया के साथ सहवास किया .और उसे अपनी पत्नी घोषित कर दिया ” बुखारी – जिल्द 4 किताब 52 हदीस 143

5 -माहवारी में सहवास

“वे तुम से स्त्रियों की माहवारी के बारे में पूछते हैं , कह दो यह तो नापाकी है .इसलिए माहवारी के समय स्त्रियों से अलग रहो .जब तक वह शुद्ध न हो जाएँ , उनके पास नहीं जाओ ” सूरा – बकरा 2 :222 विरोध -आयशा ने कहा कि एक बार उमरा बिन गुराब कि चाची ने मुझ से माहवारी के बारे में पूछा तो मैंने बताया .कि एक बार कमरे में सिर्फ एक ही खाट थी . और मैं माहवारी में थी . तभी रसूल कमरे में आये , और वहीँ नमाज पढ़ने लगे .इसी बीच में मुझे नींद आ गयी .तभी रसूल ने कहा सर्दी के कारण मुझे सीने में दर्द हो रहा है , तुम मेरे पास लेट जाओ .और जब मैंने बताया कि मैं तो माहवारी से हूँ , तो रसूल ने मेरी जांघें फैला दी , और कपडे खिसका कर मेरे साथ सहवास किया .और उसके बाद मेरी जांघों के बीच में अपने गाल रख कर आराम से सो गए .” अबू दाऊद किताब 1 हदीस 270

6 -इहराम में स्त्री संसर्ग

“हज्ज का महीना सब जानते हैं , और जिसने हज्ज जाने का निश्चय कर लिया हो ,उसके लिए हज के दिनों में विषय भोग की बात करना बिलकुल हराम है ” सूरा -बकरा 2 :197 विरोध -इब्ने अब्बास ने कहा कि जब रसूल अहराम के वस्त्र पहन कर हज्ज के लिए जा रहे थे , तो रस्ते में उनको मैमूना बिन्त हारिस पसंद आ गयी . और रसूल ने उसी समय उसके साथ निकाह कर लिया ” अबू दाउद- किताब 10 हदीस 1840

नुबैह बिन बहाब ने कहा कि रसूल की शादी में उस्मान बिन अफ्फान भी भी मौजूद थे , वह भी अहराम के पवित्र वस्त्र पहिने हुए थे .और जब मेरे पिता ने उनको टोका तो वह बोले यह तो रसूल की सुन्नत है ” अबू दाउद – किताब 10 हदीस 1837 ( नोट – रसूल ने हिजरी 7 में अहराम के पवित्र कपडे पहिने हुए मैमुना बिन हरिस से शादी की थी .उस समय रसूल की आयु 60 साल और मैमूना की आयु 36 साल थी )जिस तरह आज मुसलमान हज्ज के बहाने स्मगलिंग का सामान और हथियार ले आते हैं . उसी तरह मुहम्मद साहब भी हज्ज के बहाने औरतें खोजते रहते थे .और भीड़ में जो भी सुन्दर औरत पसंद आजाती थी उस से वहीँ निकाह कर लेते थे .

7 -रसूल पवित्र आत्मा नहीं थे

अगर कोई व्यक्ति मुहम्मद साहब के चरित्र , और पवित्रता के बारे में किसी भी प्रकार का सवाल करता है , तो मुसलमान हंगामा कर देते हैं . लेकिन जब खुद अल्लाह ही मुहम्मद साहब को पवित्रात्मा नहीं मानता तो हम क्या करें .क्योंकि यह कुरान ने ही कहा है .” हे रसूल तुम अपने आपको बहुत बड़ा पवित्र आत्मा नहीं ठहराओ ” सूरा -अन नज्म 53 :32 ” फला तुज़क्कू अनफुसकुम “” فَلَا تُزَكُّوا أَنْفُسَكُمْ “53:32

दिए गए इन प्रमाणों से स्पष्ट सिद्ध हो जाता है कि कुरान में दिए गए नियम कानून सिर्फ दिखाने के लिए बनाये गए हैं . और जब अल्लाह का रसूल ही उनको नहीं मानता तो बाकी लोग कुरान के कानून क्यों मानेगे ?

“अल्लाह का विरोधी दुष्टात्मा है “