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इस ब्लॉग को पढ़नेवाले सभी मित्र जानते हैं कि अक्सर जब मुस्लिम ब्लोगरों के पास कोई तर्कपूर्ण उत्तर नहीं होता है ,तो वह अनर्गल टिप्पणियां करने लगते हैं .इसी तरह कुछ दिन पूर्व एक बेनामी “इम्पेक्ट “मेरे ऊपर कटाक्ष करते हुए लिखा था कि ,मैं एक चकलाघर चला रहा हूँ .इसलिए जरूरी हो गया था कि ,इन इम्पेक्ट जैसे लोगों को यथायोग्य उत्तर दिया जाए .

सब जानते हैं कि चकला -कोठा ,मुजरा -महफ़िल ,तवायफ -तबला ,शराब -शायरी ,यह सारी गन्दगी इस्लाम और मुसलमानों की देन हैं .जो भारतीय संस्कृति को प्रदूषित कर रही है .

चकलों में लोग शराब पीकर बाहरी औरतों से कुछ समय के लिए शारीरिक सुख प्राप्त करते हैं .और एक तरह से वह वेश्या कुछ समय के लिए ग्राहक की पत्नी बन जाती है .यह एक अस्थायी शादी (Temporary Marriage ) होती है .

इस परिभाषा के अनुसार मुहम्मद दुनिया का सबसे बड़ा चकला चलाने वाला व्यक्ति था .उसने वेश्यावृति को “मुतआ مُتعه “का नाम देकर उसे जायज बना दिया था .इसमे आपसी मर्जी से पुरुष और स्त्री एक निर्धारित अवधि के लिए शारीरिक सम्बन्ध (sexual Relation )रख सकते हैं .यह अवधि एक दिन ,एक महिना या एक साल तक की हो सकती है .मुतआ में चारसे अधिक की संख्या की पाबन्दी नहीं है .

1 -मुतआ क्या होता है

सही मुस्लिम और इब्ने माजा के मुताबिक मुतआ एक प्रकार का अनुबंध है ,जो एक दिन ,दो दिन ,एक माह ,एक साल या तीन सालों के लिए किया जाता है .और अवधि पूर्व भी बिना तलाक दिए ही इसे ख़त्म किया जा सकता है ..

Mut’ah is a type of Nikah until an agreed time. It can be for a day, two days, a month, one year, three years etc.

Waheed ad-Deen az-Zaman. Sunan Ibn Majah. Volume 2, p. 76

Imam Nawawi in his commentary of Sahih Muslim, relied on the definition of Mut’ah advanced by Imam of Ahle Sunnah Qadi Iyad as follows:

وَاتَّفَقَ الْعُلَمَاء عَلَى أَنَّ هَذِهِ الْمُتْعَة كَانَتْ نِكَاحًا إِلَى أَجَل لَا مِيرَاث فِيهَا , وَفِرَاقهَا يَحْصُل بِانْقِضَاءِ الْأَجَل مِنْ غَيْر طَلَاق

“Ulema agree that this Mut’ah is a Nikah in which the husband and wife do not inherit from eachother and separation would take place on the completion of the Specified time without Talaq”.

Sharh Sahih Muslim, Volume 4 page 13

2 -रसूल ने अय्याशी की अनुमति दी

Let us cite two such examples, first from Sahih Muslim, the second most authentic Sunni Hadith book.

حدثني الربيع بن سبرة الجهني، أن أباه، حدثه أنه، كان مع رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال ” يا أيها الناس إني قد كنت أذنت لكم في الاستمتاع من النساء

“Sabra al-Juhanni reported on the authority of his father that while he was with Allah’s Messenger (may peace be upon hm) he said: 0 people, I permitted you to contract temporary marriage with women…”

“सबराअल जुन्ननी ने अपने पिता हवाले से कहा कि,रसूल ने कहा कि हे लोगो मैं ने अस्थायी शादी की अनुमति दी है .तुम किसी भी औरत से ऐसी शादी कर सकते हो .मुस्लिम -किताब 4 हदीस 13 .

3 -मुतआ मौज मस्ती के लिए है ..

शेख अब्दुराहमान जर्री ने इमाम शाफी के हवाले से कहा कि,मुतआ को जायज करने का निर्णय और अनुमति इस लिए दी गयी है कि ,मुसलमान मौज मस्ती करें ,और अगर इस से कोई बच्चा भी होगा तो वह वैध माना. जायेगा

according to Shaafiyee sect, marrying for the purpose of enjoyment and fun (sex) is totally permissible. Shaykh Abdurehman Jazri records:

الشافعية قالوا : الأصل في النكاح الإباحة فيباح للشخص أن يتزوج بقصد التلذذ والاستمتاع ، فإذا نوى به العفة أو الحصول على ولد فإنه مستحب

The Shaafies say: ‘The judgment in marriage is lawfulness, so it is permissible for a person to get married for the purpose of enjoyment and fun, if he performs (marriage) for the purpose of chastity or having a son so it is mustahab.’

Fiqh ala Madahib al-Arba, Volume 4 page 10

4 -शराबी गवाह भी चलेंगे.

यदि कोई व्यक्ति किसी औरत से ऐसे आदमी के सामने मुतआ करता है ,जो शराब के नशे ने हो .और जिसे कुछ भी याद नहीं रहता हो ,तो भी वह मुतआ वैध समझा जायेगा .

witnesses are not obligatory for Nikah al-Mut’ah, we read the following interesting edict about the witnesses to a Nikah in their school:

ولو تزوج امرأة بحضرة السكارى وهم عرفوا أمر النكاح غير أنهم لا يذكرونه بعد ما صحوا انعقد النكاح

“If someone marries a woman in the presence of drunken witnesses and they understand the matters of marriage, but they forget about it when sober, the nikah will remain valid”

Fiqh ala Madahib al-Arba, Volume 4 page 10

5 -अपनी शादी के खुद गवाह

सुन्नी विद्वान् कहते हैं कि मुतआ एक प्रकार से आपसी रजामंदी से की गयी शादी होता है .जिसमे दौनों पक्ष कबूल करते हैं कि हम एक महिना या एक साल के लिए शादी करते हैं .इसमे दौनों की स्वीकृति को प्रमाण माना जाता है .और इसमे किसी मुल्ले मौलवी या अभिभावक की कोई जरुरत नहीं होती है .

The Sunni scholar Allamah ‘Abd Ar-Rahman al-Jazeri in his Al-fiqh ‘Ala Al-Madhahib al-Arba’ said:

أما حقيقة نكاح المتعة، فهو أن يقيد عقد الزواج بوقت معين، كأن يقول لها: زوجيني نفسك شهراً. أو تزوجتك مدة سنة. أو نحو ذلك، سواء كان صادراً أمام شهود وبمباشرة ولي، أولا

The reality of Nikah Mut’ah is that, in the marriage recital performed with a woman, words are added which stipulate that the marriage is for a fixed time. For example a man shall say ‘she shall remain as my wife for a month, or I shall have Nikah Mut’ah with you for a year.” The parties themselves act as witnesses. It can occur in the presence of a Wali or witnesses, or without them

.Al-fiqh ‘Ala Al-Madhahib al-Arba’ (Lahore Edition) Volume 4, page 167

अल फिक्का अल मजहब अल अरब -जिल्द 4 पेज 167

अब मैं बेनामी इम्पेक्ट जैसे लोगों से पूछता हूँ कि इन हदीसों मेंचकले चलाने के आलावा और क्या लिखा है ?चकला चलाने वाला तो खुद मुहम्मद ही था ,लोगों को Temporary शादियाँ “मुतआ مُتعه )करने की इजाजत देकर वेश्यावृति को बढ़ावा देता था .लोग बताएं कि चकलों की शुरुआत कहाँ से हुई थी .और मुसलमान चकले के दलाल नहीं तो और कौन हैं ?

समय और स्थान की कमी से पूरी हदीसें नहीं दी जा सकी हैं .मुझे विश्वास है कि समझदारों के लिए इशारा ही बहुत होता है .यदि भविष्य में फिर किसी ने व्यक्तिगत कटाक्ष करने का दुस्साहस किया ,तो इसी तरह का जवाब मिलेगा . इम्पेक्ट जैसे लोगों को चाहिए कि पाहिले अपनी किताबों को ध्यान से पढ़ लें .याद रखें कि अगर मैं ने इस्लाम के बारें में ऐसी और बातें लिखना शुरू कर दिन तो .जवाब खोजना मुश्किल हो जायेगा !

मेरा उन लोगों से भी विनम्र निवेदन है ,जो गंगा -जमुनी तहजीब की दुहाई देते रहते हैं ,और इस्लाम की यह गन्दगी भारतीय संसकृति में मिला कर उसे प्रदूषित करते रहते हैं .और खुद को धर्मं निरपेक्षता का झंडा बरदार मानते है .और दूसरो को सम्प्रदायवादी कह कर अपमानित करते हैं

हमें समझाना चाहिए कि जितने भी अनैतिक काम ,अपराध ,और कुकर्म होते हैं सबके मूल में मुहम्मद और इस्लाम ही है .

http://www.answering-ansar.org/answers/mutah/en/chap2.php