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ज्यादातर हिन्दू मानते हैं कि संघ परिवार और कट्टर वादी हिन्दू संगठन इस्लाम व मुसलमानों को बदनाम करने के लिए उन पर झूठे आरोप लगाते हैं जबकि सभी धर्म समान रूप से शांति की शिक्षा देते हैं । इस संबंध में सउदी अरब की आधिकारिक साइट इस्लाम हाउस से उन विषयों व इस्लाम के विचार जाने जा सकते हैं जो गैरमुसलमानो से संबंधित हैं ।

 

जैसे एक फत्वे में कहा गया है कि गैर मुसलमानों के लिए इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है । बेचारे मुसलमान कितने स्पष्ट शब्दों में कहें कि इस्लाम के अलावा किसी अन्य मजहब को स्वीकार करने के योग्य नहीं माना गया है । इसीलिए सभी गैर मुसलमान इस्लाम को शांति का मजहब घोषित करने से पूर्व कृपया इन फतवो का अध्ययन अवश्य कर ले ।
क्या गैरमुसलमानों पर इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है ?

 

इसी प्रकार एक अन्य फतवे में अन्य धर्मावलम्बियों के त्योहारों पर बधाई देने को हत्या से भी बड़ा अपराध बताया गया है । इसी फतवे में कहा गया है कि जो कोई इस्लाम के अतिरिक्त अन्य धर्म ढूंढे तो उसका धर्म कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा और वह परलोक में घाटा उठाने वालो में से होगा । इससे स्पष्ट है इस्लाम में जघन्य अपराधों को बड़ा अपराध न मानकर इस्लाम के अतिरिक्त किसी अन्य मजहब को मानने को बताया गया है । यही कारण है कि सभी आतंकवादी का घोषित एक मात्र लक्ष्य पूरे विश्व को शरीयत शासन के अंतर्गत लाना है ।
काफिरों को उनके त्यौहारों की बधाई देने का हुक्म
इसी प्रकार एक अन्य पत्र जो एक मुसलमान द्वारा अपनी हिन्दू मां को लिखा गया है ( लड़के ने इस्लाम स्वीकार कर लिया था ) स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस्लाम ही वह धर्म है जो सत्य है । पृष्ठ ११ पर यह अपनी मां को बताता है कि वह शांति मार्ग जिसपर चलकर परलोक में सदा का सुख और आराम इस्लाम ही है । इसी पर चलकर दुनिया में कामयाबी और परलोक में मुक्ति और प्रभु का सामीप्य प्राप्त हो सकता है । मेरी दिली इच्छा है कि मैं अपनी मां को उस भड़की हुई आग से बचा लूं जो मुझे दिखाई दे रही है और आप जिस मार्ग पर चल रही है वह आपको उसी आग की तरफ ले जा रहा है लेकिन आपको इसका अहसास नहीं है । अर्थात आप एक ट्रेन पर सवार हैं वह गाड़ी जिस मार्ग से जाने वाली है उसमें एक पुल एसा भी है जिसकी पटरी उखड़ी पड़ी है । मैं अच्छी तरह जानता हूं कि यह ट्रेन मंजिल तक नहीं पहुंच पाएगी और रास्ते में ही उलट जाएगी और इसके सब यात्री घायल हो जाएगें या मृत्यु को प्राप्त हो जाएगें और मेरे पास एक खूबसूरत कार ( इस्लाम की ) है जो मुझे अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंचा देगी । मैं बार बार हर स्टेशन पर उतरकर आपको पुकारता हूं कि हे मां मेरी कार में आ जाइए ।एक हिन्दू ( जो मुसलमान बन गया ) द्वारा अपनी मां को लिखा पत्र

 

इसी कारण प्रसिद्घ इस्लामी विद्वान जाकिर नायक कहता है कि अपने मुल्क में मंदिर या चर्च नहीं बनने देंगे । वह स्पष्ट रूप से कहता है कि जब दीन ही गलत है तो उसके प्रचार की अनुमित वे अपने मुल्क में नहीं देंगे ।
” इस्लामी राज में मंदिर या चर्च बनाने की इजाजत नहीं “- जाकिर नायक
 
बेचारे मुसलमान भी सब तरह के प्रयास कर रहे हैं जहां कम ( जिस देश में कम संख्या में होते हैं वहां जाकिर नायक की तरह इस्लाम का संदेश प्यार से देते हैं ) जहां शरीयत का शासन लागू होता है वहां पर गैर मुसलमानों के जजिया कर न देने के कारण उनके सिर काट दिए जाते हैं ।  
इसी तरह यह भी बताया गया है वे क्या चीजे हैं जो एक मुसलमान को इस्लाम से खारिज कर देती हैं । १- अल्लाह के साझीदार अन्य लोगों को ठहराना और उनसे प्रेम करना । अर्थात यदि आप यह कहते हैं कि अन्य मजहब के भगवान अल्लाह के जैसे हैं या सभी भगवानो के नाम अलग अलग हैं सभी एक ही ईश्वर के अलग अलग नाम हैं।

३- मुश्रिकों ( अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराने वालों को – इसमें सभी हिन्दू आ गए क्योंकि सभी हिन्दू अल्लाह को भी भगवान का ही एक नाम मानते हैं ।

४- इस्लाम के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म के परिपूर्ण होने का विश्वास रखना ।को काफिर न समझना या उनको सत्य समझनाअल्लाह के अतिरिक्त किसी अन्य के लिए मन्नत मांगना या चढ़ावा चढ़ाना । अर्थात यदि मुसलमान को क्या क्या कार्य नहीं करना चाहिए । इसमें शामिल है उसे यह नहीं कहना चाहिए वर्तमान समय में शरीयत कानून अप्रासंगिक हो गया है । अथवा किसी व्यक्ति को पत्थर मार मार कर मार देना चाहिए इसे गलत नहीं बताना चाहिए ।

८-मुसलमानों के विरुद्ध काफिरो का समर्थन करना और उनकी सहायता करना जिसने एसा किया काफिर हो गया ।


“वे बातें जो करने से इस्लाम से खारिज किए जाने का प्राविधान है ”