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by निंजा हटटोरी on Thursday, May 10, 2012 at 8:24pm ·

विश्व के सभी धर्मों में ईश्वर को महान अर्थात बड़ा बताया गया है. इस्लाम से पहले अरब के कुछ भाग में ईसाई धर्म प्रचलित था.

 

इसाई अपनी प्रार्थना में कहते थे “Gloria tibi Domine” यानी ईश्वर तू महिमाशाली है “इसी तरह मुसलमान भी “अल्लाह तअला ” शब्द का प्रयोग करते आये हैं, यानी “अल्लाह बड़ा है “.

 

वैसे ईश्वर को बड़ा साबित करने के लिए किसी भी प्रकार के प्रमाणपत्र की कोई जरुरत नहीं है. लेकिन अपने अल्लाह को सबसे बड़ा साबित करने और दूसरों को भयभीत करने के लिए, जिहादी, मुस्लिम हमलावर और आतंकवादी “अल्लाहो अकबर” का नारा लगाते रहते है. इसके साथ धूर्त मुल्ले अपने कल्पित अल्लाह में समस्त खूबियाँ साबित करने के लिए कुरान की ऐसी व्याख्याएं करते हैं, जिस से लोगों को लगे सचमुच अल्लाह, सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान है. जिस से प्रभावित होकर नादान लोग अल्लाह पर इमान ले आयें, यानी मुसलमान बन जाएँ.

 

अल्लाह के बारे में सही जानकारी कुरान में है. चूँकि कुरान की सूरतों में कोई तारतम्य (Continuity) नहीं है. इसलिए हदीसो की मदद के बिना कुरान समझना मुश्किल है.

 

अल्लाह कितना समर्थ और सर्वज्ञ है, और उसकी नजर किस पर रहती है, इसे जानने के लिए कुरान की सूरा हूद की आयत 4 और 5 दी जाती है. फिर इन आयतों के बारे में बुखारी में जो तफ़सीर (व्याख्या) दी है, उनको पढ़िए —

 

 

1- अल्लाह देखता और जानता है —-

 

कुरान की सूरा हूद की आयत 4 और 5 दौनों आयतें अल्लाह के महान गुणों को व्यक्त करती है,

 

“तुम्हें उसी की ओर पलट कर जाना है, और वह हर चीज का सामर्थ्य रखता है “सूरा -हूद 11 :4.

إِلَى اللَّهِ مَرْجِعُكُمْ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ   -Sura Hud 11:4.

 

“देखो, यह लोग अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस से छिप जाएँ. मगर जान रखो जब ये अपने कपड़ों से अपने आप को ढांपते हैं, तो अल्लाह सब जान लेता है, को कुछ यह छिपाते हैं, और जो कुछ खोलते है. वह तो अन्दर के भीतर जानने वाला है ” सूरा – हूद 11 :5.

أَلا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ أَلا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ   -Sura Hud 11:5.

 

 

इन आयतों को पढ़कर लोगों को ऐसा प्रतीत होगा, जैसे अल्लाह सर्वद्रष्टा है, और उस से कोई भी चीज नहीं छुप सकती है. लेकिन दी गयी इन दो हदीसों से पता चलता है. कि कुरान की आयतें किन लोगों के लिए कही गयी है और अल्लाह क्या देखता रहता है.

 

 

2- अल्लाह क्या देखता है —

 

रसूल के सहाबी और मुसलमान क्या करते थे जो छुपाने के बावजूद अल्लाह देखता रहता था, यह हदीसें बताती हैं .

 

अल हसन बिन मुहम्मद बिन सब्बाह ने कहा कि अब्बाद बिन जाफर ने रसूल से इस आयत के बारे में पूछा “ये लोग अपने सीनों को मोड़ते है, ताकि उस से छिप जाएँ “इस का तात्पर्य क्या है. तो रसूल ने बताया, हमारे लोग खुले आसमान के नीचे मैदान में टट्टी और औरतों के साथ सम्भोग करते हैं. इसलिए यह आयत नाजिल हुयी है.

 

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ صَبَّاحٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقْرَأُ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ ) قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْهَا فَقَالَ أُنَاسٌ كَانُوا يَسْتَحْيُونَ أَنْ يَتَخَلَّوْا فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، وَأَنْ يُجَامِعُوا نِسَاءَهُمْ فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، فَنَزَلَ ذَلِكَ فِيهِمْ

 

Sahih Al-Bukhari -Vol 6 Hadith203

Sahih Bukhari Hadith Serial No. 4681

 

 

 

” मुहम्मद बिन अब्बास बिन जाफ़र ने कहा, इसमे कोई शक नहीं है कि लोग अपने सीनों को मोड़ते है, और कारण पूछने पर रसूल ने बताया, कि लोग खुले आसमान के नीचे टट्टी और अपनी औरतों से सम्भोग करते है. और जब कोई देख लेता है, तो शर्म से सीने मोड़ लेते हैं. लेकिन अल्लाह सब देखता रहता है. इसीलिए यह आयत उतरी है

 

حَدَّثَنِى إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا هِشَامٌ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ وَأَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ قَرَأَ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ ) قُلْتُ يَا أَبَا الْعَبَّاسِ مَا تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ قَالَ كَانَ الرَّجُلُ يُجَامِعُ امْرَأَتَهُ فَيَسْتَحِى أَوْ يَتَخَلَّى فَيَسْتَحِى فَنَزَلَتْ ( أَلاَ إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ )

 

Sahih Al-Bukhari -Vol 6Hadith204

Sahih Bukhari Hadith Serial No. 4682

 

 

इन हदीसों का और अधिक खुलासा इस्लाम की इतिहास की किताबों में मिलता है. इसके अनुसार मुहम्मद साहब जब अपने साथियों के साथ जिहाद में जाते थे तो शाम को किसी खुले मैदान में ही टट्टी करते थे. और वहीँ पकड़ी गयी औरतो के साथ बलात्कार भी करते थे. और देखे जाने के डर से सीने मोड़ कर उकडूं बैठ जाते थे. लेकिन अल्लाह यह नज़ारे देखता रहता था. यही कुरान की आयतों का भावार्थ है.

 

 

3- गप्पियों का सरदार —

 

जैसे ही मुहम्मद साहब ने इस्लाम को अल्लाह का प्रिय धर्म घोषित किया, उन्होंने उसी दिन से अपने उपास्य अल्लाह को सबसे बड़ा साबित करने के लिए तिकड़मी चालें चलना शुरू कर दी थी.ताकि लालची और अकल के अंधे अपना धर्म छोड़कर उनके अल्लाह पर ईमान ले आयें. मान लें कि जब अल्लाह इतना महान है, तो उसका रसूल कितना बुद्धिमान होगा. इसलिए मुहम्मद साहब अपने जाहिल साथियों पर अपनी चतुराई का रुआब डालने, और दूसरे नबियों को नीचा दिखने के लिए गप्पों का सहारा भी लिया करते थे. ताकि मूर्ख लोग उनकी गप्पों पर वाहवाही करें.

 

सभी हदीसों की किताबें मुहम्मद साहब की गप्पों से भरी पड़ी हैं, उसका एक नमूना देखिये.

 

“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया है, इस्राइल के लोग नंगे होकर साथ में नहाते थे, और एक दुसरे को नंगा देखते थे. उसी समय वहां मूसा भी आये जो अकेले नहाने लगे. लोगों कहा मूसा हमारे साथ क्यों नहीं नहाते, क्या उनके अंडकोष बहुत बड़े है. फिर जब मूसा ने अपने कपडे उतर कर एक चट्टान पर रख दिए, तो वह चट्टान उनके कपडे लेकर भागने लगी. मूसा नंगे ही उसके पीछे दौड़े, और कपडे वापिस मांगने लगे. लोगों ने उनको पहिचान लिया. बाद में जब कपडे मिल गए तो मूसा ने उस चट्टान को काफी मारा.

 

“Sahih Bukhari, Volume 1, Book 5, Number 277:

 

 

अगर मुसलमान जिहाद के जूनून में, और जन्नत की हूरों के लालच में पागल नहीं होते, और उनमे रत्ती भर भी सोचने समझने की बुद्धि होती, तो वह ऐसे बुरी नजर रखने वाले अल्लाह और ऐसे गप्पी रसूल पर कभी विश्वास नहीं करते, और अपने साथ लाखों लोगों की जिंदगियां बर्बाद नहीं करते.

 

 ” मूर्खता का कोई इलाज नहीं, और अक्लमंद को इशारा काफी होता है “