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by भांडाफोडू (Bhandafodu)
मुहम्मद साहव विश्व में एक ऐसे अद्वितीय महानुभाव थे, जिनकी उपेक्षा करना नितांत असंभव है. उनके अनुयायी और विरोधी सभी उनको हमेशा याद रखेंगे.

मुसलमान उनको इसलिए याद रखेंगे कि वह एक मात्र व्यक्ति थे, जिन्होंने कलमा में अल्लाह के साथ अपना नाम जोड़ दिया. इस से पहले किसी भी नबी या अवतार ने अल्लाह के साथ अपना नाम लेना अनिवार्य नहीं किया था. मुहम्मद साहब के विरोधी उनको इस लिए हमेशा याद करेंगे कि उनकी शिक्षा के कारण दुनिया का भूगोल बदल गया. कई देश नक़्शे से मिट गए, कई विखंडित हो गए, कई नए देश पैदा हो गए. और कई देश टूट कि कगार पर खड़े हुए हैं.

यह मुहम्मद साहब कि महानता है, कि लोग उनके मुजाहिदों के डर के मारे भी उनको याद करते हैं. इसलिए जब भी मुहम्मद साहब की बात होती है, तो हदीसों को याद किये बिना बात अधूरी मानी जाती है, क्योंकि हदीसों में उनके बारे में बारीकी से और प्रमाणिकता से सारी बातें लिखी गई हैं. और उन पर शंका करने का कोई प्रश्न ही नहीं है (ऐसा मुस्लिम विद्वानों का दावा है).

यद्यपि कुरान में अल्लाह ने मुहम्मद साहब को एक साधारण, और सामान्य व्यक्ति बताया है. उदहारण के लिए —

“हे मुहम्मद कहो, कि मैं तो तुम्हारी तरह ही एक मनुष्य हूँ .सूरा -कहफ़ 18 :110.

“हे मुहम्मद हमने तुम से पहले मनुष्यों को ही रसूल बनाया था, और उन में कोई ऐसा नहीं था जो खाना नहीं खाता हो, और न उन में से कोई अमर था. सूरा -अल अम्बिया 21 :7 और 8.

इन आयातों से सिद्ध होता है की मुहम्मद साहब अमर नहीं थे, और सामान्य लोगों की तरह ही उनकी एक ही बार मौत होना चाहिए थी. परन्तु मुहम्मद साहब के साथी उनको सभी नबियों से श्रेष्ठ, चमत्कारी, और अल्लाह के सबसे प्रिय रसूल साबित करना चाहते थे. तब उन लोगों ने एक तरकीब निकाली, कि सभी नबी एक ही बार मरे थे अगर हम अपने नबी की तीन बार मौत बता देंगे तो लोगों पर अधिक प्रभाव होगा.

हदीसों के अनुसार मुहम्मद साहिब अपनी आयु के 60 साल से 65 साल के बीच 5 सालों में तीन बार मरे थे. और तीनों मौतों के गवाह भी थे. वैसे तो मुहम्मद साहिब की तीनों मौतों के कई गवाह हैं, लेकिन यहाँ हरेक मौत के तीन तीन गवाहों के बयान दिए जा रहे हैं.

1-पहली मृत्यु साठ (60) साल की आयु में —

1 – मिश्कात से सबूत मिश्कातुल मसाबीह में मौलाना फजलुल करीम ने बताया कि “अनस ने रसूल के बारे में बताया रसूल न तो एकदम गोरे रहे यार न सांवले, न उनकी आँखें बिल्ली कई तरह थी. चालीस साल कि आयु में उन्हें रिसालत मिली फिर दस साल मक्का में रहने बाद वह हिजरत कर गए और दस साल दूसरे शहर में रिसालत करते रहे. और जब वह साठ की आयु में गुजरे थे, तो उनके सिर्फ कुछ बाल ही सफ़ेद हुए थे.

وعن أنس قال كان رسول الله صلى الله عليه وسلم ليس بالطويل البائن ولا بالقصير وليس بالأبيض الأمهق ولا بالآدم وليس بالجعد القطط ولا بالسبط بعثه الله على رأس أربعين سنة فأقام بمكة عشر سنين وبالمدينة عشر سنين وتوفاه الله على رأس ستين سنة وليس في رأسه ولحيته عشرون شعرة بيضاء

Mishkath –al- Masabih – Vol.4. Chapter 44 – Hadith 75).

2 – सही मुस्लिम से सबूतअनस बिन मालिक ने कहा कि रसूल को चालीस साल कि आयु में अल्लाह ने रसूल बनाया, और वह दस साल तक मक्का में रहे फिर मदीना चले गए, वहां भी दस साल रिसालत करने के बाद साठ साल की आयु में अल्लाह ने उठा लिया. उस समय मुश्लिल से उनके बीस बाल सफ़ेद हुए थे. राबिया ने कहा कि मैंने उनंके सफ़ेद बाल गिने थे.

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِى عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ سَمِعَهُ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَيْسَ بِالطَّوِيلِ الْبَائِنِ وَلاَ بِالْقَصِيرِ وَلَيْسَ بِالأَبْيَضِ الأَمْهَقِ وَلاَ بِالآدَمِ وَلاَ بِالْجَعْدِ الْقَطَطِ وَلاَ بِالسَّبِطِ بَعَثَهُ اللَّهُ عَلَى رَأْسِ أَرْبَعِينَ سَنَةً فَأَقَامَ بِمَكَّةَ عَشْرَ سِنِينَ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْرَ سِنِينَ وَتَوَفَّاهُ اللَّهُ عَلَى رَأْسِ سِتِّينَ سَنَةً وَلَيْسَ فِى رَأْسِهِ وَلِحْيَتِهِ عِشْرُونَ شَعْرَةً بَيْضَاءَ

Sahih Muslim – Book 30, Number 5794-6235.

3- बुखारी से सबूत. राबिया बिन अबी अब्दुर रहमान के कहा कि रसूल का कद माध्यम था, वह जादा लम्बे नहीं थे चालीस साल की आयु में उन पर वही नाजिल हुई. फिर वह दस साल मक्का में और दस साल मदीना में रहे. अफसोस की बात है कि अल्ल्लाह ने उनको साठ साल की आयु में उठा लिया, जबकि उनके सर और दाढी के सिर्फ थोड़े से बाल ही सफ़ेद हुए थे. जिन पर खिजाब लगा था.

حَدَّثَنِى ابْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنِى اللَّيْثُ عَنْ خَالِدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِى هِلاَلٍ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِى عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَصِفُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ كَانَ رَبْعَةً مِنَ الْقَوْمِ ، لَيْسَ بِالطَّوِيلِ وَلاَ بِالْقَصِيرِ ، أَزْهَرَ اللَّوْنِ لَيْسَ بِأَبْيَضَ أَمْهَقَ وَلاَ آدَمَ ، لَيْسَ بِجَعْدٍ قَطِطٍ وَلاَ سَبْطٍ رَجِلٍ ، أُنْزِلَ عَلَيْهِ وَهْوَ ابْنُ أَرْبَعِينَ ، فَلَبِثَ بِمَكَّةَ عَشْرَ سِنِينَ يُنْزَلُ عَلَيْهِ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْرَ سِنِينَ ، وَلَيْسَ فِى رَأْسِهِ وَلِحْيَتِهِ عِشْرُونَ شَعَرَةً بَيْضَاءَ . قَالَ رَبِيعَةُ فَرَأَيْتُ شَعَراً مِنْ شَعَرِهِ ، فَإِذَا هُوَ أَحْمَرُ فَسَأَلْتُ فَقِيلَ احْمَرَّ مِنَ الطِّيبِ . طرفاه 3548 ، 5900 – تحفة 833 – 228/4

Vol 4, Book 56. Virtues And Merits Of The Prophet (S) And His Companions. Hadith 747.

2- दूसरी मृत्यु तिरेसठ (63) साल की आयु में —

1 – बुखारी से सबूत आयशा ने कहा जब रसूल का इंतकाल हुआ था तो उनकी आयु तिरेसठ साल थी.

عَنْ عَائِشَةَ – رضى الله عنها أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم تُوُفِّىَ وَهْوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ

Also see Bukhari Hadith Vol 4. Hadith736, and Vol 5 Hadith 190,

2- मुस्लिम से सबूत सही मुस्लिम में करीब 9 हदीसें है जिनमे मौत के समय रसूल की आयु 63 बताई गयी है, इन में से दो हदीसें दी जा रही हैं.

इब्न अब्बास ने कहा की रसूल मदीना में तेरह साल रहे, और जब वह तिरेसठ साल के हुए तो उनका इंतकाल हो गया.
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَهَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ رَوْحِ بْنِ عُبَادَةَ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَكَثَ بِمَكَّةَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ وَتُوُفِّىَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ .
6243.

وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِى عُمَرَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِىِّ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ أَبِى جَمْرَةَ الضُّبَعِىِّ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمَكَّةَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ سَنَةً يُوحَى إِلَيْهِ وَبِالْمَدِينَةِ عَشْراً وَمَاتَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ6242

सही मुस्लिम किताब 30 हदीस 6242 और 6243. (Sahih Muslim Book . 30, Number 5801:(Also see Hadith Serial Numbers: 5796, 5797, 5798, 5799, 5801, 5802, 5803 & 5804).

3- मिश्कात से सबूत मिश्कात और बुखारी दौनों इस हदीस पर सहमत हैं (متفق عليه) मिश्कात के बाब ( باب المبعث وبدء الوحي الفصل الأول ) में लिखा है.

कि इब्न अब्बास ने कहा ,”कि अल्लाह ने रसूल को चालीस साल की आयु में पहली वही नाजिल की थी. और उसके बाद रसूल मक्का में तेरह साल तक नुबूवत करते रहे. फिर अल्लाह के आदेश से मदीना चले गए. और वहां भी दस साल तक यही काम करते रहे. और तिरेसठ साल की आयु में गुजर गए.

Mishkathul Masabih-Al-Hadis – Maulana Fazlul Karim – Vol.4. Chapter 44 – Hadith 73

Narrated by Ibn Abbas,Allah’s Apostle stayed in Mecca for thirteen years (after receiving the first Divine Inspiration) and died at the age of sixty-three.

Sahih Al-Bukhari Volume.5. Hadith #243 (Bukhari – Arabic Hadith Serial No. 3536).

3- तीसरी मृत्यु पैंसठ (65) साल की आयु में —

1-मिश्कात से सबूत “इब्न अब्बास ने कहा कि रिसालत मिलने के बाद रसूल मक्का में 15 रहे. और इस दौरान 7 साल तक उनकी जिब्राइल से बाते होती रहीं. फिर अगले 8 साल तक जिब्राइल कोई बात नहीं हुई, तो वह मदीना हिजरत कर गए. और वहां दस साल रहे. और जब उनका इंतकाल हुआ तो उनकी आयु पैंसठ (65) साल थी.

وعنه (عن ابن عباس) قال أقام رسول الله صلى الله عليه وسلم بمكة خمس عشرة سنة يسمع الصوت ويرى الضوء سبع سنين ولا يرى شيئا وثمان سنين يوحى إليه وأقام بالمدينة عشرا وتوفي وهو ابن خمس وستين. ( متفق عليه )

Al-Hadis (Maulan Fazlul Karim – Vol.4. Chapter 44 – Hadith 74).

2- सही मुस्लिम से सबूतबनू हाशिम द्वारा आजाद किये गए एक गुलाम अम्मार ने इब्न अबास से पूछा कि हिसाब करके बताओ मृत्यु के समय रसूल क़ी आयु कितनी थी. तो उसने जोड़ कर बताया, रसूल को 40 साल क़ी आयु में रिसालत मिली, उसके बाद वह 15 मक्का में रहे. फिर हिजरत करके मदीना चले गए. और वहां भी 10 तक रहे. इस हिसाब से (40 + 15 + 10 = 65) मौत के समय उनकी आयु 65 साल थी.

وَحَدَّثَنِى ابْنُ مِنْهَالٍ الضَّرِيرُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ عَمَّارٍ مَوْلَى بَنِى هَاشِمٍ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ كَمْ أَتَى لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ مَاتَ فَقَالَ مَا كُنْتُ أَحْسِبُ مِثْلَكَ مِنْ قَوْمِهِ يَخْفَى عَلَيْهِ ذَاكَ – قَالَ – قُلْتُ إِنِّى قَدْ سَأَلْتُ النَّاسَ فَاخْتَلَفُوا عَلَىَّ فَأَحْبَبْتُ أَنْ أَعْلَمَ قَوْلَكَ فِيهِ . قَالَ أَتَحْسُبُ قَالَ قُلْتُ نَعَمْ . قَالَ أَمْسِكْ أَرْبَعِينَ بُعِثَ لَهَا خَمْسَ عَشَرَةَ بِمَكَّةَ يَأْمَنُ وَيَخَافُ وَعَشْرَ مِنْ مُهَاجَرِهِ إِلَى الْمَدِينَةِ

Sahih Muslim – Book 30, Number 5805:

हदीसों से यह सिद्ध हो गयाहै कि मुहम्मद साहब एक बार नहीं बल्कि तीन बार मरे थे, एक बार तो यहूदियों, और ईसाईयों के नबी मरते हैं. अल्लाह ने अपने प्रिय रसूल को तीन बार मरने का मरतबा दिया होगा.

अब यह लेख पढ़कर जकारिया नायक के कुतर्की लोग यदि यह कहें, कि यह हदीसे अमान्य है, तो उनको पता होना चाहिए कुरान भी एक हदीस ही है, यानि हदीस और कुरान एक ही बात है.

कुरान में लिखा है ,”اللَّهُ نَزَّلَ أَحْسَنَ الْحَدِيثِ كِتَابًا مُتَشَابِهًا مَثَانِيَ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ “39:23 “अल्लाह ने हदीस की सर्वोत्तम किताब उतारी है, जिसके सभी हिस्से आपस में जुड़े हुए हैं ,और बार बार दोहराए गए हैं . सूरा -अज जुमर 39 :23.

विरोधियों के पास बस एक ही उपाय है कि यातो वह कबूल करें कि मुहम्मद साहब की तीन बार मौत हुई थी, या हदीसों और कुरान को झूठ और कल्पित बता दें.