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by भांडाफोडू (Bhandafodu)

भारतीय धर्मों में इश्वर को अनेकों रूप से माना जाता है. उसे माता, पिता, बंधू और अपना मित्र तक कहा गया है . अर्थात वह पुरुष और स्त्री दोनो ही हो सकता है. भारत में देवताओं के साथ देवियों की भी पूजा की जाती है. इसी के साथ कई महिला संतों का आदर करते हैं.

इस्लाम से पूर्व अरब भी देवियों की पूजा करते थे. और फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहते थे. लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि इस्लाम में न तो कोई स्त्री नबी बनी और न ही कोई स्त्री संत या औलिया ही बना है.

आज तक कोई मुस्लिम विद्वान् इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका कि अल्लाह को नबी या रसूल बनाने के लिए कोई उपयुक्त स्त्री क्यों नहीं मिली ? जब अल्लाह एक अनपढ़ व्यक्ति को रसूल बना सकता था, तो उसने मुहम्मद की पढ़ी लिखी बेटी फातिमा को रसूल क्यों नहीं बना दिया ? या रसूल की पत्नी आयशा को ही रसूल बना देता.

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि अल्लाह स्त्रियों से चिढ़ता है. और ऐसा तभी हो सकता है, जब अल्लाह खुद एक स्त्री हो तुलसीदास जी ने कहा हैं “पन्नगारी यह चरित अनूपा, मोहि न मोहि नारी, नारी के रूपा.

“तो क्या अल्लाह एक स्त्री है ? इसी के बारे में हमें स्त्रियों और उनके बारे में परदा सम्बन्धी कुरान और हदीसों को देखना होगा. क्योंकि यदि अल्लाह एक स्त्री होगी तो वह पर्दा जरुर करेगी. अरबी शब्द ” हिजाब ” का अर्थ ओट, आड़ और छुप जाना भी होता है. या कोई ऐसी चीज, जिस से खुद को दूसरों की नज़रों बचाया जाये. ऐसी चीज चादर भी हो सकती है. इसका अर्थ बुरका नहीं है. हिजाब का मकसद छुपाना ही है. चाहे वह किसी से की जाये. इस बात को विस्तार से समझाने के लिए पढ़िए –

1 परदे का हुक्म क्यों —

इसके पीछे एक घटना है जो इस प्रमाणिक हदीस में मिलती है. “आयशा ने कहा कि रसूल की पत्नियाँ अक्सर नित्य कर्म के लिए “अल मनसी” नाम के खुले मैदान में जाया कराती थीं, जो मदीना में बाकिया नाम की जगह के पास था. उम्र अक्सर रसूल से कहते थे कि आप अपनी पत्नियों को पर्दा रखने को कहें. लेकिन रसूल इस पर दयां नहीं करते थे. एक दिन रसूल कि पत्नी “सौदा बिन्त जमआ ” ईशा के समय (रात को) शौच के लिए गयी. वह कद में लम्बी थी. और उसे बेपर्दा देख कर उम्र ने कहा सौदा मैंने तुम्हें इस हालत में देख लिया और पहचान लिया. इसके बाद ही यह “हिजाब ” की आयत उतारी थी, जिसमे रसूल की औरतों को इस तरह पर्दा करने कहा था जिसमे सिर्फ आँखें खुली रहें ” बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 148.

और कुरान का आदेश इस प्रकार है -“जब तुम्हें किसी चीज की जरूरत हो ,तो परदे के पीछे रहकर माँगा करो “सूरा -अहज़ाब 33 :53.

وَإِذَا سَأَلْتُمُوهُنَّ مَتَاعًا فَاسْأَلُوهُنَّ مِنْ وَرَاءِ حِجَابٍ”whenever you ask them for anything that you need, ask them from behind a screen”Sura -alAhzab33:53

2- शौच के समय परदा जरुरी है—

शौचालय के सामने दरवाजा या कोई आड़ बना दी जाती है. लेकिन इसके लिए कोई बुरका नहीं पहिनता रसूल भी करते थे. “अब्दुल्लाह बिन उमर ने कहा कि रसूल ने कहा तुम लोग जब ही नित्य कर्म के लिए जाओ तो क़िबला या बैतुल मुक़द्दस कि तरफ मुंह नहीं करो. एक दिन मैं छत के ऊपर था, और देखा कि रसूल दो ईंटों कर पैर जमाये शौच कर रहे थे और उनका मुंह जरुशालेम की तरफ था. पता कहते ही रसूल ने बीच में एक आड़ बना दी, जिस से किसी की उन पर नजर न जा सके.यह फतह अल बारी जिल्द 1 पेज 258 में है “बुखारी -जिल्द 1 किताब 4 हदीस 147.

इसी तरह की आड़ को हिजाब कहा है. न कि बुर्के को. जैसे दफ्तरों के दरवाजों पर पर्दा होता है.

3- अल्लाह परदा करता है —

इन हदीसों और कुरान की आयतों से पता चलता कि अल्लाह अपना चेहरा छुपाने के लिए कोई आड़ (पर्दा) प्रयोग करता है. जिस से लोग उसका चेहरा न देख सकें. और अल्लाह का पर्दा इतना चमकीला है जिसे देखते ही आँखें चुंधिया जाएँ, जैसी हदीस कहती है —

अबू मूसा से रसूल ने कहा कि अल्लाह कभी सोता नहीं और नींद उसे शोभा देती है, और फिर रसूल ने कहा कि अल्लाह के सामने एक पर्दा रहता है. अबू बकर ने कहा क्या आग का पर्दा, रसूल बोले चमकीला पर्दा, और अगर अल्लाह अपना चेहरे से पर्दा हटा दे तो उसकी चमक वहां तक जाएगी जहाँ तक नजर जाएगी “सही मुस्लिम -किताब 1 हदीस 343.

अल्लाह कियामत के दिन जब सब लोगों का हिसाब होगा तो भी अनजान लोगों के सामने पर्दा कर लेगा. यह कुरान कहती है जिस दिन (कियामत) लोगों को उठाया जायेगा अल्लाह अपने ऊपर हिजाब (पर्दा) दल देगा, ताकि लोग उसे खुला नहीं देख सकें “सूरा -अत ततफीक 83 :15.

“كَلاَّ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّمَحْجُوبُونَ”Nay!, verily, they, on that day, the Day of Resurrection, will be screened off from their Lord, and so they will not see Him. Sura-at Tatfiq83:15

indeed; but upon that day they shall be veiled (lamahjooboona) from their Lord, 83:15.

4- मूसा मांग पर अल्लाह बेपर्दा हुआ —

मूसा (Moses) भी एक अल्लाह के रसूल थे, जो इस्लाम से बहुत पहिले हुए थे इनका विवरण बाइबिल और कुरान में भी विस्तार से मिलता है. मूसा ने अल्लाह से कहा था, कि जब तक मैं तम्हारी शक्ल बेनकाब नहीं देखूंगा, तब तक तुम पर विश्वास नहीं करूँगा, कुरान में इसी के बारे में कहा गया है

“हे मूसा हम तुम्हारी बात नहीं मानेंगे, जब तक अल्लाह को बेपर्दा (खुल्लम खुल्ला) नहीं देख लेते ” सूरा -बकरा 2 :55.

“وَإِذْ قُلْتُمْ يَا مُوسَىٰ لَنْ نُؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى اللَّهَ جَهْرَةً فَأَخَذَتْكُمُ الصَّاعِقَةُ وَأَنْتُمْ تَنْظُرُونَ” Sura -bakra2:55O Moses, indeed we shall not believe thee until we see God face to face!” 2:55.

जब मूसा अल्लाह को बेनकाब देखने के लिए तूर नामके पहाड़ पर गए तो हवा के कारण अल्लाह का परदा उड़ रहा था .तब अल्लाह ने कहा.” तू उसको देख, और जब वह स्थिर हो जायेगा तो तू मुझे देख सकेगा “सूरा-अल आराफ़ 7 :143.
if it remains firm in its place, then – only then – wilt thou see Me.””مَكَانَهُ فَسَوْفَ تَرَانِي” 7:143-al Araf.

5- रसूल ने अल्लाह को बेपर्दा देखा —

जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा की जब रसूल अल्लाह से मिलकर उसे बिना पर्दा देख कर आये, तो यह आयात नाजिल हुई थी, जिसमे अल्लाह की शक्तिं के बारे में कहा है. तब रसूल को अल्लाह के चहरे की याद आ गयी. और वह बोले की अल्लाह मैं तेरे तेजोमय खुले चहरे की पनाह मांगता हूँ, यही हदीस कहती है, कहो, वह अल्लाह का इतना सामर्थ्य है, की वह तुम्हारे ऊपर से या तुम्हारे पैरों के नीचे से कोई यातना (Punishment) भेज दे ”

“قُلْ هُوَ الْقَادِرُ عَلَىٰ أَنْ يَبْعَثَ عَلَيْكُمْ عَذَابًا مِنْ فَوْقِكُمْ أَوْ مِنْ تَحْتِ أَرْجُلِكُمْ أَوْ يَلْبِسَكُمْ شِيَعًا وَيُذِيقَ بَعْضَكُمْ بَأْسَ بَعْضٍ انْظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَفْقَهُونَ”6:65सूरा -अल अनआम 6 :65.

इस आयत के बाद ही रसूल ने कहा था, कि “अल्लाह मैं तेरे चहरे की पनाह मांगता हूँ “यहाँ पर अरबी में “वजहूوجهه” शब्द प्रयोग किया गया है. जिसका अर्थ चेहरा (Face) होता है.

Narrated Jabir bin ‘Abdullah:When this Verse:–’Say (O Muhammad!): He has Power to send torments on you from above,’ (6.65) was revealed; The Prophet said, “I take refuge with Your Face.”قال النبي : “اغتنم ملجأ مع وجهك.”

Sahih Bukhari, Volume 9, Book 93, Number 503:

6- कैसे जाने अल्लाह स्त्री है ? —

वैसे तो बड़ा ही गूढ़ और रहस्यपूर्ण विषय है. किसी ने भी इसके बारे में दावे से नहीं कहा कि अल्लाह पुरुष है अथवा स्त्री. कुरान और हदीसों से अलह स्त्री ही लगता है. ऐसे विषय का निर्णय करने के लिए एक लघु कथा दी जा रही है.

“एक बार किसी के माकन कि छत पर एक हरे रंग का पक्षी आ गया. जो तोता जैसा था. एक बच्चे ने पिता से पूछा कि पिताजी यह तोता है या तोती. पिता बोला उसके आगे अमरूद रख दो. अगर खाता है तो, तोता होगा और अगर खाती है तो, तोती होगी. इसी कथा के आधार पर हमने कहा कि अगर पर्दा करे तो अल्लाह स्त्री है, और बेनकाब रहे तो पुरुष है. शायद यही कारण होगा कि अल्लाह ने औरतों के लिए पर्दा अनिवार्य कर दिया. अब आपकी मर्जी कि अल्लाह को पुरुष मानें या स्त्री मानें !

http://answering-islam.org/Shamoun/allah_as_woman.htm