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by भांडाफोडू (Bhandafodu)

इस्लाम सभी धर्मों से उत्तम है, क्योंकि इसके बुनियादी उसूलों में एकरूपता है, और इस्लाम के उसूलों में कोई बदलाव नहीं हो सकता है. इस्लाम के सभी नियम अल्लाह के द्वारा बनाये गए है, इस समय विश्व में पचास से अधिक मुस्लिम देश हैं, लेकिन सभी में अल्लाह के वही नियम प्रचलित हैं. यही इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता है.
जो इस्लाम को दूसरे धर्मों से श्रेष्ठ साबित करती है. ऎसी बातें सिर्फ वही लोग कहते हैं, जिनको या तो इस्लाम के बारे में ठीक से ज्ञान नहीं होता है, या फिर वह लोग कहते हैं, जो जानबूझ कर लोगों को गुमराह करते है.
क्योंकि हकीकत इन बातों के बिलकुल विपरीत है.

असल में इस्लाम जिन पांच सिद्धांतों पर टिका हुआ है, उनको इस्लाम के पांच स्तम्भ (Five Pillars of Islam) या ” अरकानुल इस्लाम (arkân-al-Islâm أركان الإسلام) ” कहते हैं.

यह पांच स्तम्भ इस प्रकार हैं —-

1 . ईमान
2 .सलात यानी (Arabic: صلاة salāh) नमाज
3 .जकात
4 .सोम यानि रोजा, और
5 .हज्ज

मुसलमानों का दावा है कि इस्लाम कि इस्लाम की मेहराब इन्हीं मजबूत सुतूनों पर टिकी हुयी है. और इन्हें हिलाना असंभव है. इस बात में कितनी सत्यता है, यह पता करने के लिए इस्लाम दे दूसरे स्तम्भ ” नमाज ” की मजबूती जांचते हैं.

1 – अजान क्या है —

लगभग सभी ने देखा होगा की हरेक नमाज से पहले एक व्यक्ति मीनार पर चढ़कर जोर से बांग देता है, और लोगों को नमाज के लिए आने का आह्वान करता है, इसी को अजान कहते हैं. यह अरबी के शब्द ” उज्न” से बना है जिसका मतलब “कान Ear ” होता है. अजान देने वाले को “मुअज्जिन” कहा जाता है, जो अजान के शब्दों को जोर जोर से चिल्ला कर लोगों को सुनाता है.

2- अजान की जरुरत क्यों पड़ी —

इस्लाम के शुरूआती दिनों में नमाज का कोई समय निर्धारित नहीं था. और मुसलमान नमाज के समय अपने कामों में लगे रहते थे. इसलिए मुहम्मद साहिब के साथियों ने सुझाव दिया कि कोई ऐसी तरकीब निकाली जाये जो, सभी से निराली हो. और जिस से लोगों को नमाज से समय का पता भी चल जाये. यह कुरान और हदीस में इस तरह कहा गया है —

“तबाही है ऐसे लोगों के लिए जो नमाज के (समय) के बारे में बेखबर रहते हैं, और दिखावे की बातों में लगे रहते हैं, सूरा – माऊन 107 :4 से 6.

अनस बिन मालिक ने कहा कि कुछ लोगों ने रसूल को सुजाव दिया कि किसी पहाड़ी पर आग जला दी जाये. किसी ने ईसाईयों कि तरह घंटा बजा कर नमाज की सूचना देने की राय दी. लेकिन रसूल से इन कृत्रिम उपायों की जगह बिलाल को मुंह से अजान देने को कहा, और अजान के शब्द भी बता दिए.बुखारी किताब 11 हदीस 577 और 579.

3- अजान से बदबू —

देखा गया है कि मस्जिदों के अन्दर, उसके आसपास, और मुसलमानों शरीर और कपड़ों में अजीब सी बदबू भरी रहती है, जिसे छुपाने के लिए वह इत्र का प्रयोग करते रहते हैं, असल में यह दुर्गन्ध अजान के कारण होती है, जैसा कि हदीस में बताया गया है.

अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है, जैसे ही अजान दी जाती है, उसकी आवाज सुनते ही शैतान पादते हुए सरपट दूर भाग जाता है, और जब अजान हो जाती है वापिस अन्दर आ जाता है. फिर इकामा के समय इतनी जोर से पादते भागता है कि उसकी बदबू दूर तक जाती है.

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ أَبِى الزِّنَادِ عَنِ الأَعْرَجِ عَنْ أَبِى هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ « إِذَا نُودِىَ لِلصَّلاَةِ أَدْبَرَ الشَّيْطَانُ وَلَهُ ضُرَاطٌ حَتَّى لاَ يَسْمَعَ التَّأْذِينَ ، فَإِذَا قَضَى النِّدَاءَ أَقْبَلَ ، حَتَّى إِذَا ثُوِّبَ بِالصَّلاَةِ أَدْبَرَ ، حَتَّى إِذَا قَضَى التَّثْوِيبَ أَقْبَلَ حَتَّى يَخْطُرَ بَيْنَ الْمَرْءِ وَنَفْسِهِ ، يَقُولُ اذْكُرْ كَذَا ، اذْكُرْ كَذَا . لِمَا لَمْ يَكُنْ يَذْكُرُ ، حَتَّى يَظَلَّ الرَّجُلُ لاَ يَدْرِى كَمْ صَلَّى » . أطرافه 1222 ، 1231 ، 1232 ، 3285 – تحفة 13818

Sahih” Al-Bukhari Volume 1. chap13 Hadith #582.
Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.608.

“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान से कहा, अजान की आवाज सुनते ही शैतान पादने लगता है, और भाग जाता है. और जैसे ही मुआज्जिन अजान पूरी कर लेता है, शैतान वापिस आ जाता है. फिर इकामा के शब्द सुनते ही पादते हुए भागता. रसूल ने कहा ऐसा हर बार होता है, लेकिन तुम पाद की बदबू पर ध्यान नहीं देना.

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ جَعْفَرٍ عَنِ الأَعْرَجِ قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ – رضى الله عنه – قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم « إِذَا أُذِّنَ بِالصَّلاَةِ أَدْبَرَ الشَّيْطَانُ لَهُ ضُرَاطٌ حَتَّى لاَ يَسْمَعَ التَّأْذِينَ ، فَإِذَا سَكَتَ الْمُؤَذِّنُ أَقْبَلَ ، فَإِذَا ثُوِّبَ أَدْبَرَ فَإِذَا سَكَتَ أَقْبَلَ ، فَلاَ يَزَالُ بِالْمَرْءِ يَقُولُ لَهُ اذْكُرْ مَا لَمْ يَكُنْ يَذْكُرُ حَتَّى لاَ يَدْرِى كَمْ صَلَّى » . قَالَ أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِذَا فَعَلَ أَحَدُكُمْ ذَلِكَ فَلْيَسْجُدْ سَجْدَتَيْنِ وَهُوَ قَاعِدٌ . وَسَمِعَهُ أَبُو سَلَمَةَ مِنْ أَبِى هُرَيْرَةَ – رضى الله عنه . أطرافه 608 ، 1231 ، 1232 ، 3285 – تحفة 13633 ، 15423 – 85/2 -Sahih” Al-Bukhari Volume 2. Hadith #313.Bukhari Hadith (Arabic) Serial No.1222.

इन हदीसों से यही लगता है, मुसलमान ही अजान के समय मस्जिदों में पादते रहते है, क्योंकि वह हमेशा हर तरह के जानवर खाते रहते हैं. इसीलिए उनकी बदबू को छुपाने के लिए शैतान का बहाना लिया गया है.

4 – अजानों में अंतर —

पूरे विश्व में हर जगह की अजानों के शब्दों में काफी अंतर है, क्योंकि यह शब्द इधर उधर से उठा लिए गए थे, और कुछ वाक्य लोगों ने खुद जोड़ लिए है. शिया और सुन्नी इस्लाम के मुख्य फिरके हैं, इसकी अजानें इस प्रकार हैं.

शिया लोगों द्वारा अजान में जोड़े गए अतिरिक्त शब्द लाल रंग में दिए गए हैं,

1-الله اكبر :अल्लाहो अकबर
2-اشهد ان لا اله الا الله :अशहदु अन ला इलाह इल्लल्लाह
3- رسول الله أشهد أن محمدا :अशहदु अन मुहम्मदुर रसूल्लाह
4-اشهد ان عليا ولي الله :अशहदु अन अलीयन वलीउल्लाह
5-حي على الصلاة :हय्या अलस्सलात
6-حي على الفلاح :हय्या अलल फलाह
7-حي على خير العمل :हय्या अलल खैरल अमल
8-الله اكبر :अल्लाहो अकबर
9-لا اله الا الله :ला इलाहा इल्लल्लाह

इस अजान के जो शब्द कुरान की आयातों से लिए गए हैं वह अजान के शब्दों के क्रम संख्या से दिए जा रहे हैं.

क्र .2 – और जब इन से कहा जाता है कि कहो ” ला इलाहा इल्लल्लाह ” तो यह मजाक उड़ाते है ” सूरा -अस साफ्फात 37 :35.

क्र .3 -“और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं (मुहम्मदुर रसूलुल्लाह) जो काफिरों के प्रति कठोर, और अपनों के लिए दयालु हैं “सूरा -अल फतह 48 :29.

क्र .4 -“तुम्हारे वली तो अल्लाह और उसका रसूल है. सूरा – मायदा 5 :55.

इन आयतों से पता चलता है, जब किसी ने मुहम्मद को कोई अल्लाह का रसूल नहीं माना तो मुहम्मद ने अपने लोगों से कहा की वह यहूदियों और ईसाइयों के सामने गवाही दें मैं रसूल हूँ. क्योंकि अजान की तीसरी पंक्ति का अर्थ है “हम गवाही देते है कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं.

5- इस्लाम में सुधार —

मुसलमान कितनी भी डींगें मारें कि इस्लाम में कोई बदलाव नहीं हो सकता, लेकिन यह बात सरासर झूठ है क्योंकि न केवल अजान में बल्कि नमाज में भी बदलाव हुआ है. यही नहीं अरबी में कुरान पढ़ने पर पाबन्दी लगा दी गयी, यह किसी मुस्लिम देश ने नहीं बल्कि मुस्लिम देश तुर्की ने ऐसा साहसी कदम उठाया था. और कट्टर मुल्ले मुंह ताकते रह गए. तुर्की के प्रथम राष्ट्रपति कमाल अता तुर्क (19 मई 1981 -10 नवम्बर 1838) ने इस्लाम में समूल परवर्तन करा दिया था, जैसे 1926 में बुरका पर रोक लगा दी, उसी साल 4 अक्तूबर को इस्लामी अदालतें बंद करा दी. अरबी की जगह तुर्की भाषा में अजान देने और कुरान पढ़ने का हुक्म दिया, फिर तुर्की भाषा को अरबी अक्षरों की जगह रोमन लिपि में लिखने पढ़ने का आदेश जारी कर दिया. आज भी तुर्की में अजान और कुरान तुर्की भाषा में पढ़ी जाती है.तुर्की अजान का नमूना देखिये —

Tanrı uludurŞüphesiz bilirim, bildiririmTanrı’dan başka yoktur tapacak.Şüphesiz bilirim, bildiririm;Tanrı’nın elçisidir Muhammed.Haydin namaza, haydin felaha,Namaz uykudan hayırlıdır. ( विडियो )Adhan at turkish (old times) – Adhan auf türkisch (alte Zeiten) – Türkce Ezan

तुर्की की तरह ईरान में भी अजान और नमाज में काफी बदलाव हुए हैं. इरान के लोग शिया हैं, और वह पहले अरबी भाषा में जो अजान देते थे उसका नमूना देखिये.

Shia azan —
Shia Islamic Call to Prayer Azan Ali Akbar Karbala Live from (Roza) Shrine Hazrat Imam Hussain a.s

यह शिया अजान इरान के बादशाह के समय तक थी, लेकिन उसके बाद आयतुल्लाह खुमैनी फारसी भाषा में अजान देने का हुक्म दे दिया जो अज तक प्रचलित है. फारसी अजान का नमूना देखिये —

Iranian Ajan in Farsi —

6- शिया सुन्नी नमाज में अंतर —

जिस तरह से शिया और सुन्नियों के विचार एक दूसरे से विपरीत और भिन्न हैं, उसी तरह उनकी अजान, नमाज भी अलग हैं.

1. शिया दिन में सिर्फ तीन बार नमाज पढ़ते हैं, और मगरिब के साथ ईशा की नमाज मिला देते है. सुन्नी पांच बार नमाज पढ़ते हैं.

2. सुन्नी हाथ बांध कर और शिया हाथ खोलकर नमाज पढ़ते हैं.

3. शिया “खैरल अमल ” शब्द अधिक कहते हैं.

4. सुन्नी सजदे के समय जमीन पर सर रखते हैं, शिया किसी लकड़ी के बोक्स या ईंट पर सर रखते हैं.

5- शिया दुआ के बाद “आमीन ” शब्द नहीं बोलते.

7- कुत्तों की अजान —

जिस दिन से अजान देने की प्रथा शुरू हुई थी, उसी दिनसे लगातार अजान दी जा रही है, इसका मुसलमानों पर कोई असर हुआ है कि नहीं इसके बारे में कोई शोध नहीं किया गया है. लेकिन कुछ लोगों ने पता किया है कि, जब भी अजान दी जाती है, कुत्ते अजीब सा व्यवहार करने लगते हैं. वे अजान की आवाज के साथ भौंकने लगते हैं.

इस्लाम के विरोधी तो यहाँ तक कहते हैं कि अजान कि प्रेरणा कुत्तों के भौंकने से मिली होगी. क्योंकि दौनों में काफी समानता है. दिए गए विडियो से यह बात सही लगती है.

Unbelivable Behaviour of Dogs during Islamic Call ” AZAN ” —

विचार करने योग्य यह बात है कि जब इस्लाम का एक स्तम्भ ” नमाज ” इतना कमजोर है, तो बाकी स्तम्भ कैसे होंगे. वैसे ही जिस पुल का एक खम्भा जर्जर होता है, वह पुल टिकाऊ नहीं माना जाता है. इस से यह भी सिद्ध होता कि इस्लाम में एकरूपता नहीं है.