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इस्लाम धर्म में कुछ ऎसी मान्यताएं हैं जिन पर जिन पर हरेक मुसलमान को विश्वास करना

फ़र्ज़ है.और उस पर शंका करने या सवाल करने की कोई इजाजत नहीं है.इस्लाम्मे इसे ईमान

लाना कहा जाता है.ऎसी कुछ बातें इस इस तरह हैं,अल्लाह को एक मानना,फरिश्तों को मानना

,जन्नत और दोलख को मानना आदि .

इन मान्यताओं का आधार कुरआन और हदीसें हैं .इस्लाम की सारी धार्मिक पुस्तकें अरबी भाषा में हैं.अरबी एक शब्द संपदा से संपन्न भाषा है.इसकी व्याकरण लगभग संस्कृत मिलती है.एनी भाषाओं के मुकाबले अरबी में अभिव्यक्ति की क्षमता अधिक है इसलिए जब कुरआन को अरबी व्याकरण के अनुसार पढ़ा जाता है तो कुछ तथ्य मान्यताओं के विपरीत पाए जाते हैं,जैसे कि-

१-अल्लाह एक नहीं ,अनेक व्यक्ति हैं

कुरआन में जब भी अल्लाह अपने मुंह से कुछ बात कहता है ,तो वह “मैं “की जगह “हम “शब्द का प्रयोग करता है.अरबी में “अना”की जगह “नहनु”कहता है ,जोकि बहुवचन है .और एक से अधिक लोगों के लिए प्रयुक्त किया होता है देखिये

इन्ना नहनु अकरबु इलैह मं कुम सूरा वाकिया ५६:८५ हम तुम्हारे पास हैं

नहनु खलाक्नाकुम सूरा अम्बिया ५६:५७,इन्ना नहनुल हय्यी व् युमीतु सूरा अल हिज्र १५:२३ हम तुम्हें जीवित करते हैं और मारते हैं.

इन्ना नहनु नुही व् नुमीतु सूरा काफ ५०:५३ ,हम जीवन देते हैं और मौत देते हैं

ऐसे कुरआन में कई उदाहण हैं जिस से लगता है कि अलाह के साथ कोई और भी है जो उसके साथ काम कर रहा है वरना अल्लाह एकवचन की जगह बहुवचन में क्यों बोल रहा है यानी वाहिद की जगह जमा मुतकल्लिम में क्यों बोल रहा है.अर्थात अल्लाह एक नहीं है

२-फ़रिश्ते मर्द नहीं औरतें हैं

फ़रिश्ता फारसी शब्द है .इसके लिए अरबी शब्द मलायाकतुं है जो अरबी व्याकरण के अनुसार मुआन्निस जमा है .यानी स्त्रीलिंग बहुवचन है

अरबी में पुर्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के लिए संज्ञा के आगे हे ते और दो पेश लगाए जाते हैं उदा-हामिदुन-हामिदतुन,सादिकुन सादिकतुं

इसलिए अरबी व्याकरण के अनुसार मलायाकतुन का अर्थ फरिस्ता नहीं फरिश्तिनी होना चाहिये और वे सारी औरतें हैं

३-फ़रिश्ते अजन्मा और अमर हैं

कुरआन में मनुष्य को काली मिट्टी से और जिन्नों को गर्म लू की लपटसे पैदा बताया है सूरा अल हिज्र १५:२७.२८

लेकिन फ़रिश्ते का बने और किस चीज से बने इस पर कुरआन मौन है .इतना प्रमाण है कि जिस समय आदम और जिन्नों को बनाया जारहा था फ़रिश्ते पहिलेसे मौजूद थे.फरिश्तों के न औलाद हो रही है और न वे मर रहे हैं अर्थात वह अजर अमर हैं .और अलह की तरह अजन्मा हैं

४-मुहम्मद ने औरत पर सवारी की सूरा बनी इसराएल के अनुसार जब मुहम्मद ने अल्लाह से मिलना चाहाथा वह मक्का ने था

और अल्लाह सातवें आसमान पर रहते हैं इसलिए अल्लाह ने एक फरिस्ते को भेजा ,जिसकी शक्ल और छाती से ऊपर का हिस्सा एक १४ साल की लड़की की तरह था.और धड एक गढ़ी की तरह थे .उसका नाम बुर्राक बताया जाता.वह घोड़ी से छोटी और गधीसे बड़ी थी .वह इंसान की तरह बात करती थी .और औरतोंकी तरह श्रृंगार किये थी

. जब उसने मुहामद को देखा तो वह शर्मा गयी .अब जिब्रील ने कहा तुम शरमाओ मत ,यह नबी हैं ,जो तम्हारे ऊपर चढ़ कर अल्लाह के पास जायेंगे .बुर्राक ने मुहम्मद को सातों आसमान की सैर करायी..

इस यात्रा को मेराज कहा जाता है मुहम्मद ने बुर्राक को जोर से पकड़ा था ताकि गिर न जाए .बुर्राक के पंख भी थे .लेकिन उसने कोई पर्दा नहीं किया था .

इन बातों से पता चलता है कि इस्लामी मान्यताओं में कितनी विसंगतियां हैं