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यह सर्व स्वीकृत सत्य है कि ,किसी भी व्यक्ति के चरित्र और स्वभाव के बारे में उसकी संगत से पता चल जाता है.जो जिस प्रकार का व्यक्ति होता है ,उसको वैसे ही साथी मिल जाते हैं .मुहम्मद ने भी अपने स्वभाव के अनुसार साथी बना रखे थे .मुहम्मद के साथियों को मुसलमान “الصحابهसहाबी “या Companion कहते हैं.और उनको अपना आदर्श मानकर आदर से उनके नाम से “रजी अल्लाहु अन्हु “लगा देते हैं ,यानि अल्लाह उन से राजी हो .मुहम्मद के साथियों में कई तरह के लोग थे ,जिनमे ,ईर्ष्यालु ,रिश्वत लेने देने वाले ,वेश्यागामी ,गंदे ,और ऐसे लोग भी थे ,जो औरतों पर बुरी नजर रखते थे .इनके बारे में हदीसों और इस्लाम की प्रमाणिक इतिहास की किताबों में जो लिखा है उसका कुछ नमूना प्रस्तुत किया जा रहा है .

1 -ईर्ष्यालु

इतिहास की किताबों में सहबियों की आपसी लड़ाइयों के बारे में जो प्रामाणिक हदीसों में रावियों द्वारा बयान की हैं ,उसके अनुसार अधिकांश सहाबी मुख्य मार्ग से हट गए थे .और जालिम और फासिक बन गए थे .क्योंकि वह इर्ष्या ,नफ़रत ,और लालच से भर गए थे .कई लोगों ने तो रसूल को देखा भी नहीं था .यह सभी पूरी तरह से निष्पाप नहीं थे .

The battles (between the Sahaba) as its recorded in history books & narrated by reliable narrators serve as proof that some companions left the right path and became Zaalim and Fasiq because they became affected by jealousy, hatred, stubbornness, a desire for power and indulgence because the companions were not infallible , nor was every individual that saw Rasulullah (s), good”.

Imam Dhahabi stated in his book Marifat al-Ruwah, page 4:

अल शुयूती ने कहा कि वह एकदूसरे को काफ़िर कहते थे .

Al-Suyuti writes:

“Some of the Sahaba issued Takfeer against one another”

Al-Dur al-Manthur, Volume 2 page 361

2 -मन के पापी

एक औरत रसूल के पीछे नमाज पढ़ती थी ,वह बहुत सुन्दर थी .उसी लोग

को देखने के लिए उसके पीछे खड़े हो जाते थे ,ताकि वह जैसे ही झुके उसके पीछे का हिस्सा दिख जाये .एक बार उन में से एक आदमी जब उस औरत को देखने को अगली पांति में अगया तो ,सब नाराज हो गए .

رأة تستخدم للصلاة وراء النبي (ص) وكانت جميلة جدا، وبالتالي فإن الناس سوف يصلون في السطر الأخير حتى يتمكنوا من مراقبة لها في حين أنها رضخت، واحد منهم، ثم توجه إلى السطر الأول بحيث أنهم لم يتمكنوا لرؤيتها، وبالتالي كشف الله ‘{لتعرف بنا أولئك منكم الذين أسارع إلى الأمام، وأولئك الذين متخلفة.}’

A woman used to pray behind the Prophet (s) and she was very beautiful, therefore the people would pray in the last line so that they could observe her whilst they bowed, one of them then went to the first line so that they were unable to see her, hence Allah revealed ‘{To Us are known those of you who hasten forward, and those who lag behind.}’

Imam of the Salafies Nasiruddin Albaani records in Silsila Sahiha, Volume 5 page 608:

Tarikh Dimashq, Volume 60 pafe 40:

3 -वेश्यागामी

उमर एक औरत को सम्भोग के लिए बुलाये ,लेकिन वह इस के लिए अग्रिम पैसा चाहती थी .जब उमर ने उसके साथ सम्भोग करना चाहा तो वह बहाने करने लगी ,की मेरा मासिक चल रहा है .उमर को पता चल गया कि औरत झूठ बोल रही है .तो वह रसूल के पास गए और शिकायत की ,रसूल ने कहा औरत को पचास दीनार अधिक दे दो .”

ضي الله عمر بن الخطاب رضي الله كان له زوجة العبيد الذين كانوا يكرهون الرجال. واعتذرت كلما أراد عمر أن يكون الجماع معها ، من خلال تعزيز ذريعة أنها كانت فترة وجود ، وبالتالي يعتقد أن عمر كان يقول انها كذبة ، ثم (عندما كان الجماع معها) وجد أنها كانت تقول الحقيقة . ذهب بعد ذلك إلى النبي (ص) وقال انه أمرته بدفع خمسين دينارا كمنظمة خيرية.

Umar bin al-Khatab may Allah be pleased with had a slave girl who used to hate men. Whenever Umar wanted to have sexual intercourse with her, she apologized by advancing an excuse that she was having a period, hence Umar thought that she was telling lie, then (when he had sexual intercourse with her) he found that she was telling the truth. He then he went to the prophet (pbuh) and He ordered him to pay fifty dinars as charity.

We read in Tabaqat Ibn Saad, Volume 6 page 195:

तबकाते इब्न साद -जिल्द 6 पेज 195

4 -गंदे

कदमा बिन मदऊन रसूल के सहाबी थे .उन्हों ने कहा है कि उमर नमाज से समय अपने सर और कपड़ों के जुएँ मारते रहते थे .यहांतक उनके हाथ खून से रंग जाते थे

.” ‘Ibn Umar used to kill lice during prayer until the blood get on his hand’

وكان ابن عمر لقتل القمل في الصلاة حتى الدم الحصول على يده’

Imam Ghazzali records in his authority work Ehya uloom al-Deen, Volume 1 page 188:

उसुद अल गवा -जिल्द 1 पेज 980 .और अल इसबा -जिल्द 5 पेज 432

तारीख अल खिलाफा -लेखक अबू नईम अस्बहानी पेज 127

और यही बात इमाम मुहम्मद बिन याह्या बिन अबी बकर ने अपनी किताब “التحميدوالبيان في المقتل شهيدعثمانअल तहमिदवाल बयान फिल मकतल अल शहीद उस्मान .पेज 186

5 -हिजड़ा प्रेमी

“उम्मे सलाम ने कहा कि .रसूल एक हिजड़े के साथ बैठे थे ,उसने अब्दुल्लाह बिन अबी उमैया से कहा अगर तुम कल ताइफ़ के यद्ध में जीत जाओ तो ,गैलान कि बेटी से शादी कर लेना वह सुन्दर है और उसमे इतनी चर्बी है कि आगे से चार गुना और पीछे से आठ गुना आनंद आयेगा .रसूल ने कहा इस हिजड़े को औरत के पास नहीं भेजना .

Narrated Um Salama:

The Prophet came to me while there was an effeminate man sitting with me, and I heard him (i.e. the effeminate man) saying to ‘Abdullah bin Abi Umaiya, “O ‘Abdullah! See if Allah should make you conquer Ta’if tomorrow, then take the daughter of Ghailan (in marriage) as (she is so beautiful and fat that) she shows four folds of flesh when facing you, and eight when she turns her back.” The Prophet then said, “These (effeminate men) should never enter upon you (O women!).” Ibn Juraij said, “That effeminate man was called Hit.”

Sahih al-Bukhari, Volume 5, Book 59, Number 613

6 -इस्लाम के लिए रिश्वत

एक सहाबा अल मुगीरा बिन शुआब ने कहा कि ,मी इस्लाम के लिए सबसे पहिले रिश्वत ली थी .यही दूसरी हदीस भी है .

Al-Mughira bin Shu’aba (a Companion) said: ‘I am the first one who gave a bribe in Islam’

Similarly, we read in Usud al-Ghaba, Volume 4 page 407:

” أنا أول من أعطى رشوة في الإسلام “

“The first one who gave a bribe in Islam”

Likewise we read in Al-Isaba, Volume 6 page 157:

7 -शहर में बदनाम

अबू बकर अल मजूरी ने कहा कि ,मैं हसन अल बजा अहमद बिन हम्बल के घर गया तो उनके साथ एक सुंदर लड़का बात कर रहा था .जब मैं बात करके जाने लगा तो कहा तुम इस लडके के साथ बाजारों में बात नहीं किया करे ,वह बोले यह मेरी बहिन का लड़का है .तो मैंने कहा कुछ भी हो ,लोग तुम्हारी आदतों के कारण शक जरुर करेंगे .

Abu Bakr al-Maroozi narrated that Hassan al-Baza came to visit Ahmad ibn Hanbal and with him was a beautiful boy. He talked to him and when he wanted to leave, Abu Abdillah (Imam Ahmad) said: ‘Oh Abu Ali, don’t walk with this boy on the street. He replied: ‘He is my sister’s son’. He (Imam Ahmad) said: ‘Even so, otherwise the people will have suspicious thoughts about you.’

وروى أبو بكر المروزي أن حسن بازا جاء لزيارة أحمد بن حنبل ومعه كان صبيا جميلا. وتحدث إليه وعندما أراد الرحيل ، أبو عبدالله (الإمام أحمد) قال : يا أبا علي، لا تمشي مع هذا الولد في الشارع. فأجاب : ‘وهو ابن شقيقتي. وقال (الإمام أحمد) : ‘على الرغم من ذلك، وإلا فإن الناس سوف لديك أفكار مشبوهة حول أنت.

Talbis Iblis, page 337

आप खुद अंदाजा कर सकते हैं ,की जब मुहम्मद के साथी इस प्रकार के थे तो मुहम्मद किस प्रकार का व्यक्ति होगा .उसके साथियों को मुसलमान भले ही आदर्श मानें ,लेकिन उनका तन और मन दौनों गंदे थे .इन से दूर रहना ही उचित है .

http://www.wilayat.net/index.php?option=com_content&view=article&id=231%3Ashould-we-love-all-the-sahabah&catid=71%3A05-Sahabiat-%28Companionship%29

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