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लोग मुसलमानों को उनके कर्मो के कारण कोसते है .पर इन्समे उनकी कोई गलती नही है

वो क्या करे जब उनको लाने वाला ही लुटेरा चोर बलात्कारी था ,इस सब को उसमे धर्म से जोड़ कर सही बताया

तो मुसलमान जो कर रहे है सही है

कुछ जिहादी मानसिकता वाले ब्लोगर इस्लाम का प्रचार करने के लिए और मुहम्मद को एक शांन्ति का दूत साबित करना चाहते हैं .इसके लिए इन लोगों ने अपने ब्लोग्प्न के बड़े लुभावने नाम रख दिए हैं .जैसे मधुर सन्देश.प्रेम वाणी ,प्रेम वार्ता ,स्वच्छ सन्देश ,और अंतिम अवतार आदि .इनका उद्देश्य लोगों को अपने जाल में फंसा कर मुसलमान बनाने का है .ताकि धर्म परिवर्तित लोगों के द्वारा जिहाद किया जा सके .और ऐसे नए मुसलमानों पर किसी का ध्यान नहीं पड़े .

हाँ इन से पूछते हैं कि,अगर वाकई मुहम्मद अल्लाह का रसूल था ,और वह दुनिया में प्रेम का सन्देश भेजना चाहता ,और इस्लाम सच्चा धर्म है ,तो मुहम्मद को भारी फ़ौज खडी करने ,और हथियारों की क्या जरुरत थी .अकेले बौद्ध गुरु पद्म संभव ने तिब्बत और चीन जाकर सबको बौद्ध बना दिया था .गुरु नानक ने केवल अपने दो शिष्यों बाला और मरदाना के साथ मक्का तक अपना सन्देश भेज दिया था .सम्राट अशोक के पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने सारी लंका को बौद्ध बना दिया था.भगवान महावीर के 11 और ईसा मसीह के केवल 12 शिष्य

वास्तव में मुहम्मद अरबी लुटेरों का सरदार था .या लुटरों का don था .वह सारी दुनिया की संपत्ति लूटकर मदीना ले जाना चाहता था .मुहम्मद एक कुख्यात ,और शातिर गैंग लीडर की तरह अपनी गैंग चलाता था .बाकायदा लूट में अपना हिस्सा लेता था .अपने गैंग के लोगों को वेतन देता था ,और लूट में पकड़ी गयी औरतों का सौदा करता था .मुहम्मद ने लूट को धार्मिक रूप देकर जायज बना दिया था .वह इसे जिहाद का नाम देता था .और लुट के माल को الانفال अनफालऔर فاء फै या مالِ غنيمت माले गनीमत का नाम देकर जायज कर देता था .देखिये –

1 -लूट का माल जायज है

“दुश्मनों का माल फै (जायज )है .सूरा-अनफाल 8 :1

“अल्लाह ने रसूल को फै (लूट का माल )प्राप्त कराया .सूरा -अल हश्र 59 :6

(यह लूट का माल बनू नजीर कबीले से लूटा गया माल था.)

“जाबिर बिन अब्दुल्लाह से रसूल ने कहा कि अल्लाह ने लूट का माल मेरे लिए हलाल कर दिया है .बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 351

“अबू हारैरा ने कहा कि रसूल की बड़ी फ़ौज का खर्चा अधिक होने के कारण और जीतने के किये हथियारों और धन की जरूरत होती थी ,इसलिए अल्लाह ने रसूल के लिए मेल गनीमत (लूट का धन )हलाल कर दिया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 53 हदीस 353

2 -क्या क्या लूटते थे

“अबू हुरैरा ने कहा कि ,खैबर की लूट में हमें सोना चांदी अधिक नहीं मिले .इसलिए हमने गाय ,और ऊंट लूट लिए .और रसूल ने अल किरा की वादी से एक आदमी “मिद आम “को पकड लिया .और जब वह भागने लगा तो रसूल ने उसे तीर मार कर क़त्ल करदिया .फिर रसूल ने उसके कपडे बाँट लिए .बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 541

“रसूल करीब 6000 लोगों को गुलाम बनाया था .जिनने औरतें और बच्चे भी थे.इसके अलावा गाएं,ऊंट और बेशुमार भेड़ें भी थीं .

इब्ने इशाक -पेज संख्या 592

3 -औरतें भी लूटते थे

“जब रसूल लूट के बाद मदीना वापस आये तो अपने साथ 44 औरतें लाये थे .जिनके पतियों को रसूल ने क़त्ल करवा दिया था.

तबरी -किताब 7 हदीस 65

“अनस ने कहा कि ,खबर में सवेरा होने वाला ही था कि रसूल ने हमला कर दिया . कुछ लोग सो रहे थे.रसूल में मर्दों को क़त्ल करा दिया और औरतों को कैद कर लिया .उनमे एक औरत “साफिया “भी थी जो रसूल को भा गई .बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 512

“सईदुल खुदरी ने कहा कि ,हमें लूट में काफी माल की उम्मीद थी .लेकिन औरतें ही हाथ में आयीं .हमने रसूल से पूछा कि इनका क्या करें .रसूल ने कहा इनसे सम्भोग जरुर करो .यह इसी लिए बनी हैं .बुखारी -जिल्द 8 किताब 77 हदीस 600

4 -लूट का बटवारा

“तुमकू जो भी लुट का माल मिले उसका पांचवां भाग रसूल को दो .सूरा -अनफाल 8 :41

“रसूल ने ऊमरसे कहा कि बद्र में लूट करने वाले जिहादियों को कमस कम एक हजार दिरहम देना .ऊमर ने कहा कि मैं उस से भी अधिक दूंगा

बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 357

“अम्र बिन तागालीब्ने कहा कि रसूल उन जिहादियों को इनाम के रूप में अलग से हिसा देते थे ,जो सबसे

जादा लूट करते थे .रसूल उनको ऊंट ,धन और गुलामों के औरतें भी देते थे.बुखारी-जिल्द 5 कित्ताब 59 हदीस 373

“इब्ने ऊमर ने कहा कि रसूल ने खैबर की लूट में घुड सवारों को दू गुना और किसी किसी को तीन हिस्सा दिया ”

बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 357

“रसूल ने ऊमर खत्ताब से कहा कि लूट में जो मेल गनीमत मिले उसका एक हिस्सा खजाने में जमा करते रहो .ताकि युद्ध के कामआये .

बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 360 और 361

5 -युद्ध बंदियों का क्या करें

“यदि रसूल के लिए यह संभव नहीं है ,कि वह कैदियों का खर्चा उठा सके तो ,तो कैदियों को कुचल दो ,क़त्ल कर दो .सूरा -अनफाल 8 :67

“रसूल ने साद बिन जिद और उसके भाई अब्दुल माराहा अंसारी को बनू कुरैजा की औरतों को पकड़ने के लिए भेजा.ताकि उन औरतों को बेच कर हथियार खरीदे जा सकें इब्ने इशक हदीस 693 “अबू सईदुलखुदरी ने कहा कि बनू कुरैजा के साथ समझौता हो जाने बाद वे लोग रसूल से मिलाने मदीना आ रहे थे .उननके साथ औरतें और बच्चे भी थे.जब बनू कुरैजा के लोग मस्जिद के पास जमा हो गए तो रसूल ने अपने लोगों से कहा कि जितने मर्द हैं उन्हें क़त्ल कर दो .और बच्चों के साथ औरतोंको गुलाम बना लो “बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 447

6 -मुहम्मद का स्वार्थी कानून

“अबू हुरैरा ने कहा कि ,एक बार हुदैगल कबीले की औरतें आपस में लड़ गयीं और एक दूसरे पर पत्थर मारे .जिस से एक औरत के पेट का गर्भ गिर गया .रसूल ने दौनों औरतों से रसूल को एक मर्द और एक स्त्री गुलाम देने का हुक्म दिया “बुखारी -जिल्द 9 किताब 83 हदीस 41 और 42

बुखारी -जिल्द 9 किताब 83 हदीस 44 और 45

“अबू दाउद ने कहा कि,रसूल ने ऊमर बिन खत्ताब से कहा कि ,अगर कोई जिहादी लूट का माल छुपाये और रसूल का हिस्सा न दे तो उसको पीटोऔर उसकी सारी संपत्ति में आग लगा दो.सुन्नन अबू दाऊदकिताब 14 हदीस 2707 ,2709 और 2710

7 -मुहम्मद का गुलामों का धंधा

एक सहबा ने रसूल से कहा कि मैं अपने गुलाम को बेचना चाहता हूँ ,रसूल ने उस गुलाम को 800 दिरहम में बिकवा दिया और आधी कीमत खुद अपने पास रख ली .बुखारी -जिल्द 9 किताब 89 हदीस 296

“जाबिर बिन अब्दुलाह ने कहा कि एक अंसार के पास एक गुलाम था ,वह अपना कर्जा चुकाने के लिए गुलाम बेचना चाहता था.रासू के उसका गुलाम “नुआमिन बिन सदाम “को 800 दिरहम में बिकवा दिया .और आधी कीमत खुद रख की .और कहा कि यह गुलाम किब्त्ती (हब्शी )है ,इसलए आधी कीमत मैं लूंगा बुखारी -जिल्द 8 किताब 79 हदीस 707

“जाबिर बिन अब्दुल्लाह ने कहा कि एक गुलाम अपने जालिम मालिक की शिकायत लेकर रसूल के पास गया .उसी समय अचानक गुलाम का मालिक भी आ गया. रसूल ने मालिक से कहा कि यह गुलाम फ़ौरन बेच दो .त्ताकी फिर शिकायत न कर सके .रसूल ने वह गुलाम बिकवा दिया .औरकीमत में अपना हिस्सा मालिक से ले लिया .

सहीह मुस्लिम -किताब 10 हदीस 3901

8 -मुहम्मद पाखण्ड -लूट से दान

मुहम्मद खुद को बड़ा दानी साबित करने के लिए दिखावे के लिए लूट का हिस्सा खैरात कर देता था यह बात कुरआन में लिखी है –

“हे नबी तुम दुश्मनों से लूटे गए मॉल से कुछ हिस्सा सदका(खैरात )भी कर दिया करो ,जिस से लूट का माल पवित्र हो जाए .और तम्हारी आत्मा का भी विकास हो जाए .”सुरा -अत तौबा 9 103

इस विवरण को पड़ने के बाद अप खुद निर्णय करिए कि मुसलमान भारत में शान्ति ,प्रेम या मित्रता का सन्देश देने आये थे ,हां मुहम्मद की नक़ल (सुन्नत )का पालन करते हुए इस देश को लूटने आये थे .और उन लुटेरों की संतान यह ब्लोगर शांति और प्रेम का सन्देश कैसे दे सकते है ,यह सिर्फ गलियाँ ही दे सकते है .आप इनके आकर्षक नामों के चक्कर में नहीं आयें