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जैसे-जैसे हम लोग इस्लाम के बारे में ज्यादा जानते जा रहे हैं… यह स्पष्ट होता जा रहा है कि… इस्लाम के प्रतिपादक और अल्लाह के तथाकथित भूत…. सॉरी … दूत … मुहम्मद एक जाहिल, कमअक्ल और पेशे से लुटेरे थे…!

अब सवाल यह है कि …. एक मूर्ख व्यक्ति आखिर इस्लाम नामक एक संप्रदाय या कहें कि एक संगठन बनाने में कैसे सफल हो गया…..????

ये राज और उसका जबाब मुहम्मद के पेशे में छुपा हुआ है… यानी कि एक लुटेरा … संप्रदाय बना सके या नहीं बना सके …… लूट और चोरी तो कर ही सकता है….!

उन्होंने क्या और कैसे चोरी की…. जरा आप भी नजर दौड़ाएँ और अपना सामान्य ज्ञान बढाएँ….

1. उन्होंने अल्लाह शब्द हमारे संस्कृत के “अल्ला” से चुराया है .. जिसका मतलब ”अम्बा और अक्का” होता है .. जो दुर्गा माँ को पुकारा जाता है.

2. हिन्दु मे पुराण (पु + राण ) होते है…. जिसको आधार बना कर मुहम्मद ने इस्लाम में कुरान (कु + रान) बना दिया.

3. “मस्ज़िद” में ”मस्ज” धातु यह मज्जन है… जिसका शाब्दिक मतलब … “धोकर साफ़ करने” के अर्थ वाला है… इसीलिए मुस्लिम मस्जिद में प्रवेश से पूर्व ”वज़ु” करते हैं.

4. इसी तरह मुस्लिम ख़ुशी या गम में “या अल्लाह” बोलते हैं …. मतलब “हे माँ दुर्गा” ……. आप इसका संस्कृत में मंत्र देखें …. ” या देवी सर्वभुतेसू शक्तिरूपेण …..

5. नमाज में ”नम” धातु है, ”देव वाणी” का, इसका उपयोग संस्कृत में ” नमस्तस्यो नमो नमः” के रूप में सदियों से किया जाता रहा है. ( और, हिंदी में भी “नमस्ते” उसी का अपभ्रंश है )

6. मुस्लिमों का “आमीन” हमारे ॐ का अपभ्रंश है।

7. ”बिरादर” मुस्लिमों का , हमारा ही “भ्रातर” है।

8. “कारवाई” उनकी, हमारी ”कार्यवाही” है।

9. यहाँ तक कि मोहब्बत में भी मोह (प्रेम) भी तो, उधार हमारा है।

10. माँ को जब पुकारते हो “अम्मा” वह भी हम हिन्दुओं कि “माँ” से ही ली गयी है .. जो “अम्बा” भी है, देव वाणी की …

11. और तो और …. इस्लाम की पहली मस्जिद काबा भी हिन्दुओं के शिव मंदिर पर ही बनाई गयी है…!

अब तो इतिहासकार भी मानते हैं कि इस्लाम-पूर्व अरेबिया में सहिष्णुतावादी भारतीय संस्कृति का प्रभाव था। यहाँ के ‘काबा’ में अनेक देवी-देवताओं की एक साथ पूजा होती थी जो विभिन्न कबीलों के इष्ट देव थे… इनमें भारतीय देवी-देवताओं की भी पूजा होती थी।

कहने का तात्पर्य यह है कि…. एक चोर धन संपत्ति .. औरतें वगैरह चोरी करते-करते धर्म और पूजा स्थान तक चोरी कर … उस नए धर्म का भगवान् बन बैठा….!

और.. आज भी मुस्लिम अपने उसी मुहम्मद के चोरी के कारनामे को अंजाम दिए जा रहे हैं … ( बाबरी मस्जिद, काशी-विश्वनाथ मंदिर, ताज महल इत्यादि पर दावे इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं.

इतना ही नहीं… लव जेहाद के नाम पर आधुनिक युग में भी हिन्दुओं की लड़कियां तक चोरी कर रहे हैं…!

लगता तो है कि… इस्लाम कोई धर्म या संप्रदाय ना हो कर …. महज चोर-उचक्कों, बेईमानों और बलात्कारियों का एक संगठन मात्र है.

जय महाकाल…!!!