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अपने प्रारम्भ से ही इस्लाम दुनिया के लिए विनाश का कारण बना हुआ है. इस्लाम की शिक्षा के कारण कई देश बर्बाद हो गए और करोड़ों निर्दोष लोग मारे गए हैं. आज भी यह सिलसिला जारी है. पहिले जो लोग अपने अपने धर्म और सदाचार का पालन करते थे. उन्हें सब धार्मिक कहते थे. और उनका आदर करते थे .

लेकिन जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो,एक ही झटके में दुनिया की तत्कालीन आबादी की 90 प्रतिशत को काफिर और मुशरिक घोषित कर दिया. मुहम्मद ने कुरान में ऎसी ऎसी परिभाषाएं गढ़ दीं जिसके अनुसार काफिरों और मुशरिकों (गैर मुस्लिमों) के लिए सिर्फ दो ही विकल्प हैं , कि यी तो वे इस्लाम कबूल करें या क़त्ल कर दिए जाएँ. चाहे उन्होंने अल्लाह और मुहम्मद का कुछ भी नहीं बिगाड़ा हो. इस्लामी कानून के अनुसार काफिर और मुशरिक “बाजिबुल क़त्ल “हैं हम आपको काफिर और मुशरिक की परिभाषा दे रहे हैं —

1 -कुफ्र और काफिर —

विसे तो काफिर का अर्थ नास्तिक Infidels या Non believers भी होता है. लेकिन इस्लाम में काफिर उसे कहते है, जो अल्लाह को नहीं मानता हो. चाहे वह ईश्वर या God को मानता हो. अगर कोई अल्लाह के साथ रसूल, आखिरत, और कुरआन को नहीं माने तो वह भी काफ़िर होगा और अगर कोई अल्लाह की सिफात (गुणों) से इंकार करे तो वह भी काफिर होगा.

2 -शिर्क और मुशरिक —

शिर्क का अर्थ वहुदेववाद Polytheism है. इसके अनुसार अल्लाह के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु की उपासना करना, उसकी स्तुति करना या उसका वंदन करना शिर्क है “Association of Allah with non divine beings and worship and honor such beings . इसके अलावा अल्लाह के सिवा किसी दुसरे की शपथ (swearing) भी शिर्क है. जो भी शिर्क करता है उसे मुशरिक कहा जाता है .

शिर्क ऐसा महापाप या अपराध है जिसे अल्लाह कभी माफ़ नहीं करेगा. देखिये कुरआन क्या कहती है-

“जो अल्लाह का प्रतिद्वंदी ठहराएगा ,जहन्नम में जाएगा .सूरा -इब्राहीम 14 :30

“अल्लाह इसको माफ़ नहीं करेगा कि उसका सहभागी ठहराया जाये -सूरा अन निसा 4 :48

“जो अल्लाह के साथ किसी को शरीक करेगा उसपर अल्लाह जन्नत हराम कर देगा .सूरा -अल मायदा 5 :72

“बेशल अल्लाह इस बात को माफ़ नहीं करेगा कि उसके साथ किसी को शरीक किया जाए .सूरा अन निसा 4 :116

“अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें .सूरा -हूद 11 :2.

3 -अल्लाह के सिवा किसी और की कसम खाना भी शिर्क है —-

“अरब लोगों में बात बात पर कसम खाने की आदत थी .वे अपने देवताओं ,और माँ बाप की कसम खाते थे ,मुहम्मद ने उनको रोका और कहा कि अल्लाह के सिवा किसी और की कसम खाना शिर्क है .और गुनाह है .देखिये हदीस –

“अब्दुल रहमान बिन समूरा से रिवायत है कि रसूल ने कहा कि अलाह के अलावा किसी की कसम खाना शिर्क है . सहीह मुस्लिम किताब 15 हदीस 4043″.

रसूल ने ऊमर बिन खाताब से कहा कि अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारे माँ बाप की कसम खाने से मना किया है .जब भी कसम खाओ तो अलाह की खाओ .किसी दुसरे की कसम खाना शिर्क है .बुखारी जिल्द 8 किताब 78 हदीस 641 ”

इसी तरह और हदीसें हैं ,जिन में अल्लाह के अलावा किसी और की कसम खाना शिर्क बताया गया है -देखिये

बुखारी जिल्द 3 किताब 48 हदीस 844

बुखारी जिल्द 5 किताब 58 हदीस 177

अब आप यह ध्यान से पढ़ने के बाद दी जा रही बातों पर फैसला करिए –

1 -फरिश्तों ने इंसान (आदम) को सिजदा किया —

“हमने फरिश्तों से कहा कि आदम (एक मनुष्य )को सिजदा करें ,सबने सिजदा किया .सूरा -बकरा 2 :34.”

“सभी फरिश्तों ने आदम को सिजदा किया .सूरा -अल हिज्र 15 :30 .”

2 -जादूगरों ने मूसा (एक नबी) को सिजदा किया —

“और जादूगर मूसा के आगे सिजदे में गिर पड़े .सूरा अल आराफ 7 :120.”

3 -यूसुफ (एक नबी) ने माँ बाप को सिजदा किया —

‘जब वह मिस्र पहुंचे तो अपने माँ बाप को सिंहासन पर बिठाया और उनके सामने सिजदे में झुक गए .सूरा -यूसुफ 12 :100.”
(यूसुफ इब्राहीम के बेटे इशाक का नाती और याकूब का बेटा था यह सभी रसूल या नबी थे ).

4 -मुहमद अल्लाह के साथ अपनी स्तुति “तस्बीह “करवाता है —

“तुम लोग अल्लाह के साथ उसके रसूल पर ईमान लाओ .और उसकी मदद करो, और उसकी (रसूल की )प्रतिष्ठा बढाओ.औए सवेरे शाम उसकी तसबीह (स्तुति) करते रहो .सूरा -अल फतह 48 :9.”

5 -अल्लाह खुद अन्य वस्तुओं की कसम खाता है —

अलाह दूसरोको किसी अन्य वस्तु की कसम खाने से रोकता है ,लेकिन खुद इसका उलटा करता है .अल्लाह को बात बात पर कसम खाने की लत पड़ी है ,वह अपनी कसम नही खाकर दूसरी चीजों की कसम खाता है .देखिये –

तारों की कसम .सूरा अन नज्म 53 :1

सूरज की कसम सूरा शम्श 91 :1 -2

आकाश की कसम सूरा -अल बुरूज 85 :1

रात की कसम सूरा -अत तारिक 86 :1

जब खुद अल्लाह और उसके फ़रिश्ते उसके नबी और मुहम्मद सब शिर्क कर रहे हैं. तो गई मुस्लिमों को मुस्लिमों को मुशरिक का काफिर क्यों कहा जाता है. इस्लाम में यह दोगली नीति क्यों है ?

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