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सेकुलरिज्म ,सम्प्रदायवाद और आतंकवाद यह सब शब्द लोगों की विचारधारा और उनके सोचने के ढंग से सम्बंधित है .अभी तक सेकुलरिज्म को सम्प्रदायवाद का विपरीत शब्द (opposit ) माना जाता है .लेकिन समय के साथ सेकुलरिज्म शब्द आतंकवाद का पर्यायवाची बनता जा रहा है ..इस बात को और स्पष्ट करने के लिए हमें शब्दों के अर्थ और अभिप्राय को ठीक से समझना जरुरी है ,क्योंकि इनका हमारे अस्तित्व और देश की अखंडता से बड़ा गहरा सम्बन्ध है .

यहाँ हम एक एक शब्द के बारे में समझते है –

1 -आतंकवाद इस विचार के लोग दूसरों पर अपनी बात बलपूर्वक मनवाने में विश्वास रखते है ,चाहे वह धार्मिक विषय हो या राजनीतिक विश्हय हो .यह लोग हमेशा खुद को सही और दूसरों को गल़त मानते हैं ,इनका एकमात्र उद्देश्य देश में अस्थिरता ,और भय का वातावरण बनाये रखना है .ताकि देश की एकता खंडित हो जाये .इस समय देश में नक्सली जैसे और कई आतंकी संगठन कार्यरत है .जो निर्दोष लोगों की हत्या को अपना धर्म समझते. लेकिन कुछ ऐसे आतंकी गिरोह है जिनके आका देश के बाहर हैं ,और उनके गुर्गे यहाँ आतंकी कार्य करते रहते हैं लेकिन सब की कार्यविधि और लक्ष्य एक ही है ,भारत को नुकसान पहुचना ,और दहशत फैलाना .ऐसे लोग अपने कुत्सित इरादों की पूर्ति के लिए निर्दोषों को बम से उड़ने में नहीं झिझकते है , हमारा कर्तव्य है ऐसे लोगों पर नजर रखे और इनकी जानकारी सम्बंधित अधिकारीयों को जरुर दे दें

2-सम्प्रदायवाद भारत में अनेकों धर्म ,संप्रदाय और मत पैदा हुए हैं जो मिलजुल कर रहते आये हैं सविधान के अनुसार सबको अपने धर्म का पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार है .लेकिन किसी को छल से या जबरन अपना विचार थोपने कोई अधिकार नहीं है .चाहे वह धार्मिक विचार क्यों न हो .ऐसा करने से ही सम्प्रदायवाद का जन्म होता है .चाहे कितनी भी अच्छी बात हो वह किसी को बलपूर्वक मनवाना उचित नहीं है कुछ लोग सिर्फ इस्लाम को सम्प्रदायवाद से जोड़कर देखते है ,तो उन्हें समझना चाहिए ईसाई और दुसरे लोग भी उन से कम नहीं हैं .खुसी की बात यह है कि कुछ इस्लामी देशों में भी ऐसे अनेकों प्रगतिशील सुधारवादी संगठन बन गए हैं जो रुढ़िवादी ,आतंकी विचारों का विरोध करते है ,निश्चय ही यह शुभ संकेत है .

3-सेकुलरिज्म या धर्मसमभाव सेकुलरिज्म विदेश से आयातित शब्द है . कानूनी तौर से इसका अर्थ “धर्मनिरपेक्षता ” रख दिया है ,जो पूरी तरह से भ्रामक आशयविहीन लगता है . भारत की किसी भी भाषा के साहित्य को खोज कर देखिये यह शब्द कहीं नहीं मिलेगा .आपको प्राचीन पुस्तकों में केवल धार्मिक और अधर्मी शब्द ही मिलेंगे .फिर भी कुछ लोगों ने ” सेकुलरिज्म ‘ के यह अर्थ किये है ,जैसे “सर्वधर्मसमभाव ” पंथ निरपेक्षता ” आदि , यदि सेकुलरिज्म का आशय सभी धर्मों ,पंथों ,और मतों का सामान रूप से सम्मान और आदर करना है ,तो भारत का हरेक हिन्दू , सिख ,जैन ,और बौद्ध स्वाभाविक रूप से सेकुलर है . आज भी हिन्दू दरगाहों ,मजारों , पर जाते हैं और गुरद्वारों ,बुद्ध ,जैन मंदिर में जाते ,सबी एक दूसरों के त्योहारों में शामिल होते है ,फिर कानून बना कर लोगों को सेकुलर बनाने की जरुरत क्यों पड़ गई . बताइये क्या तोते (PArrot ) पर हरा रंग पोतने की जरुरत होती है ? निश्चय ही यह एक राजनीतिक षडयंत्र है .यदि जरुरत होती तो संविधान के निर्माता डा ० बाबा साहेब अम्बेडकर संविधान में सेकुलर शब्द पहले ही लिख देते . इसके लिए हमें कांगरेसी सेकुलरिज्म को समझना होगा .

4 -कांग्रेसी सेकुलरिज्म वास्तव में सरकारी सेकुलरिज्म का तात्पर्य ” तुष्टिकरण ” है in fact, official secularism means “appeasement” यह बात किसी से भी छुपी नहीं है कि कान्ग्रेसिओं दिल में हिन्दू विरोधी मानसिकता कूट कूट कर भरी हुई है ,जिसे यह यदाकदा प्रकट भी कर देते है , दिग्विजय सिंह इसका एक उदहारण है . इसी सेकुलरिज्म का सिद्धांत है ,एक समुदाय को खुश करने के लिए हिन्दुओं को जितना बदनाम ,प्रताड़ित करोगे उस समुदाय के उतने ही वोट अधिक मिलेंगे .क्योंकि यह घाघ नेता जानते हैं कि अल्प संख्यक लोग थोक में वोट देते है .यह सरकारी सेकुलर जानते हैं कि अगर सत्ता पर कोई खतरा है ,तो वह हिन्दुओं की एकता से है ,इसलिए किसी न किसी तरह से हिन्दू एकता को भंग किया जाये ,जब भी हिन्दू एक होने लगें उनको कोई न कोई आरोप लगा कर अन्दर कर दिया जाये .आज इन सेकुलरों में हिन्दुओं को गलियां देने की होड़ सी लग रही है .और जो हिन्दू संस्थाओं ,संतों को जितनी अधिक गलियाँ वह उतना बड़ा सेकुलर माना जायेगा

5-सेकुलर आतंकवाद आप देख चुके हैं ,कि जैसे हर प्रकार का आतंकवाद ,और सम्प्रदायवाद का मुख्य उद्देश्य देश में अस्थिरता और अव्यवस्था फैलाना है .आज यही काम सोनिया जी की सरकार करने वाली है.अपनी इसी इच्छा को पूरी करने के लिए सोनिया ने अपनी सलाहकार मंडली में चुन चुन कर ऐसे सेकुलरों को शामिल किया है ,को हिन्दू विरोध के लिए कुख्यात हैं ,इनने हर्ष मंदर ,तीस्ता सीतलवाड ,सय्यद शहाबुद्दीन ,शबनम हाशिमी जी लोग शामिल है .फिर इन्ही जैसे लोगो की सलाह से सेकुलर देवी सोनिया जी ने 2011में एक ” सांप्रदायिक लक्षित हिंसा विरोधी अधिनियम ‘ सरकार की बिना सहमति के पेश कर दिया .सब जानते हैं कि सोनिया कट्टर कैथोलिक ईसाई है ,और पोप की पक्की अनुयायी है .इन्ही पोपों ने protastant ईसाइयों सिर्फ इस बात पर जिन्दा जलवा दिया था क्योंकि वह बाइबिल की उस व्याख्या से सहमत नहीं थे ,जो तत्कालीन पोप करते थे ,पोपों का यह दमन चक्र सदियों चलता रहा था .अब सोनिया अपने पापं की यही निति भारत में लागु करना चाहती है .

यदि यह अधिनियम पारित हो गया तो हिन्दुओं के लिए सिर्फ यही विकल्प होंगे ,ईसाई या मुसलमान बन जाएँ ,देश से पलायन कर जाएँ या फिर जेलों में चक्की पीसें ,केवल पांच साल में हिन्दू विलुप्त प्रजाति बन जायेंगे ,क्योकि इस अधिनियम यही प्रावधान दिए गए हैं .इस विधेयक में कुल 9 अध्याय और 138 धाराएँ हैं ,जिनमे कुछ IPCC और CRPC से ली गयी हैं .यह भारत का पहला अधिनियम है जो नागरिकों को जाती के आधार पर सजा देने की वकालत करता है .

और्यः मन कर चलता है कि हिन्दू स्वभाव से आक्रामक और हिंसक होते हैं और हिन्दू ही सबसे पहले दंगे करवाते हैं , साफ है कि सोनिया इस विधेयक के सहारे अपने (कु ) सुपुत्र और फिर उसकी संतानों को हमेशा के लिए भारत पर राज करने का रास्ता बना रही है . .दिग्विजय सिंह कई बार यह बात उगल चुके है ,इसी लिए उनके निशाने पर हिन्दू संत और संगठन बने रहते हैं .बहुत से लोगों को इस अधिनियम का पूरा ज्ञान नहीं होगा ,

इसलिए इसके कुछ चुने हुए बिंदु प्रस्तुत किये जा रहे है ,ताकि अभी से सावधान हो जाएँ और अपना भविष्य इस सेकुलर आतंकवाद से बचा सकें .इस अधिनियम के प्रावधान देखिये .-

1.दंगे के समय बिना किसी जांच पड़ताल के किसी भी हिन्दू को गिरफ्तार किया जा सकता .

2 -हिन्दू तब तक अपराधी माना जाएगा ,जब तक वह खुद को निर्दोष सिद्ध नहीं कर देता .

3 -यदि किसी हिन्दू संगठन के किसी कार्यकर्ता के विरुद्ध कोई अल्पसंख्यक शिकायत करता है ,तो वह पूरा संगठन दोषी माना जाएगा

4-.यदि किसी प्रांत की विरोधी दल की सरकारकी पुलस संप्रदायी दंगे रोकने के हिन्दुओं को गिरफ्तार करने में असफल होती है ,तो उस सरकार को बरखास्त किया जा सकता है .

5 -भारत के बंगलादेशी घुसपैठियों को निकालने की मांग करना ,और जबरन धर्म परिवर्तन करने का विरोध करना भी अपराध होगा .

6 -यदि किसी हिन्दू का मकान या दुकान किराये के लिए उपलब्ध हो ,और वह किसी अल्पसंख्यक को किराये पर देने से इंकार करे ,तो वह हिन्दू स्वामी अपराधी माना जाएगा .

7-यदि कोई अल्पसंख्यक किसी हिन्दू की खाली जमीन पर कब्र ,दरगाह या मस्जिद बना दे तो उस भूमि को खाली नहीं कराया जा सकता ,और विरोध करने पर हिन्दू भूमिस्वामी को सजा दी जा सकती है .

8 -दंगे के दौरान मारे गए हिन्दू के आश्रितों को मुआवजा नहीं दिया जायेगा .

9 -यदि कोई अल्पसंखक किसी हिन्दू लड़की को प्रेमजाल में फंसा ले ,और लड़की के माँ बाप से शादी करने को कहे ,और लड़की के माता पिता ऐसी शादी से मना करें ,तो वह दण्डित होंगे ,चाहे लड़की अवयस्क क्यों न हो.

10-जिन संस्थाओं और संगठनों के नाम में हिन्दू शब्द होगा उनकी मान्यता निरस्त हो जाएगी .

11 -आतंकवादिओं के विरुद्ध आवाज उठाना ,और उनको सजा देने की मांग करना ,एक समुदाय को पीड़ा देने वाला कृत्य मना जायेगा .और ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी . बताइए यह सेकुलर आतंकवाद नही है तो और क्या है ?.एक तरफ हमारे प्रधान मंत्री पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को “शांति पुरुष ” कहके उसका सम्मान करते है ,और परोक्ष रूप से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर चुप रहते हैं ,इसे हम क्या कहेंगे ? क्या यही सेकुलरिज्म है ?

आप विचार करिये कि एक तरफ वह आतंकवादी हैं जो बिना किसी धर्म और जाति का भेद करके सौ पचास लोगों को अपना निशाना बनाते हैं ,और दूसरी तरफ यह सेकुलर हैं जो चुन कर सिर्फ सभी हिन्दुओं पूरे समूह को समाप्त करने की तय्यारी कर रहे हैं .बताइए , हम इन सेकुलरों को सबसे बड़ा आतंकवादी क्यों नहीं मानें ?

(नोट -यह लेख प्रसिद्ध लेखक और आलोचक श्री वीरेन्द्र सिंह परिहार के लेख से प्रेरित है ,जो 8 नव 2011 को दैनिक जागरण पेपर में प्रकाशित हुआ था )