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1- सबसे पहले भारत के देशभक्त इस्लाम जिहाद, उसके उद्‌देश्य, भारत में मुस्लिम इतिहास की वास्तविकता और इस्लाम के राजनैतिक स्वरूप को समझें। साथ ही इस सच्चाई को भी समझें कि मुसलमान पाकिस्तान पाकर ही सन्तुष्ठ नहीं हैं; उनका अन्तिम उद्‌देश्य शेष भारत में भी इस्लामी राज्य स्थापित करना है।

2- कुरान (५८ः१९-२२) के अनुसार सारा विश्व ‘मोमिनों’ और ‘काफिरों’ में बाँटा गया है और इस्लाम ”काफिरों” को खुला दुश्मन मानता हैं।’ (४ः१०१, पृ. २३९) और उनके धर्म को समाप्त करना चाहता है, तो विश्व के ‘काफिरों’ के सामने एक ही व्यावहारिक विकल्प रह जाता है कि वे भी आपस में इकट्‌ठे होकर अपने-अपने धर्म व राज्यों की रक्षा करें तथा एक दूसरे की रक्षा में सहायता करें।

3- इस्लामी देश अपने गैर-मुस्लिम अल्पसंखयक नागरिकों के साथ सभी प्रकार के भेदभाव करते हैं। अतः गैर-इस्लामी राज्यों को इसका विरोध करना चाहिए।

4- इसके लिए विश्व भर के गैर-मुस्लिम राज्य संयुक्त राष्ट्र संघ पर दबाब डालें कि वे इस्लामी देशों में अल्पसंखयकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानून बनाऐं और इसकी विशेष पहल करें।

5- वैज्ञानिक शोध द्वारा पेट्रोल का विकल्प विकसित करें। तब तक प्रत्येक गैर-इस्लामी देश इस्लामी देशों से न्यूनतम पेट्रोल का आयात करें।

6- भारत में १५ प्रतिशत मुसलमान किसी भी मापदण्ड से अल्पसंखयक नहीं हैं। अतः अल्पसंखयकवाद के नाम पर उनका तुष्टीकरण नहीं करना चाहिए।

7- जब १९४७ में समस्त भारतीय मुसलमानों को उनका मनचाहा देश पाकिस्तान मिल गया तो उन्हें जाकर बसना चाहिए। उनका भारत में बसाए रखना और उन्हें किसी प्रकार के आर्थिक व राजनैतिक अधिकार देने का कोई औचित्य नहीं है। अगस्त १९४७ का अधूरा एजेंडा पूरा किया जाना चाहिए।

8- भारत एक सेक्यूलर राज्य है। अतः कोई भी राजनैतिक दल और सरकार संविधान के विरुद्ध किसी भी समुदाय को धर्म के आधार पर कोई धार्मिक, आर्थिक व राजनैतिक अधिकार न दें।

9- संविधान की २५ से ३० तक की धाराएँ निरस्त की जाऐं क्योंकि इनकी भ्रमित व्याखया करके देश में अलगाववाद और हिन्दुओं का धर्मान्तरण बढ़ रहा है।

10- जिहादी और नक्सलवादी आतंकवाद रोकने के लिए सखत कानून बनाए एवं उन्हें अपनाए जाऐं।

11- बंगला देशी मुस्लिम घुसपेठियों पर सखती से रोक लगाई जाए। जो बसे हैं उन्हें निकाला जाए और जिन विदेशियों की बीसा अवधि समाप्त हो गई हो उन पर और उनको संरक्षण देने वालों पर कानूनन सखती की जाए।

12- म्यूनिस्पल, राज्य या केन्द्र सरकार के चुनावों में राष्ट्र की सुरक्षा व अखंडता का प्रयास करने वाले व्यक्तियों व दलों को प्राथमिकता दी जाए और अल्पसंखयक-तुष्टीकरण करने वाले दलों का बहिष्कार किया जाए। केवल राष्ट्र की रक्षा व अखंडता के लिए समर्पित देशभक्त व्यक्तियों व राजनैतिक दलों का ही समर्थन किया जाए।

1- सबसे पहले भारत के देशभक्त इस्लाम जिहाद, उसके उद्‌देश्य, भारत में मुस्लिम इतिहास की वास्तविकता और इस्लाम के राजनैतिक स्वरूप को समझें। साथ ही इस सच्चाई को भी समझें कि मुसलमान पाकिस्तान पाकर ही सन्तुष्ठ नहीं हैं; उनका अन्तिम उद्‌देश्य शेष भारत में भी इस्लामी राज्य स्थापित करना है।

2- कुरान (५८ः१९-२२) के अनुसार सारा विश्व ‘मोमिनों’ और ‘काफिरों’ में बाँटा गया है और इस्लाम ”काफिरों” को खुला दुश्मन मानता हैं।’ (४ः१०१, पृ. २३९) और उनके धर्म को समाप्त करना चाहता है, तो विश्व के ‘काफिरों’ के सामने एक ही व्यावहारिक विकल्प रह जाता है कि वे भी आपस में इकट्‌ठे होकर अपने-अपने धर्म व राज्यों की रक्षा करें तथा एक दूसरे की रक्षा में सहायता करें।

3- इस्लामी देश अपने गैर-मुस्लिम अल्पसंखयक नागरिकों के साथ सभी प्रकार के भेदभाव करते हैं। अतः गैर-इस्लामी राज्यों को इसका विरोध करना चाहिए।

4- इसके लिए विश्व भर के गैर-मुस्लिम राज्य संयुक्त राष्ट्र संघ पर दबाब डालें कि वे इस्लामी देशों में अल्पसंखयकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानून बनाऐं और इसकी विशेष पहल करें।

5- वैज्ञानिक शोध द्वारा पेट्रोल का विकल्प विकसित करें। तब तक प्रत्येक गैर-इस्लामी देश इस्लामी देशों से न्यूनतम पेट्रोल का आयात करें।

6- भारत में १५ प्रतिशत मुसलमान किसी भी मापदण्ड से अल्पसंखयक नहीं हैं। अतः अल्पसंखयकवाद के नाम पर उनका तुष्टीकरण नहीं करना चाहिए।

7- जब १९४७ में समस्त भारतीय मुसलमानों को उनका मनचाहा देश पाकिस्तान मिल गया तो उन्हें जाकर बसना चाहिए। उनका भारत में बसाए रखना और उन्हें किसी प्रकार के आर्थिक व राजनैतिक अधिकार देने का कोई औचित्य नहीं है। अगस्त १९४७ का अधूरा एजेंडा पूरा किया जाना चाहिए।

8- भारत एक सेक्यूलर राज्य है। अतः कोई भी राजनैतिक दल और सरकार संविधान के विरुद्ध किसी भी समुदाय को धर्म के आधार पर कोई धार्मिक, आर्थिक व राजनैतिक अधिकार न दें।

9- संविधान की २५ से ३० तक की धाराएँ निरस्त की जाऐं क्योंकि इनकी भ्रमित व्याखया करके देश में अलगाववाद और हिन्दुओं का धर्मान्तरण बढ़ रहा है।

10- जिहादी और नक्सलवादी आतंकवाद रोकने के लिए सखत कानून बनाए एवं उन्हें अपनाए जाऐं।

11- बंगला देशी मुस्लिम घुसपेठियों पर सखती से रोक लगाई जाए। जो बसे हैं उन्हें निकाला जाए और जिन विदेशियों की बीसा अवधि समाप्त हो गई हो उन पर और उनको संरक्षण देने वालों पर कानूनन सखती की जाए।

12- म्यूनिस्पल, राज्य या केन्द्र सरकार के चुनावों में राष्ट्र की सुरक्षा व अखंडता का प्रयास करने वाले व्यक्तियों व दलों को प्राथमिकता दी जाए और अल्पसंखयक-तुष्टीकरण करने वाले दलों का बहिष्कार किया जाए। केवल राष्ट्र की रक्षा व अखंडता के लिए समर्पित देशभक्त व्यक्तियों व राजनैतिक दलों का ही समर्थन किया जाए।