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क्या आपने अपने आस पास ऐसे निम्नलिखित शब्द सुने या पढे है ?
कभी जानने का प्रयास किया है इनका अर्थ क्या है ?

1) उम्मा (Ummah) – एक अरबी शब्द जिसका अर्थ है Community (समुदाय) या राष्ट्र (Nation), परन्तु इसका उपयोग “अल्लाह को मानने वालों” (Believers) के लिए ही होता है…

2) दारुल इस्लाम (Dar-ul-Islam) – ऐसे तमाम मुस्लिम बहुल इलाके, जहाँ इस्लाम का शासन चलता है, सभी इस्लामिक देश इस परिभाषा के तहत आते हैं।

3) दारुल-हरब (Dar-ul-Harb) – ऐसे देश अथवा ऐसे स्थान, जहाँ शरीयत कानून नहीं चलता, तथा जहाँ अन्य आस्थाओं अथवा अल्लाह को नहीं मानने वाले लोगों का बहुमत हो… अर्थात गैर-इस्लामिक देश।

4) काफ़िर (Kafir) – ऐसा व्यक्ति जो अल्लाह के अलावा किसी अन्य ईश्वर में आस्था रखता हो, मूर्तिपूजक हो। अंग्रेजी में इसे Unbeliever कहा जाएगा, यानी “नहीं मानने वाला”। (ध्यान रहे कि इस्लाम के तहत सिर्फ़ “मानने वाले” या “नहीं मानने वाले” के बीच ही वर्गीकरण किया जाता है).

5) जेहाद (Jihad) – इस शब्द से अधिकतर पाठक वाकिफ़ होंगे, इसका विस्तृत अर्थ जानने के लिए यहाँ घूमकर आएं… (http://en.wikipedia.org/wiki/Jehad)। वैसे संक्षेप में इस शब्द का अर्थ होता है, “अल्लाह के पवित्र (?) शासन हेतु रास्ता बनाना…”

6) अल-तकैया (Al-Taqiya) – चतुराई, चालाकी, चालबाजी, षडयंत्रों के जरिये इस्लाम के विस्तार की योजनाएं बनाना। सुन्नी विद्वान इब्न कथीर की व्याख्या के अनुसार “अल्लाह को मानने वाले”, और “नहीं मानने वाले” के बीच कोई दोस्ती नहीं होनी चाहिए, यदि किसी कारणवश ऐसा करना भी पड़े तो वह दोस्ती मकसद पूरा होने तक सिर्फ़ “बाहरी स्वरूप” में होनी चाहिए…।

बहरहाल, तमिलनाडु के मेल्विशारम और कील्विशारम के उदाहरणों तथा इन परिभाषाओ से आप जान ही चुके होंगे कि समूचे विश्व को “दारुल इस्लाम” बनाने की प्रक्रिया में अर्थात एक “उम्मा” के निर्माण हेतु “अल-तकैया” एवं “जिहाद” का उपयोग करके “दारुल-हरब” को “दारुल-इस्लाम” में कैसे परिवर्तित किया जाता है…। फ़िलहाल आप चादर तानकर सोईये और इंतज़ार कीजिए, कि कब और कैसे पहले आपके मोहल्ले, फ़िर आपके वार्ड, फ़िर आपकी तहसील, फ़िर आपके जिले, फ़िर आपके संभाग, फ़िर आपके प्रदेश और अन्त में भारत को “दारुल-इस्लाम” बनाया जाएगा…