मुल्ले मौलवी मुसलमानों को यही सिखाते है कि दूसरों के धर्मग्रन्थ मनुष्यों ने बनाये हैं ,और कुरआन अल्लाह कि किताब है .हालांकि उनके पास इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है .फिरभी मुसलमान दूसरों क्र धर्मग्रंथों कि निंदा करना अपना अधिकार मानते हैं ,लेकिन कुरआन पर उंगली उठाने पर दंगे और हंगामा कर देते है.और कहते हैं हम कुरान की इज्जत करते हैं ,कुरान का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते . परन्तु मसलमानों के बड़े बड़े मुल्ले मौलवियों ने कुरान के बारे में जो लज्जाजनक फतवे दिए हैं ,उनको देख कर मुसलमानों को चुल्लू पर पानी में डूब कर मर जाना चाहए .यह लेख पढ़कर आपको पता चल जायेगा कि मुसलमान कुरान की कितनी इज्जत करते हैं .

कुछ नमूने देखिये –

1-कुरान को पेशाब से लिख सकते हैं

it permissible to write the Qur’an with urine A reputed scholar from this camp Allamah Hassan bin Mansoor Qadhi Khan unashamedly writes that: “ليس هناك إثم إذا كنت أكتب القرآن مع الدم والبول أو على جلد حيوان ميت” “There is no sin if you write the Qur’an with urine, blood or on the skin of a dead animal”.

अल्लामा हसन बिन मंसूर काजी खान ने अपने फतवे में लिखा है “इसमे कोई गुनाह नहीं है अगर कुरान को पेशाब से ,खून से या मरे हुए जानवरों की खाल पर लिखा जाए . Fatawi Qazi Khan page 780 “Chapter al Khathur”

2-कुरआन की आयतें गर्भवती के पेट पर लगा दो

Quranic verses can be attached with woman’s womb We read in a famed Deobandi work by Maulana Ashraf Ali Thanvi:

मौलाना अशरफ थानवी ने कहा अगर किसी औरत के गर्भ गिर जाने का डर हो ,या गर्भ नहीं ठहरता हो तो कुरान की आयतें उसके पेट पर बांध दो .इस से गर्भ सुरक्षित रहेगा और गर्भ गिरने का खतरा नहीं रहेगा

“إذا كان هناك خوف من الإجهاض أو امرأة لا يتصور ثم ربط الآيات المذكورة أعلاه مع رحم امرأة. إن شاء الله سوف يكون في مأمن من الحمل ومن ثم تصور أنها سوف، وسوف لا اجهاض. ”

“If there is fear of abortion or a woman doesn’t conceive then tie the above mentioned verses with the womb of woman. Inshallah the pregnancy will be safe and then she will conceive and will not miscarry. ” Amaal e Qurani, page 12 published by Muktaba Rehmania, Lahore

3-प्रसव आसानी से कराने की विधि

method for an easy delivery of child

कष्टरहित प्रसव करने की विधि यह है कि कागज पर कुरान की आयतें लिख कर औरत की दायीं जांघ पर बांध दो .जब बच्चा हो जाये तो उस कागज को खोल कर औरते कुछ बालों साथ जला दो ,और उसका धुआं औरत के गुप्त अंगों में पंहुंचा दो

كتابة هذه الآيات وربطها مع الفخذ الأيمن من امرأة لتسليم سهلة ، إن شاء الله سوف يصبح من السهل تسليم جدا ولكن بعد الولادة وينبغي فتح المدلاة، وينبغي أن أحرق بعض الشعر من نفس المرأة، وينبغي أن تنتقل من الدخان خاصة لها جزء ”

“Write these verses and tie them with the right thigh of woman for easy delivery, Inshallah the delivery will become very easy but after delivery the locket should be opened and some hair of same woman should be burnt and the smoke should be passed from her private part” Amaal e Qurani, pages 24-25 published by Muktaba Rehmania, Lahore

4-सेक्स का आनंद बढ़ाने के लिए कुरान पढो

use of Holy Name for drawing sexual pleasure

सम्भोग से समय कुरान की आयतें दुहराते रहो ,इस से औरत तुम्हें प्यार करेगी

“Keep reciting Al-Mughni during sex and woman will love you.”

“حافظ على قراءة المغني أثناء ممارسة الجنس والمرأة وسوف أحبك” Amaal e Qurani, page 175 published by Muktaba Rehmania, Lahore

5-कुरान उमर से राय लेकर बनी थी

Quran was revealed according to the opinions of Umar We read in Tareekh Khulfa, page 110:

तारीखे खुलफा में लिखा है ,एक मुजाहिद ने कहा है कि खलीफा उमर कुरान के बारे में जो भी विचार रखते थे वही कुरान में उतारा जाता था .और बाद में सब उसकी पुष्टि कर देते थे.

أخرج ابن مردويه عن مجاهد قال : كان عمر يرى الرأي فينزل به القرآن

Mujahid said: ‘Umar used to hold a view and Quran would be revealed with (confirmation of) it’. We also read:

इब्ने उमर ने कहा है ,जब लोग कुरान में एक बात लिखवाना चाहते थे ,और उमर दूसरी बात लिखवाना चाहते थे ,तो कुरान में वही लिखा जाता था जो उमर की मर्जी के अनुसार होता था .

أخرج عن ابن عمر مرفوعا : ما قال الناس في شيء و قال فيه عمر إلا جاء القرآن بنحو ما يقول عمر

– Ibn ‘Umar said: ‘When people said one thing and Umar said another, the Quran would be revealed with the like of what

Umar said’ अब आपको पता चल गया होगा कि मुसलमान कुरान कि कितनी इज्जत करते हैं और कुरान का कैसा उपयोग करते हैं .हम सदा से कहते ए है कि मुसलमान दोगली नीति अपनाते है .हाथी कि तरह खाने दांत अलग दिखने के दांत अलग .इन्हें न कुरान से मतलब है नअपने अल्लाह और मुहम्मद से .इन्हें सिर्फ दंगा करने का बहाना चाहिए .

अगर इनमे हिम्मत है तो पाकिस्तान में जाकर अपने उन आकाओं पर कोई कार्यवाही कर के दिखाएँ ,जिन्हों ने यह फतवे दिए ,या छापे हैं ,तभी हम समझेंगे कि ये लोग सच्चे मुसलमान है . मुस्लिम ब्लोगर अच्छी तरह से समझ लें कि हम उनका कचरा उनके ऊपर ही फेक रहे हैं .इसका जवाब अपने मुल्लों से पूछें अगर हमारे ऊपर उंगली उठाएंगे तो ऐसा ही जवाब मिलता रहेगा .हमारे पास सबूतों की कमी नहीं है . प्रस्तुतकर्ता बी एन शर्मा पर