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वेदों के एक हज़ार से अधिक उपनिषद् बताये जाते हैं .परन्तु उन में से अधिकाँश उपलब्ध नहीं हैं .जब मुस्लिम आक्रान्ताओं ने तक्षशिला और नालंदा के ग्रंथागारों को जला दिया था कई ग्रन्थ जल गए थे.बाद में विद्वानों ने जितना भी याद था उसे लिख लिया था.जो कुछ बच सके थे वह भी पूरी तरह से प्रमाणिक नहीं माने नहीं जा सकते.कई उपनिषदों के केवल एक ही प्रपाठक हैं .आज सिर्फ १३ उपनिषद् ही प्रमाणिक माने जाते हैं .जो संदिग्ध हैं उन में अल्लोपनिशषद और अरबोपनिषद मुख्य हैं .मुसलमान अगर अल्लोपनिषद को प्रमाणिक मान कर उसे वेदों का अंग बता रहे हैं ,तो उन्हें अरबोपनिषद को भी मानना चाहिए .क्योंकि दौनों एक जैसे हैं ,दौनों में अरबी और संस्कृत मिश्रित है .इस से दौनों समकालीन लगते हैं.इसका निर्णय विद्वान ही कर सकते हैं .जो दोनो भाषाएँ जानते हों .हम आपको अरबोपनिषद बता रहे हैं

अथ अरबोपनिषद

अलल हुब्ल अलल हुब्ल -१

ला इलाह ला इलाह नास्ति अल्ला कदाचन -२

लमैयता बनी हाशिम बिल मुल्क ,फिमा खबर जा अ व् ला वही नज़ल -३

ईश ग्रन्थ कर्तारौ सर्वे धूर्तौ सुनिश्चिता -तस्मिन् अल्ला अव्वला-४

इन्नाल्लाहा खैरुन माकीरीन-५

एतत सत्य धर्मं प्रकाश्येत -६

जाला सत्य जहकल मिथ्या ,निश्चय मिथ्या कान जहूक -७

एको ईश वहिदुं नास्ति इलाहा अल्लापि-८

अल्ला बरीयुं मिन सर्वे मुसलमीन व् रसूलिही ९-

तस्मात् ला तज़रुन्ना दीनुकुम स्वधर्मे निधनं श्रेयः १०

ला फिकर कर्तव्यं ,न कर्तव्यं ज़िक्रे अला -११

ज्ञान विज्ञान संयोगेन सर्व कार्यं फ़तेह भवेत् -१२

ला इलाह ला इलाह मुदीरयेत ,हाजल दीनुल कय्यमा -१३

सुम्मा एवमस्तु आमीन -१४

कृष्ण यजुर्वेद शुबयान कंडिका द्वादश समाप्त

अर्थ –

हुब्ल की जय हो जय हो -१

कोई इलाह नहीं है और न कोई अल्ला है -२

बनी हाशिम ने लोगों को चकमा दिया न आसमान से किताब आयी और न वही नाजिल हुई

कताबें बनाने वाले दोनो धूर्त थे -३

यह बात सिद्ध है -४

अल्लाह इन मेसे सबसे बड़ा धूर्त है -५

इसलिए सत्य का अनुसरण करें -६

सत्य की जीत होतीहै और असत्य भाग जाता है -७

एक ही ईश्वर है ,अल्लाह नहीं -८

अल्लाह मुसमानों से अलग है और सभी नबियों स -९

इसलिए अपना धर्म न छोड़ें -१०

न चिंता करें न अल्ला का नाम na n लें -११

विज्ञान और ज्ञान से सारी समस्याए हल होंगीं -१२

कोई इलाह नहीं है समझ लें ,यही तथ्य है -१३

ऐसा ही हो एवमस्तु -१४