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मित्रों , अभी मोदी जी के उपवास मे एक प्रचार के भूखे मौलवी ने मोदी जी को टोपी पहनाने की कोशिश की जिसे मोदी जी ने सम्मान पूर्वक इंकार कर दिया ..

अब इस बात को लेकर कांग्रेस के फेके टुकड़े पर मीडिया ने अपनी खूब छाती पिटी ..खूब बिधवा प्रलाप किया .

… लेकिन क्या भारत का संविधान किसी भी धर्म के गुरु को किसी दूसरे धर्म के इंसान को जबरजस्ती अपना प्रतिक चिन्ह पहनाने की इजाजत देता है ? बिलकुल नहीं ! क्या मोदी जी ने अपने कुछ नागरिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है ?

पहले मै भारत की नीच ,बिकाऊ और कुत्ती मीडिया से कुछ सवाल करना चाहता हूँ :-

१- अभी राजस्थान के भरतपुर मे भयंकर दंगे हों रहे है .. वहा मरने वाले सभी ८ मुस्लिम है और २३ घायलों मे २० मुस्लिम है .. आज मीडिया इस पर चुप्पी क्यों साध रखी है ? क्या कांग्रेस ने मीडिया को खासकर स्टार न्यूज को बोटी फेक दिया ? और उस बोटी को दीपक रंगरसिया बैठ कर चबा रहा है !!

सोचिये अगर ये दंगा गुजरात या किसी बीजेपी शासित राज्य मे होता और सिर्फ मुसलमान मरे हों तो क्या मीडिया खासकर स्टार न्यूज़ ऐसे ही चूप रहता ?

२- स्टार न्यूज़ की एक उभरती पत्रकार शईमा सहर ने स्टार न्यूज़ के मैनेजमेंट पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाये . पुलिस जाँच और अल्पसंख्यक आयोग की जाँच मे ये आरोप सही पाए गए . लेकिन आज तक सरकार ने दोषियो पर कोई करवाई नहीं की और उल्टे सईमा को नौकरी से निकाल दिया गया और स्टार न्यूज़ और सरकार के दबाव मे किसी भी चैनेल ने सईमा को नौकरी नहीं दिया . उसका पूरा कैरियर और जीवन स्टार न्यूज़ और सरकार ने बर्बाद कर दिया .

दूसरों के गिरेबान मे दाग खोजने वाले और माफ़ी की मांग करने वाला स्टार न्यूज़ खुद अपने गंदे और बदबूदार गिरेबान को नहीं देखता ?

३- आज तक के हिमाचल प्रदेश के ब्यूरो चीफ भूपेंद्र नारायण सिंह उर्फ भुप्पी सिंह ने एक फर्जी स्टिंग सीडी बनाकर मुख्यमंत्री प्रेम प्रकाश धूमल को ब्लैकमेल करने की कोशिश मे गिरफ्तार हुए .

आजतक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया .. भुप्पी सिंह की पत्नी अपने बच्चों के साथ धूमल साहब से मिलकर अपने पति की गलती मानते हुए उन्हें माफ़ करने की अपील की . धूमल साहब ने भुप्पी सिंह को माफ़ कर दिया . लेकिन कोई भी मीडिया हाउस उन्हें अपने यहाँ नौकरी देने को तैयार नहीं था . फिर धूमल साहब की ही सिपारिश पर एक बड़े उद्योपति ने भुप्पी सिंह को अपने निजी जेट का पाइलट बना दिया [ भुप्पी सिंह के पास कामर्सियल पाइलट लाइसेंस था ]

धूमल साहब की इस दरियादिली का किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया .

४- चार साल पहले एक मुस्लिम युवक जो एक प्रतिष्ठित कंपनी के इंजीनियर था उसने मोदी को जान से मार देने का एक मेल किया . उसे तुरंत गिरफ्तार कर अहमदाबाद लाया गया . वो युवक कांग्रेस के एक नेता और पूर्व राज्यपाल का पोता था . लेकिन मोदी जी ने खुद अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उसके उपर दर्ज मुकदमा वापस ले लिया और उसे अपने निवास मे बुलाकर उसके साथ खाना खाया . और इतना ही नहीं उसकी कम्पनी उसे वापस नौकरी पर लेने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन मोदी जी ने खुद उस कम्पनी के निदेशक को फोन कर उसे नौकरी पर वापस रखने की अपील की .

मीडिया ने मोदी जी के इस गुण को नहीं बताया . ना बताना चाहती है .

अब कुछ सवाल कांग्रेस के नेताओ से :-

१- याद करो कांग्रेस वालो जब इंदिरा गाँधी के घर मे एक प्रसंग मे श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य सबको तिलक लगा रहे थे लेकिन तत्कालीन केबिनेट रेल मंत्री अब्दुल रहमान अंतुले ने शंकराचार्य का हाथ पकड लिया और कहा की इस्लाम मे तिलक हराम है वो नहीं लगवाएंगे .. तब तुम्हारी सम्भावना कहा थी ??

२- क्या किसी समारोह मे कोई मौलवी राहुल गाँधी का खतना करना चाहे तो राहुल गाँधी सद्भावना की खातिर खतना करवाएंगे ??

३- अभी जब अन्ना का अनसन चल रहा था तो जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने मुसलमानों को अन्ना के आन्दोलन से दूर रहने का फ़तवा दिया . उन्होंने कहा की वहा “वंदेमातरम” गया जाता है और भारत माता की जय के नारे लगाये जाते है .

जब इस पर एक पत्रकार ने कांग्रेस के प्रवक्ता रशीद अल्वी की टिप्पणी ली तो उन्होंने कहा की बुखारी ठीक कह रहे है इस्लाम मे अल्लाह के सिवा किसी की भी इबादत नहीं की जा सकती चाहे वो अपना राष्ट्रगान या अपना देश ही क्यों ना हों .

तब कांग्रेस की सद्भावना कहा थी ? तब इस देश का नीच मीडिया कहाँ था ?

अब मेरा कुछ सवाल उस मौलवी से जो कांग्रेस के नेता और केबिनेट मंत्री दिनशा पटेल और अहमद पटेल के सिखाए हुए चाल के तहत मोदी को टोपी पहनाने ध्रष्टता किया था [ मौलवी दिनशा पटेल के छेत्र खेडा जिले के ठासरा का रहने वाला है ]

१- मौलवी !! अगर मै तुम्हे भगवा वस्त्र पहनाऊ तो क्या तुम पहनोगे ?

२- यदि उस मौलवी मे जरा भी सद्भावना होती तो उन्हें नरेंद्र मोदी के धर्म के अनुकूल प्रतिक चिन्ह भेंट में करना चाहिए था ,उन्हें चाहिए था कि वे भगवत गीता मोदी को भेंट करते ,उन्हें चाहिए था कि वे भारत माता की फोटो उन्हें भेंट करते

३- क्या मिडिया उस मौलवी के फोन का काल डिटेल इस देश की जनता को दिखाएगी ?

मुस्लिम टोपी नहीं पहन कर और विनम्र भाव से टोपी को अस्वीकार कर मोदी ने छद्म धर्मनिरपेक्षता को पुरे देश के सामने करारा चांटा मारा है !! मोदी ने इमाम के हाथो हरा दुपट्टा पहन कर यह संकेत दे दिया है की वे गुजरात और देश में मुस्लिम वर्ग को हराभरा ,खुश हाल देखना पसंद करते हैं