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बी.एन. शर्मा
प्रस्‍तुति: डॉ0 संतोष राय

धर्म और सत्य की सदा विजय होती है ,यह एक अटल सत्य है .कि झूठ और पाखंड अधिक समय तक नहीं टिकता है .कहावत भी है कि सच्चे का बोलबाला और झूठे का मुंह काला.इसीलिए समझदार लोग हर हालत में सत्य और धर्म का पालन करते आये हैं .लेकिन यह भी देखागाया है कि जब भी कोई सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयत्न करता है ,तो कुछ ऐसी आसुरी शक्तियां पैदा हो जाती हैं ,जो उसके मार्ग में अवरोध उत्पन कराती हैं ,और उसे भटकाने और गुमराह करने का हर तरह का षडयंत्र रचती हैं .ऐसी दुष्ट शक्तियों के कई नाम और कई रूप हो सकते हैं .विश्व के सभी धर्मों में ऐसी दुष्ट शक्तियों के अलग अलग नाम दिए गए हैं .लेकिन काम एक ही बताया गया है अर्थात लोगों को गुमराह करना ,सत्य से विचलित करना ,भटकना और भ्रमित करना .हम ऐसी दुष्ट शक्ति को “Deciever ” या धोखेबाज भी कह सकते हैं .
हिन्दू धर्म में इसे कलियुग भी कहा गया है ,जिसके प्रभाव से लोग अपना धर्म भूल जाते हैं रामचरित मानसके -उत्तर काण्ड के दोहा 97 क से लेकर दोहा 102 ख तक इसका विस्तृत विवरण मिलताहै.पारसी धर्म में इसे “अहिरमन” या “दुश्मन्यु “कहा गया है .बौद्ध ग्रंथों में इसे “मार “कहा गया है (सुत्त निपात-पधान सुत्त 28 :5 से 7 )
बाइबिल में इसे “बिल जिबूब Greek: Βεελζεβούλ, Hebrew: בעל זבוב‎, Baal Zəbûb, “या “Prince of Hell “कहा गया है और कई जगह इसे “दुष्टात्मा ” भी कहा गया है ( नया नियम -मरकुस 3 :22 ,मत्ती 10 :25 ,लूका 11 :14 )
इस्लाम में भी शैतान को गुमराह करने वाला बताया गया है .कुरान में शैतान का जगह जगह उल्लेख है .मुसलमान जब भी कुरान की कोई सूरा पढ़ते हैं तो अल्लाह के साथ शैतान को भी याद कर लेते हैं .लेकिन इस्लाम में एक और दुष्ट शक्ति को माना गया है जिसका नाम “दज्जाल “है यद्यपि कुरान में इसका उल्लेख नहीं है .लेकिन हदीसों में दज्जाल के बारे में काफी विस्तार में लिखा गया है दज्जाल को अल्लाह का प्रतिद्वंदी या “अल्लाह विरोधी Anti Allah “माना गया है .प्रमाणिक हदीसों में दज्जाल के बारे में जो लिखा है वह दिया जा रहा है .कूछ हदीसें काफी लम्बी होने के कारण उनके मुख्य अंश लिए गए हैं
1 -दज्जाल कौन है
दज्जाल का पूरा नाम “अल मसीहु अद्दज्जालالمسيح الادّجال”है कुरान के अनुसार शैतान तो स्रष्टि के समय भी मौजूद था ,लेकिन दज्जाल मुहमद के जीवनकाल में ही पैदा हुआ था .
“अली ने कहा कि दज्जाल रसूल के जन्म के समय ही इस्राएल में पैदा हुआ था “बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 649
“दज्जाल एक धोखेबाज ( deciever ) नकली अल्लाह ( False God ) और फर्जी उद्धार कर्ता( False Messiah ) है .जो लोगों को गुमराह करता रहता है .लोग दज्जाल को ही खुदा मानते हैं .” सही मुस्लिम -किताब 40 हदीस 7007 .
2 -दज्जाल क्या कहता है
“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया कि दज्जाल मुसलमानों से कहेगा कि मैं ही असली अल्लाह हूँ ,और मैं तम्हारे मृतक माँ बाप को फिर से जिन्दा कर सकता हूँ .फिर दज्जाल लोगों के मृतक माँ बाप को जिन्दा कर देगा .फिर मृतक माँ बाप अपने बच्चों से कहेंगे कि यही सच्चा खुदा है .तुम इसी कि इबादत करो ” इब्ने माजा -हदीस .4067 .
“दज्जाल लोगों के दिलों में शक पैदा कर देगा ,और लोगों को जन्नत का लालच देगा ,और दोजख का झूठा भय दिखाकर भ्रमित करके अपना अनुयायी बना लेगा “सही मुस्लिम -किताब -40 हदीस 7007
3 -दज्जाल की शिक्षा का प्रभाव
आज इस्लाम की शिक्षा से जो कुछ हो रहा है ,वही दज्जाल की शिक्षा से होगा ,यह इन हदीसों से साबित होता है .देखिये –
“जगह जगह निर्दोषों की हत्याएं होंगीं ,बेईमानी बढ़ जाएगी ,मुसलमान घमंडी हो जायेगे ,लोग व्यभिचारी हो जायेंगे ,औरतें बेशर्म हो जाएँगी ,बच्चे अपने माँ बाप का आदर नहीं करेंगे ,मुल्ले मौलवी पाखंडी हो जायेंगे .उलेमा ज्ञान की जगह फसाद फैलायेंगे “मुस्लिम -किताब 41 हदीस 7005 .
“अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया कि दज्जाल खुद को अल्लाह बताएगा ,और उसके प्रभाव से इस्लाम मिट जायेगा ,दुनिया भर में हत्याएं बढ़ जाएँगी .मुसलमान धन सम्पति जमा करने लगेंगे ” बुखारी -किताब 9 हदीस 245 .
“अनस बिन मलिक ने कहा कि रसूल ने कहा है कि दज्जाल के असर से सिर्फ एक ही दिन में सत्तर हजार लोग दज्जाल के अनुयायी बन जायेंगे .और उनकी संख्या बढती जाएगी .कुछ लोग ईरानी शाल ओढेंगे”सही मुस्लिम -किताब 40 हदीस 7034
4 -दज्जाल गायब रहता है
दज्जाल भी अल्लाह की तरह छुपा रहता है यानी गायबानाغایبانہ है .लेकिन अशरीरी नहीं है .अल्लाह की तरह दज्जाल का भी शरीर है .जिसमे लगभग सभी अंग है लेकिन दज्जाल अल्लाह की तरह अप्रकट रूप से काम करता है .यह बात इस हदीस से साबित होती है-
“जबीर बिन अब्दुल्लाह ने कहा कि एक बार मुहम्मद इब्ने मनकदीर ने कसम खाकर लोगों से कहा कि एक व्यक्ति “इब्ने अस्साद “ही दज्जाल है ,लोगों ने यह बात रसूल को बताई तो .रसूल ने इब्ने मनकदीर की बात को गलत बताया ,और कहा कि इब्ने अस्साद दज्जाल नहीं हो सकता .क्योंकि दज्जाल गायबाना (अप्रकट غایبانہ) है ,सुन्नन अबू दाऊद-किताब 47 हदीस 4317
Sahih al-Bukhari, Volume 9, Book 92, Number 453

5 -दज्जाल की पहचान -दज्जाल काना है
इन दी गयी हदीसों में दज्जाल जितनी भी विशेषताएं बताई गयीं हैं उनसे दज्जाल के बारे में पता चल सकता है ,लेकिन दज्जाल की एक खास पहचान सभी हदीसों में दी गयी है कि”दज्जाल काना है “अर्थात उसकी एक ही आँख है .काना होना ही दजल की एकमात्र पहचान है .हदीस देखिये “अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने बताया कि दज्जाल लोगों को जन्नत का लालच देगा ,और लोग उसकी बातों में आ जायेंगे .लेकिन दज्जाल तो काना है .बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 554
“उबैदा इब्ने सामित ने कहा कि रसूल ने कहा ,तम्हें दज्जाल के बारे में कोई शक नहीं होना चाहिए ,वह ठिगना है ,उसके बाल लच्छेदार हैं .अगर तुम उसे ध्यान से देखोगे तो पता चलेगा कि उसकी सिर्फ एक ही आंख है ,यानि वह काना है “अबू दाऊद-किताब 37 हदीस 4306 .
“अली जुबैर और अबू हुजैफा ने कहा कि रसूल ने कहा कि दज्जाल एक गधे पर सवारी करता है ,जो ईसा मसीह के गधे से भी तेज चल सकता है ,और दज्जाल को थोड़ी सी देर में ही दुनिया की सैर करा देगा.और दज्जाल काना है “सही मुस्लिम -किताब 41 हदीस 7010
“इब्ने उमरने कहा कि रसूल ने बताया कि दज्जाल काना है ,और उसकी आँख पके अंगूर की तरह तैरती है “मुस्लिम -किताब 41 हदीस 7005
“अब्दुल्लाह इब्ने उमर ने कहा कि एक बार रसूल ने लोगों के बीच खड़े होकर कहा कि मैं तुम्हें सचेत करता हूँ ,कि दज्जाल काना है ‘
Sahih Bukhari, Book 55 Volume 4, Number 553
6 -दज्जाल बायीं आँख से काना है
The hadith above states that he is blind in the right eye. But, there are others that mention the left eye!!!

Shaykh al-Albani records this hadith:

إن الدجال أعور العين الشمال،

Certainly, the Dajjal is blind in the left eye.
Musnad Ahmad 3/115, 201
7 -मुहम्मद झूठ बोलता था
जैसे कि हरेक मुसलमान झूठ बोलता है ,उसी तरह मुहम्मद लोगों से झूठ बोलता था .और धोखा देता था .यद्यपि उसे पता था कि अल्लाह भी काना है ,लेकिन वह इस बात को छुपा देता था .और लोगों से कहता कि दज्जाल काना है .लेकिन अल्लाह काना नहीं है .हदीस –
“अब्दुल्लाह इब्ने उमर ने कहा कि रसूल ने कहा ,क्या तुम्हें पता है कि दज्जाल काना है ,लेकिन अल्लाह काना नहीं है ”
सही बुखारी -जिल्द 4 किताब 55 हदीस 553
मुहम्मद की यह बात बिलकुल झूठ थी इसका प्रमाण देखिये
8 -अल्लाह खुद काना है
यह एक निर्विवाद सत्य है कि कोई कितनी भी चालाकियां करे ,झूठ बोले .पाखंड करे एक न एक समय उसका भंडा फूट ही जाता है .मुहमद और अल्लाह मिलकर लोगों की आँखों में धुल डाल रहे थे कि अल्लाह काना नहीं है .लेकिन जिस किताब को मुहम्मद अल्लाह की किताब कहता था ,उसी से साबित हो गया कि अल्लाह सचमुच काना है .देखिये प्रमाण
VERSES ABOUT GOD’S EYE

The Qur’an presents an insurmountable challenge to the Salafis. We read:

أَنِ اقْذِفِيهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِّي وَعَدُوٌّ لَّهُ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِّنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَى عَيْنِي

[Yusufali 20:39] “‘Throw (the child) into the chest, and throw (the chest) into the river: the river will cast him up on the bank, and he will be taken up by one who is an enemy to Me and an enemy to him’: But I cast (the garment of) love over thee from Me: and (this) in order that thou mayest be reared under Mine eye.
इस अरबी आयत का अर्थ रामपुर से प्रकाशित अरबी हिंदी कुरान से लिया गया है ,पेज संख्या 560
“इस (बच्चे )को एक संदूक में में रख दे ,फिर उस संदूक को दरिया में डाल दे ,दरिया उसे (संदूक को )किनारे पर छोड़ देगा .और मेरा शत्रु उस बच्चे को उठा ले ,मैंने उसपर अपना प्रेम डाल दिया है ,ताकि वह मेरी आँख (EYE )के सामने पाला जाये .सूरा -ताहा 20 :39

“My Eye” here is singular.Quran-Sura.Taha 20:39
9 -स्पष्टीकरण
अरबी ब्याकरण में हरेक संज्ञा (Noun ) के तीन वचन ( numbers ) होते हैं .एकवचन (singular ) वाहिद ,द्विवचन ( dual ) तस्निया और बहुवचन ( plural ) जमा .और जो चीजें जोड़ियों में होती है ,जैसे आँख ,कान,हाथ और पैर आदि ,उनके लिए द्विवचन का प्रयोग किया जाता है .दी गयी आयत अल्लाह ने अरबी में” ऐनीعيني मेरी आंख ” शब्द का प्रयोग किया है .जो एकवचन ( singular ) है अर्थात अल्लाह की सिर्फ एक आंख है .और अल्लाह काना है .अगर अल्लाह की दो आँखें होती तो वह द्विवचन शब्द “ऐनैनी عينيني” शब्द का प्रयोग करता .और काना होना दज्जाल की निशानी है .जैसा की मुहम्मद कहता था .इस से साबित हो जाता है कि वास्तव में अल्लाह ही दज्जाल यानि शैतान है .और यही कारण है कि मुसलमान आतंक मचाते रहते हैं .अगर उनका अल्लाह (दज्जाल )सचमुच ईश्वर होता तो मुसलमान शांतिप्रिय होते .
मुसलमानों का अल्लाह ही दज्जाल यानि शैतान है और मुसलमान शैतान के बन्दे हैं ,इसका ताजा सबूत उस वक्त मिल गया जब इमाम बुखारी और दुसरे मुल्लों ने यह कह दिया कि मुसलमान अन्ना का समर्थन नहीं कर सकते ,क्योंकि वह वन्दे मातरम बोलते हैं .लोग मुझ पर आरोप लगते है कि मैं नफ़रत फैलता हूँ .मैं उन सेकुलर और हिन्दू मुस्लिम एकता के वकील है उनसे पूछता हूँ बुखारी यह बात सुनकर उनका मुंह बंद क्यों हो गया ? कुछ मुस्लिम महिला ब्लोगर जो खुद को हिन्दू मुस्लिम एकता की समर्थक होने का नाटक करती हैं ,उनके मुंह में कौनसी गन्दगी भर गयी ,जो वह चुप रही ,मुझे मुसलमानों की नस नस का पता है .और इस्लाम की रग रग से वाकिफ हूँ ,मैं तो इस्लाम ,मुहमद और मुसलमानों के अल्लाह का इसी तरह भंडा फोड़ता रहूँगा .भले मेरे कुछ मुस्लिम मित्रों को बुरा लगे .मुझे पूरा यकीन है यह खबर उन लोगों तक जरुर पहुँच जाएगी .
आपसे भी निवेदन है कि जिन गानों में अल्लाह ,मौला ,खुदा जैसे शब्द हों उन्हें नहीं सुने .और किसी मुस्लिम की दरगाह में नहीं जाएँ

http://wilayat.net/index.php?option=com_content&view=article&id=206:sunnis-compare-allah-swt-with-dajjal&catid=55:tauheedshirktawassulshafaat-general&Itemid=60

http://al-mahdi.atspace.com/dajjal.html