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मुहमद के समय अरब के बद्दू गरीब और बेकार थे .उन्हें मुहम्मद जिहाद के लिए बुला लेता था वह भी लूट के हिस्से की लालच में मक्का पहुच जाते थे .बद्दू मूर्तिपूजक थे .और अनपढ़ थे . मुहम्मद ने उन्हें जिहाद के लिए उपयुक्त समझा .

इसी तरह अरब के “उकल और उरैना “के कबीले के लोग जब मुहमद से मिलने मक्का गए तो उनकी तबीयत ख़राब हो गयी .क्योंकि मक्का का मौसम (climate )उनको माफिक नहीं आरहा था .जब मुहम्मद को यह पता चला तो उसने उन बद्दुओं को ऊंट की पेशाब पीने का आदेश दिया .और कहा यह एक कारगर दवा है .जिसे मैंने भी आजमाया है .बाद में कुछ महीनों में बद्दू उस इलाज से स्वस्थ हो गए और जिहाद पर जाने लगे .

यह सारा लेख हम प्रमाणिक हदीसों से दे रहे है .पाहिले हम हिन्दी में इसका प्रमाण देंगे ताकि सब समझ सकें ,फिर अंगरेजी और अरबी की मूल हदीसें देंगे ,ताकी मुसलमान यह आरोप न लगाएं की हम तोड़ मरोड़ कर बात करते है .

1 -मुहम्मद ने मुसलमानों को ऊंट की पेशाब पिलायी

“अनस ने कहा की “उक्ल और उरैना “के लोगों की शिकायत है कि,उन लोगों को मक्का का मौसम माफिक नहीं अ रहा है ,और वे बीमार हो रहे है .रसूलल्लाह ने आदेश दिया कि उनको ऊँटों के ल्हुन्द के पास ले चलो .फिर रसूल ने उन लोगों से कहा तुम ऊंट की पेशाब पीया करो .यह एक कारगर और आजमाई हुई दवा है ,लोगों ने ऐसा ही किया .कुछ समय में वे स्वस्थ हो गए ”

बुखारी -(वुजू )जिल्द 1 किताब 4 हदीस 234

बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 794

2 -नए मुसलमान ऊंट की पेशाब पीते थे

“फिर इसके बाद जो भी व्यक्ति मुसलमान बनने के लिए रसूल के पास आता था वे उसे ऊंट की पेशाब जरूर पिलाते थे .रसूल फरमाते थे कि ऊंटों की पेशाब मुफीद होती है और कारगर दवा होने के कारन मैं भी इसका इस्तेमाल करता हूँ .

बुखारी -जिल्द 7 किताब 71 हदीस 590

अब इतने प्रमाण देने के बाद मुसलमान क्या कहेगे .क्या वे ऊंट की पेशाब पियेंगें ?