यह एक अटल सत्य है कि “जैसी मति वैसी गति “अर्थात व्यक्ति जीवन जैसे विचार और आचार रखता है ,उसकी मौत भी वैसी ही होती है .मुसलमान भले मुहम्मद को रसूल और महापुरुष कहते रहें ,लेकिन वास्तव में वह एक अत्याचारी ,कामी और बलात्कारी व्यक्ति था .वह औरत के लिए ह्त्या भी करवाता था .मुहम्मद का यही दुर्गुण उसकी दर्दनाक मौत का कारण बन गया .मुहमद कुदरती मौत नहीं मरा ,उसकी जहर देकर ह्त्या की गयी थी .मुसलमान इस बात को छुपाते हैं .और टाल जाते हैं .लेकिन इसके पुख्ता सबूत मौजूद है .

1 -मुहमद की हत्या के निमित्त

हमने पिचले लेख में बताया था कि सन 628 में मुहम्मद ने अपने साथियों के सात बनू कुरेजा के कबीले पर धन के लिए हमला किया था .इस हमले उसने कबीले के यहूदी पुरुषों ,बच्चों और काबिले के सरदार “किनाना बिन अल रबी “की ह्त्या करा दी थी .और उसकी पत्नी साफिया के साथ जबरन शादी कर ली थी .और उसी दिन सफियाने मुहम्मद के खाने में जहर मिला दिया था .जो मुहम्मद के शरीर में धीमे धीमे असर करता रहा .और आखिर वह उसी जहर के कारण ऎसी मौत मरा कि मुसलमान दुनिया में यह बात बताने से कतराते हैं .

2 -साफिया ने मुहम्मद को जहर दिया

“अब्दुर रहमान बिन अबूबकर ने कहा कि रसूल ने एक भेड़का बच्चा जिबह किया ,और उसे पकाने के लिए साफिया के पास भिजवा दिया .साफिया ने उसे पकाया .बुखारी -जिल्द 3 किताब 47 हदीस 787

“अनस बिन मालिक ने कहा कि .रसूल की एक यहूदी पत्नी ने भेड़ का बच्चा पकाया था ,जिसमे जहर था .रसूल प्लेट से लेकर वह गोश्तखा गए

बुखारी -जिल्द 3 किताब 47 हदीस 786

3 -जहर से मुहम्मद बीमार रहता था

“आयशा ने कहा कि रसूल कहते थे कि मैं सीने में दर्द महसूस करता हूँ ,लगता है यह उसी खाने के कारण है ,जो मैंने खैबर के हमले के समय खाया था.मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरे गर्दन की धमनी कट गयी हो .बुखारी- जिल्द 5 किताब 59 हदीस 713

4 -मुहम्मद मौत से डरता था –

“आयशा ने कहा कि उस दिन (मौत के दिन )रसूल के साथ सोने की मेरी बारी थी ,रसूल ने कहा मुझे पता नहीं है ,कि मैं कहाँ जाऊँगा ,कहाँ सोऊंगा और मेरे साथ कौन होगा .मैंने कहा यद्यपि मेरी बारी है ,फिर बी अप किसी के साथ सो सकते है .मुझे पता नहीं था कि रसूल अगली दुनिया की बात कर रहे थे ..बुखारी -जिल्द 7 कित्ताब 62 हदीस 144

5 -मुहम्मद की नफरत भरी इच्छा

“इब्ने अब्बास ने कहा जिस दिन रसूल मरे .वे मुझ से कह रहे थे ,सारे अरब से काफिरों ,यहूदियों और ईसाइयों को निकाल दो ,उनके उपासना स्थलों को गिरा दो .और उनको कबरिस्तान में बदल दो .बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 660

6 -मुहम्मद की मौत का हाल

मुहमद कि मौत 8 जून सन 632 को हुयी थी आयशा उसके साथ थी ,उसने कहता –

आयशा कहा कि रसूल की तबीयत खराब थी ,मैं पानी लेकर आई और रसूल को पानी पिला कर उनके चहरे पर पानी मला .रसूल आपने हाथ ऊपर करके कुछ कहना चाहते थे ,लेकिन उनके हाथ नीचे लटक गए .बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 730

“आयशा ने कहा कि उस दिन रसूल के साथ सोने की मेरी बारी थी ,रसूल मेरे पास थे ,लेकिन अल्लाह ने उन्हें उठा लिया.मरते समयुनका सर मेरे दोनों स्तनों के बीच था .उआकी लार मेरे थूक से मिल कर मेरी गर्दन से बह रही थी .बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 144 -145

“रसूल की लाश को अली बिन अबू तालिब और अल अब्बास ने पर पकड़ कर जमीन पर रख दिया .बुखारी -जिल्द 1 किताब 11 हदीस 634

7 -मुहम्मद का लिंग आकाश (अल्लाह )की तरफ था

‘खर सुनते ही अली इब्ने अबू तालिब जो रसूल के दामाद और चचेरे भी थे आगये .उनहोंने देखा कि रसूल का बेजान जिस्म जमीन पर पडा है लेकिन उनका लिंग आसमान की तरफ खड़ा है .यह देखकर उमर खत्ताब ने रसूल के मरने से इंकार कर दिया .क्योंकि अली ने कहा था “يا أيها النبي القضيب خاصتك هو منتصب حتى السماء! ” अंगरेजी में “O prophet thy penis erect unto sky “अबू दौउद -किताब 20 हदीस 3135

7 -विकी इस्लाम से इसके प्रमाण

In English, Ali ibn Abi Ṭalib, the fourth rightly guided Caliph of Islam (and also Muhammad’s son-in-law and cousin) had exclaimed upon seeing Muhammad’s lifeless corpse: “O prophet, thy penis is erect unto the sky!”

Unsurprisingly, this is one “miracle of Islam” that you will not find proudly displayed or posted in the many Islamic da‘wah (preaching) websites or forums.

Umar ibn al-Khattab, the second rightly guided Caliph of Islam, initially refused to believe Muhammad had died, and who could blame him when the prophet displayed such strong signs of life?

8 – मुहम्मद अपराधी था

मरने बाद इस तरह लिंग के खड़े रहने को “Death erection “या “angel lust “कहते है .यह उन्हीं के साथ होता है जो जघन्य अपराधी होते है ..इसके बारे में हिन्दी विकी पीडिया ने यह लिखा है-

मरणोत्तर स्तंभन (अंग्रेजी: Death Erection डेथ इरेक्शन), एक शैश्निक स्तंभन है और जिसे तकनीकी भाषा में प्रायापिज़्म कहते हैं, अक्सर उन पुरुषों के शव में देखने में आता है, जिनकी मृत्यु प्राणदंड, विशेष रूप से फांसी के कारण हुई हो।

9 -मुहम्मद का दफ़न

अब्दुलाह बिन अब्बास ने कहा कि रसूल को इसी दशा में नजरान के तीन कपड़ों में दफ़न कर दिया गया था .दो कपडे ऊपर के थे और एक नीचे तहमद थी अबू दौउद -किताब 20 हदीस 3147

अब हम कैसे मने कि मुहमद एक महा पुरुष या रसूल था .उसने अपने कुकर्मों का फल मरने बाद पा लिया .वह क़यामत तक इसी तरह अपना लिंग अल्लाह कि तरफ दिखाता रहेगा .

यदी किसी को शक हो तो वह गूगल में “muhammad and his eternal erection “सर्च करके देख लें