Tags

, , , ,


मैं अपने सभी मित्रों और सम्माननीय पाठकों का आभार प्रकट करता हूँ ,जिन्होंने मेरे अबतक मेरे प्रकाशित लेखों को ध्यान से पढ़ा है ,और उन पर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ दी हैं .जैसा कि आप सब जानते हैं कि मैं पिछले तीन चार महीनों से इस्लाम के बारे में धारावाहिक रूप से शोधपूर्ण लेख प्रकाशित करता आया हूँ .इसमे मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाने या आस्था पर चोट करने का नहीं है .मैं तो सिर्फ लोगों के सामने सच्चाई लाना चाहता हूँ .लेकिन इस दौरान मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि कुछ लोग भाषा और शिष्टाचार की सीमा तोड़ देते हैं .और अपशब्दों का प्रयोग कर बैठते है.ऐसा वही लोग करते हैं जब या तो उनके पास कोई तर्क और दलील नहीं होती ,या वे बौखला जाते हैं .

आपने यह भी देखा होगा कि जब इन लोगों की दलीलें खोखली होती हैं तो मुख्य विषय से भटकाने के लिए किसी बेनामी व्यक्ति को आगे कर देते हैं.मेरा अपने सभी मित्रों से अनुरोध है कि भाषा में संयम रखें ,और मुख्य विषय से न भटकें .इससे आपको मेरे आनेवाले लेखों के पढ़ने में और आनंद आयेगा .

इस्लाम के सम्बंधित लेखों के सिलसिले में मैंने दिनांक २०/०७ /२०१० को “कुरआन में हेराफेरी और बाइबिल सेchuraayii गयी आयतें “शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था.जिस पर काफी कमेन्ट आये .हालांकि मैंने पिछले जितने भी लेख प्रकाशित किये ,और इस्लाम के बारे में जो भी तथ्य प्रस्तुत किये उन को घुमाफिराकर ऐसे लोगों ने भी स्वीकार किया है ,जो आयेदिन चेलेंज देते रहते हैं .आप सब लोग इसके साक्षी है.

मैंने अपने २०/०७ /२०१० के लेख में प्रमाण दिया था कि वर्त्तमान कुरआन पुरी नहीं है.जितनी सूरतें नाजिल हुई थी ,उन में से दो सूरतें जानबूझ कर निकाल दी गयी थीं .चूंकि यह दो सूरतें अरबी भाषा में हैं ,और हमारे अधिकांश हिन्दू मित्र अरबी भाषा से अनभिज्ञ हैं.चूंकि मैं अरबी जातता हूँ .पाहिले तो मैंने कुरआन की उन दौनों सूरतों को पढ़ा ,जब मुझे यकीन हो गया कि इन दोनो सूरतों की भाषा और तर्जे बयान वही है जो वर्त्तमान कुरआन की है .तो मैं ने अपने मित्र जीशान जैदी को दोनो सूरतें मेल कर दीँ.क्योंकि मुझे विश्वास था कि जैदी जी इस्लाम के ऐसे फिरके से हैं ,जिसके लोग सत्य पर मिटने के लिए प्रासिद्ध हैं .मैंने २०/०७/२०१० को मेल भेजा था ,जिसका जैदी जी ने २३/०७ /२०१० को जो उत्तर दिया वह इस प्रकार है .

“शर्मा जी, हमारे पास कुरआन के अलावा भी इमामों का दिया हुआ बहुत कुछ है जो पूरी तरह कुरआन से मिलता जुलता है जैसे की इमामों द्वारा पढी गई बड़ी बड़ी दुआएं. इस बात की पूरी संभावना है की इसमें नबी पर नाजिल वह आयतें शामिल हों जो कुरआन में नहीं हैं. लेकिन इसके बावजूद हम उन्हें कुरआन का हिस्सा नहीं कहते, क्योंकि ऐसा करने से हमारे इमाम ने मना फरमाया है. इमाम नहीं चाहते थे की लोगों में एक से ज्यादा कुरआन हो जाएँ. हर मुसलमान के पास हमेशा से एक ही कुरआन रहा है, चाहे वह किसी भी फिरके से ताल्लुक रखता हो. मेरे पास हज़ारों साल पुरानी विद्वानों की किताबें मौजूद हैं जिनमें इसी कुरआन की आयतों का हवाला है. कोई भी अलग की नहीं है. अब इसके अलावा जो कुछ भी है उसे हम इमाम या नबी की हदीस, दुआ, सहीफ़ा या किसी भी और नाम से पुकार सकते हैं लेकिन कुरआन नहीं कहते.

दूसरी बात अगर आप यह मान लें की कुरआन से कुछ हटाया गया है, तो उसके बावजूद यह मुकम्मल ही है. इसकी मिसाल आप ऐसे दरख़्त से ले सकते है जिसकी कुछ शाखें काट दी गई हैं. लेकिन उसके बावजूद वह दरख़्त मुकम्मल ही होता है. इसी तरह कुरआन अल्लाह का ऐसा चमत्कार है जिसमें काँट छांट के बावजूद यह मुकम्मल है. हमारे इमामों के ज़माने में बहुत से मसले लाये गए, जिसका हल उन्होंने इसी कुरआन की रौशनी में दिया.

बहरहाल कुरआन को पूरी तरह समझने के लिए अहलेबैत की मदद ज़रूरी है. इसीलिये नबी यह पैगाम देकर गए की मैं अपनी उम्मत के मार्गदर्शन के लिए दो चीज़ें छोड़कर जा रहा हूँ, एक ‘कुरआन’ और दूसरे ‘मेरे अहलेबैत’. यानी किताब और उसके उस्ताद!

जीशान ”

और मैंने जो मेल भेजा था वह इस तरह था .

2010/7/21 brij sharma

जैदी साहेब ,आदाब ,आप जो बात कर रहे हैं कि कुरआन पाहिले पन्ने से आखिर तक पूरी है जो सब के पास है,लें यह बात भी सच है कि जब कुरआन के अलग अलग हिस्से जमा किये गए थे तो उम्र और अबूबकर ने वह पन्ने निकाल दिए थे जो अली कि शान में थे.इसमे दो सूरतें थीं .सूरा नूरें और सूरे विलाया. मैं ने यह दोनों सूरतें पढ़ कर देखीं कि इनकी और बाक़ी कुरआन की भाषा शैली एक ही .और वही तर्ज़े बयान है .आप खुद पढ़ कर देखिये

http://www.answering-islam.org/Quran/Miracle/nurain.html

http://www.answering-islam.org/Quran/Miracle/wilaya.हटमल

अब आप लोग स्वयं ही निर्णय करिए कि इन चेलेंज करने वालों की बातों में कितनी दम है . इसीलिए मेरा निवेदन है कि आनेवाले मेरे सभी लेखों को आप ध्यानपूर्वक पढ़ें .आगे भी इसी तरह के लेख देता रहूँगा .अब बताइये कि सच्चा कौन है.