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इस्लाम की नजर में सभी मुसलमान समान और बराबर हैं ,चाहे वह इस्लाम के किसी भी फिरके के मानने वाले हों .यह बयान जकारिया नायक ने एक सभा में उस समय कहा था ,जब किसी ने उस से शिया सुन्नी विवाद के बारे में सवाल किया था .जकारिया ने यह भी दावा किया था कि इस्लाम की जो बुनियादी मान्यताएं है ,उनमे सुन्नी और शिया दौनों ही एकमत हैं .जैसे अल्लाह ,कुरान ,नबूवत ,सहाबी ,आदि विषयों पर सुन्नी और शिया में कोई विभेद नहीं है .यही इस्लाम की महानता है ,जो इस्लाम के दूसरे धर्मों से श्रेष्ठ साबित करती है .

इस लेख से पता चल जायेगा कि जकारिया के दावों में कितनी सत्यता है .वैसे सब जानते है कि शिया सुन्नी हमेशा लड़ते रहते है .और एकदूसरे को काफ़िर बता कर क़त्ल भी कर देते हैं इनका यह विवाद मुहमद की मौत से बाद सन 632 से ही शुरू हो गया था .शिया फिरका मुसलमानों का दूसरा बड़ा समुदाय है .जादातर शिया ईरान ,दक्षिण इराक ,लेबनान ,सीरिया ,अफगानिस्तान ,पाकिस्तान ,और भारत में पाए जाते हैं .शियाओं में भी अधिकांश “इसना अशरीاثنا عشريه Twelver हैं .जो अपने बारह इमामों को मानते है .इनका पहला इमाम अली बिन अबुतालिब है .अबतक ग्यारह इमाम गुजर चुके है ,और शिया मानते है कि बारहवें इमाम “मेहदी امام مهدي”का आना बाकी है .इसके आलावा शिया मानते हैं कि चौदह लोग ऐसे हैं जो निष्पाप है .इनमे मुहम्मद ,फातिमा ,और बारह इमाम शामिल हैं .शिया सिर्फ “अहले बैतاهل بيت” यानी अली के परिवार और वंशज के लोगों की हदीसों को सही मानते हैं .और सुन्नियों की तरह पूरी कुरान को याद नहीं रखते

इसलाम सम्बन्धी प्रमुख मुद्दों पे शिया लोगों जो मान्यताएं है वह उनकी किताबों में विस्तार से दी गयी है .उन्हीं से कुछ हवाले इस लेख में दिए जा रहे हैं .ताकि लोगों को शिया सुन्नी के बीच का अंतर पता चल जाये .और सुन्नियों का पर्दाफाश भी हो जाये .

चूँकि मूल किताबें अरबी और अंगरेजी में हैं ,इसलिए ,सिर्फ अंगरेजीको लिया गया है और हिंदी अनुवाद मेरा है ,इसमे भी अति महत्वपूर्ण मुद्दों को लिया गया है

 

1-अल्लाह

1.न हम ऐसे अल्लाह को मानते हैं और न ऐसे रसूल को जिनका स्वामी अबूबकर है .

Neither we accept such Lord nor do we accept the Prophet of such Lord whose Caliph is Abu-Bakr . [Anwaar-ul-Na’umania, Vol#2, Pg#278 – Published Iran]

2.जहांतक विभूतियों की बात है ,अल्लाह और अली में कोई अंतर नहीं है ,अली खात्मे सुलेमान ,क़यामत के दिन के स्वामी ,जन्नत और नरक के बीच के पुल के मालिक है .उन्ही ने पत्तियों और पेड़ों को बनाया .और फलों को पकाया .और झरनों और नदियों को प्रवाहित किया है .

There is no difference between ALLAH and Ali . such as in the virtues for; The master of Khatim-e-Suleman, The Master of Doomsday, The master of Siraat (The Bridge over Hell) and .The Creator of leaves on the trees, The one who ripens the fruits, The one who continued fountains, The one who made drift in the canals . [Jila-ul-A’yoon, Vol#2, Pg#85 – Published Lahore]

3.कुरान में जहां भी “रब्ब “शब्द का उल्लेख है ,उसका मतलब “अली ” है .

Wherever Quran referred the word “RABB”, it meant as Ali .. [Jila-ul-A’yoon, Vol#2, Pg#66 – Published Lahore]

 

2-कुरान

1.कुरान को शराबी खलीफा अबू बकर ,उमर और उस्मान ने बदल दिया है ,और वर्त्तमान कुरान नकली है .और इमाम की जिम्मेदारी है कि वह असली कुरान को सामने लायें ,जब बारहवें इमाम मेहदी आएंगे तो वह असली कुरान को मूल स्वरूप में पढ़कर बताएँगे .

Quran has been purposely altered by the drunkard Caliphs {Abu-Bakr , Umar and Usman }; The present Quran is false; It’s the duty of Imam Mehdi (SHIAs 12th Imam) to bring it in its original form; When Imam Mehdi (SHIAs 12th Imam) will come, then the Quran will be recited in its original..

form . [Quran Translation by Maqbool Hussain Delhvi, Chap#12, Pg#384 – Published India

2.मुहम्मद की मौत के बाद असली कुरान अली के पास थी .जब अली वह कुरान अबूबकर को देने गए तो उसने मना कर दिया .जिसके कारण मुसलमान असली कुरान से वंचित हो गए .

after the death of Holy Prophet original Quran was in the possession of Ali , which he brought before Abu-Bakr but He refused to prevail such version that is why Muslim Ummah was deprived of original Quran . [Sheikh-e-Saqifah, Pg#138 – Published Karachi]

3.वर्त्तमान नकली कुरान में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं है ,लेकिन हमारी कुरान में पाकिस्तान का नाम मौजूद है .

The present (false) Quran doesn’t mentions the name of “Pakistan” however ours (SHIAs) true Quran even have the name of “Pakistan”

. [Hazar Tumhari Das Hamari, Pg#554 – Published Karachi]

 

3-अहले बैत (household of Muhammad)

1.एक “लिंग ” था जिसने अली की इमामत की भविष्यवाणी की थी ( शायद वह “शिव ” होंगे .

Penis proclaimed the Imamate (patriarchate) of Ali . [Aasar-e-Haidery, Pg#557 – Published Lahore]

2.हफ्शा बुरे स्वभाव की औरत थी ,जिसे मुहम्मद ने स्वीकार किया .हफ्शा का चेहरा सूअर की तरह था.

Hafsa , a bad natured woman, was accepted by Prophet Muhammad… She was a pig-faced woman .

[Haqiqat Fiqah-e-Hanafiah Dar Jawab Fiqah-e-Jafariyah, Pg#124 – Published Lahore]

3.आयशा और हफ्शा पर लानत है ,इन्हीं ने रसूल को जहर दिया था .

Curse upon Ayesha and Hafsa who gave poison to Prophet Muhammad [Hayat-ul-Quloob, Vol#2, Pg#700 – Published Iran]

4.जबतक रसूल नहीं आये ,आयशा पर वासना के दौरे पड़ते रहते थे .

On not arriving of Prophet Muhammad Ayesha suffered with the fits of madness and passion . [Hazrat Ayesha Ki Tareekhi Haisiyat, Pg#54]

5-हे सुन्नियो ,आयशा एक बंदरिया है

O Sunnis! Is Ayesha a woman or a female monkey? . [Chara’gh-e-Mustafvi Aur Sharar Bu-Lehbi, Pg#67 – Published Lahore]

 

4-इमामत

1.इमाम का दर्जा मुहम्मद के बराबर है .

Imams are equal in the status with Prophet Muhammad .. [Usool-ul-Kaafi, Vol#2, Pg#287 – Published Iran]

2.इमाम पर अल्लाह की तरफ से वाही नाजिल होती है .

Imam get revelations (WAHI by ALLAH) . [Usool-ul-Kaafi, Vol#1, Pg#329-330 – Published Iran]

 

5-खलीफा

1.पहले के तीन खलीफा (अबू बकर ,उस्मान ,उमर ) गधे के लिंग की तरह हैं .

The caliphate of first three caliphs is like the penis of donkey . [Haqiqat Fiqah-e-Hanafiah Dar Jawab Fiqah-e-Jafariyah, Pg#72 – Published Lahore]

2.गुदामैथुन करना सहबियों की सामान्य आदत थी , जैसे वालिद बिन मुगीरा ,और उमर सब ऐसे काम करते थे .

Sodomy was very common among various Sahabah ; for e.g. Waleed bin Mugha’irah, Umar .

[Haqiqat Fiqah-e-Hanafiah Dar Jawab Fiqah-e-Jafariyah, Pg#59 – Published Lahore]

3.खलीफा मुआविया की माँ और दादी दौनों वेश्याएं थीं .

Mua’wiyah ’s mother and granny were prostitutes. [Kaleed-e-Manazrah, Pg#301 – Published Lahore

4..उस्मान की माँ एक वेश्या थी .

Usman ’s mother was a prostitute . [Na’sal Ko Qatal Kar Do, Pg#18 – Published Karachi]

5.अबू बकर और शैतान के ईमान में कोई फर्क नहीं है .

There is no difference in the faith of Abu-Bakar and in the faith of Satan . [Kaleed-e-Manazrah, Pg#93 – Published Lahore

6.मौत के समय उमर आखिरी खुराक शराब थी .

Last diet of Umar ’s was Vine . [Sehm Masmoom, Pg#241 – Published Lahore]Published Iran]

7.सभी इमाम माँ की योनी से पैदा नहीं हुए ,बल्कि माँ के पेट की बगल से पैदा हुए हैं

Imams are not born through the womb of their mothers but they are born from the sides of their mothers . [Jila-ul-A’yoon, Vol#2, Pg#474 – Published Lahore]

8.इमाम जाफर सादिक तबतक नमाज के लिए नहीं खड़े होते थे ,जबतक वह अबू बकर ,उम्र ,उस्मान ,मुआविया ,आयशा ,हफ्शा ,हिन्दा ,और उम्मे हाकिम पर लानत नहीं भेज देते थे .

Ja’far Sadiq never stood up from the prayer mat unless he had not sent curse upon Abu-Bakr ,Umar (, Usman, Mua’wiyah , Ayesha , Hafsa , Hind , and Umm-ul-Hakm . [A’yn-ul-Hayat, Pg#599 – Published Iran

9.कुछ सहाबी ऐसे दुष्कर्म करते थे ,जैसे चोरी ,बलात्कार और झूठ बोलना आदि .

Some Sahabah performed evil deeds; they did the acts of stealing, rape and telling a lie . [Char Yaar, Pg#64 – Published Karachi]

10.मुहम्मद की मौत के बाद उनके चार साथियों के अलावा सभी काफ़िर हो गए थे .

After Prophet Muhammad ’s death all his disciples except four became apostate . [Anwaar-ul-Na’umania, Vol#1, Pg#81 – Published Iran]

 

6-महत्वपूर्ण विषय

1.शौचालय में कुरान पढ़ सकते हैं.

Quran can be recited in toilet . [Fir’o-ul-Kaafi, Vol#6, Pg#502 – Published Iran]

2.शिया विद्वानों के अनुसार सुन्नी सबसे नापाक ,और यहूदियों और ईसाइयों से भी बदतरीन और काफ़िर हैं .

According to SHIA scholars, Ahl-e-Sunnah are worse and dirtiest infidels than the Jews or Christians or Majoos ..

[Anwaar-ul-Na’umania, Vol#2, Pg#306 – Published Iran]

3.चाची और भतीजी से एक साथ शादी कर सकते हैं.

Niece and Aunts can remain in Nikkah at a time. [Malla Yahzur-ul-Faqeeh (Fiqah-e-Jafariyah), Vol#4 ,Pg#260 – Published Iran]

4.गधे का गोश्त हलाल है .

Donkey’s flesh is Halal. [Malla Yahzur-ul-Faqeeh (Fiqah-e-Jafariyah), Vol#4 ,Pg#213 – Published Iran

5.सुन्नियों को शादी का अधिकार नहीं है ,उनसे शादी करना हराम है.

There is no right for Ahl-e-Sunnah in Islam so Nikkah with them is also Haram. [Malla Yahzur-ul-Faqeeh (Fiqah-e-Jafariyah), Vol#3 ,Pg#258 – Published Iran]

6.अपनी नौकरानियों से अस्थायी शादी कर सकते हैं.

Own female servant can be given to someone temporarily for Muta’h practices. [Tehzeeb-ul-Ahkaam, Vol#7, Pg#244 – Published Iran]

7.अस्थायी शादियों की सीमा नहीं है ,चाहे एक हजार शादियाँ कर लो.

Muta’h (illegitimate temporary marriage) has no accountability; it can be done with 1000 even. [Tehzeeb-ul-Ahkaam, Vol#7, Pg#258-259 – Published Iran]

8.सभी सुन्नी काफ़िर हैं .उनसे शादी करना हराम है.

Ahl-e-Sunnah are infidels (Kafir) so Nikkah with them is illegitimate. [Tehzeeb-ul-Ahkaam, Vol#7, Pg#302 – Published Iran]

 

 

इस लेख का उद्देश्य शिया अथवा सुन्नी को सही या गलत साबित करना नहीं है .बल्कि लोगों को यह बताने का है ,कि सभी मुसलमान विश्व कि शांति के लिए खतरा हैं .क्योंकि लड़ाई करना ,और हत्याएं करना इनका स्वभाव बन चूका है .आजतक इन लोगों ने कल्पित अल्लाह ,दुष्ट रसूल .मानव रचित कुरान ,बेतुकी हदीसों ,और शैतानी शरीयत का सहारा लेकर करोड़ों निर्दोष लोगों को बर्मी से मार डाला है .और अभी भी यह सिलसिला चालू है .फिर भी जकारिया जैसे लोग बेशर्मी से इस्लाम को शांति और सद्भावना का धर्म बताते है .मुझे विश्वास है कि इस लेख से उन सेकुलर लोगों की आँखें खुल जाना चाहिए जो इस्लाम के प्रति सहानुभूति रखते हैं .और मुसलमानों को खुश करने में लगे रहते हैं. जल्द ही दूसरे फिरकों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी .मेरा काम केवल लोगों को सचेत करना है कि किसी भी मुस्लिम प्रचारक ,या ब्लोगरों के झूठे लेखों से कभी प्रभावित नहीं हों .और अपने धर्म पर अडिग होकर डटे रहें .

जैसा कि कहा गया है –

“स्वधर्मे निधनं श्रेयः पर धर्मो भयावहः ” गीता -3 :35

अपने धर्म में म़र जाना ही उचित है ,दूसरों का धर्म भयानक होता है .