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मेरी इस पोस्ट को पढ़कर कुछ लोग आपे से बाहर हो जायेंगे ..लेकिन मैं जो भी लिख रहा हूँ ,सब हदीसों के आधार पर लिख रहा हूं .यह वाकया सभी हदीसों की किताबों में दर्ज है.आजकल हदीसोंकी किताबे नेट पर उपलब्ध हैं ,जिसे शक हो खुद देख ले

मुहम्मद के कुछ सहाबा ऐसे थे जो इथोपिया और अबीसीनिया के निवासी थे .और जादातर बनी अफरीदी कबीले के थे.और उस समय मदीने में रहते थे.यह लोग हर साल ईद के मौके पर अपने रसूल से मिलने आते थे.बुखारी और दूसरी हदीस की किताबों में लिखा है की यह हब्शी लोग ईद पर एक ख़ास तरह का नाच करते थे .जिसे यलाहबू कहा जाता है इस नाच में यह हब्शी हाथोंमे खंजर और भाले लेकर नाचते थे .नाच में लड़कियां भी भाग लेती थीं .ख़ास बात यह है की यह नाच मुहम्मद के घर के सामने मस्जिदे नबवी में होता था. और मुहम्मद अपनी पत्नी आयेशा और दूसरे सहाबिओं के साथ नाच देखते थे .देखिये

१-सही बुखारी किताब ४ हदीस १०५

२-सही बुखारी किताब १ हदीस ४४५

३-सही मुस्लिम किताब ४ हदीस १९३८ से १९४६ तक

मुस्लिम में अबूउ दाउद कहते है की हब्शी भाले लेकर नबी के सामने नाचते थे और नबी खड़े होकर देखते थे .नबी ने आयेशा को बुलाया और नाच देखने को कहा .आयेशा ने एक अंसार से पूछा कियह लोग क्या गा रहे है .सहबा ने बताया “मुहम्मद अब्दुल्लाह “यानी मुहम्मद अल्लाह का बन्दा है.

अबू हुरेरा मुस्लिम किताब ४ हदीस १९४६ में कहते है कि उम्र खित्ताब ने एक कंकड़ मार कर हब्शिओं को रोकना चाहा ,लेकिन रसूल ने उम्र से कहा इनको मत रोको .

आएशा से रवायत है कि ‘मेरे सामने जब दो लड़कियां नाच कर बुताह के युद्ध का गाना सूना रही थी , तो रसूल आराम से सुन रहे थे आयेश्ह ने कहा कि उस वक्त मेरा घर “रियाजुल जन्नत “लग रहा था .

तबरानी में दर्ज है कि “रसूल ने आयेशा को बुलाया और नाच देखने को कहा .भीड़ अधिक होने ,और आयेशा छोटी होने के कारण उसे देखने में दिक्कत हो रही थी .इसलिए नबी ने आयेशा को ऊपर की तरफ उठा लिया था .

इस से सभी पढ़ने वाले लोग आसानी से समझ सकते है कि अगर रसूल खुद अपनी मस्जिद में नाच करवा सकते हैं ,तो अगर दूसरे धर्म के लोग अपने धार्मिक आयोजनों में नाच भजन आरती आदि करते हैं ,तो मुसलमान दंगे क्यों करते है

मेरा उन लोगों से अनुरोध है कि मेरे ऊपर आरोप लगाने या अभद्र कमेन्ट करने से पहिले हदीसें पढ़ ले,

मेरे सम्मानीय समर्थक भी दी गयी हदीसें नेट पर सर्च करके देख ले, या सिर्फ ” african डांस या लाहबू “सर्च करके देख ले दूध का दूध और पानी का पानी तुरत हो जाएगा. अब या तो आरोप लगाने वाले कबूल करें कि हदीसें झूठ हैं प्रस्तुतकर्ता बी एन शर्मा