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हाँ तो साथियों…

एक बात हम लोगों को हमेशा सोच में डालती रहती है कि आखिर क्या कारण है कि एक्के-दुक्के को छोड़कर सारे के सारे मुसलमान देशद्रोही और गद्दार ही होते हैं…?

जब मैं इस बात कि गहराई में गया तो मुझे सारा मामला समझ में आ गया तो आईए आप भी  सारे तथ्यों से वाकिफ होइए…

मुस्लिम धर्म एक दम नया है या आप कह सकते हो कि अभी पैदा ही हुआ है यही कोई 1300 -1400  साल पहले …उसकासंस्थापक मुहम्मद नाम का एक अनपढ़, जाहिल और लुटेरा था…!!

अब मुर्ख होने की वजह से उसके पास कोई सिद्धांत तो था नहीं.., इसीलिए उसने कुरान में लिख दिया कि ….. “”दुनिया में जेहाद चलाओ और सारी दुनिया को मुस्लिम बना लो””.. इसके पीछे उसकी मंशा  ये थी कि जब सारे लोग चोर ही हो जायेंगे तो सब उसी को अपना गुरु मान लेंगे क्योंकि… वो तो “”चोरों का ही सरदार“” है.

खैर.., उसका सपना तो सफल ना होना था …. न हुआ……!!

लेकिन.., कुछ चोरों  (वो भी हिन्दू ही थे) को उस बड़े चोर की बात बहुत पसंद आई और वे निकल पड़े चोरी-पाकेटमारी करने.. !

उन्ही चोरों में से एक चोर था ……बाबर

जब बाबर चोरी-पाकेटमारी करते हमारे हिन्दुस्तान में आया तो यहाँ की भव्यता देख के उनकी आँखें चौंधया गयी…और वो सोचने लगा की इतना धन तो सात पुश्तों  में भी अपने देश नहीं ले जा पाउँगा…और अगर किसी तरह थोडा बहुत ले भी गया तो वहां करूँगा क्या…..?? वहां ना तो कुछ बिकता था न ही कोई जिंदगी….. सब के सब चोर और भिखारी ही थे……!!

तो बाबर यहीं रह गया…. लेकिन जैसा कि हर चोर के साथ होता है.., उसे भी मन में हमेशा ये डर लगा रहता था कि …कोई हमें पकड़ न ले या मार के भगा ना दे…….!!!! इसीलिए वो अपने जैसे चोरों और गद्दारों को अपने ग्रुप में शामिल कर ग्रुप को बढाता गया…और जब वो कुछ ताकतवर और धनी हुआ तो उसने और उसके औलादों (अकबर., जहाँगीर.., शाहजहाँ.., वगैरह) ने उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए यहाँ के हिन्दुओं को धमकाना  और लालच देना शुरू कर दिया कि…. तुम भी मुसलमान बन जाओ….!!!

तो उस समय के कुछ चोर-उच्चके.,लालची और गद्दार किस्म के लोग झट से मुसलमान बन गए और खूब मलाई खायी…साथ ही साथ जो नपुंसक.. और कायर लोग थे वो भी डर के मारे मुसलमान बन गए…. परन्तु जो साहसी.., निडर  और ईमानदार लोग थे उन्होंने उस चोरों के खानदान को मुंहतोड़ जबाब दिया और अपना धर्म और ईमान बचाए रखा..!

तो समय के साथ-साथ उन्ही चोर-उच्चकों.., लालची , गद्दार और कायर लोगों के वंशज   अपने एकसूत्रीय   कार्यक्रम(बच्चा  पैदा करना) में लगे  रहे  और आज  अपनी  इतनी  आबादी  बढ़ा  ली …!!

अब होना ये चाहिए कि… जैसे ही इनका डर या लोभ खत्म हो गया …इन्हें अपने पूर्वजों की गलती पर शर्मिंदा होना चाहिएऔर  फिर से अपने पुराने धर्म में लौट जाना चाहिए.., लेकिन खून ने अपना रंग दिखाया और कोई नहीं लौटे.., उलटे अपने आप पर गर्व करने लगे…… और जिन्होंने बहादुरी से अपने धर्म और संस्कृति को बचाए रखा (हिन्दू) उन्हें ही आँख दिखाने लगे….!!

अब इन जाहिलों को कौन समझाए  कि जो हिन्दू उन विदेशी आक्रान्ताओं और आतातायियों से सामने नहीं झुके  और अपने आपको बचाए रखा., वो गौरवशाली हिन्दू …. इन मूर्खों और कायर आतंकवादियों के सामने क्या झुकेगा….????