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अभी तक महात्मा गांधी के ब्रह्मचर्य के प्रयोगों को लेकर महिलाओं के साथ उनके संबंधों पर चर्चा होती थी, लेकिन अब एक लेखक ने दावा किया है कि महात्मा गांधी नस्लवादी और बाइसेक्शुअल थे। एक बायॉग्रफ़ी में किए गए दावे के अनुसार, महात्मा गांधी के जर्मन-यहूदी आर्किटेक्ट व बॉडीबिल्डर हरमान कैलनबाक के साथ संबंध थे और उसके साथ रहने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी तक को छोड़ दिया था।

 

न्यू यॉर्क टाइम्स के पूर्व एग्ज़ेक्युटिव एडिटर लेखक जोसेफ लेलिवेल्ड ने अपनी किताब ‘ ग्रेट सोलः महात्मा गांधी ऐंड हिज़ स्ट्रगल विद इंडिया ‘ में गांधी जी और कैलनबाक के संबंधों के बारे में कई सनसनीखेज दावे किए हैं।

 

कैलनबाक का जन्म जर्मनी में हुआ था, लेकिन बाद में वह दक्षिण अफ्रीका चले गए और वहां उन्होंने आर्किटेक्ट के तौर पर काफी धन कमाया। उस समय महात्मा गांधी वहां काम कर रहे थे और इसी दौरान कैलनबाक उनके अनुयायी बन गए।

 

लेखक का दावा है कि गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में कैलनबाक के घर में करीब 2 साल तक उसके साथ रहे और इस दौरान दोनों के बीच संबंध परवान चढ़ा। दोनों ने वादा किया वह एक-दूसरे से इतना प्यार करेंगे जितना आज तक कभी किसी ने ना किया हो। महात्मा गांधी ने कैलनबाक से एक बार कहा था कि तुमने मेरे शरीर पर पूरा नियंत्रण कर लिया है। यह गुलामी मुझे हसीन लगती है।

 

लेलिवेल्ड की इस किताब में गांधी जी की निजी जिंदगी और उनकी सेक्शुअलिटी पर कई सवाल खड़े किए गए हैं। इसमें कहा गया है, ’13 साल की उम्र में गांधी जी की शादी 14 साल की कस्तूरबा से हुई, लेकिन 4 बच्चों के जन्म के बाद 1908 में दोनों अलग हो गए ताकि वह कैलनबाक के साथ रह सकें।’

 

लेखक के मुताबिक, ‘यह साफ नहीं है कि गांधी जी ने यह क्यों लिखा कि वैसलीन और रूई कैलनबाक की हमेशा याद दिलाते हैं। गांधी खुद को अपर हाउस और अपने प्रेमी को लोअर हाउस कहकर बुलाते थे और उन्होंने कैलनबाक से वचन लिया कि वह कभी किसी महिला की ओर ललचाई निगाहों से नहीं देखेंगे।’ बाद में उन्होंने कहा, ‘मैं कभी कल्पना नहीं कर सकता कि पुरुष और स्त्री के बीच इंटरकोर्स इतना बदसूरत हो सकता है।’

 

दोनों एक-दूसरे से उस समय अलग हुए, जब 1914 में गांधी में वापस भारत आ गए। पहले विश्व युद्ध के चलते कैलनबाक को भारत आने की इजाजत नहीं मिली, लेकिन दोनों पत्रों के जरिए से एक-दूसरे से संपर्क में रहे। किताब के मुताबिक, सन् 1933 में भेजी चिट्ठी में गांधी ने अपनी पूर्व पत्नी को ‘सबसे जहरीली औरत’ करार दिया था।

 

किताब में कहा गया है कि 70 की उम्र गांधी जी नियमित तौर पर 17 साल की अपनी भतीजी मनु और दूसरी महिला के साथ सोया करते थे और कोशिश करते थे कि वह उत्तेजित न हों। एक बार उन्होंने एक महिला से कहा था,’यह बहुत ही आश्चर्यजनक और शर्मनाक है कि मेरी इतनी कोशिशों के बावजूद भी गुप्तांग उत्तेजित रहता है।’

 

एक और सनसनीखेज खुलासे में किताब में यह भी दावा किया गया है कि गांधी जी नस्लवादी थे और साउथ अफ्रीकी के काले लोगों के प्रति नस्ली भेदभाव रखते थे। दक्षिण अफ्रीका में उनके दौरे का जिक्र करते हुए किताब में गांधी जी के शब्दों में लिखा है- हम काफिरों के बदले जेल गए थे। हम समझ सकते थे कि हमें गोरों लोगों की श्रेणी में नहीं नहीं रखा जा सकता थे, लेकिन हमें यहां के मूल निवासियों (ब्लैक) के स्तर का समझा जाना अति था। काफिर जन्मजात असभ्य हैं।