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पहला हिन्दू आंतकवादी मोहनदास करमचंद गाँधी था ….. जिसने अंग्रेजो के विरुद्ध उमड़ते जनसैलाब को अहिंसा के छींटो के बुझाकर अंग्रेजो का काम आसान किया और परिणाम स्वरुप अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों पर किये गये अत्याचार की कालावधि बढती रही ! जिनके समय में हिन्दुओ का नरसंघार होता रहा और ये अहिंसा की पीपनी बजाते रहे ! इस्लाम के नाम पर देश का विभाजन हो गया और इन्हें याद रहा तो केवल इतना की पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने है ! भारतीयों के मूँह से निवाला छीनकर कर पाकिस्तानियो की चोंच भरने वाला आंतकवादी नहीं था तो क्या था !!

 

दूसरा आंतकवादी था जवाहरलाल नेहरु …. देश का विभाजन होता रहा और ये जनाब लेडी माउन्टबैटन के साथ ऐसे लेटे की करवट बदलकर एक बार भी नहीं देखा की भारत को चीरा जा रहा है ! कश्मीर और चीन समस्या के जनक को आंतकवादी कहना किसकी भी दशा में अतिश्योक्ति नहीं हो सकता !! नपुंसक विदेश निति देश पर कोई “चाचा” या “ताऊ” ही थोप सकता था, जिम्मेदार प्रधानमंत्री नहीं !!

 

तीसरी आंतकवादी थी इंदिरा गाँधी …. जब इस्लाम के आंतक का सितारा डूबने के कगार पर था और मुसलमानों का वीभत्स चेहरा सब के सामने आ चूका था तो इन्होने एक मुसलमान से शादी करके देश के सामने एक गंदा उदाहरण पेश किया और इस्लाम की जड़े फिर से हरी हुई !! हिन्दुओ और सिखों के संबंधो में विष का संचार करने वाली इसी महिला आंतकवादी के कारण आज तक हिन्दू और सिखों के संबंध वापस वैसे नहीं हो पाए जिसका की इतिहास साक्षी रहा है !!

 

स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आंतकवादी यदि कोई है तो मेरे अनुसार वो राजीव गाँधी था …. रक्षा सौदों में दलाली खाने वाला दलाल, सोनिया की बहनों के साथ देश के खजाने की बन्दरबाँट करने वाला, धर्म परिवर्तन करने वाला , क्वात्रोची और भोपाल गैस त्रासदी में मरे 5000 लोगो के हत्यारे जेम्स एंडरसन को देश से भगाने वाला जल्लाद आंतकवादी नहीं है तो कोई भी आंतकवादी नहीं है ! ये राजीव की ही हिजड़ा मानसिकता थी जो पाकिस्तान परमाणु शक्ति बन बैठा और हम चाह कर भी पाकिस्तान के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर पाते क्युकी परमाणु युद्ध की आशंका हमें ऐसा करने से रोक देती है और हम पाकिस्तानी आतंकवादियो द्वारा मारे गए देशवासियो के शरीर के चीथड़े चुनते रह जाते है !