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इस्लामी सिद्धांत, आदर्श और विधि विधान का एकमात्र अंतिम लक्ष्य सभी अन्य धर्मों को नष्ट कर विश्व भर में इस्लामी साम्राज्य एवं अरबी संस्कृति स्थापित करना है क्योंकि ”इस्लाम एक मजहब नियंत्रित राजनैतिक आन्दोलन है”। जी.एच.जॉनसन के अनुसार ”इस्लाम में मजहब और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं” (मिलिटेंट इस्लाम)। 

यह बात प्रत्येक गैर-मुस्लिम भारतीय को भलीभांति समझ लेनी चाहिए कि पाकिस्तान व बंगलादेश बनने के बाद भी मुसलमानों का एकमात्र अंतिम लक्ष्य शेष भारत को भी इस्लामी राज्य बनाना और समस्त गैर-इस्लामी धर्मों जैसे हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि को समाप्त करना है जैसा कि उनको कुरान (मुहम्मद फारूख खां, १९८०) का आदेश है – 

१. ‘दीन’ तो अल्लाह का इस्लाम है’ (३-१९; पृ. १८८);

(२) ” उनसे युद्ध करो जहां तक कि फितना शेष न रहे और ‘दीन’ अल्लाह का हो जाए” ;२ :१९३, पृ. १५८”

(३) ”वही है जिसने अपने ‘रसूल’ को मार्गदर्शन और सच्चे ‘दीन’ सत्य धर्म के साथ भेजा ताकि उसे समस्त ‘दीन’ पर पर प्रभुत्व प्रदान करे, चाहे मुशिरकों को नापसन्द क्यों न हो।”

(९ : ३३, पृ. ३७३)। इसलिए मुस्लिम नेताओं ने अपने राजनैतिक आकाक्षाएं सुस्पष्ट कर दी हैं – (१) हकीम आजम खां ने कहा है – ”एक और भारत और दूसरी ओर एशिया माइनर भावी इस्लामी संघ रूपी जंजीर की दो छोर की कड़ियाँ हैं जो धीरे-धीरे किन्तु निश्चय ही बीच के सभी देशों को एक विशाल संघ में जोड़ने जा रही है” ;भाषण का अंश खिलाफत कान्प्रफेंस, अहमदाबाद १९२१, आई.ए.आर. १९९२, पृ. ४४७”

(२) एफ.ए.दुर्रानी ने कहा – ”भारत- संपूर्ण भारत हमारी संपत्ति है और उसका फिर से इस्लाम के लिए विजय करना नितांत आवश्यक है तथा पाकिस्तान का निर्माण इसलिए महत्त्वपूर्ण था कि उसका शिविर यानि पड़ाव बनाकर शेष भारत का इस्लामीकरण किया जा सके।” (पुरुषोत्तम, मुस्लिम राजनीतिक चिन्तन और आकांक्षाएं, पृ. ५१, ५३)

(३) कांग्रेस नेता एवं भूतपूर्व शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने पूरे भारत के इस्लामीकरण की वकालत करते हुए कहा : ‘भारत जैसे देश को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रहा चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता और प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करे’ (बी.आर.नन्दा, गांधी पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियालज्म एण्ड नेशनलिज्म, पृ. ११७)

(४) मौलाना मौदूदी का कथन है कि ”मुस्लिम भी भारत की स्वतंत्रता के उतने ही इच्छुक थे जितने कि दूसरे लोग। किन्तु वह इसको एक पड़ाव मानते थे ध्येय (मंजिल) नहीं। उनका ध्येय एक ऐसे राज्य की स्थापना था जिसमें मुसलमानों को विदेशी अथवा अपने ही देश के गैर-मुस्लिमों की प्रजा बनकर रहना न पड़े। शासन दारुल-इस्लाम )शरीयः शासन की कल्पना के, जितना संभव हो, निकट हो। मुस्लिम, भारत सरकार में, भारतीय होने के नाते नहीं, मुस्लिम हैसियत से भागीदार हों।’ (डॉ. तारा चन्द, हिस्ट्री ऑफ दी फ्रीडम मूवमेंट, खंड ३, पृ. २८७)

(५) हामिद दलवई का मत है कि ‘आज भी भारत के मुसलमानों और पाकिस्तान में भी प्रभावशाली गुट हैं, जिनकी मांग पूरे भारत का इस्लाम में धर्मान्तरण है।’ (मुस्लिम डिलेमा इन इंडिया, पृ. ३५)

(६) बांग्लादेश के जहांगीर खां ने ”बंगलादेश, पाकिस्तान, कश्मीर तथा पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के मुस्लिम बहुल कुछ भागों को मिलाकर मुगलियास्थान नामक इस्लामी राष्ट्र बनाने का सपना संजोया है”

(मुसलमान रिसर्च इंस्टीट्यूट, जहांगीर नगर, बंगलादेश, २०००)। साऊदी अरेबिया के प्रो. नासिर बिन सुलेमान उल उमर का कथन है कि ”भारत स्वयं टूट रहा है यहाँ इस्लाम सबसे बड़ा दूसरा धर्म है। आज भारत भी विध्वंस के कगार पर है। जिस प्रकार किसी राष्ट्र को उठने में दसियों वर्ष लगते हैं उसी प्रकार उसके ध्वंस होने में भी लगते हैं। भारत एकदम रातों-रात समाप्त नहीं होगा। इसे धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा निश्चय ही भारत नष्ट कर दिया जाएगा।

(आर्गे, १८.०७.०४) इसलिए मुस्लिम धार्मिक नेता मौलाना वहीदुद्दीन ने सुझाव दिया कि ”मुसलमानों को कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए और आगे चलकर उनमें से एक निश्चय ही भारत का प्रधानमंत्री हो जाएगा” (हिन्दु टा. २५.१.९६)। शायद २०२०  के चुनावों में मुसलमानों ने यही नीति अपनाई थी। उपर्युक्त उद्देश्यों को हिन्दुओं, भारत सरकार और सभी राजनैतिक दलों को मुसलमानों की इन आकांक्षाओं को गंभीरता से सोचना-समझना चाहिए। मगर हमारा विश्वास है कि कांग्रेस, सी.पी.एम., सपा, राजद आदि के स्वार्थी नेता उनके वोटों के सहारे के बल पर कुछ दिनों राज करने के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण और शांतिपूर्ण जिहाद में सहयोग देकर शेष भारत के इस्लामीकरण में सहयोग दे रहे हैं। ऐसे नेता तो चले जाएंगे लेकिन इनके कारण मानवता, अध्यात्म और उद्दात संस्कृति का हिन्दू भारत सदैव के लिए इस्लामी जिहाद की भट्टी में जलकर समाप्त हो जाएगा। इसलिए भारत के इस्लामीकरण को रोकना प्रत्येक देश भक्त का सबसे पहला कर्त्तव्य है।