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वास्तव में मुसलमानों का अल्लाह सर्वशक्तिमान नहीं है बल्कि किसी बादशाह तरह उसे हर काम के लिए नौकरानियों की जरुरत पड़ती है ,जिसे फ़रिश्ता कहा जाता है .फिर भी मुसलमान अल्लाह के साथ फरिश्तों का नाम लेकर शिर्क करते हैं ,
वास्तव में “फ़रिश्ता “फारसी भाषा का शब्द है .कुरान के अनुसार अल्लाह ने फरिश्तों के सामने मनुष्य को मिट्टी से और जिन्नों को आग से बनाया था .अर्थात सृष्टि के समय से पूर्व भी फ़रिश्ते मौजूद थे .लेकिन कुरान में यह नहीं लिखा है कि फ़रिश्ते कब और किस चीज से बनाये गए हैं .फिर भी उन पर ईमान रखने को कहा जाता है यहाँ तक .लोग यह भी नहीं जानते कि फ़रिश्ते पुरुष है ,या स्त्री है .इसी का खुलासा यहाँ पर किया जा रहा है .
इस्लाम में फरिश्तों का इतना बड़ा ऊँचा दर्जा है कि अल्लाह और रसूल के साथ उन पर भी विश्वास करने के लिए कहा गया है .लेकिन लोग बिना किसी तर्क के इस बात को स्वीकार कर लेते है . और इस विश्वास को ईमान(Faith ) कहा जाता है .और अल्लाह के साथ फरिश्तों ,किताबों ,और रसूलों पर इमान रखने को इमाने मुफस्सिल कहा जाता है ,अरबी में इस प्रकार है –
“آمَنْتُ بِاللهِ وَمَلاَئِكَتِه وَكُتُبِه وَرُسُلِه وَالْيَوْمِ الآخِرِ وَالْقَدْرِ خَيْرِه وَشَرِّه مِنَ اللهِ تَعَالى وَالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَ ”
I have faith in Allah and His Angels, His Books and His Messengers, and the Day of Judgement and that all good and evil and fate is from Almighty Allah and it is sure that there will be resurrection after death.
इस ईमाने मुफस्सिल में अल्लाह के बाद दुसरे नंबर पर फरिश्तों पर ईमान रखने को कहा है ,और फरिश्तों को अरबी में “मलायकतु” कहा काया है .जिसे लोग अंगरेजी में Angels या Fairy भी कहते हैं .फरिश्तों का काम,उनके बारे में कुरान और हदीसों में यह लिखा है ,(कुरान में यह शब्द 68 बार आया है .)
1-फरिश्तों की संख्या और काम
वैसे तो फरिश्तों का मुख्य काम अल्लाह की रात दिन बंदगी करना है ,लेकिन वह उन से और भी काम करवाता है ,जैसे कि,
“और वह फ़रिश्ते अल्लाह की बंदगी करने और उसके हुक्म का पालन करने में लगे रहते है “सूरा -अस साफ्फात 37 :165 
“यह तुम्हारे ऊपर जासूसी भी करते हैं ,और तुम जोभी करते हो वह बारीकी से लिखते रहते हैं “सूरा-अल इन्फितार 82 :10 से 12 
“और आदमी के मुंह से जोभी बात निकलती है ,उसे सुनने के लिए ताक में रहते हैं “सूरा -काफ 50 :18 
“अल्लाह लोगों के आगे पीछे फ़रिश्ते लगा देता और जब अल्लाह का आदेश होता है वह उस व्यक्ति की रक्षा करते हैं “सूरा -रअद 13 :11
“मौत से समय तुम्हारे ऊपर मौत का फ़रिश्ता लगा दिया जाएगा जो ,तुम्हें ग्रस्त कर लेगा ,और तुम अल्लाह के पास वापस भेज दिए जाओगे “
सूरा -अस सजदा 32 :11 
“जो नेक लोग जन्नत में जायेंगे तो उनको बधाई देने के लिए हर दरवाजे पर फ़रिश्ते खड़े मिलेंगे “सूरा-रअद 13 :23 
“अल्लाह का सिंहासन उठाने के लिए आठ फ़रिश्ते उसे किनारों से पकड़ कर रखेंगे “सूरा -हाक्का -69 :17 
“कठोर लोगों को काबू करने के लिए बलवान फ़रिश्ते लगाये जाते हैं ,जो अल्लाह के आदेशों का पालन करवाते हैं “सूरा -अत तहरीम 66 :6 
और निश्चय ही यह सन्देश (कुरान ) एक फ़रिश्ते द्वारा ही पहुंचाई हुयी बात है “सूरा -अत तकवीर 81 :19 
“नरक वासियों के ऊपर उन्नीस फ़रिश्ते नियुक्त किये गए हैं “सूरा -अल मुदस्सिर 74 :30 
इन सभी विवरणों से पता चलता है कि अल्लाह कि हुकूमत में फ़रिश्ते ,मजदूरी ,जासूसी ,और चुगली के साथ जेलर का काम भी करते हैं .और जरुरत होने पर पोस्टमेन का काम भी करते हैं .
2-फरिश्तों के कितने पंख
कुछ लोगों को ऐसा लगता होगा कि फरिस्तों कन्धों पर दायें और बाएं एक एक पंख होगा ,जैसे पक्षियों के होते हैं .ईसाई भी दो ही पंख मानते है .लेकिन इस्लाम की बात और ही है .इसमे फरिश्तों के पंखों की संख्या दी जा रही है ,
“कुछ ऐसे भी फ़रिश्ते हैं ,जिनके ,दो -दो ,तीन-तीन , चार -चार पंख होते हैं “सूरा -फातिर 35 :1 
हदीस ने तो एक फ़रिश्ते के 600 पंख बताये है ,हदीस इस प्रकार है 
“अबू इशाक शैवानी ने कहा कि जब वह जिब्रील से मिलने गए तो उनके बीच में दो कमान की दूरी (two bow length ) थी .और उन्होंने जरीर बिन मसूद से कहा था कि जिब्रील के 600 पंख हैं “बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 455 
3-फरिश्तों को स्त्रियाँ बताने का विरोध
अभी तक फरिश्तों के बारे में जोभी दिया गया वह विश्वास यानि ईमान पर आधारित है .चूँकि लगभग 97 % मुसलमान कुरान की व्याकरण नहीं समझते ,और उनको जो अर्थ बताया जाता है ,उसी को सही मानते है .यद्यपि कुरान में भी फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहा गया है ,जिसका मुसलमान विरोध करते हैं ,क्योंकि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसमे स्त्रियों को हीन समझा जाता है .और जब लोगों ने फरिश्तों को अल्लाह की बेटियां या स्त्रियाँ कहा तो ,अल्लाह इस बात का खंडन करने के लिए दलीलें देने लगा ,और कहने लगा ,
यह लोग अल्लाह की बेटियां होने को बुरा मान रहे हैं ,क्योंकि जब इनके यहाँ जब को बेटी होने की सूचना मिलाती है ,तो इनके मुंह काले पड़ जाते हैं ,और वह कुढ़ जाते हैं “सूरा -अन नहल 16 :57 और 58 
“क्या तुम इसे बड़ी भारी बात मान रहे हो कि अल्लाह ने फरिश्तों को बेटियां बना लिया है “सूरा बनी इस्रायेल 17 :40 
“क्या अल्लाह ने लड़कों की जगह लड़कियों को पसंद कर लिया है ? सूरा -अस साफ्फात 37 :153 
“क्या तुम्हारे दिलों में यह बात खटकती है ,कि अल्लाह के घर में बेटियां हों ,और तुम्हारे घर बेटे पैदा हों “सूरा -अस साफ्फात 37 :149 
“क्या अल्लाह ने खुद के लिए बेटियां पसंद कर लीं ,जो आभूषणों और श्रृंगार में पलती हैं ,और वादविवाद में ठीक से जवाब नहीं दे सकती हैं “
सूरा-जुखुरुफ़ 43 :16 और 18 
“तुम्हारे घर बेटे हों ,और अगर अल्लाह के घर बेटियाँ हों तो तुम्हें बहुत गलत लग रहा है “सूरा -अन नज्म 53 :21 और 22 
4-फरिश्तों का स्त्रियाँ होने का प्रमाण
सब जानते हैं कि ,झूठे बहाने बनाकर सच को नहीं छुपाया जा सकता .और जैसे अदालत में जिरह के दौरान सच बाहर निकल ही आता है ,वैसे अल्लाह के इस झूठ की पोल खुद कुरान ने खोल दी है कि फ़रिश्ते स्त्रियाँ नहीं है .यह बात तब खुली जब अल्लाह ने यह कहा था ,(इस आयत को गौर से पढ़ने की जरुरत है .) देखिये
“क्या हमने फरिश्तों को स्त्रियाँ बनाया ,तब यह साक्षी थे “सूरा -अस साफ्फात 37 :150
Did We create the angels as females the while they witnessed?” 37:150
.”اَمۡ خَلَقۡنَا الۡمَلٰٓٮِٕكَةَ اِنَاثًا وَّهُمۡ شٰهِدُوۡنَ‏”37:150(अम खलक ना मलायकतु निसा अन व् हुम शाहिदून)
इसी आयत की तफ़सीर में भी फरिश्तों को स्त्री बताने का खंडन किया है .
“وجعلوا الملائكة الذين هم عباد الله والإناث ”
And they make the angels who are servants of the  Allah  are females.
5-अरबी व्याकरण से प्रमाण
लेकिन अल्लाह की इस आयत में खुद विरोधाभास है ,क्योंकि वह अरबी में जिन फरिश्तों के लिए “मलायकतुملائكة “
 “शब्द का प्रयोग कर रहा है वह व्याकरण के अनुसार स्त्रीलिंग बहुवचन  Feminine GendarPlular शब्द है .जिसे अरबी में “मुअन्निस जमा ” कहते हैं .जो इस प्रकार है मुअन्निसالمؤنث सीगा जमाصيغة الجمع .अर्थात फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही हैं .क्योंकि अरबी व्याकरण के अनुसार किसी भी संज्ञा (Noun ) या सर्वनाम (Pronoun ) का स्त्रीलिंग (Feminine ) बनाने के लिए उसके आगे गोल ते के साथ ऊपर दो पेश(ةٌ ) लगा दिए जाते हैं ,जिसे ते मरबूता ( ta marbouta)कहते हैं 
  .उदाहरण हामिद ( حامِدُ) एक वचन पुर्लिंग इसका स्त्रीलिंग होगा (حامِدةٌ ) हामिदः जिसे हामिदतुन लिखते हैं और हामिदा बोलते हैं .ऐसे ही नासिर ( ناصِرُ) का स्त्रीलिंग नासिरा (ناصِرةٌ ) होगा .इस व्याकरण के नियमानुसार (“मलायकतुملائكة ”  शब्द स्त्रीलिंग ही है .भले मुसलमान फरिश्तों (परियों ) को अल्लाह की बेटियां मानने से इनकार करें ,लेकिन इस बात से कोई मुल्ला इंकार नहीं कर सकता की अरबी व्याकरण के अनुसार फ़रिश्ते स्त्रियाँ ही है .और अल्लाह ने औरतों की सेना बना रखी है .शायद अल्लाह से ही प्रेरणा लेकर गद्दाफी ने औरतों की सेना बना डाली थी .

मुझे पूरा यकीन है कि जब इस लेख को पढ़ने के बाद मुस्लिम बहिनों को यह पता चलेगा कि फ़रिश्ते वास्तव में पुरुष नहीं ,बल्कि स्त्रियाँ हैं ,तो वह जरुर खुश होंगी ,और उनको स्त्री होने पर गर्व होगा .लेकिन आगे से उनको जहाँ भी फ़रिश्ता लिखा हुआ दिखे ,उसकी जगह “फरिश्तिनी ” या “परियां ” शब्द प्रयोग करना होगा
बताइए क्या अब भी आप फरिश्तों को परियां कहने से इंकार करेंगे ?

http://islamzpeace.com/2008/09/03/the-duties-of-angels/