जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नेता यासीन मलिक अजमेर में भी अपनी अलगाववादी हरकतें करने से नहीं चूका। उसने भेंट स्वरूप दिए जा रहे तिरंगे झंडे को यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया कि यह उसके देश का झंडा नहीं है। इस्लाम में पवित्र माना जाने वाला जुम्मा यानी शुक्रवार का दिन इस अलगाववादी नेता के लिए काफी बुरा साबित हुआ। उसे अहसास हो गया कि एक शांत शहर भी उसकी मौजूदगी से कैसे उबल सकता है और उसे वहां से खदेड़े जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। बुधवार 9 फरवरी 2011 को अपनी पत्नी मुशाला के साथ अजमेर पहुंचे यासीन मलिक पर शनिवार की सुबह जूते, चप्पल बरसाए गए। जिस होटल में ठहरा था वहां प्रदर्शन हुआ। माहौल इतने उबाल पर पहुंचा कि अजमेर पुलिस ने सोलह घंटे पहले शुक्रवार की रात 12 बजकर दस मिनट पर उसे निजी कार में बैठाकर भारी पुलिस लवाजमे के बीच अजमेर से चलता कर दिया। गरीब नवाज ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह में जियारत कर बाहर आने पर एक खादिम नातिक चिश्ती ने यासीन को गुलाब का फूल थमाया।

यासीन ने जैसे ही फूल हाथ में लिया, नातिक ने दूसरे हाथ में पीछे छिपाया तिरंगा झंडा उसे भेंट किया। यासीन ने हाथ खींच लिया और कहा, यह आपके देश का झंडा है। इससे वहां खडे़ लोग सकते में आ गए। नातिक ने पलटवार किया, ‘जनाब यह हमारे देश का नहीं अपने देश का झंडा है। यह तिरंगा लो और राष्ट्रवादी बनो।’ इस पर यासीन वहां से चल दिया। इससे कुछ क्षण पहले दरगाह के महफिलखाने में लगी सूफी प्रदर्शनी देखते हुए यासीन ने चिश्तिया फाउंडेशन के अध्यक्ष सलमान चिश्ती से कहा, ‘हमारे कश्मीर में भी इस तरह का आयोजन होना चाहिए। सलमान ने इस पर जवाब दिया, ‘हां हम हमारे कश्मीर में भी जरूर ऐसी प्रदर्शनी लगाएंगे।’ यह घटना शाम की थी और इससे पहले सवेरे उसके खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन हो चुका था। विरोध प्रदर्शन के बावजूद उसके ऐसे तेवर से लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।

यासीन मलिक यहां दरगाह जियारत के लिए आया था। उसके आने की खबर और फोटो अखबारों में छपने के बाद शुक्रवार की सुबह करीब दस बजे भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्यकर्ता उसकी खिलाफत करने जा पहुंचे। सिर पर काला कपड़ा बांधे, तिरंगा लहराते हुए इन कार्यकर्ताओं ने दरगाह के पास धानमंडी स्थित होटल रॉयल पैलेस को घेर लिया। हो हल्ला सुनकर यासीन दूसरी मंजिल की बॉलकनी में आया। प्रदर्शनकारियों ने उसे देशद्रोही बताते हुए अजमेर से बाहर भेजने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने उसे देखकर जूते-चप्पल और पत्थर फेंके। उसकी होटल में घुसने की कोशिश की। इसे लेकर धक्का-मुक्की होने लगी। माहौल में तनाव आ गया। दुकानदारों अपना सामान समेटने की तैयारी करने लग गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर रास्ता जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 26 जनवरी को श्रीनगर के लालचौक पर यासीन मलिक और उसके समर्थकों के कारण ही तिरंगा नहीं फहराया जा सका था। राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान नहीं करने वाले देशद्रोही को अजमेर में नहीं रहने दिया जाएगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिला कलेक्टर से मिलने जा पहुंचे और उनसे यासीन मलिक को अजमेर से रवाना करने की मांग की गई। प्रशासन के यह कहने पर कि वह एक भारतीय नागरिक है, उसे निकालना संभव नहीं है, गुस्सा और भड़क गया। जिला प्रशासन को तीन घंटे का समय दिया और शनिवार 12 फरवरी को सुबह दस बजे उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। प्रदर्शनकारियों के रवाना होने के बाद पत्रकार उससे मिलने जा पहुंचे। यासीन उनके सामने फट पड़ा, मेरे उपर जूते, चप्पल, बोतलें और पत्थर फेंके गए। मेरे सिर में सूजन आई है। यह खुली गुंडागर्दी है। ऐसी गुंडागर्दी से ना तो मैं डरता हूं और ना ही डरने वाला हूं।

भाजपा जब हकूमत में थी तब यही लोग मुझसे मिलने आते थे। आज बौखलाहट में हरकतें कर रहे हैं। इस किस्म की हरकतों से कश्मीर समस्या का हल नहीं निकलने वाला। मौजूदा हकूमत पर दबाव बनाकर मसला हल करें। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उसकी सुरक्षा बढ़ा दी और कमरा भी बदलवा दिया। पुलिस के करीब 35 जवान सादा वर्दी में उसकी सुरक्षा के लिए तैनात कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों के चले जाने के बाद वह पत्नी समेत दरगाह चला गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे जुम्मे की नमाज अदा की। इसके बाद पत्नी के साथ अराकाट के दालान में जा बैठा। कुछ देर बाद वह आस्ताना शरीफ में जियारत के लिए चला गया।

जियारत से लौटकर महफिलखाने गया। वहां प्रदर्शनी का अवलोकन किया और शाम छह बजे रोशनी की दुआ तक वहीं रहा। इसके बाद होटल लौटा और पंद्रह मिनट बाद ही फिर दरगाह लौट आया। इस दौरान वह अहाता-ए-नूर में बैठकर कव्वालियां सुनता रहा। रात करीब साढ़े दस बजे वह होटल लौटा। रात करीब पौने ग्यारह बजे राजस्थान पुलिस और गुप्तचर अधिकारी उसके पास पहुंचे। उसने होटल तक बदलने में आनाकानी की। प्रशासन ने उसे हालात से अवगत कराया। मामले की नजाकत को समझते हुए उसने अजमेर छोड़ने में ही भलाई समझी और आधी रात को पुलिस वाहनों को काफिला उसे जिले की सीमा तक विदा कर लौट आया।