क्या अल्लाह भी मुहम्मद की तरह अनपढ़ है ?
एक तरफ तो मुसलमान मुहम्मद को बिलकुल अनपढ़ ,निरक्षर ,और उम्मी बताकर उसके अज्ञान पर पर्दा डालते रहते हैं ,और कहते हैं कि मुहम्मद ने कुरआन में जो भी कहा है वह मेरा कथन नहीं है.यह तो अल्लाह की वाणी है. और दूसरी तरफ मुहम्मद के मुंह से कहे गए अल्लाह की आयातों को विज्ञानं सम्मत सिद्ध करने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं.

मुसलमान कुरआन की ऊंटपटांग व्याख्याएं करके कभी कुरआन में गणित का चमत्कार दिखाते हैं .कभी भौतिक विज्ञान और शारीरिक विज्ञान का प्रमाण साबित करने का प्रयत्न करते हैं.लेकिन जब कोई व्यक्ति कुरआन को गौर से पढ़ता है तो मुसलमानों के सारे दावों की पोल खुल जाती है.और साफ पता चल जाता है कि अल्लाह का सामान्य ज्ञान एक नर्सरी के बच्चे के ज्ञान से भी कम है.लगता है कि अल्लाह यातो लोगों को बातों में बहला रहा है या बहका रहा है .अल्लाह के ज्ञान का नमूना देखिये –

1 -अल्लाह ने एक गधे और उसके मालिक को सौ साल की मौत देदी -सूरा बकरा -2 :259

2 -जब लोग वही काम करने लगे जिस से उन्हें रोका गया था तो अल्लाह ने कहा तुम बन्दर बन जाओ -सूरा अल आराफ -7 :166

3 -हे मरियम के पुत्र !ईसा मेरा अनुग्रह याद करो ,जब तुम पैदा होते ही पालने में लोगों से बात करने लगे.सूरा अल मायदा -5 :110

4 -हमने तारों और नक्षत्रों को दुनिया के बिलकुल निकट सजा दिया है.और उनको शैतान को मार भगाने के काम पर लागा दिया .अल्मुल्क 67 :5

5 -हमने तारों को आकाश में दुनिया के बिलकुल सुशोभित कर दिया है सूरा अस साफ्फात -37 :6

6 -हमने सारी धरती को बिछौना और आकाश को तम्बू canopy बनाया है .और उस से पानी उतारा .सूरा बकरा –2 :22

7 -अल्लाह ही है ,जिसने आकाश को बिना सहारे के ऊंचा किया हुआ है,जैसा कि तुम खुद देख सकते हो.इस काम के बाद अल्लाह उसके ऊपर राज -सिंहासन पर विराजमान हो गया.यह सोचने वालों के लिए बड़ी निशानी है.सूरा अर रअ द-13 :2

8 -क्या तुम नहीं देखते कि ,अल्लाह ने आकाश को धरती पर गिराने से रोक रखा है.निश्चय ही अल्लाह लोगों के लिए अत्यंत दयावान और अत्यंत करूणामयहै .सूरा अल हज्ज -22 :65

9 -क्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया ,और पहाड़ों को खूंटे bulwarks नही बनाया.ताकि वे सुद्रढ़ बने रहें.सूरा अन नबा -78 :7 ,8

10 -हनने अपनी खिलाफत को आकाशों ,धरती और पहाड़ों के सामने रखा,लेकिन वे उसे उठाने को तैयार नहीं हुए,और कांपने लगे.फिर एक मनुष्य ने उसे आसानी से उठा लिया.निश्चय वह आदमी बड़ा जाहिल और ज़ालिम है .सूरा अल अहजाब -33 :72

11 -हमने पहाड़ों को दाउदके साथ इस काम पर लगा दिया कि वे रोज संध्या और प्रातः काल अजान देते रहें .और बिछ जाएँ -साद -38 :18

बताइये क्या आप अब भी मुसलमानों के इस दावे ओअर विशवास कर सकते हैं कि कुरआन अल्लाह की क्याब है ,और यह ज्ञान और विज्ञान के अनुकूल है .क्या ऎसी ही बेवकूफी की बातें बता कर लोगो को मुसलमान बननेका बुलावा दे रहे है

यह तो थोड़ा सा नमूना है.आगे कुरआन की गणित और इस्लाम के कामसूत्र के बरे में लिखेंगे .क्यों कि यह विषय मुहम्मद को प्यारा था ,तो मुसलमानों को जरूर पसंद आयेगा.

बस आपसे अनुरोध है कि हरेक लेख ध्यान से पढ़ें ,ताकि तारतम्य बना रहे